विदेश
होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी करने वाले ईरानी कमांडर की मौत:इजराइल के हमले में घायल हुए थे तंगसीरी, ईरान बोला- ऑपरेशन पर असर नहीं पड़ेगा
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकेबंदी से जुड़े IRGC नेवी चीफ अलीरेजा तंगसीरी की मौत की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। वे पिछले हफ्ते इजरायली एयरस्ट्राइक में गंभीर रूप से घायल हुए थे और बाद में उनकी मौत हो गई।
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के मुताबिक, तंगसीरी हमले के समय कोस्टल डिफेंस और मैरीटाइम ऑपरेशंस से जुड़े थे। उन्हें होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान की नाकेबंदी का प्रमुख चेहरा माना जाता था, जिसके जरिए ईरान ने वैश्विक तेल सप्लाई पर दबाव बनाया।

ईरान ने उनकी मौत के बावजूद साफ किया है कि उसके सैन्य ऑपरेशंस पर कोई असर नहीं पड़ेगा और रणनीति पहले की तरह जारी रहेगी। गौरतलब है कि इजराइल के रक्षा मंत्री ने 26 मार्च को दावा किया था कि एक एयरस्ट्राइक में तंगसीरी को मार गिराया गया।
जंग से जुड़ी तस्वीरें…

कुवैत में बिजली और पानी के प्लांट पर हुए हमले के बाद आग लग गई थी। हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई है।

ईरान ने रविवार को दक्षिणी इजराइल के केमिकल प्लांट रामत होवाव पर मिसाइल से हमला किया।

ईरान ने रविवार को वीडियो जारी कर इजराइल के इंडस्ट्रियल इलाके में मिसाइल हमलों को दिखाया।

लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी इलाके में सोमवार सुबह इजराइली हवाई हमले के बाद वहां से धुआं उठता देखा गया।
ट्रम्प ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों को तबाह करने की धमकी दी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट तुरंत नहीं खोला गया और समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिका उसके ऊर्जा ठिकानों को तबाह कर देगा।
सोशल मीडिया पर जारी बयान में ट्रम्प ने कहा कि पावर प्लांट, ऑयल वेल और खार्ग आइलैंड को पूरी तरह उड़ा दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर डीसैलिनेशन प्लांट्स को भी निशाना बनाया जा सकता है।
ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका एक नए और ज्यादा समझदार शासन के साथ बातचीत कर रहा है और इसमें प्रगति हो रही है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि अगर जल्द समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई तेज की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यह कदम अमेरिकी सैनिकों और अन्य लोगों की मौत का बदला लेने के लिए उठाया जाएगा, जिनके लिए उन्होंने ईरान को जिम्मेदार ठहराया।
ईरान बोला-कुवैत के डीसैलिनेशन प्लांट पर इजराइल ने हमला किया
ईरान ने आरोप लगाया है कि कुवैत के डीसैलिनेशन प्लांट पर इजराइल ने हमला किया है। ईरानी सेना का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान को बदनाम करने और उस पर आरोप डालने की साजिश के तहत की गई।
तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, ईरान ने इस हमले को ‘जायनिस्ट शासन’ (इजराइल) की क्रूर कार्रवाई बताया है और कहा है कि इसके गंभीर नतीजे होंगे।
ईरान ने अमेरिका और इजराइल को चेतावनी देते हुए कहा कि क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकाने, उनके सैनिक और हित अब निशाने पर रहेंगे। साथ ही, इजराइल की सैन्य, सुरक्षा और आर्थिक संरचनाओं को भी टारगेट करने की बात कही गई है।
फारस की खाड़ी में भारत के 18 जहाज और 485 क्रू मौजूद
ईरान जंग के बीच फारस की खाड़ी में भारत के 18 जहाज और 485 भारतीय क्रू मौजूद हैं और सभी सुरक्षित हैं। पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय ने बताया कि पिछले 24 घंटों में किसी भी तरह की समुद्री घटना नहीं हुई है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
भारत सरकार के मुताबिक, हाल ही में दो भारतीय LPG कैरियर BW TYR और BW ELM सफलतापूर्वक होर्मुज स्ट्रेट पार कर भारत की ओर बढ़ चुके हैं। इसके अलावा, पिछले 24 घंटों में 8 भारतीय नाविकों को सुरक्षित भारत वापस लाया गया है।
स्पेन ने अमेरिका के लिए एयरस्पेस बंद किया
स्पेन ने ईरान के खिलाफ युद्ध में शामिल अमेरिकी सैन्य विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया है। साथ ही, मिलिट्री बेस के इस्तेमाल पर भी रोक लगा दी गई है।
स्पेन की रक्षा मंत्री मार्गारीटा रोब्लेस ने कहा कि देश न तो अपने एयरस्पेस और न ही सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल ईरान से जुड़े किसी भी सैन्य अभियान के लिए करने देगा।
इस फैसले के बाद अमेरिकी विमानों को अपने रूट बदलने पड़ेंगे, हालांकि मानवीय और आपातकालीन उड़ानों को छूट दी गई है।
स्पेन के अर्थव्यवस्था मंत्री कार्लोस कुएर्पो ने कहा कि यह फैसला एकतरफा और अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ शुरू किए गए युद्ध का समर्थन न करने के आधार पर लिया गया है।
स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज पहले ही अमेरिका-इजराइल सैन्य अभियान की आलोचना कर चुके हैं। वहीं, डोनाल्ड ट्रम्प ने इस फैसले के जवाब में व्यापारिक कार्रवाई की धमकी दी है। इस निर्णय के बाद अमेरिका और स्पेन के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ने की संभावना है।
ईरान बोला- लेबनान में राजदूत अपना काम जारी रखेगा
ईरान ने लेबनान के निष्कासन आदेश को ठुकराते हुए कहा है कि उसका राजदूत बेरूत में ही अपना काम जारी रखेगा। विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि राजदूत अपने कर्तव्यों का निर्वहन करता रहेगा।
दरअसल, लेबनान ने पिछले हफ्ते ईरान के राजदूत मोहम्मद रजा शिबानी को पर्सोना नॉन ग्राटा घोषित कर 29 मार्च तक देश छोड़ने का निर्देश दिया था।
हालांकि, तय समयसीमा गुजरने के बाद भी राजदूत बेरूत में ही मौजूद हैं, जिससे दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ गया है।
ईरान का अमेरिका से सीधी बातचीत से इनकार
ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत से इनकार किया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अब तक दोनों देशों के बीच सिर्फ मध्यस्थों के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान हुआ है।
उन्होंने बताया कि अमेरिका ने बातचीत की इच्छा जताई है, लेकिन उसकी ओर से भेजी गई शर्तें अतार्किक हैं। बघाई ने कहा कि ईरान का रुख शुरू से स्पष्ट रहा है, जबकि अमेरिका बार-बार अपनी स्थिति बदल रहा है।
ईरान ने यह भी कहा कि उसे पूरी तरह पता है कि वह किस ढांचे में बातचीत पर विचार करेगा। प्रवक्ता ने अमेरिकी कूटनीति पर तंज करते हुए कहा कि वहां खुद लोग उसके दावों को कितनी गंभीरता से लेते हैं।
पाकिस्तान में हुई बैठकों पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान ने कहा कि ये उनकी अपनी पहल है और तेहरान इसमें शामिल नहीं हुआ। उसने मिडिल-ईस्ट के देशों से कहा कि वे युद्ध खत्म करने की कोशिश करें, लेकिन यह भी ध्यान रखें कि संघर्ष की शुरुआत किसने की थी।
हिजबुल्लाह बोला- इजराइल के हाइफा नेवल बेस पर मिसाइलें दागीं
हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसने इजराइल के उत्तरी शहर हाइफा में नेवल बेस पर मिसाइलें दागी हैं। संगठन के मुताबिक, यह हमला इजराइल के खिलाफ चल रही सैन्य कार्रवाई का हिस्सा है।
इस हमले के बाद हाइफा की एक ऑयल रिफाइनरी में आग लगने की खबर भी सामने आई है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि आग सीधे मिसाइल हमले से लगी या गिरते मलबे के कारण।
हिजबुल्लाह का दावा-114 इजराइली टैंकों को निशाना बनाया
लेबनान के हथियारबंद संगठन हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि मौजूदा संघर्ष की शुरुआत से अब तक उसने 114 इजराइली टैंकों को निशाना बनाया है। यह जानकारी अल मायादीन चैनल के हवाले से सामने आई है। हालांकि, इजराइली सेना की ओर से भी इस पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

ईरानी स्पीकर बोले- ट्रम्प के बयानों पर तुरंत भरोसा न करें
ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने निवेशकों को सलाह दी है कि ट्रम्प के बयानों पर तुरंत भरोसा करके फैसला न लें। उनका कहना है कि जब अमेरिकी बयान से बाजार तेजी से ऊपर-नीचे हो, तो उसी दिशा में चलने के बजाय उल्टा सोचकर कदम उठाना बेहतर हो सकता है।
उन्होंने कहा कि ट्रम्प के बयान का फायदा बाजार के बड़े खिलाड़ी उठा रहे हैं। ट्रम्प ने 22 मार्च को कहा था कि ईरान के साथ अच्छी बातचीत और उसके एनर्जी ठिकानों पर हमले टाल दिए गए हैं। इससे बाजार में राहत आई, अमेरिकी शेयर बाजार चढ़े और तेल की कीमतें गिर गईं।
लेकिन कुछ ही दिनों बाद हालात बदल गए। ट्रम्प ने फिर सख्त बयान दिए, इजराइल ने तेहरान पर हमले किए और सऊदी अरब में ड्रोन इंटरसेप्शन की खबरें आईं। इसके बाद बाजार पलट गया। शेयर गिरे और तेल की कीमतें फिर बढ़ गईं।
कुछ ट्रेडर्स का कहना है कि बड़े एलान से पहले ही बाजार में अचानक ज्यादा खरीद-फरोख्त होने लगती है, जिससे लगता है कि कुछ लोगों को खबर पहले से मिल जाती है।
गालिबाफ ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी सेना ईरान में घुसती है, तो उसे कड़ा जवाब मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका सार्वजनिक रूप से बातचीत की बात करता है, लेकिन अंदर ही अंदर सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है।

विदेश
आखिर 4 माह बाद होगी खामेनेई की अंतिम विदाई; जनाजे की भव्य तैयारी, जानें क्यों हुई संस्कार में देरी?
तेहरान, एजेंसी। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के लगभग चार महीने बाद उनकी अंतिम यात्रा निकालने की तैयारी पूरी कर ली गई है। अधिकारियों के अनुसार, जून के तीसरे सप्ताह में होने वाले अंतिम संस्कार में करीब दो करोड़ लोगों के शामिल होने की संभावना है, जो आधुनिक इतिहास की सबसे बड़ी अंतिम यात्राओं में से एक बन सकती है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, खामेनेई का पार्थिव शरीर तेहरान, क़ोम और मशहद में अंतिम दर्शन के लिए ले जाया जाएगा। तीन दिनों तक जनता को श्रद्धांजलि देने का अवसर दिया जाएगा, जिसके बाद उन्हें मशहद में दफनाया जाएगा।

इमाम रज़ा की दरगाह के पास होगी दफन
अधिकारियों ने बताया कि खामेनेई की अंतिम इच्छा थी कि उन्हें ईरान के पवित्र शहर मशहद में स्थित इमाम रज़ा की दरगाह के निकट दफनाया जाए। शिया मुस्लिम समुदाय के लिए यह दुनिया के सबसे पवित्र धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। इमाम रज़ा, जिन्हें अली अल-रिदा के नाम से भी जाना जाता है, ट्वेल्वर शिया परंपरा के आठवें इमाम थे। उनकी दरगाह हर वर्ष करोड़ों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है और ईरान की आध्यात्मिक पहचान का प्रमुख केंद्र मानी जाती है। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, मुख्य शोक समारोह तेहरान में आयोजित होगा, जो लगभग 24 घंटे तक चल सकता है। इसके बाद पार्थिव शरीर को धार्मिक नगर क़ोम ले जाया जाएगा और फिर मशहद में अंतिम संस्कार किया जाएगा। तेहरान नगर प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि अंतिम यात्रा पवित्र शहरों क़ोम और मशहद से होकर गुजरेगी, जहां लाखों लोग श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।
क्यों हुई अंतिम संस्कार में देरी?
इस्लामी परंपरा के अनुसार किसी व्यक्ति को मृत्यु के कुछ दिनों के भीतर दफनाया जाता है, लेकिन ईरानी अधिकारियों का कहना है कि युद्धकालीन परिस्थितियों, सुरक्षा चुनौतियों और अभूतपूर्व भीड़ की आशंका के कारण अंतिम संस्कार को स्थगित करना पड़ा। अधिकारियों के अनुसार, इतने बड़े आयोजन की तैयारियों और सुरक्षा प्रबंधों के लिए अतिरिक्त समय की आवश्यकता थी।विश्लेषकों का मानना है कि यदि अनुमानित दो करोड़ लोग अंतिम संस्कार में शामिल होते हैं तो यह 1989 में ईरान के इस्लामी गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी की अंतिम यात्रा का रिकॉर्ड तोड़ सकता है।खोमैनी के अंतिम संस्कार में लगभग एक करोड़ लोग शामिल हुए थे। उस दौरान भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई थी, जिसमें कई लोगों की मौत हो गई थी और हजारों घायल हुए थे।
बेटे मोजतबा खामेनेई संभाल रहे हैं नेतृत्व
खामेनेई की मृत्यु के बाद उनके पुत्र मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना गया था। हालांकि सत्ता संभालने के बाद से उन्होंने अपेक्षाकृत कम सार्वजनिक उपस्थिति दर्ज कराई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतिम संस्कार केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं होगा, बल्कि ईरान की राजनीतिक और वैचारिक एकजुटता का भी बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इमाम रज़ा की दरगाह के निकट दफनाए जाने से खामेनेई की विरासत को धार्मिक महत्व भी मिलेगा। समर्थकों के लिए यह कदम उन्हें शिया इतिहास और इमामों की परंपरा से जोड़ने वाला प्रतीक माना जा रहा है। आने वाले दिनों में पूरी दुनिया की नजर इस अंतिम यात्रा पर रहेगी, क्योंकि यह न केवल ईरान के इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय होगा, बल्कि मध्य पूर्व की राजनीति पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
देश
अमेरिका में गूंजी भारत की आजादी गाथा, न्यूयॉर्क सीनेट में 15 अगस्त को लेकर ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित
न्यूयॉर्क, एजेंसी। न्यूयॉर्क की सीनेट ने राज्य की गवर्नर कैथी होचुल से 15 अगस्त 2026 को राज्य में ‘भारत स्वतंत्रता दिवस’ घोषित करने का आग्रह करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें सांसदों ने महात्मा गांधी की विरासत को याद किया और अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के योगदान की सराहना की। सीनेटर जेरेमी कूनी द्वारा प्रायोजित इस प्रस्ताव में कहा गया है कि न्यूयॉर्क राज्य की विधायिका की परंपरा रही है कि वह उन महत्वपूर्ण दिनों को मान्यता देती है, जो राज्य के नागरिकों की सांस्कृतिक विरासत से जुड़े होते हैं। प्रस्ताव में कहा गया कि ”भारत की स्वतंत्रता दुनिया भर के लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह नागरिक, राजनीतिक और आर्थिक अधिकारों के साथ-साथ आत्मनिर्णय के लिए चले 90 वर्षों के संघर्ष के अंत का प्रतीक है।”

प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान कई राज्य सीनेटरों ने भारत की प्राचीन सभ्यता, लोकतांत्रिक परंपराओं, महात्मा गांधी के शांति संदेश और न्यूयॉर्क सहित पूरे अमेरिका में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के बढ़ते योगदान की प्रशंसा की। कूनी ने कहा कि दुनिया भर में भारतीय अपने-अपने समुदायों पर स्थायी प्रभाव छोड़ रहे हैं और यह अवसर साझा इतिहास, संस्कृति और विरासत का जश्न मनाने तथा उस पर विचार करने का है। सीनेटर जॉन लियू ने कहा कि भारत का अस्तित्व हजारों वर्षों से है। उन्होंने कहा, ”भारत एक सभ्यता रहा है, एक राष्ट्र रहा है और वास्तव में हमारे देश से भी लंबे समय से लोकतंत्र का एक आदर्श मॉडल रहा है।”
सीनेटर टोबी ऐन स्टाविस्की ने दोनों देशों के बीच मित्रता की परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान करते हुए कहा कि दोनों देशों में समानताएं, मतभेदों से कहीं अधिक हैं। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने सीनेट के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि ”यह भारत और अमेरिका के बीच मित्रता, लोकतंत्र और साझा मूल्यों के मजबूत संबंधों को दर्शाता है।” दूतावास ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, ”भारत की विरासत से लेकर न्यूयॉर्क के दिल तक : लोकतंत्र और समुदाय के रिश्तों का उत्सव।” भारतीय दूतावास ने प्रस्ताव आधिकारिक रूप से पेश करने के लिए जेरेमी कूनी का धन्यवाद किया और भारत की समृद्ध विरासत तथा न्यूयॉर्क में भारतीय-अमेरिकी समुदाय के अमूल्य योगदान को सम्मान देने के लिए सभी विधायकों के प्रति आभार व्यक्त किया।
देश
दिल्ली मालवीय नगर होटल अग्निकांड की गूंज विदेशों तक, ग्लोबल मीडिया ने उठाए गंभीर सवाल, छिड़ गई नई बहस
नई दिल्ली, एजेंसी। दक्षिण दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल में लगी भीषण आग में 21 लोगों की मौत और दर्जनों लोगों के घायल होने की घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियां बटोरी हैं। ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन, कतर और बांग्लादेश सहित कई देशों के प्रमुख मीडिया संस्थानों ने इस त्रासदी को प्रमुखता से कवर करते हुए भारत में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था और भवन नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। हादसे में मृतकों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की होने के कारण यह घटना वैश्विक मीडिया का ध्यान आकर्षित कर रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घटना पर शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों के लिए दो-दो लाख रुपये और घायलों के लिए 50 हजार रुपये की अनुग्रह राशि की घोषणा की है।

अल जज़ीरा की रिपोर्ट
कतर के समाचार चैनल अल जज़ीरा ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि भारत में आग लगने की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। रिपोर्ट में कहा गया कि मालवीय नगर स्थित भवन के निचले हिस्से में रेस्तरां और ऊपर होटल संचालित हो रहा था। अल जज़ीरा ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि आग लगने के बाद पूरा भवन धुएं से भर गया और लोग अंदर फंस गए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई इमारतों में आवश्यक सुरक्षा व्यवस्थाओं की कमी के कारण ऐसी घटनाओं में भारी जनहानि होती है।


BBC ने लिखा
ब्रिटेन के BBC ने अपनी रिपोर्ट में इलाज के लिए भारत आए विदेशी नागरिक भी बने हादसे का शिकार हैडलाइन दी और बताया कि मृतकों में कई विदेशी नागरिक शामिल हैं, जो भारत में चिकित्सा उपचार के लिए आए थे। BBC के अनुसार, यह भवन एक गेस्ट हाउस के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था, जहां आसपास के निजी अस्पतालों में इलाज करा रहे मरीज और उनके परिजन ठहरते थे। रिपोर्ट में दिल्ली सरकार के मंत्री आशीष सूद के बयान का हवाला देते हुए कहा गया कि यह जांच की जा रही है कि भवन को गेस्ट हाउस के रूप में संचालित करने की वैध अनुमति थी या नहीं। BBC ने यह भी लिखा कि भारत में कई अग्निकांडों की जांच में खराब विद्युत व्यवस्था, सुरक्षा नियमों की अनदेखी और भवनों के गलत उपयोग जैसी समस्याएं सामने आती रही हैं।

स्पेन का एल पाइस
स्पेन के प्रमुख अखबार एल पाइस ने सूचना मिलने में देरी और घनी आबादी को चुनौती बताया और लिखा कि दक्षिण दिल्ली के फ्लोरिश स्टे होटल में लगी आग की सूचना दमकल विभाग को देर से मिली। रिपोर्ट में कहा गया कि शुरुआती आशंका के अनुसार आग भवन के निचले हिस्से में चल रहे रेस्तरां से शुरू हुई हो सकती है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। एल पाइस ने दिल्ली की घनी आबादी, संकरी गलियों और पुराने भवनों में सुरक्षा मानकों की कमी को ऐसी घटनाओं के गंभीर होने का प्रमुख कारण बताया।

जर्मनी का DW
जर्मन मीडिया संस्थान DW News ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि भवन के बेसमेंट में रेस्तरां और ऊपर होटल संचालित हो रहा था। रिपोर्ट के अनुसार, प्रारंभिक जांच में रेस्तरां से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि आग के वास्तविक कारणों की जांच अभी जारी है।DW ने यह भी उल्लेख किया कि मृतकों में कुछ विदेशी नागरिक शामिल हैं, जो इलाज के लिए भारत आए थे।
ब्रिटिश टैब्लॉयड द सन
ब्रिटिश टैब्लॉयड द सन ने घटना के मानवीय पहलू को प्रमुखता से दिखाया। रिपोर्ट में कहा गया कि आग और धुएं के तेजी से फैलने के कारण ऊपरी मंजिलों पर फंसे लोगों को जान बचाने के लिए खिड़कियों और बालकनियों से छलांग लगानी पड़ी। द सन ने स्थानीय लोगों की सराहना करते हुए लिखा कि उन्होंने सड़क पर गद्दे बिछाकर कई लोगों की जान बचाने में मदद की। रिपोर्ट में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का भी जिक्र किया गया, जिनमें इमारत से उठती लपटें और धुआं दिखाई दे रहा था।

बांग्लादेश का डेली स्टार
बांग्लादेश के प्रमुख समाचार पत्र डेली स्टार ने लिखा कि आग लगने के बाद कई घंटों तक बचाव अभियान चलाया गया और 40 से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि मृतकों में विदेशी नागरिक भी शामिल हैं, जो इलाज या अन्य कार्यों के सिलसिले में दिल्ली आए हुए थे।विश्व मीडिया की अधिकांश रिपोर्टों में एक समान चिंता उभरकर सामने आई है ग्नि सुरक्षा मानकों का पालन, भवनों का उपयोग और आपातकालीन निकासी व्यवस्था।दिल्ली पुलिस ने होटल मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि भवन में अग्नि सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं।
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