बालकोनगर। भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने व्यावसायिक साझेदार के कर्मचारियों के लिए एक वित्तीय सशक्तिकरण कार्यक्रम आयोजित किया। आयोजन भारतीय डाक सेवा, बिलासपुर मंडल और कोरबा कार्यालय के सहयोग से किया गया। इसका उद्देश्य संयंत्र स्तर पर कार्यरत कर्मचारियों में वित्तीय साक्षरता बढ़ाना तथा निवेश के अवसरों की जानकारी देना था।
कार्यक्रम का नेतृत्व गणेश देवांगन, सहायक अधीक्षक, बिलासपुर डाक मंडल ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों को नियमित बचत की आदत, बीमा के माध्यम से जोखिम सुरक्षा, और दीर्घकालिक निवेश के लाभों के बारे में जागरूक किया। इसमें व्यावसायिक साझेदार के 80 कर्मचारियों ने भाग लिया।
सत्र में डाकघर की विभिन्न बचत योजनाओं, बीमा नीतियों और निवेश विकल्पों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। बालको इस सार्थक पहल में भारतीय डाक सेवा के सहयोग की सराहना करता है और भविष्य में भी अपने विस्तारित कार्यबल के समग्र विकास और वित्तीय समावेशन के लिए प्रतिबद्ध है।
कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश एवं उप संचालक खनिज प्रशासन प्रमोद नायक के मार्गदर्शन में जिला खनिज जाँच अमला द्वारा आज अवैध उत्खनन, परिवहन एवं भंडारण के विरुद्ध संयुक्त कार्यवाही की गई। कार्रवाई के दौरान कुल 9 वाहनों को जप्त किया गया, जिनमें 2 ट्रक, 4 हाइवा, 1 जेसीबी, 1 चैन माउंट मशीन एवं 1 टिप्पर शामिल है।
साथ ही दो अलग-अलग स्थानों में अवैध रेत भंडारण पाए जाने पर लगभग 700 घनमीटर रेत जप्त करते हुए खनिज नियमों के अंतर्गत आवश्यक कार्रवाई प्रारंभ की गई है। आज की कार्यवाही में मिट्टी, रेत एवं कोयला खनिज से संबंधित अवैध गतिविधियों पर प्रभावी कार्रवाई करते हुए आवश्यक दंडात्मक प्रक्रिया प्रचलन में लाई गई है। जिला प्रशासन द्वारा अवैध खनन पर सख्त निगरानी रखी जा रही है तथा भविष्य में भी ऐसी कार्यवाहियाँ निरंतर जारी रहेंगी।
कोरबा। आरजीआई पोर्टल से आनलाईन जन्म-मृत्यु पंजीयन हेतु 16 फरवरी को जनपद पंचायत कोरबा के सभाकक्ष में प्रातः 11 बजे से अपरांह 01 बजे तक तथा दोपहर 02 बजे से 04 बजे तक प्रशिक्षण का आयोजन किया गया है। प्रशिक्षण जिला योजना एवं सांख्यिकी कार्यालय के अधिकारियों द्वारा दिया जायेगा। जिला योजना एवं सांख्यिकी अधिकारी ने बताया कि जिला चिकित्सालय कोरबा, शहरी प्राथमिक केन्द्र ढोढ़ीपारा, एसईसीएल कोरबा (मुड़ापार), सीएसईबी पूर्व, ईएसआईसी अस्पताल कोरबा, समस्त सामुदायिक, प्राथमिक एवं उप स्वास्थ्य केन्द्र विकासखंड कोरबा के लिए प्रशिक्षण का आयोजन प्रातः 11 बजे से दोपहर 01 बजे तक किया जायेगा। इसी तरह नगर पालिका कोरबा एवं जनपद पंचायत पोंड़ीउपरोड़ा अंतर्गत समस्त ग्राम पंचायत सचिवों के लिए प्रशिक्षण का आयोजन दोपहर 02 बजे से 04 बजे तक किया जायेगा।
कोरबा। आयुष विभाग अंतर्गत स्पेशलाइज्ड थेरेपी सेंटर, सह संस्था सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटघोरा में राष्ट्रीय आयुष मिशन के तहत राष्ट्रीय संधिवात कार्यक्रम के अंतर्गत संधिवात, अस्थिगतवात, वातरक्त, अवबाहुक जैसे जीर्ण एवं कष्टसाध्य रोगों का आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा पद्धति द्वारा प्रभावी उपचार किया जा रहा है। आधुनिक जीवनशैली, खान-पान की अनियमितता और शारीरिक गतिविधियों में कमी के कारण कम आयु में भी अस्थि-संधिगतवात रोगों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो अत्यंत चिंताजनक है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए केंद्र में पंचकर्म चिकित्सा के माध्यम से जनकल्याणकारी पहल संचालित की जा रही है। इस प्रयास का मूल उद्देश्य आमजन को आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा पद्धति की सुरक्षित और प्रभावी भूमिका से अवगत कराना है। अस्थि-संधिगतवात रोगों की प्रारंभिक जांच के माध्यम से इनकी समय पर पहचान सुनिश्चित की जा रही है तथा पंचकर्म चिकित्सा के क्षेत्र में आयुष प्रणाली की क्षमता को जनसामान्य के समक्ष दृढ़ता से स्थापित किया जा रहा है।
कार्यक्रम का स्वरूप स्पेशलाइज्ड थेरेपी सेंटर कटघोरा में रोगियों की विस्तृत जांच, परामर्श और मार्गदर्शन प्रदान किया गया। पंचकर्म चिकित्सा के अंतर्गत स्नेहन, स्वेदन, कटिबस्ती, जानूबस्ती, मात्रावस्ति, नस्य, विरेचन और शिरोधारा जैसी पारंपरिक प्रक्रियाओं के माध्यम से अनेक जीर्ण एवं कष्टसाध्य रोगों का सफल उपचार किया गया। उपचार प्रक्रियाओं में रोगियों को राहत, सहजता और दीर्घकालिक लाभ प्राप्त हुए। पंचकर्म चिकित्सा अंतर्गत विगत वर्ष कुल 5399 पंचकर्म प्रक्रियाओं का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया। उपचार प्राप्त करने वाले रोगियों में पंचकर्म उपरांत शीघ्र स्वास्थ्य लाभ, पुनरावृत्ति में कमी और उच्च संतुष्टि देखने को मिली। क्षेत्र में आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा के प्रति जनविश्वास में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और लोग इसका लाभ लेने के लिए अधिक संख्या में केंद्र पहुंच रहे हैं। उपचार से लाभ हासिल करने वाली शुकवारा बाई, उम्र 52 वर्ष ने बताया कि वह दोनों घुटनों में अत्यधिक दर्द से पीड़ित थीं और चिकित्सकों द्वारा उन्हें ऑपरेशन की सलाह तक दे दी गई थी। स्पेशलाइज्ड थेरेपी सेंटर कटघोरा में उन्होंने पंचकर्म चिकित्सा के अंतर्गत अभ्यंग, नाड़ी स्वेदन और जानूबस्ती की प्रक्रियाएं लीं। लगभग एक माह के उपचार के बाद उन्हें आशातीत राहत मिली। घुटनों के दर्द में भारी कमी आई, चलने-फिरने में सहजता बढ़ी और उन्हें ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं रह गई। आज वे सामान्य जीवनशैली के साथ अपनी दैनिक गतिविधियों को आरामपूर्वक पूरा कर पा रही हैं और पंचकर्म चिकित्सा को अपने लिए जीवनदायी मानती हैं।
स्पेशलाइज्ड थेरेपी सेंटर कटघोरा में आयुर्वेदिक पंचकर्म चिकित्सा जीर्ण और कष्टसाध्य रोगों में अत्यंत प्रभावी सिद्ध हो रही है। इस चिकित्सा पद्धति ने अनेक रोगियों को राहत प्रदान की है और कई मामलों में शल्य क्रिया की आवश्यकता भी समाप्त कर दी है। इस पहल से न केवल स्वास्थ्य लाभ बढ़ा है, बल्कि आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली के प्रति लोगों का विश्वास भी उल्लेखनीय रूप से मजबूत हुआ है।