छत्तीसगढ़
वर्षों बाद आज आम लोगों के लिए फिर खुले मुख्यमंत्री के दरवाजे
सुशासन, पारदर्शिता और कामकाज की गति तेज करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की एक और पहल
साय ने हफ्ते का एक दिन कर दिया नागरिकों के नाम
जनदर्शन कार्यक्रम फिर शुरू, कोई भी कर सकेगा मुख्यमंत्री से सीधी मुलाकात
मुख्यमंत्री स्वयं लेते हैं आवेदन, कार्यक्रम स्थल पर ही अधिकारियों को देते हैं कार्यवाही के निर्देश
आवेदनों के रजिस्ट्रेशन के साथ-साथ पोर्टल के माध्यम से प्रगति की मॉनिटरिंग भी
रायपुर। वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आज छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री-निवास के दरवाजे आज आम-नागरिकों के लिए पूरी तरह खुल गए। आज की ही तरह अब हर सप्ताह, गुरुवार के रोज, ये दरवाजे इसी तरह खुला करेंगे। इन खास दिनों में आम-औ-खास, कोई भी नागरिक, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात कर सकेगा।
दरअसल, मुख्यमंत्री की ही इच्छा के अनुरूप छत्तीसगढ़ शासन ने आज से एक खास कार्यक्रम- जनदर्शन – का दोबारा आगाज कर दिया है। आम नागरिकों से सीधी मुलाकात और सीधे संवाद के इस कार्यक्रम का फार्मेट ऐसा है कि मुख्यमंत्री निवास में सहज वातावरण में लोग अपनी बातों को मुख्यमंत्री के सामने रख सकते हैं। वे अपनी शिकायतें, समस्याएं, अपेक्षाएं और सुझाव आसानी से मुख्यमंत्री तक पहुंचा सकते हैं। एक साधारण सी टेबल के एक ओर मुख्यमंत्री की कुर्सी होती है और दूसरी ओर फरियादी। आस-पास ही मुख्यमंत्री के सचिवालय के अधिकारियों सहित राज्य के वरिष्ठतम अधिकारी मुख्यमंत्री के निर्देशों के परिपालन के लिए मुस्तैद खड़े होते हैं। शिकायतों और सुझावों को बकायदा रजिस्टर्ड किया जाता है, नागरिकों को टोकन दिया जाता है, ताकि शासन द्वारा की जा रही कार्यवाही की मॉनिटरिंग की जा सके और आवेदक भी समय-समय पर प्रगति की जानकारी प्राप्त कर सके। इसके लिए बकायदा एक पोर्टल तैयार किया गया है, जिसमें टोकन नंबर दर्ज करते ही प्रगति की जानकारी आवेदक के सामने होती है।
आज जनदर्शन के पहले दिन मुख्यमंत्री से मुलाकात करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। इनमें महिलाओं भी खासी संख्या में शामिल थीं। कार्यक्रम को लेकर जितना उत्साह नागरिकों में था, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी उतनी ही उत्सुकता और आत्मीयता के साथ उनसे मुलाकात करते नजर आए। आवेदकों से आवेदन लेने के साथ-साथ वे उनसे पारिवारिक ढंग से बातें भी करते नजर आए। महिलाओं ने जब महतारी वंदन योजना शुरू करने के लिए उन्हें धन्यवाद कहा तो श्री साय ने भी मुस्कुराते हुए विनम्रता से तुरंत आभार व्यक्त किया। आवेदकों के साथ आए बच्चों के साथ उन्होंने अभिभावक की तरह घुल-मिल कर बातें की। कार्यक्रम में सहायता की आस लेकर कई दिव्यांग भी पहुंचे थे, इन सभी दिव्यांगों की उम्मीदें पूरी हुईं, मुख्यमंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उन्हें तत्काल ट्रायसायकल और अन्य सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। एक महिला ने अपने कैंसर पीड़ित पति के इलाज के लिए सहायता मांगी, तो मुख्यमंत्री श्री साय ने उन्हें आश्वस्त किया कि उन्हें हर जरूरी सहायता दी जाएगी।
वर्ष 2018 से पहले तत्कालीन सरकार के कार्यकाल में यह कार्यक्रम इसी नाम से संचालित था। मुख्यमंत्री की इच्छा थी इसे दोबारा शुरू किया जाए, ताकि उनसे मिलने के इच्छुक ज्यादा से ज्यादा लोगों से मुलाकात की जा सके। मुख्यमंत्री ने इस कार्यक्रम को राज्य में सुशासन स्थापित करने और कामकाज में पारदर्शिता तथा तेजी लाने के लिए भी महत्वपूर्ण माना है। आज कार्यक्रम के पहले दिन लोगों से बात करते हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा- हम यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि आम नागरिकों की समस्याओं और शिकायतों का समाधान समय-सीमा में हो सके।
कोरबा
एकलशिक्षकीय विद्यालय छपराही पारा में नई शिक्षिका की ज्वाईनिंग से पढ़ाई हुई बेहतर
कोरबा। कोरबा जिले के विकासखंड पाली अंतर्गत ग्राम छपराही पारा का प्राथमिक शाला वर्षों से एकलशिक्षकीय व्यवस्था में संचालित हो रहा था। यहां कुल 41 बच्चे पंजीकृत हैं, जिनमें ज्यादातर वनांचल क्षेत्र के अनुसूचित जनजाति परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं। सीमित संसाधनों और केवल एक शिक्षक के भरोसे चलने के कारण बच्चों की नियमित और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रभावित हो रही थी।

विद्यालय के हेडमास्टर गुरदीप सिंह नेताम लंबे समय से अकेले ही सभी कक्षाओं को पढ़ा रहे थे। परिस्थिति चुनौतीपूर्ण थी, लेकिन बच्चों की सीखने की इच्छा और शिक्षक की जिम्मेदारी ने विद्यालय को आगे बढ़ने से रोका नहीं।
इसी बीच प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय द्वारा प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने हेतु अतिशेष शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण लागू किया गया। इस योजना का लाभ कोरबा जिले के सैकड़ों विद्यालयों और हजारों विद्यार्थियों तक पहुँचा। इसी कड़ी में छपराही पारा के प्राथमिक शाला को भी नई ऊर्जा मिली।

विद्यालय में शिक्षिका गायत्री कुर्रे की नियुक्ति युक्तियुक्तकरण के तहत की गई। उनके पदस्थ होने से हेडमास्टर गुरदीप सिंह नेताम को बड़ी राहत मिली और विद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों में सकारात्मक बदलाव स्पष्ट दिखाई देने लगा। अब विद्यालय में सभी कक्षाओं की अलग-अलग पढ़ाई नियमित रूप से हो रही है।
कक्षा पाँचवी की सुहानी, अजिया, चौथी की निशा और आराध्या, छात्र रोशन, मनीष तथा कक्षा तीन की सौम्या ने उत्साहपूर्वक बताया कि नई मैडम के आने से पढ़ाई अब और अच्छी हो गई है। पहले एक ही शिक्षक होने से कई बार पढ़ाई में कठिनाई होती थी, लेकिन अब सब कुछ आसान हो गया है।
कोरबा
दर्दनाक हादसा मां की मौके पर मौत,पिता गंभीर,बेटियां बचीं:कोरबा में ईद मनाकर लौट रहा था परिवार, सड़क पर गिरे सामान उठाते वक्त हुआ हादसा
कोरबा/पाली। कोरबा के पाली थाना क्षेत्र में रविवार शाम एक दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। तेज रफ्तार भारी वाहन की चपेट में आने से 39 वर्षीय शबीना तरन्नुम की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके पति शेख सद्दाम (40) गंभीर रूप से घायल हो गए। राहत की बात यह रही कि उनकी दोनों बेटियां सुरक्षित बच गईं।
जानकारी के अनुसार, मानिकपुर बस्ती में रहने वाला परिवार ईद मनाकर बिलासपुर से कोरबा लौट रहा था। पाली मुख्य मार्ग पर चलते समय बाइक से कुछ सामान सड़क पर गिर गया। शबीना उसे उठाने के लिए जैसे ही आगे बढ़ीं, पीछे से आए तेज रफ्तार वाहन ने उन्हें कुचल दिया। इसके बाद वाहन की चपेट में उनके पति भी आ गए।

एक्सीडेंट का शिकार हुआ परिवार
बच्चियों की परीक्षा थी इस लिए लौट रहा था परिवार
हादसा इतना भयावह था कि शबीना ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। वहीं, गंभीर रूप से घायल शेख सद्दाम को तुरंत बिलासपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी हालत नाजुक बनी हुई है, वहीं वाहन चालाक फरार है।

दोनों बच्चियों की सोमवार को परीक्षा थी, इसी वजह से परिवार रविवार को ही वापस लौट रहा था। हादसे के बाद बच्चियां सहमी हुई हैं, लेकिन सुरक्षित हैं।
सोमवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पाली थाना प्रभारी नागेंद्र तिवारी ने बताया कि मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है।
इस हादसे ने एक खुशहाल परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है। ईद की खुशी पल भर में मातम में बदल गई।
कोरबा
महापौर संजू देवी के नेतृत्व में बदल रहा कोरबा:पीएम आवास और बिजली के कामों के साथ बुनियादी सुविधाओं पर फोकस तेज
कोरबा। किसी भी शहर की पहचान केवल उसके ढांचों से नहीं, बल्कि वहां की स्वच्छता, सुविधाओं और सुव्यवस्थित जीवनशैली से बनती है। कोरबा की महापौर संजू देवी सिंह राजपूत ने इसी सोच को आधार बनाकर शहर को नई दिशा देने का काम किया है।
उन्होंने यह साबित किया है कि स्वच्छता सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि सतत विकास की मजबूत नींव है। प्रशासनिक दृढ़ता, जनसहभागिता और निरंतर प्रयासों के जरिए कोरबा को बदलाव की राह पर आगे बढ़ाया।

उनके नेतृत्व में शहर में न केवल स्वच्छता को प्राथमिकता मिली, बल्कि सड़क, पानी, नाली और अन्य बुनियादी सुविधाओं को भी व्यवस्थित रूप से मजबूत किया गया। अब पीएम आवास और बिजली से जुड़े कार्यों की शुरुआत के साथ शहर के विकास को और गति मिलने जा रही है। उनका दृष्टिकोण स्पष्ट है—विकास तभी सार्थक है जब वह आम नागरिक के जीवन में सीधे सुधार लाए।
संजू देवी सिंह राजपूत का यह प्रयास दर्शाता है कि मजबूत नेतृत्व और स्पष्ट विज़न के साथ कोई भी शहर नई ऊंचाइयों को छू सकता है, और कोरबा इसी बदलाव की मिसाल बनता जा रहा है।
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