छत्तीसगढ़
जगदलपुर पहुंचे अमित शाह..बस्तर ओलिंपिक में शामिल:रायपुर में कहा-31 मार्च 2026 से पहले करेंगे नक्सलवाद का खात्मा, शस्त्र छोड़कर विकास के रास्ते पर आइए
रायपुर ,एजेंसी। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह जगदलपुर पहुंच गए हैं। यहां वे बस्तर ओलिंपिक के समापन में शामिल हुए। इससे पहले रायपुर में राष्ट्रपति पुलिस कलर अवॉर्ड कार्यक्रम में कहा कि हम सब मिलकर छत्तीसगढ़ को 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त करेंगे। जैसे ही छत्तीसगढ़ नक्सल मुक्त होता है, देशभर में नक्सलवाद का खात्मा हो जाएगा।
शाह ने कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस ने बहादुरी के साथ 1 साल में खत्म करने का संकल्प लिया है। शाह ने नक्सलियों से अपील की है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने बहुत अच्छी सरेंडर पॉलिसी बनाई है। मुख्यधारा में आप शामिल हो जाइए। हथियार छोड़ दीजिए। विकास के रास्ते पर आ जाइए।

जगदलपुर में बस्तर ओलिंपिक के खिलाड़ियों ने अमित शाह का स्वागत किया।
2900 खिलाड़ियों ने लिया हिस्सा
बस्तर में संभाग स्तरीय बस्तर ओलिंपिक प्रतियोगिता का आयोजन शुक्रवार 13 दिसंबर से शुरू हुआ था। जगदलपुर के इंदिरा प्रियदर्शनी स्टेडियम में बैडमिंटन, कबड्डी, वॉलीबॉल समेत अन्य गेम्स हुए। आज 15 दिसंबर को समापन है, जिसमें गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल होंगे।
इस बस्तर ओलिंपिक में बस्तर संभाग के सातों जिले के अलग-अलग खेलों के करीब 2900 से ज्यादा खिलाड़ी हिस्सा लेने पहुंचे। इसका सारा बंदोबस्त जिला प्रशासन की तरफ से किया गया है। प्रशासन की माने तो इस आयोजन में सरेंडर किए हुए करीब 300 नक्सली भी शामिल हुए। इसके साथ ही नक्सल घटनाओं में दिव्यांग हुए कुल 18 खिलाड़ियों, नक्सल हिंसा पीड़ितों ने भी अलग-अलग गेम्स में हिस्सा लिया।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में राष्ट्रपति पुलिस कलर अवॉर्ड- 2024 कार्यक्रम में शामिल हुए
रायपुर में अमित शाह की बड़ी बातें
- नक्सलवाद के खिलाफ ताबूत में अंतिम कील ठोकने की तैयारी
शाह ने कहा कि सरकार बदलने के बाद से टॉप 14 नक्सली न्यूट्रलाइज हुए हैं। 4 दशकों में पहली बार नागरिकों और सुरक्षाबलों के मृत्यु के आंकड़े में कमी आई है। 10 साल में नक्सलवाद पर नकेल कसी गई। पुलिस ने 1 साल में छत्तीसगढ़ समेत सभी राज्यों से नक्सलवाद के खिलाफ ताबूत में अंतिम कील ठोकने की तैयारी की है।
- राष्ट्रपति कलर्स सिर्फ एक अलंकरण नहीं, बलिदान का प्रतीक
शाह ने पुलिस से कहा कि राष्ट्रपति कलर्स सिर्फ एक अलंकरण नहीं है, यह बलिदान का प्रतीक है। यह उन चुनौतियों की याद दिलाता है, जिनके साथ आपको दो-दो हाथ करना है। एक अलंकरण के साथ-साथ एक दायित्व भी है। मुझे विश्वास है कि छत्तीसगढ़ पुलिस का हर जवान इस दायित्व को निभाएगा। अपने फर्ज में कभी भी पीछे नहीं हटेगा।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह राष्ट्रपति पुलिस कलर अवॉर्ड- 2024 कार्यक्रम में शामिल हुए।
यह सामान छत्तीसगढ़ पुलिस की वर्दी पर सजेगा-सीएम
CM विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 24 वर्षों में ही यह सम्मान पुलिस को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए दिया गया है। यह सामान न सिर्फ छत्तीसगढ़ पुलिस की वर्दी पर सजेगा, बल्कि हमारे जवानों की कर्तव्य, निष्ठा, साहस और समर्पण का प्रतीक भी बनेगा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आभार व्यक्त करता हूं।
छत्तीसगढ़ पुलिस ने एंटी नक्सल ऑपरेशन में साहस और दृढ़ता के साथ पिछले 1 साल में अभूतपूर्व सफलता प्राप्त की है। बड़ी संख्या में नक्सलियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्य धारा में लौटने का निर्णय लिया है। जवानों को बड़ी उपलब्धि मिली है।
राष्ट्रपति पुलिस कलर फ्लैग पुलिस को सौंपा
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने रायपुर के पुलिस परेड ग्राउंड में राष्ट्रपति पुलिस कलर अवॉर्ड- 2024 कार्यक्रम में पुलिस प्लाटून की सलामी ली। इस दौरान शाह ने राष्ट्रपति पुलिस कलर फ्लैग पुलिस को सौंपा। जहां धर्म गुरुओं ने मंत्रों के साथ ध्वज का स्वागत किया।
कार्यक्रम में शाह और CM विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति के निशान को सलामी दी। राष्ट्रपति पुलिस कलर ध्वज में बस्तर की संस्कृति को भी दर्शाया गया है, जिसमें गौर, माड़िया सिंह और धान के खेत शामिल हैं। ध्वज के ऊपर और नीचे 36 किले दर्शाए गए हैं।

अमित शाह ने ली पुलिस प्लाटून की सलामी।
छत्तीसगढ़ के लिए ऐतिहासिक है यह फ्लैग
छत्तीसगढ़ राष्ट्रपति के इस फ्लैग को हासिल करने वाला देश का सबसे युवा राज्य है। छत्तीसगढ़ 2025 में अपने सिल्वर जुबली ईयर में प्रवेश कर रहा है। इससे ठीक पहले राष्ट्रपति की तरफ से पुलिस सेवा को मिलने वाला यह सम्मान छत्तीसगढ़ राज्य के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है।
स्टेट पुलिस के सर्विस रिकॉर्ड को लंबे समय तक ऑब्जरवेशन पर रखे जाने के बाद राष्ट्रपति की ओर से यह सम्मान दिया जाता है।
तस्वीरों में देखिए राष्ट्रपति पुलिस कलर अवॉर्ड कार्यक्रम

राष्ट्रपति के निशान को अमित शाह ने सलामी दी। साथ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह मौजूद।

परेड कमांडर जीतेंद्र शुक्ला 8 प्लाटून के साथ कर रहे मार्च।

केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रपति पुलिस कलर फ्लैग पुलिस को सौंपा।

धर्म गुरुओं ने मंत्रों के साथ ध्वज का स्वागत किया।

पुलिस के घुड़सवार दस्ते के साथ अमित शाह की परेड ग्राउंड में हुई एंट्री।
छत्तीसगढ़ पुलिस को यह सम्मान क्यों दिया गया?
भारत के सशस्त्र बलों और पुलिस संगठनों को उनकी स्पेशल सर्विस और कर्तव्य के प्रति बेहतरीन समर्पण के लिए दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान ‘राष्ट्रपति का प्रतीक चिन्ह’ है। हाल ही में छत्तीसगढ़ पुलिस को यह सम्मान दिया गया है। यह सम्मान नक्सलवाद और अन्य चुनौतियों से निपटने में राज्य पुलिस के अद्वितीय प्रयासों और उपलब्धियों को मान्यता देता है।
1. नक्सलवाद के खिलाफ संघर्ष: छत्तीसगढ़ लंबे समय से नक्सलवाद से प्रभावित रहा है। पुलिस ने दुर्गम क्षेत्रों में माओवादी गतिविधियों का डटकर सामना किया है और सफलतापूर्वक शांति बहाल की है। उनके अभियानों में साहस, समर्पण और सामुदायिक सहभागिता का अनूठा मेल देखने को मिला।
2. सामुदायिक पुलिसिंग: छत्तीसगढ़ पुलिस ने सामुदायिक पुलिसिंग के तहत आदिवासी युवाओं को रोजगार, शिक्षा और पुनर्वास के लिए विशेष योजनाएं चलाईं। इसके जरिए पुलिस ने आम जनता और सुरक्षा बलों के बीच विश्वास कायम किया।
3. आधुनिक तकनीक और विशेष बल: छत्तीसगढ़ पुलिस ने अपराध नियंत्रण और नक्सल विरोधी अभियानों में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया। विशेष बल, जैसे डिस्ट्रिक्ट रिजर्व ग्रुप (DRG), ने माओवादियों के खिलाफ महत्वपूर्ण सफलता हासिल की।
इन 2 जगहों पर जाने की चर्चा, जानिए क्यों
- पूवर्ती गांव..हिड़मा यहीं का रहने वाला
बस्तर में जब भी नक्सल का जिक्र होता है तो नक्सली लीडर माड़वी हिड़मा का नाम भी आता है। पुलिस की वांटेड लिस्ट में भी सबसे पहले हिड़मा का ही नाम है। हिड़मा सुकमा जिले के अति संवेदनशील पूवर्ती गांव का रहने वाला है। वर्तमान में ये नक्सलियों के सेंट्रल कमेटी का मेंबर है। इस पर 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित है।
कुछ महीने पहले ही हिड़मा के गांव पूवर्ती में उसके घर के नजदीक ही सुरक्षाबलों का कैंप स्थापित किया गया है। पूवर्ती, टेकलगुडेम समेत आस-पास के इलाके को जवानों ने कैप्चर कर लिया है। हर दिन यहां सैकड़ों जवान सर्च ऑपरेशन पर निकलते हैं। ऐसे में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह हिड़मा के गांव जाकर उसके इलाके के लोगों से मुलाकात कर सकते हैं।
- अबूझमाड़…यहां आर्मी कैंप भी स्थापित होना है
अमित शाह नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ भी जा सकते हैं। अबूझमाड़ के गांव में इसलिए क्योंकि इस इलाके को नक्सलियों की राजधानी के नाम से जाना जाता है। यहां कई बड़े कैडर्स के नक्सली हैं। बड़ी बात है कि अबूझमाड़ के इलाके में ही आर्मी का बेस कैंप भी स्थापित किया जाना है।
इस लिहाज से इलाके को करीब से देखने और इंडियन आर्मी के बेस कैंप खोलने को लेकर वे इस इलाके में भी जा सकते हैं। माड़ की जमीनी स्थिति, इलाके के लोगों से मुलाकात कर उनसे चर्चा कर सकते हैं।

हिड़मा की फाइल फोटो।

सालभर में खोले गए 25 से ज्यादा कैंप
बस्तर को नक्सलियों से मुक्त करने और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के निर्देश के बाद सालभर में बस्तर में 25 से ज्यादा सुरक्षाबलों के कैंप स्थापित किए गए हैं। इनमें दंतेवाड़ा के नेरली घाटी, कांकेर के पानीडोबरी, बीजापुर के गुंडम, पुतकेल, छुटवही, नारायणपुर के कस्तूरमेटा, इरकभट्टी, मसपुर, मोहंदी, सुकमा के मुलेर, परिया, सलातोंग, टेकलगुडेम, पूवर्ती, लखापाल पुलनपाड़ में कैंप खुले हैं।

बस्तर ओलिंपिक में अलग-अलग खेल में कुल 2900 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया है।
छत्तीसगढ़
जगदलपुर : बस्तर मॉडल की पूरे देश को सीख: 8241 परिवारों को मिला जमीन पर वैध हक, प्रशासन खुद पहुंचा लोगों तक
जमीन का मालिकाना हक स्पष्ट, अब शिक्षा, बैंक और योजनाओं तक पहुंच होगी सरल


जगदलपुर। किसी परिवार के मुखिया की मृत्यु हो जाए और वर्षों बाद भी जमीन के सरकारी कागजों में उनका ही नाम दर्ज रहे। ऐसे में परिवार को हर छोटे-बड़े काम के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। बस्तर में हजारों परिवारों की यही समस्या थी। जिला प्रशासन खुद आगे बढ़कर इस परेशानी को दूर करने का काम कर रही है। बस्तर जिले में पिछले चार वर्षों के लंबित फौती नामांतरण मामलों को निपटाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य था कि जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है, उनकी जमीन के रिकॉर्ड में उनके परिवार के सही वारिसों का नाम दर्ज किया जाए। इस काम की शुरुआत गांवों से हुई। ग्राम सचिवों ने पिछले चार वर्षों में मृत्यु को प्राप्त लोगों की सूची तैयार की। इसके बाद पटवारियों ने उन लोगों की पहचान की जिनके नाम पर जमीन दर्ज थी और जिनके मामलों में फौती नामांतरण की जरूरत थी। कोटवारों ने गांव स्तर पर जानकारी का सत्यापन किया और तहसीलदारों ने पूरे अभियान की निगरानी की।

अभियान के दौरान बस्तर जिले के 611 गांवों से जानकारी जुटाई गई। ग्राम सचिवों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले चार वर्षों में 17,405 लोगों की मृत्यु दर्ज हुई थी। इनमें से 8,651 ऐसे मामले मिले जिनमें फौती नामांतरण की आवश्यकता थी। इसके बाद ग्राम सचिव, पटवारी और कोटवार की संयुक्त टीम ने घर-घर जाकर ,जिन परिवारों के पास मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं था, उनके लिए प्रमाण पत्र बनवाए गए। वारिसों की जानकारी और वंशवृक्ष तैयार किए गए। सभी दस्तावेज पूरे होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई। इस विशेष अभियान के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे। अब तक 8,241 मामलों में फौती नामांतरण पूरा कर दिया गया है। इसका मतलब है कि हजारों परिवारों की जमीन के सरकारी रिकॉर्ड अब सही हो गए हैं। केवल 410 मामले ही शेष हैं, जिन पर कार्य जारी है।

यह अभियान बस्तर जिले की सभी प्रमुख तहसीलों में चलाया गया। इनमें तोकापाल, करपावंड, बस्तर, बास्तानार, बकावंड, भानपुरी, नानगुर, जगदलपुर, लोहंडीगुड़ा और दरभा जैसे सुदूर आदिवासी अंचल शामिल हैं। सबसे अधिक प्रगति बकावंड, करपावंड, नानगुर और बास्तानार जैसे क्षेत्रों में देखने को मिली, जबकि जगदलपुर और लोहंडीगुड़ा में लगभग सभी पात्र मामलों का निराकरण कर दिया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। बस्तर में चलाया गया यह विशेष फौती नामांतरण अभियान इसी सोच का परिणाम है। जिन परिवारों के सदस्य अब इस दुनिया में नहीं हैं, उनके वारिसों को उनके अधिकार समय पर मिलें, यह हमारी प्राथमिकता है। हजारों परिवारों के जमीन संबंधी रिकॉर्ड अपडेट होने से उन्हें भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह अभियान सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनसेवा का एक अच्छा उदाहरण है, जिसमें प्रशासन स्वयं लोगों के घर तक पहुंचकर उनकी समस्या का समाधान कर रहा है।
बस्तर जिले की सभी तहसीलों में इस अभियान को अच्छी सफलता मिली। तोकापाल में 1,454, करपावंड में 504, बस्तर में 1,019, बास्तानार में 337 और बकावंड में 1,142 मामलों का निराकरण किया गया। वहीं भानपुरी में 959, नानगुर में 518, जगदलपुर में 1,057, लोहंडीगुड़ा में 799 और दरभा में 452 परिवारों के जमीन संबंधी रिकॉर्ड अपडेट किए गए। सबसे अच्छी प्रगति जगदलपुर, लोहंडीगुड़ा और बकावंड क्षेत्रों में देखने को मिली।
इस अभियान की खास बात यह रही कि लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। प्रशासन खुद गांवों तक पहुंचा, रिकॉर्ड खंगाले, दस्तावेज तैयार कराए और पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया। तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की गई, जिससे कार्य में तेजी आई।
बस्तर कलेक्टर ने कहा कि जिले के कई दूरस्थ और पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जमीन संबंधी कार्यों के लिए लंबे समय तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई परिवारों को केवल इसलिए परेशानी होती थी क्योंकि जमीन के रिकॉर्ड में मृत व्यक्ति का नाम दर्ज था। विशेष अभियान चलाकर प्रशासन ने स्वयं गांवों तक पहुंचकर इस समस्या का समाधान किया। अब हजारों परिवारों के जमीन संबंधी रिकॉर्ड सही हो गए हैं, जिससे उन्हें अपने अधिकार प्राप्त करने, बैंकिंग सुविधाओं का लाभ लेने और शासकीय योजनाओं से जुड़ने में आसानी होगी। इससे न केवल लोगों का प्रशासन पर विश्वास मजबूत होगा, बल्कि जमीन संबंधी विवादों में भी कमी आएगी और ग्रामीणों का जीवन अधिक सरल बनेगा।
छत्तीसगढ़
सुकमा : बंदूक छोड़ थामा ई-रिक्शा का हैंडल, आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़े राजू, मनीष और कलमू
नक्सल पुनर्वास नीति 2025 ने बदली जिंदगी, मुख्यधारा से जुड़कर बन रहे स्वावलंबी



सुकमा। कभी नक्सल गतिविधियों से जुड़े रहे पोडियाम राजू, मनीष लखमा और कलमू कोसा आज आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन की नई मिसाल बन गए हैं। छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल पुनर्वास नीति 2025 के तहत आत्मसमर्पण करने के बाद इन युवाओं को जिला प्रशासन द्वारा ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया। अब वे सुकमा की सड़कों पर ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं और समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं।

पुनर्वास नीति बनी नई शुरुआत का आधार
आत्मसमर्पण के बाद जिला प्रशासन ने तीनों युवाओं को पुनर्वास योजना से जोड़ते हुए वाहन संचालन का प्रशिक्षण दिलाया। साथ ही उनके ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया भी पूरी कराई गई। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद उन्हें निःशुल्क ई-रिक्शा प्रदान किए गए, जिससे वे नियमित आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन सके।
प्रशासन ने बढ़ाया उत्साह
आज शनिवार को कलेक्टर अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण तथा डीआईजी सीआरपीएफ आनंद सिंह राजपुरोहित सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं इनके ई-रिक्शा में सफर कर उनका उत्साहवर्धन किया। अधिकारियों के इस आत्मीय सहयोग से युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ा और उन्हें समाज में सम्मानजनक पहचान मिली।
शासकीय योजना से बदली जीवन की दिशा
नक्सल पुनर्वास नीति के माध्यम से शासन ऐसे युवाओं को न केवल हिंसा का रास्ता छोड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है, बल्कि उन्हें रोजगार, प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता के अवसर भी उपलब्ध करा रहा है। यही कारण है कि कभी समाज से दूर रहने वाले ये युवा आज शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर अपने पैरों पर खड़े हो गए हैं।
दूसरों के लिए बने प्रेरणा स्रोत
राजू, मनीष और कलमू की सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, शासन की संवेदनशील पहल और दृढ़ संकल्प से जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है। आज ये तीनों युवा उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं जो भटकाव छोड़कर विकास और शांति के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं।
सफलता की नई पहचान
इन युवाओं की कहानी यह संदेश देती है कि हिंसा और संघर्ष का रास्ता केवल कठिनाइयों की ओर ले जाता है, जबकि शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जुड़कर सम्मानजनक जीवन और बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति ऐसे अनेक युवाओं के जीवन में उम्मीद और बदलाव की नई रोशनी लेकर आ रही है।
छत्तीसगढ़
भूपेश के आरोपों के बाद प्रशासन एक्टिव:पाटन में 135 कृषि केंद्रों पर छापे, अमानक खाद जब्त, सात विक्रेताओं को नोटिस
दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा खाद और बीज की कमी का मुद्दा उठाए जाने के बाद दुर्ग जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। प्रशासन ने पाटन विधानसभा क्षेत्र में पर्याप्त खाद-बीज उपलब्ध होने का दावा करते हुए विस्तृत आंकड़े जारी किए हैं। साथ ही कृषि विभाग ने 135 कृषि केंद्रों पर औचक निरीक्षण कर अमानक उर्वरक जब्त किए हैं और सात विक्रेताओं को नोटिस जारी किया है।
भूपेश बघेल ने हाल ही में पाटन क्षेत्र के दौरे के दौरान किसानों से मुलाकात कर खाद-बीज की समस्या को विधानसभा में उठाने की बात कही थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने उपलब्धता और भंडारण संबंधी जानकारी सार्वजनिक की।

खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त भंडारण का दावा
कृषि विभाग और बीज निगम के अनुसार खरीफ सीजन 2026 के लिए पाटन विकासखंड में पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का भंडारण किया गया है। आईएमएफएस (iMFS) पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 5556.78 मीट्रिक टन यूरिया, 2763.07 मीट्रिक टन एसएसपी, 1314.60 मीट्रिक टन पोटाश, 1105.05 मीट्रिक टन डीएपी और 1026.90 मीट्रिक टन एनपीके का भंडारण किया गया है।
प्रशासन का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में यूरिया का भंडारण 959 मीट्रिक टन, एसएसपी 460 मीट्रिक टन और पोटाश 506 मीट्रिक टन अधिक रखा गया है।
डीएपी की कमी स्वीकार, विकल्पों पर जोर
कृषि विभाग ने डीएपी की आंशिक कमी स्वीकार करते हुए किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित करने की बात कही है। विभाग द्वारा एसएसपी, टीएसपी, एनपीके और नैनो डीएपी के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि इन उर्वरकों में फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध हैं और किसानों को इनके उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है।
2790 क्विंटल बीज का बफर स्टॉक
प्रशासन के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ और बीज निगम रूआबांधा में पर्याप्त खाद उपलब्ध है। इसके अलावा लगभग 2790 क्विंटल बीज का बफर स्टॉक सुरक्षित रखा गया है। अधिकारियों ने खाद-बीज की किल्लत से इनकार करते हुए आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने का दावा किया है।
135 कृषि केंद्रों की जांच
खरीफ सीजन के दौरान किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया। कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल ने निजी और सहकारी कृषि केंद्रों का औचक निरीक्षण किया।
अब तक जिले के 135 कृषि केंद्रों की जांच की जा चुकी है। निरीक्षण में उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के नियमों के उल्लंघन, स्टॉक संधारण में गड़बड़ी और बिना अनुमति अतिरिक्त स्रोतों से उर्वरक बिक्री के मामले सामने आए हैं। इन मामलों में सात विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
अमानक खाद जब्त, कई केंद्रों पर कार्रवाई
जांच के दौरान सेलूद, रानीतराई और धमधा क्षेत्र के कृषि केंद्रों में बायो स्टिम्यूलेंट के अनियमित विक्रय के मामले मिले। वहीं ऋषभराज फर्टिलाइजर, विद्या कृषि केंद्र बोरी और कृषि सेवा केंद्र पाटन में उर्वरकों के स्टॉक और अधिक मूल्य पर बिक्री संबंधी अनियमितताएं पाई गईं।
कृषि विभाग ने यूरिया, एनपीके, एसएसपी, पोटाश, ऑर्गेनिक मैन्योर और बायो स्टिम्यूलेंट सहित बड़ी मात्रा में उर्वरक जब्त कर कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया है।
पांच नमूने अमानक पाए गए
विभागीय जांच के दौरान पांच विक्रय केंद्रों से लिए गए उर्वरक नमूनों की प्रयोगशाला जांच में सभी नमूने अमानक पाए गए। इसके बाद संबंधित उर्वरकों की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। संबंधित विक्रेताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।
कालाबाजारी पर सख्त चेतावनी
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि खाद-बीज की कृत्रिम किल्लत पैदा करने, कालाबाजारी करने अथवा अमानक उर्वरकों की बिक्री करने वालों के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लाइसेंस निलंबित या निरस्त करने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।
अधिकारियों ने कहा कि खरीफ सीजन के दौरान खाद-बीज वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
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