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भारत विरोधी बयानों पर बांग्लादेश सरकार का ब्रेक; कहा-“भाजपा राज में मुस्लिमों पर जुल्म के आरोप झूठे, जमात सबूत तो दे”

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ढाका/नई दिल्ली, एजेंसी। भारत को लेकर बांग्लादेश में फैलाए जा रहे कथित “मुस्लिम उत्पीड़न” के नैरेटिव पर अब खुद ढाका सरकार ने बड़ा बयान दिया है। बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने साफ शब्दों में कहा है कि पश्चिम बंगाल और असम में मुसलमानों पर अत्याचार किए जाने का कोई प्रमाण सरकार के पास नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश की प्रमुख इस्लामिक राजनीतिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी (JeI) और उसके सहयोगी दल लगातार यह आरोप लगा रहे थे कि भारत में भाजपा सरकार आने के बाद मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई बढ़ी है।

 जमात-ए-इस्लामी का आरोप 
जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी दलों ने हाल ही में दावा किया था कि पश्चिम बंगाल और असम में मुसलमान “लगातार उत्पीड़न” का सामना कर रहे हैं। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि भारत में “सांप्रदायिक माहौल” बनाया जा रहा है और “भारत विरोधी ताकतें” क्षेत्र में तनाव बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में किसी प्रकार का आधिकारिक दस्तावेज, रिपोर्ट या ठोस सबूत पेश नहीं किया गया।

ढाका सरकार का जवाब
‘टाइम्स ऑफ इंडिया’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश सरकार ने इन दावों को सीधे तौर पर खारिज कर दिया। गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि सरकार को भारत में मुसलमानों पर अत्याचार से जुड़ी कोई आधिकारिक शिकायत या विश्वसनीय रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बिना प्रमाण के ऐसे संवेदनशील आरोप लगाना उचित नहीं है और इससे दोनों देशों के संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

अहम है यह बयान 
बांग्लादेश सरकार का यह रुख इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के वर्षों में भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, व्यापार और आतंकवाद विरोधी सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि ढाका सरकार नहीं चाहती कि धार्मिक या राजनीतिक मुद्दों के जरिए दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा हो। खासकर तब, जब दक्षिण एशिया पहले से कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है।जमात-ए-इस्लामी बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामिक राजनीतिक पार्टियों में से एक है। पार्टी लंबे समय से भारत और भाजपा सरकार की आलोचना करती रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भारत में मुसलमानों के कथित उत्पीड़न का मुद्दा उठाकर पार्टी अपने समर्थकों को एकजुट करने की कोशिश कर रही है। हालांकि, बांग्लादेश सरकार के इस बयान के बाद जमात के आरोपों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे हैं।

भारत-बांग्लादेश संबंधों पर असर 
विशेषज्ञों के अनुसार, ढाका का यह बयान भारत के लिए कूटनीतिक तौर पर राहत देने वाला माना जा सकता है। इससे यह संकेत गया है कि बांग्लादेश सरकार आधिकारिक स्तर पर भारत विरोधी आरोपों को बढ़ावा नहीं देना चाहती।दोनों देशों के बीच हाल के वर्षों में कई बड़े समझौते हुए हैं, जिनमें ऊर्जा, कनेक्टिविटी, सुरक्षा और व्यापार प्रमुख हैं। ऐसे में दोनों सरकारें क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने पर जोर दे रही हैं।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : जहां कभी एम्बुलेंस पहुंचना भी सपना था, वहां अब डॉक्टर दे रहे दस्तक : बस्तर के जंगलों तक पहुंची स्वास्थ्य क्रांति

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दिल्ली में बस्तर विकास मॉडल पर मंथन :  केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अहम मुलाकात

पुराने सुरक्षा शिविर अब बन रहे जन सुविधा केंद्र

दिल्ली में बस्तर विकास मॉडल पर मंथन :  केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह से मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की अहम मुलाकात

नई दिल्ली/रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर बस्तर में तेजी से बदल रहे हालात और विकास कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा उपस्थित थे।

बैठक में विशेष रूप से बस्तर में चल रहे ‘मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान’ पर चर्चा हुई।मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बताया कि जिन इलाकों में कभी एम्बुलेंस पहुंचना भी मुश्किल माना जाता था, वहां अब डॉक्टर, दवाइयां और स्वास्थ्य टीमें नियमित रूप से पहुंच रही हैं। दूरस्थ गांवों में पैदल जाकर लोगों की जांच की जा रही है और गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान कर निःशुल्क इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। मात्र एक महीने में 21.86 लाख से ज्यादा लोगों की स्वास्थ्य जांच हो चुकी है और उनके डिजिटल स्वास्थ्य प्रोफाइल तैयार कर लिए गए हैं। हजारों मरीजों को समय पर उपचार और उच्च अस्पतालों में रेफर किया गया है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर में अब पुराने सुरक्षा शिविर केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं रह गए हैं। इन्हें धीरे-धीरे “जन सुविधा केंद्र” के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां गांव के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जरूरी सुविधाएं एक ही स्थान पर मिल रही हैं। इन केंद्रों के जरिए दूरस्थ  क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहली बार कई बुनियादी सेवाएं आसानी से उपलब्ध हो रही हैं। ग्रामीण अब इलाज, बैंक खाते, दस्तावेज और सरकारी योजनाओं की जानकारी के लिए दूर-दूर तक भटकने को मजबूर नहीं हैं।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की शुरुआत 13 अप्रैल 2026 से सुकमा से हुई है। इस अभियान में 36 लाख लोगों को लक्षित किया गया है। इसके अलावा बस्तर मुन्ने ( अग्रणी बस्तर) अभियान के जरिए 31 महत्वपूर्ण योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का काम तेजी से चल रहा है। जगदलपुर में नया सुपर स्पेशलिटी अस्पताल शुरू हो गया है, जहां अब बस्तर के लोगों को महंगे इलाज के लिए रायपुर या बिलासपुर नहीं जाना पड़ेगा। डायल-112 की नेक्स्ट जेन सेवा का विस्तार और पुराने सुरक्षा शिविरों को “जन सुविधा केंद्र” में बदलने की योजना भी बस्तर के स्थायी विकास की दिशा में अहम कदम हैं। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो इलाके कभी नक्सल प्रभाव के कारण मुख्यधारा से कटे हुए थे, वहां आज सरकारी योजनाओं का लाभ लोगों तक पहुंच रहा है। हाल ही में सुकमा के एक अत्यंत दुर्गम गांव से गंभीर मरीज को सैकड़ों किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचाकर उपचार दिलाना इस बदलाव का बड़ा उदाहरण बना है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को बस्तर के लिए तैयार विकास रोडमैप की जानकारी दी। इसमें सड़क, शिक्षा, रोजगार, कौशल विकास और निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष फोकस रखा गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन से बस्तर में तेजी से सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बस्तर में हो रहे विकास कार्यों और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की सराहना की। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर यह सुनिश्चित कर रही है कि विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का 18 और 19 मई को बस्तर प्रवास  संभावित है।

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देश

14 May Petrol/Diesel Price: पेट्रोल डीजल के नए रेट्स जारी हुए- दिल्ली, मुंबई, कोलकाता समेत देखें प्रमुख शहरों में आज के ताजा भाव

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 नई दिल्ली, एजेंसी।14 मई 2026 को देशभर में पेट्रोल और डीजल के नए रेट जारी कर दिए गए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच लोगों की नजरें ईंधन के दामों पर टिकी हुई हैं। हालांकि आज दिल्ली, मुंबई समेत कई बड़े शहरों में कीमतों में ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन कुछ शहरों में हल्की बढ़ोतरी और कमी देखने को मिली है।

इससे पहले हाल ही में प्रधानमंत्री ने पेट्रोल और डीजल की अनावश्यक खपत कम करने पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से कहा कि बिना जरूरत वाहन का उपयोग कम करें, ईंधन की बर्बादी रोकें और ऊर्जा बचाने वाली आदतों को अपनाएं। इसके अलावा उन्होंने गैर-जरूरी सोने की खरीदारी टालने और खाद्य तेल का सीमित उपयोग करने की सलाह भी दी।

क्यों बढ़ रही है चिंता?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत से ज्यादा कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ने का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ता है। मध्य-पूर्व में जारी तनाव और युद्ध जैसे हालात के कारण दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में शामिल Strait of Hormuz पर खतरा बना हुआ है। अगर यहां तेल सप्लाई प्रभावित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल और महंगा हो सकता है।
 
देश के बड़े शहरों में पेट्रोल के ताजा दाम
शहर          पेट्रोल कीमत

नई दिल्ली    रू.94.77
मुंबई            रू.103.54
कोलकाता    रू.105.45
चेन्नई         रू.100.80
बेंगलुरु        रू.102.96
हैदराबाद    रू.107.50
जयपुर       रू.105.03
पटना         रू.105.54
चंडीगढ़    रू.94.30
लखनऊ   रू.94.73
नोएडा      रू.94.74
गुरुग्राम    रू.95.30
भुवनेश्वर    रू.100.97
तिरुवनंतपुरम   रू.107.38

डीजल के ताजा रेट
शहर    डीजल कीमत

नई दिल्ली    रू.87.67
मुंबई            रू.90.03
कोलकाता    रू.92.02
चेन्नई           रू.92.39
बेंगलुरु        रू.90.99
हैदराबाद    रू.95.70
जयपुर        रू.90.49
पटना         रू.91.78
चंडीगढ़    रू.82.45
लखनऊ    रू.87.86
नोएडा      रू.87.81
गुरुग्राम    रू.87.77
भुवनेश्वर    रू.92.55
तिरुवनंतपुरम   रू.96.26

क्या सरकार लेने जा रही है बड़ा फैसला?
फिलहाल केंद्र सरकार की ओर से ईंधन राशनिंग या देशभर में कीमतों में बड़े बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और सप्लाई चेन को सामान्य बनाए रखने की कोशिश जारी है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय संकट और गहराया, तो सरकार मांग कम करने के लिए कुछ सख्त कदम उठा सकती है। यही वजह है कि प्रधानमंत्री की बचत संबंधी अपील को भविष्य की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।

आम लोगों पर क्या असर पड़ सकता है?
अगर कच्चे तेल की कीमतें लगातार बढ़ती रहीं, तो आने वाले समय में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। इससे ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ेगा और रोजमर्रा की चीजों के दाम भी प्रभावित हो सकते हैं।  

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देश

राहुल गांधी के विदेशी दौरों पर छिड़ा सियासी घमासान, BJP ने उठाए खर्च और फंडिंग पर गंभीर सवाल

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नई दिल्ली, एजेंसी। राहुल गांधी के विदेशी दौरों पर सियासी घमासान छिड़ गया है।  BJP ने कांग्रेस नेता की इन विदेश यात्राओं को लेकर फिर से मोर्चा खोल दिया है।  बीजेपी ने राहुल गांधी के विदेशी दौरों के खर्चों को लेकर सनसनीखेज दावे किए हैं और कांग्रेस पार्टी से जवाब मांगा है। BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद संबित पात्रा ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी के ट्रैवल रिकॉर्ड्स को लेकर कई आंकड़े पेश करते हुए कहा कि बीते 22 सालों में राहुल कुल 54 बार विदेश गए हैं। इन यात्राओं पर उन्होंने  अनुमानित ₹60 करोड़ खर्च होने का दावा किया है। बीजेपी का कहना है कि यह खर्च राहुल गांधी की घोषित कमाई से लगभग 5 गुना अधिक है।

फंडिंग के स्रोत पर भी उठाए सवाल

 पात्रा ने राहुल गांधी की जीवनशैली और यात्राओं पर होने वाले खर्च के स्रोत पर सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि उनकी आय इतनी नहीं है, तो इन यात्राओं के लिए फंड कहाँ से आ रहा है? बीजेपी ने इसे फंडिंग का रहस्य बताते हुए पारदर्शिता की मांग की है।

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