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आरोप- सांसदों को रोकने के लिए राज्यसभा में कमांडो बुलाए

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रिजिजू बोले- विपक्ष के कुछ सदस्य आक्रामक हुए, उन्हें वेल में जाने से रोका गया

नई दिल्ली,एजेंसी। संसद के मानसून सत्र का शुक्रवार को 10वां दिन था। बिहार वोटर वेरिफिकेशन मुद्दे पर विपक्ष ने हंगामा किया। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि राज्यसभा में सदस्यों को रोकने के लिए कमांडो बुलाए गए। यह लोकतंत्र के इतिहास काला दिन है।

कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा, आज कमांडो तैनात किए गए। कोई कह रहा है कि यह CISF है, कोई कुछ और कह रहा है। उन जवानों ने सदस्यों को स्टाफ से मिलने से रोका।

हमारी महिला सदस्यों को पुरुषों जवानों ने रोका। जिस तरह से सदन के बाहर से लोगों को बुलाया गया और सांसदों को जबरदस्ती वेल में जाने से रोका गया, यह आपत्तिजनक है। सब कुछ कैमरे में कैद है।

कांग्रेस के इस आरोप पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि मुझे जो जानकारी मिली है। उसके मुताबिक कुछ सदस्य हंगामा करते हुए आक्रामक हो गए थे। सिर्फ उन्हें रोका गया था।

उधर कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश को लेटर लिखा है।

खड़गे का लेटर- यह बेहद आपत्तिजनक, हम इसकी निंदा करते हैं

मल्लिकार्जुन खड़गे ने राज्यसभा के उपसभापति को भेजे लेटर में लिखा, हम इस बात से हैरान हैं कि जिस तरह से CISF कर्मियों को सदन के वेल में लाया गया, यह बेहद आपत्तिजनक है। हम इसकी कड़ी निंदा करते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि भविष्य में जब सदस्य जनहित के महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे होंगे, तो CISF कर्मी सदन के वेल में नहीं आएंगे।

रिजिजू का जवाब- सांसद वेल के पास खड़े हो जाते हैं

संसद सदस्यों की मांग थी कि सुरक्षा बढ़ाई जाए, इसलिए CISF तैनात की गई। सदन के अंदर, सदस्य कभी-कभी सत्ता पक्ष की मेज के ऊपर और वेल के पास खड़े हो जाते हैं। उन्हें ऐसा करने से रोकने के लिए सुरक्षा तैनात की गई है। किसी भी सांसद को बोलने से नहीं रोका जाएगा।

सदन के अंदर मार्शल और सुरक्षाकर्मी तब तक कोई कार्रवाई नहीं करेंगे जब तक सांसद कोई दुर्भावनापूर्ण कार्य नहीं करते। आज की जो घटना हुई है, मैंने राज्यसभा सचिवालय से जानकारी ली है। उनके मुताबिक कुछ सांसद आक्रामक हो गए थे उन्हें सिर्फ रोका गया था।

बिहार वोटर वेरिफिकेशन मामले पर विपक्ष ने शुक्रवार सुबह संसद के बाहर प्रदर्शन किया।

बिहार वोटर वेरिफिकेशन मामले पर विपक्ष ने शुक्रवार सुबह संसद के बाहर प्रदर्शन किया।

टैरिफ पर पक्ष-विपक्ष

  • कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा- अमेरिकी राष्ट्रपति ने टैरिफ पर जो कहा, उसे सबने देखा है। प्रधानमंत्री मोदी हर जगह जाते हैं, दोस्त बनाते हैं और फिर हमें बदले में यही मिलता है।
  • केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा- अमेरिका से आयात पर 10-15 प्रतिशत टैरिफ की बात हुई थी। द्विपक्षीय व्यापार समझौता हुआ। दोनों पक्षों की 4 दौर की बातचीत के अलावा वर्चुअल बैठकें भी हुईं। देशहित में कदम उठाए गए हैं।
  • संजय सिंह ने कार्य स्थगन नोटिस में लिखा- भारत के रक्षा और ऊर्जा संबंधों पर जुर्माना लगाया गया है, जिससे न केवल व्यापक आर्थिक अस्थिरता पैदा हुई है, बल्कि घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय निवेशकों में भी दहशत फैल गई है।

मानसून सत्र के पिछले 9 दिन में 5 दिन कामकाज नहीं हुआ

संसद मानसून सत्र के 9वें दिन बिहार वोटर वेरिफिकेशन और अमेरिका के टैरिफ लगाने वाले मुद्दे पर विपक्ष ने हंगामा किया। लोकसभा और राज्यसभा 3-3 बार स्थगित हुईं। दरअसल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को भारत पर 1 अगस्त से 25% टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। इसपर विपक्ष ने सदन और संसद के बाहर विरोध-प्रदर्शन किया।

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पावर ग्रिड के निदेशक मंडल ने कर्ज सीमा बढ़ाकर 2.2 लाख करोड़ रुपए करने को मंजूरी दी

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नई दिल्ली, एजेंसी। सार्वजनिक क्षेत्र की पावर ग्रिड कॉरपोरेशन के निदेशक मंडल ने कंपनी की कर्ज लेने की सीमा 1.80 लाख करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2.20 लाख करोड़ रुपए करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। कंपनी ने शेयर बाजार को दी सूचना में कहा कि निदेशक मंडल की शुक्रवार को हुई बैठक में यह मंजूरी दी गई। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर आगामी वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में शेयरधारकों की मंजूरी के बाद लगेगी। 

निदेशक मंडल ने इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा से बाह्य वाणिज्यिक उधारी (ईसीबी) के जरिये 50 करोड़ अमेरिकी डॉलर तक की विदेशी मुद्रा जुटाने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी। कंपनी ने कहा कि निदेशक मंडल ने उडुमलपेट-मदुरै 400 केवी एकल सर्किट (एस/सी) लाइन को 400 केवी क्वाड डबल सर्किट (डी/सी) लाइन में उन्नत/परिवर्तित करने की परियोजना को भी मंजूरी दी है। करीब 772.65 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को आवंटन की तारीख से 30 महीने के भीतर, यानी 11 अगस्त, 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।  

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दुनियाभर की सुस्त अर्थव्यवस्था के बीच दौड़ेगी इंडियन इकोनॉमी, Goldman Sachs का अनुमान

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मुंबई, एजेंसी। वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंदी और भू-राजनीतिक तनाव के बादल छाए हुए हैं लेकिन भारत की विकास रफ्तार को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। करीब 150 साल पुराने वैश्विक निवेश बैंक Goldman Sachs ने अनुमान जताया है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और महंगाई में कमी के चलते भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी रहेगी। बैंक ने भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाते हुए कहा है कि आने वाले समय में दुनिया की सुस्त अर्थव्यवस्था के बीच भी भारत सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रह सकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, पहले जहां युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में संभावित व्यवधान को देखते हुए चालू वित्त वर्ष में भारत की GDP वृद्धि 6.1% रहने का अनुमान लगाया गया था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 6.5% कर दिया गया है। बैंक का कहना है कि वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही में आर्थिक गतिविधियां अपेक्षा से बेहतर रही हैं, जिससे विकास दर के अनुमान में सुधार हुआ है।

कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान घटाया

Goldman Sachs ने कच्चे तेल के पूर्वानुमान में भी कटौती की है। बैंक के मुताबिक, वर्ष 2026 की तीसरी और चौथी तिमाही में कच्चे तेल की औसत कीमत 82 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है, जबकि पहले यह अनुमान 92 डॉलर प्रति बैरल था। वहीं 2027 के लिए अनुमान 80 डॉलर से घटाकर 75 डॉलर प्रति बैरल कर दिया गया है।

भारतीय बास्केट के कच्चे तेल की कीमत भी हाल के दिनों में तेजी से घटी है। जून में यह घटकर करीब 86.31 डॉलर प्रति बैरल रही, जबकि 24 जून को इसका स्तर 70.71 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया।

महंगाई का अनुमान भी हुआ कम

Goldman Sachs ने भारत के महंगाई अनुमान को भी घटा दिया है। बैंक ने वित्त वर्ष के लिए महंगाई का अनुमान 5.1% से घटाकर 4.9% कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वैश्विक यूरिया कीमतों में कमी आने से खाद सब्सिडी पर सरकार का बोझ कम हो सकता है। साथ ही तेल की कीमतों में गिरावट से सरकार पर राजकोषीय दबाव भी कम होने की संभावना है। हालांकि मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं के कारण मांग पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।

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Volkswagen की 4 फैक्ट्रियां बंद करने का प्लान, 1,00,000 लोग होंगे बेरोगजार

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बर्लिन, एजेंसी। यूरोप की दिग्गज ऑटोमोबाइल कंपनी फॉक्सवैगन AG कुछ फैक्ट्रियां बंद कर सकती है और कर्मचारियों की संख्या में भारी कटौती पर विचार कर रही हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में हुई बोर्ड बैठक में कंपनी के CEO ओलिवर ब्लूम ने एक नई रणनीति पेश की। प्रस्तावित योजना के तहत कर्मचारियों की छंटनी का आंकड़ा बढ़ाकर करीब 1 लाख तक किया जा सकता है। फिलहाल Volkswagen Group में लगभग 6.57 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं। समूह के तहत Volkswagen के अलावा Porsche और Audi जैसे प्रीमियम ब्रांड भी शामिल हैं।

जर्मनी में 4 प्लांट बंद हो सकते हैं

रिपोर्ट के अनुसार, रणनीति में इस दशक के अंत तक जनरल ओवरहेड कॉस्ट में 11 अरब यूरो (12.5 अरब डॉलर) तक की कटौती करना और मीडियम टर्म में जर्मनी में 4 फैक्ट्रियां बंद करना भी शामिल है। इनमें नेकरसल्म में Audi के प्लांट के साथ-साथ हनोवर, ज्विकौ और एमडेन में फॉक्सवैगन के प्लांट शामिल हैं।

इसके अलावा कंपनी Volkswagen ब्रांड और उसके कंपोनेंट बिजनेस को अलग करने के विकल्प पर भी विचार कर रही है। लंबे समय से कम मुनाफे से जूझ रहे Volkswagen ब्रांड को अधिक लाभदायक और कुशल बनाने की दिशा में यह कदम अहम माना जा रहा है।

क्यों उठाने पड़ रहे हैं ये कदम?

फॉक्सवैगन इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रही है। अमेरिका के आयात शुल्क (टैरिफ), चीन में कमजोर मांग और यूरोप में BYD तथा Stellantis जैसी कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने कंपनी पर दबाव बढ़ा दिया है। इसी वजह से लागत घटाने और कारोबार को अधिक प्रभावी बनाने की रणनीति तैयार की जा रही है।

पहले से जारी है कर्मचारियों की संख्या घटाने का अभियान

रिपोर्ट के अनुसार, करीब 28,000 कर्मचारी पहले ही स्वैच्छिक रूप से कंपनी छोड़ने पर सहमत हो चुके हैं। यह 2030 तक पूरे Volkswagen Group में 50,000 कर्मचारियों की संख्या कम करने की पहले घोषित योजना का हिस्सा है।

हालांकि, नई प्रस्तावित छंटनी योजना को कर्मचारी संगठनों का विरोध झेलना पड़ सकता है। Volkswagen के सुपरवाइजरी बोर्ड में आधी सीटें कर्मचारियों के प्रतिनिधियों के पास हैं, जबकि जर्मनी का लोअर सैक्सनी राज्य भी बोर्ड में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और आमतौर पर कर्मचारी यूनियनों का समर्थन करता है। ऐसे में कंपनी के लिए इस योजना को लागू करना आसान नहीं होगा।

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