कोरबा
बांगो में रेत तस्कर का अवैध साम्राज्य
कांग्रेस शासन कार्यकाल में 700 रू. प्रति ट्रैक्टर की दर 3000 तक पहुंच गई थी, जिले में रेत तस्करी चरम पर थी, लेकिन विष्णु का सुशासन आने के बाद भी रेत तस्करी नहीं हुई कम
अभय गर्ग द्वारा हसदेव की छाती को की जा रही है छलनी
कोरबा/कटघोरा । खनिज विभाग कोरबा में गत वर्ष ईडी का छापा पडऩे के बाद भी अधिकारियों की कार्यशैली में कोई सुधार नहीं दिख रहा है। अधिकारियों की मिली भगत से कोरबा की जीवन रेखा माने जाने वाली हसदेव नदी को जगह-जगह छलनी कर लहुलुहान किया जा रहा है। ऐसा ही एक बड़ा मामला विकास खण्ड पोड़ी-उपरोड़ा से महज 3-4 किमी दूर ग्राम पंचायत बांगो स्थित है। इस छोटे से गांव के किनारे से हसदेव नदी बहती है, जहां पर रेत तस्कर का अवैध साम्राज्य चल रहा है, लेकिन खनिज विभाग के अधिकारी अनजान बनकर कार्यवाही करने से हिचक रहे हैं। रेत तस्कर अभय गर्ग और अक्षय गर्ग कोरबा जिला के पूर्व जिला भाजपा अध्यक्ष राजकुमार अग्रवाल के भतीजे हैं। अक्षय गर्ग आए दिन खनिज विभाग कोरबा में अधिकारियों से एसी में बैठकर बंद कमरे में गुप्तगू करते दिख जाते हैं। बांगो पंचायत की खाली जमीन पर सैकड़ों हाईवा रेत को डम्प किया गया है। पिछले सत्र में यहां प्रशासन द्वारा रेतघाट का संचालन किया जा रहा था, लेकिन इस वर्ष यहां रेत घाट स्वीकृत न होने के बाद भी रोज दर्जनों हाईवा रेत पोकलेन के माध्यम से निकाली जा रही है और पिछले साल की रेत को स्टोर करने और बेचने का हवाला देकर रेत तस्कर कार्यवाही से बच रहे हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि 10 महीना बीत जाने के बाद भी स्टोर की हुई रेत जादुई छड़ी की तरह बढ़ती ही जा रही है। अधिकारी मौन साधे हुए हैं। डंप किए हुए स्थान से रोजाना दर्जनों हाईवा रेत लेकर गंतव्य की ओर जा रहे हैं, लेकिन 10 महीने से रेत जस की तस पड़ी हुई है। रेत तस्कर द्वारा ग्राम पंचायत बांगो के लोगों को बहला फुसलाकर कुछ भी बोलने से रोक दिया गया है, जबकि सरपंच को रिकव्हरी निकालकर जेल भिजवाने की धमकी देकर कुछ बोलने से मना किया है। कुछ लालच में और कुछ धमकी से रेत तस्कर के खिलाफ ग्रामवासी कुछ भी बोलने से बच रहे हैं, जबकि सचिव सुषमा खुसरो ने बिंदास होकर कहा कि हसदेव नदी को रेत तस्कर गर्ग द्वारा छलनी की जा रही है और नदी में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। ग्राम पंचायत को कुछ भी लाभ नहीं हो रहा है, अवैध रेत खनन के कारण रायल्टी भी नहीं मिल पा रही है। बड़े-बड़े गड्ढेे होने के कारण बड़ी घटना होने का भी अंदेशा बलवती हो गया है। सरपंच धनकुंवर कंवर ने रेत तस्करी के मामले में प्रतिक्रिया देने से मना कर दिया और कहा-तुमन खुद जाके देख लेवा… हमन कुछ नी बतान। सरपंच पति रामसाय कंवर घर से निकला ही नहीं। सरपंच एवं सरपंच पति की ऐसी दहशत कि गर्ग के खिलाफ कुछ भी नहीं बोल पा रहे हैं।
रात के अंधेरे में उतारी जाती है पोकलेन

ग्राम पंचायत बांगो निवासी सनत कुमार ने बताया कि अभी आय से कोई मतलब नी हे, रात के 8 बजे के बाद अईहा, गर्ग ह नदी म पोकलेन अउ हाईवा ला उतारथे, अऊ भारी मात्रा म रात भर रेत निकालथे अउ सुबे से शाम तक डंप करेहे ते रेत ल हाईवा म कहुं-कहुं भेजथे। दिन भर म एक दर्जन ले ज्यादा हाइवा रेत के सप्लाई करथे। नदी की ओर ईशारा करते हुए सनत कुमार ने कहा कि देखत हस नदी म पूरा इहां-उहां ले गड्ढेच-गड्ढा हो गे हे। बरसात आही त लईका मन के डूबे के डर बने हे। अधिकारी मन कार्यवाही काबर नी करत हें, ओइचमन जानें।
नदी का कई एकड़ क्षेत्र गड्ढे में तब्दील

यह सडक़ रेत डम्पिंग एरिया से नदी की ओर जाती है, जो रेत तस्कर ने हाईवा और जेसीबी से रेत उत्खनन कर डम्पिंग एरिया तक रेत को लाने के लिए अस्थाई रूप से बनाया है, लेकिन 8-10 माह से अवैध रेत उत्खनन से यह रोड स्थायी के रूप में बन गया है। रोज दर्जनभर हाईवा रेत उत्खनन से नदी का कई एकड़ एरिया गड्ढे में तब्दील हो चुका है। तस्कर द्वारा बिना डर भय के हसदेव नदी को छलनी की जा रही है और जानकारी होने बाद भी खनिज विभाग के अधिकारी मौन साधे बैठे हैं, जिसके कारण विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। रेत तस्कर अधिकारियों के साथ चेम्बर में अधिकांश दिन गुप्तगू करते देखे जा सकते हैं। इतना बड़ा मामला होने के बाद भी खनिज विभाग के अधिकारियों की नजर आखिर यहां तक कैसे नहीं पहुंची, यह बड़ा सवाल चिंता का विषय हो सकता है। यहां के ग्रामीण डरे सहमे हुए हैं और ग्रामीण प्रशासन का डर के मारे पहुंच नहीं पा रहे हैं।
8 महीने से जारी है अवैध रेत उत्खनन
क्षेत्र के ग्रामवासियों ने बताया कि गर्ग बंधुओं द्वारा पिछली बरसात समाप्त होने के बाद से लगातार हसदेव नदी से भारी मात्रा में रेत का अवैध उत्खनन किया जा रहा है। रोजाना हाईवा और जेसीबी से रेत उत्खनन कराया जा रहा है, इसका ताजा प्रमाण नदी में रेत डंम्पिंग यार्ड से लेकर नदी उत्खनन क्षेत्र तक हाईवा एवं जेसीबी के पहियों के निशान ताजा दिख जाएंगे। रात के अंधेरे में जेसीबी और हाईवा उतारे जाते हैं और दर्जनों मजदूर भी लगे रहते हैं। अंधेरा छंटने के बाद हाईवा और जेसीबी को डंम्पिंग यार्ड में रख दिया जाता है और सुबह होते ही रेत डंम्पिंग यार्ड से जेसीबी के माध्यम से हाईवा में रेत भरी जाती है और दर्जनों हाईवा वाहनों से रेत को गंतव्य की ओर रवाना कर दिया जाता है। गत 8 महीने से रेत डंम्पिंग यार्ड में रेत की मात्रा जस की तस बनी हुई है।
रेत तस्कर का एक दिन का टर्न ओव्हर 5 लाख से अधिक
क्षेत्र के एक जानकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गर्ग बंधु (अक्षय गर्ग-अभय गर्ग) द्वारा संयुक्त रूप से इस अवैध रेत उत्खनन में काम करते हैं और रात के अंधेरे में दर्जनों हाईवा और पोकलेन द्वारा अवैध रेत का उत्खनन कराया जाता है और दिन में डंप की भी रेत को गंतव्य तक भेजा जाता है। इस अवैध काम में गर्ग बंधु का टर्न ओव्हर करीब 5 लाख से ऊपर है और गत 10 माह से यह अवैध कार्य निर्बाध गति से जारी है। खनिज अधिकारियों की मौन सहभागिता से गर्ग बंधुओं के हौसले बुलंद हैं।
सचिव ने कहा कलेक्टर से करेंगे शिकायत
ग्राम पंचायत बांगों की सचिव सुषमा खुसरो ने मोबाईल पर प्रतिक्रिया देत हुए बिंदास कहा कि 10 महीने से रेत तस्करी बड़े पैमाने पर हो रही है और खनिज विभाग के अधिकारी कार्यवाही नहीं कर रहे हैं, इसका मतलब खनिज अधिकारियों की मिलीभगत हो सकती है। कई बार मैंने सरपंच और पंचों से कहा कि अवैध रेत उत्खनन के खिलाफ विरोध करना चाहिए। इस मामले में सरपंच अकेली पड़ गई है और इस मामले में कोई भी पंच, सरपंच का साथ नहीं दे रहे हैं। मैं सरपंच को बोलूंगी कि ग्रामीणों को साथ लेकर मामले की शिकायत कलेक्टर सर से करेंगे और नदी को बचाएंगे
सरपंच कुछ भी बोलने से बचती रही, सरपंच पति निकला ही नहीं

अवैध रेत उत्खनन पर प्रतिक्रिया जानने प्रतिनिधि सरपंच के घर पहुंचा तो सरपंच धनकुंवर कुछ भी नहीं बोली, जबकि सरपंच पति रामसाय कंवर घर से निकला ही नहीं।
अक्षय गर्ग के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं, जिसके कारण लोग दहशत में रहते हैं…!
बांगो में रेत उत्खनन का अवैध कार्य जोरों पर है। इस अवैध धंधे में गर्ग बंधु में से अक्षय गर्ग क्षेत्र में ख्याति लब्ध है। कटघोरा थाने में अक्षय गर्ग के खिलाफ कई मामले भी दर्ज हैं, जिसके कारण उनके अवैध कामों में जानकारी होने के बाद भी लोग बाधा नहीं पहुंचाते। अक्षय गर्ग उस समय सुर्खियों में आए थे, जब वे लघुवनोपज समिति में सदस्य थे और वन विभाग में काम करते थे। मनमुताबिक काम न होने के कारण तत्समय के एक एसडीओ को थप्पड़ जडऩे का एवं कालर पकडऩे का प्रयास कर दुव्र्यवहार किए थे। वन अधिकारियों ने अक्षय गर्ग के खिलाफ मामला दर्ज कराया था, तब विवाद काफी बढ़ गया था।
क्या अवैध साम्राज्य ढहेगा!
गर्ग बंधुओं द्वारा बांगो में अवैध रेत का खड़ा साम्राज्य क्या खनिज अधिकारी ढहा पाएंगे या नहीं, यह आने वाला समय ही बताएगा। इस वर्ष ग्राम पंचायत बांगो में प्रशासन ने रेत घाट की स्वीकृति नहीं दी है। गर्ग बंधुओं द्वारा एनजीटी के नियमों का खुला उलंघन किया जा रहा है और प्रशासन की आंखों में धूल भी झोंका जा रहा है। जेसीबी और हाईवा से भारी मात्रा में अवैध रेत उत्खनन से हसदेव का सीना लहु लुहान किया जा रहा है। एक ओर शासन को रोजाना लाखों की क्षति पहुंचाई जा रही है, वहीं ग्राम पंचायत को भी एक रूपए की रायल्टी नहीं मिल पा रही है। दहशत के कारण पंचायत के लोग कलेक्टर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, क्या अधिकारी गर्ग बंधुओं का अवैध साम्राज्य ढहाएंगे?
अक्षय गर्ग के साथ अधिकारियों की गुप्तगू का राज
अवैध रेत डंम्पिंग यार्ड भले ही अभय गर्ग के नाम से होने का दावा किया जा रहा है लेकिन असली संचालक अक्षय गर्ग को ही बताया जा रहा है। अक्षय गर्ग आए दिन खनिज विभाग में डेरा जमाए रहते हैं और अधिकारियों के साथ गुप्तगू करते देखे जा सकते हैं।
बांगो का रेत स्टोर मेरे द्वारा संचालित है-अभय गर्ग
बांगो में अवैध रेत उत्खनन के संबंध में जानकारी लेने पर कटघोरा निवासी अभय गर्ग ने बताया कि बांगो में डंप की हुई रेत मेरी है और रेत स्टोर का संचालन मेरे द्वारा किया जा रहा है।
एक दिन म के ठो हाईवा जाथे, के सवाल पर चौकीदार ने कहा मोला नी पता

यहां तैनात चौकीदार अशोक मानिकपुरी ने बताया कि वह चैतमा का रहने वाला है और उसे आए सिर्फ 3-4 दिन हुए हैं। दिव्य आकाश प्रतिनिधि ने पूछा की दिन भर म के ठो हाईवा निकलथे, के जवाब में चौकीदार ने कहा कि मोला कुछ पता नी हे, गिनो निही।
सहायक खनिज अधिकारी ने कहा -जप्त होगी रेत
दिव्य आकाश में समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया। सहायक खनिज अधिकारी उत्तम खुंटे ने कहा कि सोमवार या मंगलवार को खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंचेगी और स्टोर की गई रेत को जप्त करेगी।
नदी के खनन क्षेत्र का भी हो सकता है मेजरमेंट
अधिकारी ने संकेत दिया है कि नदी से निकाली गई रेत के क्षेत्र का भी मेजरमेंट हो सकता है। यदि अधिकारी ईमानदारी से कार्रवाई करें तो करोड़ों का जुर्माना और अवैध उत्खनन में लगे पोकलेन, अवैध परिवहन में लगे दर्जनों हाईवा भी जप्त हो सकते हैं। देखना है कि हसदेव नदी का सीना चीरकर करोड़ों की रेत उत्खनन करने वाले रेत तस्कर किंग के खिलाफ कार्रवाई कितनी सख्त होती है।
रेत तस्कर के घर के सामने रेत का पहाड़
रेत तस्कर अभय गर्ग द्वारा अपने घर के सामने लक्ष्मी महाराज के खाली प्लाट में हजारों ट्रिप हाईवा रेत का पहाड़ बना दिया है। बताया जा रहा है कि लक्ष्मी महाराज के प्लाट में जबरन रेत का स्टोर गर्ग बंधु द्वारा किया गया है और प्लाट खाली कराने के लिए लक्ष्मी महाराज काफी परेशान हैं। सहायक खनिज अधिकारी उत्तम खुंटे ने बताया कि घर के सामने डंप अवैध रेत पर भी कार्रवाई की जाएगी।
रेत तस्कर ने सडक़ का कर दिया सत्यानाश
ग्राम पंचायत बांगों से रोजाना भारी मात्रा में हाईवा के आवागमन से पोड़ी उपरोड़ा-बांगों मार्ग की सडक़ का सत्यानाश हो गया है। इस अवैध काम को रोकने के लिए अधिकारियों ने आंख मूंद ली है। सडक़ से डामर क्या गिट्टी भी गायब हो गई है। बरसात में इस मार्ग में आने जाने वाले लोगों को काफी परेशानी हो सकती है। पीएमजीएसवाई की सडक़ में भारी वाहन प्रतिबंधित है, लेकिन रेत तस्कर का हौसला इतना बुलंद है कि प्रशासन का उसे कोई खौफ नहीं। करोड़ों की सडक़ बर्बादी की कगार पर है। सडक़ में भी भारी वाहन से जाने वाली रेत गिर-गिर कर रेतीली हो गई है।

कोरबा
कोरबा प्रेस क्लब का प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव: नौशाद खान अध्यक्ष एवं दिनेश सचिव, ऐतिहासिक मतों से जीते
उपाध्यक्ष बने राजकुमार शाह, दुर्गेश श्रीवास्तव कोषाध्यक्ष, हरीश तिवारी उपसचिव, कार्यकारिणी में नवाब, राजेश मिश्रा (मि_ू) एवं आकाश शर्मा विजयी

कोरबा। रविवार 14 जून को कोरबा प्रेस क्लब का महत्वपूर्ण चुनाव सम्पन्न हुआ, जिसमें अध्यक्ष पद के प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में नौशाद खान को एक तरफा विजयश्री मिली। उन्होंने प्रतिद्वंदी सीटिंग अध्यक्ष राजेन्द्र जायसवाल को भारी मतों से हराया।

कोरबा प्रेस क्लब के सत्र 2026-28 के लिए संपन्न चुनाव के परिणाम घोषित किया गया। चुनाव में विभिन्न पदों पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला, जिसमें विजयी प्रत्याशियों ने अपने समर्थकों के बीच जीत का जश्न मनाया।
संरक्षक पद में कमलेश यादव ने सर्वाधिक 107 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, तो सनत दास दीवान को 58 वोट ही मिले। इसी तरह अध्यक्ष पद पर नौशाद खान ने 103 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी राजेंद्र जायसवाल को 60 वोट मिले। इसी तरह कोरबा प्रेसक्लब में एक दिनेश राज ने दूसरी बाद अपना परचम लहराया है उन्हें 100 वोट मिले हैं, जबकि उनके प्रतिद्वंदी रंजन प्रसाद को 61 वोट मिले।

उपाध्यक्ष पद के लिए हुए चुनाव में राजकुमार शाह ने 59 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की है, वहीं उनके प्रतिद्वंदी रामेश्वर ठाकुर को 39 वोट, कृष्ण कुमार राठौर को 38 वोट एवं पुरुषोत्तम दुबे को 25 वोट मिले। इसी तरह उप सचिव पद के लिए हरीश तिवारी ने 72 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की। अन्य प्रत्याशियों में नीलम दास पड़वार को 46 वोट और रमेश वर्मा को 45 वोट मिले। कोषाध्यक्ष पद पर दुर्गेश श्रीवास्तव काबिज हुए। उन्होंने 71 वोट प्राप्त कर जीत दर्ज की, वहीं उनके प्रतिद्वंदी वैभव शर्मा को 55 वोट और संदीप शर्मा को 37 वोट मिले। कार्यकारिणी में नवाब हुसैन, राजेश मिश्रा और आकाश शर्मा निर्वाचित हुए हैं।




निर्वाचन अधिकारी वरिष्ठ पत्रकार छेदीलाल अग्रवाल ने अपनी टीम के साथ निष्पक्ष एवं शांतिपूर्ण चुनाव सम्पन्न कराया। सहायक निर्वाचन अधिकारी के रूप में सादिक शेख, बीता चक्रवर्ती, रेणु जायसवाल, मधु डिडवानिया, सहायक कन्हैय्या ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



कोरबा
विश्व पर्यावरण दिवस पर कोरबा वन मंडल के सभी छह परिक्षेत्रों में विविध कार्यक्रमों का सफल आयोजन

कोरबा। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अंतर्गत वन मंडल कोरबा में दिनांक 05 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस’ के विशेष अवसर पर आवश्यक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, कोरबा वनमण्डलाधिकारी प्रेमलता यादव के निर्देशानुसार उपवनमंडलाधिकारी दक्षिण कोरबा सूर्यकांत सोनी एवं उपवनमंडलाधिकारी उत्तर कोरबा रामसिंह राठिया के मार्गदर्शन में मंडल के सभी परिक्षेत्रों—लेमरू, बालको, कोरबा, करतला, पसरखेत एवं कुदमुरा में परिक्षेत्र स्तरीय व्यापक गतिविधियों का संपादन किया गया।

इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस 2026 के लिए निर्धारित मुख्य थीम “जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई के लिए एक वैश्विक आह्वान” को धरातल पर उतारने के उद्देश्य से, स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और वन सुरक्षा दलों , होम गार्ड,NGO के सहयोग से कई महत्वपूर्ण एवं अनिवार्य गतिविधियां सुनिश्चित की गईं।

सभी छह परिक्षेत्रों में संपादित की गई और सभी के सहयोग से बड़े रूप में पौधा लगाया गया साथ ही पर्यावरण के संरक्षण के लिए सपत भी दिलाई गई,इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सभी परिक्षेत्र अधिकारियों, वन रक्षकों, वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों और प्रबुद्ध नागरिकों का सराहनीय योगदान रहा।

कोरबा
15 जून को छोटे खातेदारों को रोजगार ,पुनर्वास एवं भू विस्थापितों की समस्याओं को लेकर जन आक्रोश रैली के साथ कलेक्ट्रेट का घेराव करेगी किसान सभा,
भू विस्थापितों की रैली में शामिल होंगे लोकसभा सांसद अमराराम
आंदोलन को सफल बनाने के लिए पोस्टर के साथ गांव-गांव माइक प्रचार ,बैठक के साथ घर-घर पर्चे वितरण कर भू विस्थापितों को किया जा रहा एकजुट
आंदोलन में कोरबा के चारों परियोजना के साथ रायगढ़ और सरगुजा संभाग के भी भू विस्थापित होंगे शामिल
कोरबा। छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेतृत्व में छोटे खातेदारों को रोजगार देने,भूविस्थापितों के लंबित रोजगार प्रकरणों के निराकरण,पूर्व में अधिग्रहित जमीन की वापसी,पट्टा,आंशिक अधिग्रहण पर रोक लगाने,पेयजल की व्यवस्था करने,बसावट एवं खनन प्रभावित गांवों की अन्य समस्याओं को लेकर 15 जून को जन आक्रोश रैली निकालकर कलेक्ट्रेट घेराव की घोषणा की है किसान सभा द्वारा शुरू किया गया आंदोलन भू विस्थापितों का जन सैलाब बनकर कोरबा की सड़कों पर दिखने वाला है कई भू विस्थापित संगठन इस घेराव में शामिल हो रहे है। जिला प्रशासन से भी कई बार हस्तक्षेप कर समस्याओं के समाधान की मांग की गई लेकिन प्रशासन ने समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया इस लिए विस्थापितों ने किसान सभा के नेतृत्व में अब आर पार की लड़ाई लड़ने का मन बना लिया है। आंदोलन को सफल बनाने के लिए गांव गांव में बैठक कर पर्चे वितरण के साथ भू विस्थापितों को एकजुट भी किया जा रहा है और किसान सभा ने आंदोलन को सफल बनाने के लिए पोस्टर,पर्चे के साथ गांव गांव माइक प्रचार कर भू विस्थापितों को संगठित करने का काम कर रही है। कलेक्ट्रेट घेराव और जन आक्रोश रैली को लेकर भू विस्थापित संगठनों के साथ आम जनता का व्यापक जन समर्थन मिल रहा है।

जन आक्रोश रैली और कलेक्ट्रेट घेराव से पहले घंटाघर में सभा आयोजित होगी जिसे प्रमुख रूप से माकपा के लोकसभा सांसद और किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कामरेड अमराराम,किसान सभा के राष्ट्रीय नेता अवधेश कुमार, आदिवासी एकता महासभा के प्रदेश अध्यक्ष और सचिव सुरेंद्र लाल सिंह एवं बाल सिंह सहित किसान सभा के प्रदेश के नेता और भू विस्थापित संगठनों के नेता संबोधित करेंगे।
जनआक्रोश रैली और कोरबा कलेक्टर घेराव लोकसभा के सांसद अमराराम के नेतृत्व में होगा
कलेक्ट्रेट घेराव को सफल बनाने के लिए गांव गांव में नुक्कड़ सभा,घर घर पर्चे वितरण एवं भू विस्थापितों को एकजुट करने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है आंदोलन में कोरबा जिले के कोरबा,दीपका,गेवरा,कुसमुंडा के साथ रायगढ़ और सरगुजा संभाग के भी प्रभावित शामिल होंगे।
किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि एसईसीएल के कुसमुंडा,गेवरा,दीपका,कोरबा सभी क्षेत्रों में छोटे खातेदारों को रोजगार देने,भू विस्थापितों के लंबित रोजगार,जमीन वापसी,पट्टा,बसावट एवं प्रभावित गांव की मूलभुत समस्याओं के निराकार के लिए जिला प्रशासन और एसईसीएल के अधिकारियों द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है जिससे भू विस्थापितों के सब्र का बांध टूट चुका है। 15 जून को कोरबा की सड़को पर भू विस्थापितों। का आक्रोश जन सैलाब के रूप में दिखने वाला है। प्रबंधन और प्रशासन पहले एकजुट था अब सभी क्षेत्रों के भू विस्थापित अपने अधिकार को लेने के लिए एकजुट हो रहे है। किसानों की जमीन का अधिग्रहण जिला प्रशासन द्वारा किया जाता है और उद्योगों को जमीन नियमों के पालन के तहत सौंपा जाता है लेकिन उद्योग जमीन तो ले लेती है लेकिन विस्थापित जमीन अधिग्रहण के बाद रोजगार और पुनर्वास के लिए भटकते हैं जिला प्रशासन को जमीन अधिग्रण के साथ विस्थापित किसानों के अधिकार को दिलाने के लिए भी सामने आना होगा।
किसान सभा नेता जवाहर सिंह कंवर, दीपक साहू,जय कौशिक,पवन यादव यादव,अमरजीत कंवर आदि ने भू-विस्थापितों की समस्याओं के लिए जिला प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन दोनों को ही जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि कुसमुंडा में जमीन के बदले रोजगार की मांग को लेकर 1685 दिनों से धरना प्रदर्शन चल रहा है और समस्याओं की ओर कई बार प्रशासन और प्रबंधन का ध्यान आकर्षित किया गया है, लेकिन भू-विस्थापितों की समस्याओं के निराकरण के प्रति कोई भी गंभीर नहीं है।
भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के अध्यक्ष रेशम यादव, सचिव दामोदर श्याम ने कहा कि जिनकी जमीन एसईसीएल ने ली है, उन्हें बिना किसी शर्त के रोजगार दिया जाये क्योंकि जमीन ही उनके जीने का एकमात्र सहारा थी जबरन नए नए नियम बनाना बंद किया जाए । छोटे बड़े खातेदार के नाम पर किसानों को बांटने का काम बंद किया जाए। 15 जून को चारों क्षेत्र से पूरे परिवार सहित हजारों भू-विस्थापित कलेक्ट्रेट घेराव में शामिल होंगे।
कलेक्ट्रेट घेराव में कई भू विस्थापित संगठन शामिल होंगे।
प्रमुख मांगे´
1) छोटे खातेदार के नाम पर भू विस्थापितों के रोके गए रोजगार में तत्काल रोजगार दो ।एसईसीएल में जिन किसानों की जमीन अधिग्रहण की गई है और की जा रही है हर खाते में स्थायी रोजगार प्रदान किया जाये।
2) बांगों बांध के जलाशय के ठेका प्रणाली समाप्त किया जाए।और विस्थापित आदिवासी एवं स्थानीय मछुवारा समितियों को मछली पकड़ने का अधिकार दिया जाए।
3) वन टाइम सेटलमेंट कर रोजगार के पुराने लंबित मामलो का जल्द से जल्द निराकरण किया जाये | अर्जन के बाद जन्म वाले प्रकरण और एक खाता एक रोजगार नियम के विरुद्ध अलग अलग खाता का सयोंजन के कारण रोजगार से वंचितों को रोजगार प्रदान किया जाये |
4) बसावट के नाम पर 3 लाख और 15 लाख रुपए के नाम से भेदभाव बंद किया जाए और सभी क्षेत्रों के भू विस्थापितों को एक समान बसावट की 15 लाख राशि दी जाए।
5) शासन की योजनाओं से प्राप्त पट्टों एवं शासकीय और वन भूमि पर बने मकानों का मुआवजा एवं सौ प्रतिशत सोलिशियम और बसाहट की पात्रता का लाभ दिया जाये ।
6) पुराने अर्जित भूमि को मूल खातेदारों को वापस करायी जाये | अधिग्रहण के बाद जिन जमीनों पर 40 सालों में भी कोल इंडिया ने भौतिक कब्जा नहीं किया है और जिन जमीनों पर किसान ही पीढ़ियों से काबिज हैं उन्हें किसानों के नाम वापस किया जाए।
7)अर्जित गाँव से विस्थापन से पूर्व उनके पुनर्वास स्थल की सर्वसुविधायुक्त व्यवस्था किया जाये |
8) एसईसीएल में आऊट सोर्सिंग से होने वाले कार्यों में भू विस्थापितों एवं प्रभावित गांव के बेरोजगारों को 100% रोजगार में रखा जाये।
9) प्रभावित एवं पुनर्वास गांव की महिलाओं को स्वरोजगार योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जाये।
10) पुनर्वास गांव में कबीज भू विस्थापित परिवार को पूर्ण काबिज भूमि का पट्टा दिया जाये।
11) डिप्लेयरिंग प्रभावित गांव सुराकछार बस्ती में किसानों को हुये नुकसान का क्षतिपूर्ति मुआवजा प्रदान किया जाये।
12) पूर्व में विस्थापित ग्रामों के भू विस्थापित जिन्हें बसावट नहीं दिया गया है उन्हें बसावट प्रदान किया जाए।
13) डंपिंग की मिट्टी को वापस खोदे गए खदान में भरा जाए इस डंपिंग के मिट्टी का प्रयोग दूसरे कार्यों में ना किया जाए।
14) एसईसीएल कुसमुंडा द्वारा गेवरा का अधिग्रहण 2018 में हो चुका है लेकिन अभी तक वहां पर किसानों को मुआवजा,रोजगार आदि की सुविधा नहीं दी गई है उन्हें तत्काल रोजगार मुआवजा दिया जाए नहीं तो पूर्व में जारी अधिग्रहण रद्द किया जाए।
15) खनन प्रभावित क्षेत्रों में पेयजल की व्यवस्था किया जाए।
16) आंशिक अधिग्रहण पर रोक लगाई जाए।
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