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कोरबा

जिला प्रशासन की बड़ी पहलः सड़क सुरक्षा सुदृढ़ करने समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश

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जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित

कोरबा। जिले में सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने, नागरिकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने तथा सड़क सुरक्षा प्रबंधन को मजबूत बनाने हेतु जिला प्रशासन द्वारा व्यापक कार्ययोजना लागू की गई है। इसी क्रम में कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर प्रभारी कलेक्टर आशुतोष पाण्डेय की अध्यक्षता में जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें पीडब्ल्यूडी, पीएमजीएसवाई, नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस, आरटीओ तथा खनिज विभाग के अधिकारियों ने सड़क मार्गों की वर्तमान स्थिति और सुरक्षा सुधार कार्यों की विस्तृत प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की।

बैठक में बैरा घाट, पोडीकला घाट, लैंगा स्कूल मार्ग, कुकरीचोली मार्ग, उरगा चौक, मड़वारानी ओवरब्रिज, जिला अस्पताल से गोढ़ी मार्ग, पुलिस लाइन से दीपका मार्ग, राताखर चौक और बजरंग चौक सहित जिले के अनेक संवेदनशील एवं अत्यधिक व्यस्त मार्गों की समीक्षा की गई। प्रस्तुत रिपोर्ट में सड़क चौड़ीकरण, मोड़ सुधार, क्रैश बैरियर स्थापना, रिफ्लेक्टर लगाने, संकेतक वृद्धि तथा अन्य इंजीनियरिंग सुधार कार्यों को प्राथमिकता देते हुए कई स्थानों पर कार्य प्रगति पर होने की जानकारी दी गई। प्रभारी कलेक्टर ने बैरा घाट एवं पोडीकला घाट जैसे दुर्घटना-प्रवण क्षेत्रों में सड़क किनारों की सुरक्षा, ढाल सुधार, कटाव रोकथाम और किनारों की मजबूती के लिए विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। लैंगा हायर सेकेंडरी स्कूल क्षेत्र में विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए संकेतक बोर्ड, स्पीड कंट्रोल उपाय और आवश्यक मरम्मत कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए गए।
कुकरीचोली मार्ग, उरगा चौक और प्रमुख मार्गों पर गड्ढों, जलभराव एवं टूट-फूट की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रभारी कलेक्टर ने नगर निगम और पीडब्ल्यूडी को त्वरित पैचवर्क, जल निकासी सुधार और नवीनीकरण कार्यों की गति बढ़ाने के निर्देश दिए। भीड़भाड़ वाले राताखर चौक, बजरंग चौक और पुलिस लाइन क्षेत्र में अवैध पार्किंग पर सख्ती बरतने तथा यातायात व्यवस्था सुचारु रखने के लिए ट्रैफिक पुलिस को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
जिला प्रशासन द्वारा सड़क सुरक्षा को लेकर जन-जागरूकता बढ़ाने के लिए भी व्यापक अभियान चलाया जा रहा है। जिले के हाई एवं हायर सेकेंडरी स्कूलों में सड़क सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें निबंध, क्विज एवं नुक्कड़ नाटक के माध्यम से बच्चों को यातायात नियमों की जानकारी दी जा रही है और उत्कृष्ट प्रतिभागियों को जिला कार्यालय में सम्मानित किया जा रहा है। आरटीओ द्वारा सड़क सुरक्षा माह के अंतर्गत हेलमेट रैलियों का आयोजन किया जा रहा है। हाल ही में सीतामणी से सीएसईबी चौक तथा टी.पी. नगर से कोसाबाड़ी चौक तक निकाली गई रैली ने नागरिकों को हेलमेट उपयोग के प्रति प्रेरित किया। प्रभारी कलेक्टर ने जागरूकता अभियान जारी रखने के निर्देश दिए।
बैठक में बताया गया कि बस एवं ऑटो चालकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिले में विशेष स्वास्थ्य एवं नेत्र परीक्षण शिविर आयोजित किए गए, जिसमें अब तक लगभग 180 ड्राइवरों का परीक्षण किया जा चुका है। एसईसीएल और एनटीपीसी जैसे संस्थानों में भारी वाहन चालकों का ऑन-साइट परीक्षण अनिवार्य रूप से कराया जा रहा है। दुर्घटनाग्रस्त व्यक्तियों की मदद करने वाले नागरिकों (गुड सेमेरिटन) को पुलिस विभाग द्वारा सम्मानित कर प्रोत्साहित किया जा रहा है। सुरक्षा कारणों से जिले के सभी पेट्रोल पंपों में कम से कम आठ सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य रूप से स्थापित करने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
प्रभारी कलेक्टर ने कहा कि सड़क सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है और जिला प्रशासन का लक्ष्य दुर्घटनाओं की संभावनाओं को न्यूनतम करने का है। उन्होंने सभी विभागों को समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने, प्रत्येक संवेदनशील स्थल की साप्ताहिक समीक्षा करने तथा लापरवाही पाए जाने पर उत्तरदायित्व तय करने के स्पष्ट निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि जिला प्रशासन द्वारा संचालित इस समन्वित एवं व्यापक अभियान से सड़क सुरक्षा मजबूत बनाने, दुर्घटनाओं में कमी लाने और नागरिकों को सुरक्षित, व्यवस्थित और सहज आवागमन उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो रही है। इस अवसर पर सीईओ जिला पंचायत दिनेश कुमार नाग, अपर कलेक्टर देवेन्द्र पटेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीतिश ठाकुर, परिवहन अधिकारी विवेक सिन्हा, पीडब्ल्यूडी के ईई जी आर जांगड़े, अपर आयुक्त विनय मिश्रा, एसडीएम सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहें।

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कोरबा

पेड़ की डाल नहीं, पूरा विशाल धौरा वृक्ष गिरा था, वन विभाग के दावे पर उठे सवाल

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कोरबा/पाली। पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चोरका डांड में शनिवार शाम आंधी-तूफान और बारिश के दौरान हुई दर्दनाक घटना में तीन युवकों की मौत के मामले में अब कई सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रारंभिक जानकारी में बताया गया था कि तीनों युवक बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे रुके हुए थे, तभी पेड़ की भारी डाल टूटकर उन पर गिर गई। लेकिन मीडिया टीम के मौके पर पहुंचने पर सामने आए तथ्यों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।

घटनास्थल पर देखा गया कि कोई डाल नहीं टूटी थी, बल्कि एक विशाल धौरा का पेड़ जड़ सहित गिरा हुआ था। वहीं ग्रामीणों, मृतक दिनेशु तिर्की के परिजनों तथा निर्माण कार्य में लगी महिलाओं ने बताया कि घटनास्थल पर वन समिति के माध्यम से सूअर पालन के लिए कोठा निर्माण का कार्य चल रहा था। उनके अनुसार दिनेशु तिर्की और कमलेश बड़ा निर्माण कार्य में लगे हुए थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अचानक तेज आंधी-तूफान शुरू हुआ। इसी दौरान धौरा वृक्ष से आवाज आई और कुछ ही क्षणों में वह घूमकर निर्माण स्थल पर गिर पड़ा। पेड़ के नीचे काम कर रहे युवक उसकी चपेट में आ गए। घटना में एक महिला को भी सिर और हाथ में हल्की चोटें आईं, जिसने शोर मचाकर ग्रामीणों को बुलाया। इसके बाद लोगों ने किसी तरह दबे हुए लोगों को बाहर निकाला और घायल युवकों को वाहन की व्यवस्था कर पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां जांच उपरांत दो युवकों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि एक गंभीर रूप से घायल युवक को रेफर किया गया, जिसकी रास्ते में मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार जंगल क्षेत्र होने के कारण तत्काल वाहन उपलब्ध नहीं हो पाया और अस्पताल पहुंचने में करीब ढाई घंटे का विलंब हुआ।

इधर जब इस संबंध में वन विभाग से जानकारी ली गई तो विभागीय अधिकारियों ने निर्माण कार्य में युवकों को लगाए जाने से इनकार किया। यहीं से कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि निर्माण कार्य में युवक शामिल नहीं थे तो वे घटनास्थल पर क्या कर रहे थे? ग्रामीण, परिजन और वहां मौजूद महिलाएं निर्माण कार्य में लगे होने की बात क्यों कह रही हैं? यदि वन समिति के अंतर्गत निर्माण कार्य चल रहा था तो वहां कार्यरत लोगों की निगरानी कौन कर रहा था? निर्माण स्थल पर सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? क्या कार्य शुरू करने से पहले संभावित जोखिमों का आकलन किया गया था? यदि नाबालिग मौके पर मौजूद थे तो उनकी उपस्थिति किन परिस्थितियों में थी? क्या निर्माण कार्य के लिए मजदूरों का कोई पंजीयन या उपस्थिति रजिस्टर रखा गया था? दुर्घटना के समय वहां कितने लोग काम कर रहे थे और उन्हें किसके निर्देश पर लगाया गया था? आखिर घटना के संबंध में सामने आ रहे अलग-अलग दावों में सच्चाई क्या है?

मृतकों में 14 वर्षीय शिवराम टेकाम और 17 वर्षीय दिनेश तिर्की भी शामिल हैं। ऐसे में नाबालिगों से कार्य कराए जाने की आशंका को लेकर मामला और गंभीर हो जाता है। अब आवश्यकता इस बात की है कि पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना के समय वहां वास्तव में क्या कार्य चल रहा था और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।फिलहाल यह मामला केवल प्राकृतिक दुर्घटना तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि कई ऐसे सवाल छोड़ गया है जिनके जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।

चोरकाडांड निवासी हीरा सिंह ने बताया कि वन विभाग द्वारा पशुपालन के लिए भवन निर्माण कराया जा रहा था, जिसमें युवक कार्य कर रहे थे। उनके अनुसार मौसम सामान्य था और केवल हल्की हवा चल रही थी। इसी दौरान अचानक एक विशाल धौरा पेड़ गिर गया, जिसकी चपेट में आने से तीनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में उनकी मौत हो गई।

मृतक दिनेशु तिर्की की मां हीरामणि ने बताया कि उनका बेटा पिछले तीन दिनों से वहां काम पर जा रहा था। घटना की जानकारी गांव के एक युवक ने आकर दी, जिसके बाद वह तत्काल घटनास्थल पहुंचीं। ग्रामीणों की मदद से वाहन की व्यवस्था कर घायल युवकों को पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत की खबर मिली।

काम करने वाली राधाबाई बाइसेम्हर ने बताया कि वह एक अन्य महिला के साथ दो दिनों से निर्माण कार्य में लगी थीं। हादसे के समय वह बालू उठा रही थीं, जबकि दूसरी महिला बालू छान रही थी। तभी कटने जैसी तेज आवाज सुनाई दी। जान बचाने के लिए भागते समय विशाल धौरा वृक्ष गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आकर तीन युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। राधाबाई ने बताया कि तीनों युवक पिछले दो दिनों से पानी ढुलाई और मसाला बनाने का काम कर रहे थे।

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कोरबा

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत कोरबा जिले में एक लाख से अधिक आवास पूर्ण

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मनरेगा के माध्यम से हितग्राहियों को मिल रहा 90 दिवस का रोजगार

कोरबा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत कोरबा जिले ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए एक लाख से अधिक पक्के आवासों का निर्माण पूर्ण कर लिया है। वर्ष 2016 से अब तक जिले में कुल 1,00,013 आवासों का निर्माण सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है, जिससे हजारों ग्रामीण परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार हुआ है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के आवासहीन एवं वंचित परिवारों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को आवास निर्माण के लिए चरणबद्ध तरीके से 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत आवास निर्माण कार्य हेतु 90 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है, जिससे हितग्राहियों को मजदूरी भुगतान का लाभ भी प्राप्त होता है।

योजना के अंतर्गत एसईसीसी-2011 सर्वे तथा वर्ष 2018 में आयोजित आवास प्लस सर्वे में पात्र पाए गए परिवारों को क्रमबद्ध रूप से आवास स्वीकृत किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा सतत निगरानी एवं प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप आवास निर्माण कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

जिले में वर्ष 2016 से 2023 के दौरान 61,223 आवास पूर्ण किए गए, जबकि वर्ष 2024 से 2026 के बीच 37,804 आवासों का निर्माण पूरा हुआ। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 478 आवास तथा प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत 508 आवास पूर्ण किए गए हैं।

इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिनेश कुमार नाग ने कहा कि शासन के निर्देशानुसार पात्र ग्रामीण हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण पक्के आवास उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिले में एक लाख से अधिक आवासों का पूर्ण होना ग्रामीण विकास एवं जनकल्याण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है।

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कोरबा

05 जून पर्यावरण दिवस: छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेण्डरी स्कूल छत्तीसगढ़ पर्यावरण रत्न सम्मान से होगी सम्मानित

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बिलासपुर/पाली। पर्यावरण एवं पर्यटन विकास समिति बिलासपुर, छत्तीसगढ़ी राजभाषा परिषद, वन विभाग एवं छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में 05 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस पर सरस्वती शिशु मंदिर सभागार तिलक भवन बिलासपुर में पर्यावरण सुरक्षा एवं संवर्धन विषय पर प्रतियोगिताएं, कार्यशाला, काव्य गोष्ठी, नृत्य, गीत-संगीत, फैंसी ड्रेस, बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता सहित पर्यावरण क्षेत्र में अह्म भूमिका निभाने वाली प्रतिभाओं एवं संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के मुख्य आतिथ्य में यह समारोह सम्पन्न होगा, जिसकी अध्यक्षता विनय पाठक करेंगे।इनके अलावा कई शिक्षाविद, पर्यावरणविद कार्यक्रम का गौरव बढ़ाएंगे। आईएफएस एस एस डी बड़गैया, समाजसेवी शैलेन्द्र सिंह कछवाहा, वरिष्ठ साहित्यकार विष्णु कुमार तिवारी, आईएफएस नीरज जी, डॉ. अभिलाषा बेहार, आईएसएस रमेशचंद्र श्रीवास्तव, समाजसेवी राजीव नयन शर्मा, क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण अधिकारी श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव, पर्यावरणविद हेमंत कुमार गौर सहित अन्य विभूतियां उपस्थित रहेंगी।

इस सम्मान समारोह में पाली स्थित छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेण्डरी स्कूल को भी छत्तीसगढ़ पर्यावरण रत्न सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। विद्यालय के डायरेक्टर डॉ. गजेन्द्र तिवारी ने बताया कि विद्यालय परिसर को स्वच्छ, सुंदर एवं हरितिमा बनाने के साथ-साथ जल संरक्षण और वर्षा जलसंचयन, प्लास्टिक मुक्त अभियान एवं बच्चों द्वारा पर्यावरण जागरूकता रैलियों के माध्यम से समाज को पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश देना एवं पौध रोपण जैसे विविध कार्यक्रम के लिए छत्तीसगढ़ पर्यावरण रत्न सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।
डॉ. गजेन्द्र तिवारी ने बताया कि यह विद्यालय के लिए गौरव की बात है और एक बड़ी उपलब्धि भी।

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