संभाग आयुक्त ,पुलिस महानिरीक्षक, जिला कलेक्टर ,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक द्वारा किया गया अनुभव क्यू आर कोड लॉन्च थाने की व्यवस्था के संबंध में आमजन दे सकेंगे सीधे पुलिस महानिरीक्षक को फीडबैक रेंज के सभी पुलिस अधीक्षक भी वर्चुअली हुए शामिल
बिलासपुर/कोरबा। 5/2/27 का दिन, बिलासपुर रेंज की पुलिस के लिए एक नवाचार के शुभारंभ का साक्षी बना।बिलासपुर पुलिस लाइन के चेतना हाल में संभाग आयुक्त अनिल जैन, पुलिस महानिरीक्षक राम गोपाल गर्ग, जिला कलेक्टर संजय अग्रवाल एवं DIG तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह की प्रत्यक्ष एवं रेंज के जिलों, कोरबा, रायगढ़, जांजगीर चांपा, मुंगेली,जी पी एम ,सारंगढ़ एवं सक्ती के पुलिस अधीक्षकों की वर्चुअली उपस्थिति के दौरान, “अनुभव” क्यू आर कोड का शुभारंभ किया गया। इस क्यू आर कोड को स्कैन करके आम जन थाने से, संबंधित अपना फीडबैक दे सकेंगे।
इस अवसर पर आईजीपी रामगोपाल गर्ग ने, जो इस ऐप के प्रणेता भी हैं, ने अपने उद्बबोधन में बताया, की अब समय आ गया है कि पुलिस तकनीकी रूप से सक्षम बने, और आम जन भी, सरल तकनीक के माध्यम से पुलिस के साथ अपने अनुभव साझा कर सके। इसके लिए ये पहल अनुभव के माध्यम से प्रारम्भ की जा रही है। जिसमें थाने, और पुलिस के अन्य कार्यालयों में क्यू आर कोड लगाए गए हैं, जिन्हें अपने मोबाइल से स्कैन करके कोई भी व्यक्ति अपना फीडबैक दे सकता है।कोड को स्कैन करने पर एक सरल गूगल फॉर्म खुलता है, जिसमें प्रश्नोत्तर के माध्यम से, संबंधित व्यक्ति अपना फीडबैक दे सकता है,जो सबमिट करने पर सीधे पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय में दर्ज हो जाएगा।फीडबैक देने एला व्यक्ति चाहे तो अपनी पहचान और मोबाइल नंबर भी गोपनीय रख सकता है, इसे पूरी तरह से वैकल्पिक रखा गया है। आईजीपी श्री गर्ग ने आगे बताया कि,आज से रेंज के सभी आठ जिलों में एक साथ इस ‘ अनुभव’ सिस्टम का आरम्भ किया जा रहा है,इसके लिए रेंज के सभी थानों में क्यू आर कोड की स्थापना कर दी गई है।इस अवसर पर जिला बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा , ये पुलिस प्रशासन की ऐसी पहल है, जिससे आम जन, अपना अनुभव और समस्याएं बिना किसी वरिष्ठ कार्यालय के चक्कर काटे ,सीधे बता सकते हैं,और अपनी बात पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं।।संभागायुक्त अनिल जैन ने कहा, की नवाचार को अपनाना वर्तमान समय की मांग है और हम अपने कार्य के लिए स्वयं पर्यवेक्षक नहीं हो सकते, हम जनता के सेवक हैं, इसलिए हमारे काम का पर्यवेक्षण भी आमजन के द्वारा ही किया जाना चाहिए। इस कार्यक्रम में बिलासपुर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने अपने उद्बबोधन में बताया, की बिलासपुर जिले के सभी थानों में ‘अनुभव के लिए क्यू आर कोड लगा दिए गए हैं, और अब आम जन, अपना फीडबैक इसे स्कैन करके सीधे दे सकते हैं।उन्होंने पुलिस महानिरीक्षक की इस पहल को सार्थक बताते हुए कहा, की अब इससे थाने आने वाले फरियादियों को जो भी अनुभव थाने से मिलेगा, उससे प्राप्त फीडबैक के आधार पर जो भी व्यवस्था में सुधार किए जाने हैं वो किए जाएंगे।कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रायगढ़ शशिमोहन सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली भोजराम पटेल एवं पुलिस अधीक्षक कोरबा सिद्धार्थ तिवारी ने भी अपने विचार रखे जिसमें उन्होंने इस ‘ अनुभव ‘ को एक सार्थक पहल बताते हुए, इससे पुलिसिंग को और बेहतर बनाने तथा थाने में रियल टाइम में फरियादियों को आने वाली समस्याओं को जानकर, उन्हें दूर करने में मदद मिलेगी, ऐसा अपने संबोधन में बताया। कार्यक्रम गरिमामय रहा, जिसके दौरान सभी अतिथियों के द्वारा ‘अनुभव ‘का विधिवत शुभारंभ क्यू आर कोड का रिबन खोलकर किया गया।इस दौरान इससे संबंधित एक वीडियो प्रेजेंटेशन भी दिया गया, जिसमें ‘अनुभव ‘ के उपयोग और उपयोगिता के संबंध में जानकारी साझा की गई। इस अवसर पर शहर के गणमान्य नागरिकजन, समाज सेवी संस्थाओं के लोग, प्रिंट तथा सोशल मीडिया के प्रमुख प्रबुद्धगण की गरिमामय उपस्थिति रही।आज से ही यह व्यवस्था रेंज के सभी जिलों के सभी थानों में प्रारम्भ कर दी गई है। आईजीपी रामगोपाल गर्ग ने आम जनो से अपील की है, की इसका सदुपयोग करें, और अपने सही,वास्तविक तथा महत्वपूर्ण फीडबैक को देकर, व्यवस्था में सुधार के सहभागी बने। यदि कुछ अच्छा हो तो उसे भी शेयर किया जाए, और जो कमी आपको महसूस हो, उसे भी निर्भय होकर बताएं। कार्यक्रम के अंत में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह के द्वारा सभी अतिथियों को स्मरण चिन्ह प्रदान किए गए।इस गरिमामय कार्यक्रम के साथ आज से बिलासपुर रेंज में जनता से प्रत्यक्ष संवाद के तहत ‘ अनुभव ‘ के माध्यम से क्यू आर कोड स्कैन कर फीडबैक लेने की व्यवस्था का शुभारंभ किया गया।
कोरबा निवासी 02 लोगों के विरुद्ध म्यूल अकाउंट के मामले में पुलिस की कार्रवाई
कोरबा पुलिस की अपील—अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम एवं मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें
कोरबा। पुलिस अधीक्षक जिला कोरबा सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटेल एवं साइबर नोडल अधिकारी नितेश ठाकुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कटघोरा के मार्गदर्शन में साइबर थाना प्रभारी ललित कुमार चंद्रा के नेतृत्व में म्यूल अकाउंट के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है।
भारत सरकार के गृह मंत्रालय से म्यूल अकाउंट (Mule Account) के संबंध में प्राप्त निर्देशों के पालन में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा ऐसे बैंक खातों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिनका उपयोग साइबर अपराधों में किए जाने की आशंका है।
इसी क्रम में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा अलग अलग बैंक खातों के संबंध में अपराध पंजीबद्ध कर धारा 317(2), 318(4) बीएनएस के तहत विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान दो अलग अलग अपराधों में दो खाताधारकों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई।
पूछताछ में खाता धारक महेंद्र कुमार धीवर निवासी मानस नगर, कोरबा एवं के प्रभाकर राव निवासी कृष्ण नगर कोरबा द्वारा अपने बैंक खातों को लाभ कमाने के उद्देश्य से अन्य व्यक्तियों को कमीशन के बदले उपयोग हेतु दिए जाने की बात सामने आई। बाद में उन्हें जानकारी हुई कि संबंधित बैंक खाते होल्ड हो गए हैं।
प्रकरण में उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर दोनों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई है। प्रकरण की विवेचना वर्तमान में जारी है।
म्यूल अकाउंट के विरुद्ध कोरबा पुलिस की कार्रवाई
साइबर अपराधियों द्वारा आम नागरिकों को कमीशन अथवा आसान कमाई का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाकर अथवा पहले से संचालित बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराध से प्राप्त राशि के लेन-देन के लिए किया जाता है। ऐसे बैंक खातों को म्यूल अकाउंट (Mule Account) कहा जाता है।
साइबर अपराध में प्रयुक्त ऐसे खातों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए उपलब्ध कराने वाले खाताधारक भी साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं।
कोरबा पुलिस की आम नागरिकों से अपील
साइबर अपराधी लोगों को कमीशन अथवा अन्य प्रकार के लाभ का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर अथवा सिम का उपयोग साइबर अपराधों में कर सकते हैं। अतः नागरिक निम्न सावधानियां बरतें—
अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें।
अपना एटीएम/डेबिट कार्ड, पासबुक, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी को न दें।
अपना मोबाइल नंबर अथवा सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने के लिए न दें।
किसी व्यक्ति द्वारा कमीशन या आसान कमाई का लालच देकर बैंक खाता उपलब्ध कराने की बात कही जाए तो सतर्क रहें।
अपने बैंक खाते में होने वाले लेन-देन की नियमित रूप से जानकारी रखें।
किसी संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिलने पर तत्काल अपने बैंक एवं पुलिस को सूचित करें।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने खाते में राशि प्राप्त कर उसे दूसरे खाते में ट्रांसफर अथवा नकद निकालकर न दें।
कोरबा पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि थोड़े से आर्थिक लाभ के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम अथवा मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को देकर स्वयं को साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई का हिस्सा न बनाएं।
SECL मानिकपुर जनसुनवाई रद्द करने की मांग:ग्रामीणों ने प्रक्रिया को फर्जी बताया,भू-विस्थापित बोले- पहले पुराने वादे पूरे करो,नहीं तो 3 हजार ग्रामीण करेंगे विरोध
कोरबा। SECL मानिकपुर ओपन कास्ट खदान विस्तार परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। भू-विस्थापित संगठन मानिकपुर ने 21 अगस्त को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई को रद्द करने की मांग की है।
संगठन ने जनसुनवाई की प्रक्रिया को फर्जी बताते हुए चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो 8 प्रभावित गांवों के करीब 2 से 3 हजार महिला-पुरुष ग्रामीण मौके पर पहुंचकर इसका उग्र विरोध करेंगे।
200-250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप
250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों पहले खदान के लिए अपनी उपजाऊ जमीन देने के बावजूद करीब 200 से 250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। वहीं, SECL द्वारा गोद लिए गए 7-8 गांवों में सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी खराब है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और SECL प्रबंधन खदान विस्तार और कॉर्पोरेट मुनाफे को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि विस्थापित परिवारों की पुरानी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है।
युवाओं के लिए 400-500 स्थायी नौकरी की मांग
भू-विस्थापितों ने प्रभावित गांवों के युवाओं के लिए मौके पर ही 400 से 500 पदों पर नियमित और स्थायी भर्ती शुरू करने की मांग रखी है। इसके अलावा भिलाई खुर्द-1, 2 और 3 में बचे मकानों और जमीनों का दोबारा पारदर्शी तरीके से भौतिक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग की गई है।
रापाखरा और दादर खुर्द को लेकर भी मांग
ग्रामीणों ने रापाखरा के विस्थापितों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने और आने-जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, दादर खुर्द के तालाब को गांव की निस्तारी का प्रमुख स्रोत बताते हुए वहां ओबी डंपिंग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
ग्रामीणों को सूचना दिए बिना जनसुनवाई कराने का आरोप
ग्रामीण अमन पटेल ने आरोप लगाया कि SECL प्रबंधन 21 अगस्त को जनसुनवाई कराने जा रहा है, लेकिन प्रभावित गांवों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि करीब 15-20 दिन पहले अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा गया था कि जनसुनवाई की जानकारी मिलने पर ग्रामीणों को बताया जाएगा। इसके बावजूद अब पंचायत सचिव, सरपंच और अन्य क्षेत्रों को नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुराने मुआवजे, रोजगार, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े वादे पूरे नहीं होते, तब तक खदान विस्तार के लिए जनसुनवाई नहीं होने दी जाएगी।
पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध शिकायत निवारण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
बिलासपुर/कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने भूमि के बदले रोजगार से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा समिति का गठन किया है। समिति उपलब्ध अभिलेखों, दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण कर अपनी अनुशंसाएं सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
भूमि के बदले रोजगार की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से लागू की गई यह उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था प्रत्येक पात्र हितग्राही के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
समिति के अध्यक्ष महाप्रबंधक (भू-राजस्व), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर होंगे। समिति में महाप्रबंधक (योजना एवं परियोजना), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/श्रमशक्ति), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/औद्योगिक संबंध) तथा उप-महाप्रबंधक (विधि), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर सदस्य होंगे।
गठित समिति आवश्यकता के अनुसार संबंधित अभिलेखों एवं दस्तावेजों की जांच करेगी, अधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करेगी तथा उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों का सत्यापन करते हुए प्रचलित नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप शिकायतों का परीक्षण करेगी। इससे प्रकरणों के त्वरित, निष्पक्ष एवं तार्किक निस्तारण में सहायता मिलेगी।
भूमि के बदले रोजगार से संबंधित अनियमितता, जाली अथवा कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग, तथ्य छिपाकर रोजगार प्राप्त करने अथवा अन्य संबंधित मामलों के संबंध में कोई भी व्यक्ति आवश्यक दस्तावेजों एवं साक्ष्यों सहित समिति के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर सकता है।
एसईसीएल ने स्पष्ट किया है कि विधिवत दर्ज की गई शिकायत को वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। अतः शिकायतकर्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे केवल प्रामाणिक तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही शिकायत दर्ज कराएं। कंपनी ने सभी संबंधित पक्षों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि शिकायत केवल अधिकृत माध्यमों से ही प्रस्तुत करें तथा किसी भी प्रकार के बिचौलियों, अपुष्ट सूचनाओं अथवा भ्रामक दावों से सावधान रहें।
एसईसीएल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान कोई शिकायत जानबूझकर असत्य, दुर्भावनापूर्ण अथवा भ्रामक तथ्यों पर आधारित पाई जाती है, अथवा किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करने या अनावश्यक उत्पीड़न के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती है, तो संबंधित शिकायतकर्ता के विरुद्ध प्रचलित नियमों एवं लागू विधिक प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
एसईसीएल सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं संस्थागत निष्पक्षता के उच्च मानकों के प्रति प्रतिबद्ध है। कंपनी का विश्वास है कि उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था के माध्यम से भूमि के बदले रोजगार संबंधी शिकायतों के परीक्षण की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं विश्वसनीय बनेगी। साथ ही, वास्तविक एवं पात्र हितग्राहियों के हितों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित होने के साथ शिकायत निवारण तंत्र में जनविश्वास एवं संस्थागत जवाबदेही भी और सुदृढ़ होगी।