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विदेश

ट्रम्प बोले- अमेरिका किसी देश की मदद नहीं करेगा:हमसे तेल खरीदो, नहीं तो हिम्मत दिखाओ और होर्मुज जाकर ले लो

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तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अब अमेरिका किसी देश की मदद नहीं करेगा। देशों को खुद ही अपने हालात संभालने होंगे।

उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ब्रिटेन जैसे देश जो होर्मुज स्ट्रेट से फ्यूल नहीं ले पा रहे हैं, उन्हें अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए क्योंकि अमेरिका के पास इसकी कोई कमी नहीं है।

ट्रम्प ने कहा कि अगर देश चाहें, तो हिम्मत दिखाएं और खुद होर्मुज स्ट्रेट जाकर तेल ले लें। अमेरिका उनकी मदद के लिए नहीं आएगा, जैसे वे अमेरिका की मदद के लिए नहीं आए।

अपने बयान में उन्होंने यह भी कहा कि ईरान काफी हद तक कमजोर हो चुका है और सबसे मुश्किल काम पहले ही पूरा हो गया है। अब बाकी देश खुद जाकर अपना तेल ले सकते हैं।

अमेरिका ने ईरान में हथियार डिपो पर एयरस्ट्राइक की

अमेरिका ने ईरान के इस्फहान शहर में एक बड़े हथियार डिपो पर एयरस्ट्राइक की है। वॉल स्ट्रीट जर्नल रिपोर्ट के मुताबिक, यह हमला सोमवार रात को किया गया। इसके लिए 2000 पाउंड के बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल हुआ।

रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि इस डिपो में बड़ी मात्रा में हथियार और सैन्य सामग्री रखी गई थी, जिसे निशाना बनाया गया। बंकर-बस्टर बमों का इस्तेमाल मजबूत और भूमिगत ठिकानों को तबाह करने के लिए किया जाता है।

हमले के बाद डिपो में रखे हथियारों में विस्फोट होने से कई धमाके हुए और इलाके में आग के बड़े गुबार उठे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी सोशल मीडिया पर धमाकों का एक वीडियो शेयर किया है।

इस्फहान में हथियार डिपो पर हमले का वीडियो…

ईरान जंग से जुड़ी तस्वीरें…

इजराइल के हाइफा शहर में सोमवार को हिजबुल्लाह की तरफ से दागी गई एक ईरानी मिसाइल अटैक के बाद ऑयल रिफाइनरी में आग लग गई।

इजराइल के हाइफा शहर में सोमवार को हिजबुल्लाह की तरफ से दागी गई एक ईरानी मिसाइल अटैक के बाद ऑयल रिफाइनरी में आग लग गई।

लेबनान के बेरूत में विस्थापित लोगों के लिए अस्थायी शिविर बनाए गए हैं। तस्वीर में इन अस्थायी शिविर के बाहर बच्चे खेलते नजर आ रहे हैं।

लेबनान के बेरूत में विस्थापित लोगों के लिए अस्थायी शिविर बनाए गए हैं। तस्वीर में इन अस्थायी शिविर के बाहर बच्चे खेलते नजर आ रहे हैं।

इटली का अमेरिका को सैन्य बेस देने से इनकार

इटली ने अमेरिका को अपने सिगोनेला मिलिट्री बेस का इस्तेमाल करने से रोक दिया। यह बेस सिसिली आइलैंड पर है। अमेरिका यहां विमान उतरना चाहता था, लेकिन इटली ने इजाजत नहीं दी।

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के कुछ बॉम्बर विमान इटली के इस बेस पर उतरकर आगे मिडिल ईस्ट जाना चाहते थे। लेकिन इटली को इस प्लान की पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई थी। अमेरिका ने न तो इटली से इजाजत मांगी और न ही उसके सैन्य अधिकारियों से बात की।

इससे कुछ दिन पहले स्पेन भी ऐसा ही कदम उठा चुका है। स्पेन ने ईरान जंग में शामिल अमेरिकी विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया था।

ट्रम्प बोले- होर्मुज के रास्ते तेल नहीं मिल रहा तो हमसे खरीदो

डोनाल्ड ट्रम्प ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ब्रिटेन जैसे देश जो होर्मुज स्ट्रेट से फ्यूल नहीं ले पा रहे हैं, उन्हें अमेरिका से तेल खरीदना चाहिए क्योंकि अमेरिका के पास पर्याप्त तेल है।

उन्होंने कहा कि ये देश हिम्मत दिखाएं, होर्मुज तक जाएं और तेल खरीद लें।

ट्रम्प ने यह भी कहा कि अब देशों को खुद अपनी लड़ाई लड़ना सीखना होगा। अमेरिका उनकी मदद के लिए नहीं आएगा, जैसे वे अमेरिका की मदद के लिए नहीं आए थे।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि ईरान काफी हद तक कमजोर हो चुका है और अब देशों को अपना तेल खुद हासिल करना चाहिए।

मिडिल ईस्ट में जंग की वजह से यूरोप के कई देशों महंगाई बढ़ी

यूरोप के कई देशों में महंगाई बढ़ गई है। मार्च महीने में यह बढ़कर 2.5% हो गई, जबकि फरवरी में 1.9% थी। यह जानकारी यूरोप की संस्था यूरोस्टेट ने दी है।

महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह तेल और गैस की कीमतों का बढ़ना है। मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के कारण ऊर्जा की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।

आंकड़ों के मुताबिक, मार्च में तेल-गैस की कीमतें करीब 4.9% बढ़ गईं, जबकि फरवरी में ये कम हुई थीं।

गाजा में अब तक UN के 390 से ज्यादा कर्मचारियों की मौत

गाजा में UN की एजेंसी UNRWA के 390 से ज्यादा कर्मचारियों की मौत हुई है। इसकी जानकारी UNRWA के प्रमुख फिलिप लाजारिनी ने दी है।

उन्होंने कहा कि इस मामले की सच्चाई जानने के लिए एक बड़ी और स्वतंत्र जांच टीम बनाई जानी चाहिए। UNRWA गाजा में लोगों की मदद करने वाली सबसे बड़ी संस्था है। यह वहां खाने-पीने, इलाज और जरूरी सेवाएं देती है।

लाजारिनी ने कहा कि इतने लोगों की मौत बहुत गंभीर बात है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

रिपोर्ट-अमेरिका की ईरान में घुसकर यूरेनियम जब्त करने की तैयारी

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ईरान के खिलाफ जमीनी कार्रवाई करने का आदेश दे सकते हैं। अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ईरान के पास मौजूद यूरेनियम को अपने कब्जे में लेना चाहते हैं।

ईरान के पास करीब 400 किलो समृद्ध (एनरिच्ड) यूरेनियम है, जिसका इस्तेमाल परमाणु बम बनाने में किया जा सकता है। ट्रम्प ने अपने सहयोगियों से कहा है कि ईरान को यह यूरेनियम छोड़ना ही होगा।

अगर बातचीत से बात नहीं बनी, तो इसे जबरदस्ती भी लिया जा सकता है। इस बीच, अमेरिका मिडिल ईस्ट में करीब 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने की योजना बना रहा है। इनमें से 3,500 से ज्यादा सैनिक पहले ही वहां पहुंच चुके हैं।

यूरेनियम एक ऐसा पदार्थ है, जिससे परमाणु ऊर्जा भी बनाई जा सकती है और परमाणु बम भी। फर्क सिर्फ इस बात से पड़ता है कि उसे कितना एनरिच यानि कि शुद्ध किया गया है।

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बिज़नस

AliExpress पर EU का सख्त एक्शन, लगा रू.5,500 करोड़ का जुर्माना, जानें क्यों?

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ब्रसेल्स, एजेंसी। चीन की दिग्गज टेक कंपनी अलीबाबा के ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अलीएक्सप्रेस पर यूरोपीय यूनियन (EU) ने 550 मिलियन यूरो (करीब 5,500 करोड़ रुपए) का जुर्माना लगाया है। आरोप है कि कंपनी अपने प्लेटफॉर्म पर नकली, गैरकानूनी और असुरक्षित उत्पादों की बिक्री रोकने में विफल रही।

यूरोपीय यूनियन के अधिकारियों के अनुसार, अलीएक्सप्रेस पर ऐसे कई उत्पाद बेचे जा रहे थे जो यूरोप के सुरक्षा और पर्यावरण मानकों पर खरे नहीं उतरते थे। इनमें खिलौने, कॉस्मेटिक और अन्य उपभोक्ता उत्पाद शामिल हैं। जांच में यह भी पाया गया कि जिन उत्पादों को नियमों का उल्लंघन करने पर हटाया गया था, उनमें से कई बाद में दोबारा प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध हो गए। कुछ मामलों में ऐसे उत्पादों की ग्राहकों को सिफारिश भी की गई।

मार्च 2024 में शुरू हुई थी जांच 

यह कार्रवाई यूरोपीय यूनियन के डिजिटल सर्विसेज एक्ट (DSA) के तहत की गई है। वर्ष 2022 में लागू इस कानून का उद्देश्य बड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और टेक कंपनियों की जवाबदेही तय करना है। अलीएक्सप्रेस के खिलाफ जांच मार्च 2024 में शुरू हुई थी। ईयू का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जिम्मेदारी है कि वे अपने सिस्टम में मौजूद जोखिमों की पहचान करें और समय रहते उन्हें दूर करें, ताकि उपभोक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।

अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना

बताया जा रहा है कि किसी ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर लगाया गया यह अब तक का सबसे बड़ा जुर्माना है। इससे पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर 120 मिलियन यूरो और चीनी ई-कॉमर्स कंपनी Temu पर 200 मिलियन यूरो का जुर्माना लगाया गया था।

हालांकि, अलीएक्सप्रेस ने यूरोपीय आयोग के फैसले का विरोध किया है। कंपनी का कहना है कि जुर्माने की राशि अत्यधिक है और हाल के वर्षों में किए गए सुधारों को नजरअंदाज किया गया है। कंपनी ने संकेत दिए हैं कि वह इस फैसले के खिलाफ उपलब्ध कानूनी विकल्पों का उपयोग करेगी।

यूरोप अलीएक्सप्रेस का सबसे बड़ा बाजार

यूरोप फिलहाल अलीएक्सप्रेस का सबसे बड़ा बाजार है, जहां उसके लगभग 19.3 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। तुलना में Shein के करीब 15.6 करोड़ और Temu के लगभग 13 करोड़ सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। यूरोपीय यूनियन ने कंपनी को 20 अक्टूबर तक जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया है। निर्धारित समय तक भुगतान नहीं होने पर अतिरिक्त दंडात्मक कार्रवाई की जा सकती है।

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विदेश

ब्रिटिश PM स्टार्मर ने सौंपा इस्तीफा; बोले-‘मेरा काम पूरा हो गया’, नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने संभाली सत्ता

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लंदन, एजेंसी। ब्रिटेन में सत्ता परिवर्तन की प्रक्रिया पूरी हो गई है। केअर स्टार्मर ने सोमवार को प्रधानमंत्री पद से औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया। 10 डाउनिंग स्ट्रीट से अपने अंतिम संबोधन में उन्होंने कहा, “मेरा काम पूरा हो गया है।” इसके बाद उन्होंने ब्रिटेन के राजा चार्ल्स तृतीय से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। अब लेबर पार्टी के नए नेता एंडी बर्नहम ने ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभाल लिया है।  प्रधानमंत्री पद छोड़ने से पहले केअर स्टार्मर ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि वह जिम्मेदारी एंडी बर्नहम को सौंप रहे हैं और उन्हें अपना पूरा समर्थन देते हैं। उन्होंने अपने कार्यकाल को देश की सेवा का महत्वपूर्ण अवसर बताया।

सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया 
संवैधानिक परंपरा के अनुसार स्टार्मर ने बकिंघम पैलेस जाकर राजा चार्ल्स तृतीय को अपना इस्तीफा सौंपा। इसके बाद लेबर पार्टी के नवनिर्वाचित नेता एंडी बर्नहम को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया। राजा से मुलाकात के बाद बर्नहम ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण की और फिर 10 डाउनिंग स्ट्रीट पहुंचकर राष्ट्र को अपना पहला संबोधन दिया।

एंडी बर्नहम का परिचय
7 जनवरी 1970 में जन्मे  एंडी बर्नहम का पूरा नाम एंड्रयू मरे बर्नहम (Andrew Murray Burnham) है। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के फिट्जविलियम कॉलेज से अंग्रेजी (English) में स्नातक की पढ़ाई की। छात्र जीवन से ही उनकी राजनीति और सामाजिक मुद्दों में रुचि रही। 56 वर्षीय एंडी बर्नहम लंबे समय से लेबर पार्टी के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं।  वह ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर भी रह चुके हैं और स्वास्थ्य, सामाजिक कल्याण तथा क्षेत्रीय विकास जैसे मुद्दों पर उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उनके नेतृत्व में भारत-ब्रिटेन के रणनीतिक और आर्थिक संबंधों में निरंतरता बनी रह सकती है।

बर्नहम का राजनीतिक सफर

  • वर्ष 2001 में पहली बार ली (Leigh) संसदीय क्षेत्र से सांसद चुने गए।
  • टोनी ब्लेयर और गॉर्डन ब्राउन की सरकारों में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।
  • 2008 से 2009 तक संस्कृति, मीडिया और खेल मंत्री रहे।
  • 2009 से 2010 तक ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री (Health Secretary) रहे।
  • 2017 से 2026 तक ग्रेटर मैनचेस्टर के मेयर रहे, जहां उन्होंने परिवहन, स्वास्थ्य और स्थानीय विकास के क्षेत्र में कई पहल कीं।
  • जुलाई 2026 में लेबर पार्टी के नेता चुने गए और इसके बाद ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने।
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विदेश

टूटने की कगार पर पाकिस्तानः बलूचिस्तान से PoK तक भड़की बगावत की आग, देश के हो सकते 4 टुकड़े

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इस्लामाबाद,एजेंसी।पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे गंभीर आंतरिक सुरक्षा संकटों में से एक का सामना कर रहा है। एक ओर बलूचिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) के हमले तेज हो गए हैं, तो दूसरी ओर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) खैबर पख्तूनख्वा में लगातार सुरक्षा बलों को निशाना बना रही है। इसके साथ ही पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में विरोध प्रदर्शन और अफगानिस्तान सीमा पर तालिबान के साथ बढ़ते तनाव ने इस्लामाबाद की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान के “चार टुकड़े होने” या “तत्काल गृहयुद्ध” जैसी बातें अभी दावे और अटकलें हैं। मौजूदा हालात गंभीर जरूर हैं, लेकिन ऐसा होने की पुष्टि किसी आधिकारिक या स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय संस्था ने नहीं की है।

बलूचिस्तान में हमले
बलूचिस्तान में बीएलए लगातार पाकिस्तानी सेना और सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले कर रही है। हाल के महीनों में कई सैन्य काफिलों, पुलिस चौकियों और सरकारी ठिकानों को निशाना बनाया गया है। बलूच संगठनों का आरोप है कि पाकिस्तान ने दशकों से क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन किया है और स्थानीय लोगों के अधिकारों की अनदेखी की है। वहीं पाकिस्तान सरकार इन संगठनों को आतंकवादी संगठन मानती है।

खैबर पख्तूनख्वा में TTP का खूनी अभियान
खैबर पख्तूनख्वा और पूर्व कबायली इलाकों में तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) लगातार पुलिस और सेना पर हमले कर रही है। हाल के महीनों में कई पुलिस चौकियों पर हमले, आत्मघाती विस्फोट और घात लगाकर किए गए हमलों में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि टीटीपी को अफगानिस्तान की सीमा पार से समर्थन मिल रहा है, जबकि तालिबान सरकार इन आरोपों से इनकार करती रही है।

PoK में भी बढ़ रहा असंतोष
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में महंगाई, बिजली संकट और प्रशासनिक नीतियों के विरोध में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं।
कुछ स्थानीय संगठनों ने अधिक स्वायत्तता और कुछ समूहों ने पाकिस्तान से अलग होने की मांग भी उठाई है। हालांकि पूरे क्षेत्र में अलगाववाद की एक जैसी स्थिति नहीं है और हालात अलग-अलग इलाकों में अलग हैं।

अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ा तनाव
डूरंड लाइन पर पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच तनाव लगातार बना हुआ है।दोनों पक्ष एक-दूसरे पर सीमा पार हमलों और आतंकियों को संरक्षण देने के आरोप लगाते रहे हैं। कई बार सीमा पर गोलीबारी और ड्रोन हमलों की घटनाएं भी सामने आई हैं। ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026 के अनुसार पाकिस्तान में वर्ष 2025 के दौरान आतंकवादी घटनाओं और मौतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तान अब एक साथ कई सुरक्षा मोर्चों पर लड़ रहा है, जिससे सेना और सरकार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
सोशल मीडिया और कुछ राजनीतिक टिप्पणियों में पाकिस्तान के चार टुकड़े होने के दावे किए जा रहे हैं। पाकिस्तान गंभीर सुरक्षा, आर्थिक और राजनीतिक संकट से जरूर गुजर रहा है, लेकिन उसके तत्काल विघटन या गृहयुद्ध की घोषणा जैसी कोई विश्वसनीय जानकारी उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि सरकार इन आंतरिक चुनौतियों का समाधान नहीं कर पाती तो अस्थिरता और बढ़ सकती है।

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