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कलाम की जगह भाजपा वाजपेयी को राष्ट्रपति बनाना चाहती थी:किताब में दावा- BJP ने अटलजी से कहा था, आप आडवाणी को PM बनने दीजिए

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नई दिल्ली,एजेंसी। भारत के 11वें राष्ट्रपति के लिए भाजपा ने साल 2002 में डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम से पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को राष्ट्रपति पद ऑफर किया था। पूर्व PM वाजपेयी के करीबी अशोक टंडन ने अपनी किताब ‘अटल संस्मरण’ में इसका खुलासा किया है।

इस किताब के मुताबिक भाजपा ने वाजपेयी से कहा था, ‘पार्टी चाहती है कि आपको राष्ट्रपति भवन चले जाना चाहिए। आप प्रधानमंत्री पद लाल कृष्ण आडवाणी को सौंप दीजिए।’ हालांकि, वाजपेयी ने इस प्रस्ताव को साफ ठुकरा दिया। टंडन के अनुसार, वाजपेयी ने कहा था- मैं इस तरह के किसी कदम के पक्ष में नहीं हूं। मैं इस फैसले का समर्थन नहीं करूंगा।

टंडन ने 17 दिसंबर, 2025 को वाजपेयी की बर्थ एनिवर्सरी पर ‘अटल स्मरण’ किताब लॉन्च की है। टंडन 1998 से 2004 तक वाजपेयी के मीडिया सलाहकार थे। वहीं, वाजपेयी 1999 से 2004 तक, 5 साल का पूरा कार्यकाल पूरा करने वाले देश के पहले गैर-कांग्रेसी PM थे।

NDA ने 2002 में 11वें राष्ट्रपति चुनाव में कलाम को अपना उम्मीदवार बनाया था। कलाम के सामने कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार लक्ष्मी सहगल थीं। हालांकि, कांग्रेस समेत प्रमुख विपक्षी दलों के सांसदों और विधायकों ने कलाम के समर्थन में वोट किया। कलाम ने 25 जुलाई 2002 को राष्ट्रपति पद की शपथ ली।

किताब में दावा- सोनिया-मनमोहन के साथ मीटिंग में कलाम के नाम की घोषणा हुई

टंडन की किताब में बताया गया है कि वाजपेयी चाहते थे कि देश का 11वां राष्ट्रपति पक्ष-विपक्ष की सर्वसम्मति से बने। इसके लिए उन्होंने मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के सीनियर नेताओं को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था। इस बैठक में सोनिया गांधी, प्रणब मुखर्जी और डॉ. मनमोहन सिंह शामिल हुए।

इसी बैठक में वाजपेयी ने पहली बार औपचारिक रूप से बताया कि NDA ने डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने का फैसला लिया। टंडन के अनुसार, इस घोषणा के बाद बैठक में कुछ देर के लिए सब मौन हो गए।

सोनिया गांधी ने चुप्पी तोड़ते हुए वाजपेयी से कहा, ‘हम लोग कलाम के नाम के सिलेक्शन को लेकर हैरान हैं। हालांकि, इस पर विचार करने के अलावा हमारे पास कोई ऑप्शन नहीं है। हम आपके प्रस्ताव पर चर्चा करेंगे और फिर फैसला लेंगे।’

भारत के तत्कालीन चीफ जस्टिस बीएन किरपाल (बाएं) ने 25 जुलाई, 2002 को दिल्ली स्थित पुरानी संसद के सेंट्रल हॉल में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति कलाम को शपथ दिलाई थी।

भारत के तत्कालीन चीफ जस्टिस बीएन किरपाल (बाएं) ने 25 जुलाई, 2002 को दिल्ली स्थित पुरानी संसद के सेंट्रल हॉल में नवनिर्वाचित राष्ट्रपति कलाम को शपथ दिलाई थी।

‘वाजपेयी-आडवाणी में नीतिगत मतभेद, फिर भी रिश्ते खराब नहीं हुए’

अशोक टंडन ने अपनी किताब में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के संबंधों का भी जिक्र किया है। टंडन ने लिखा- कुछ नीतिगत मतभेदों के बावजूद दोनों नेताओं के रिश्ते कभी सार्वजनिक रूप से खराब नहीं हुए।

टंडन के अनुसार, आडवाणी हमेशा वाजपेयी को अपना नेता और प्रेरणा स्रोत बताते थे, जबकि वाजपेयी आडवाणी को अपना ‘अटल साथी’ बताते थे। किताब के अनुसार, वाजपेयी और आडवाणी की साझेदारी भारतीय राजनीति में सहयोग और संतुलन का प्रतीक रही। दोनों ने न केवल भाजपा का निर्माण किया, बल्कि पार्टी और सरकार, दोनों को नई दिशा दी।

संसद हमले के समय सोनिया ने अटल से फोन पर खैरियत पूछी थी

टंडन ने अपनी किताब में 13 दिसंबर 2001 को संसद पर हुए आतंकी हमले का भी जिक्र किया है। उस समय लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष रहीं कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और वाजपेयी के बीच फोन पर बातचीत हुई थी। हमले के वक्त वाजपेयी अपने आवास पर थे और सहयोगियों के साथ टीवी पर सुरक्षाबलों की कार्रवाई देख रहे थे।

टंडन ने किताब में लिखा- हमले के दौरान वाजपेयी को सोनिया गांधी का फोन आया। उन्होंने वाजपेयी से कहा कि मैं आपकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। इसके जवाब में वाजपेयी ने कहा- मैं सुरक्षित हूं। मुझे चिंता थी कि कहीं आप (सोनिया गांधी) संसद भवन में तो नहीं हैं। अपना ध्यान रखिएगा।

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CJI बोले-छात्र गलत हों, तब भी उन्हें विरोध का अधिकार:हैदराबाद यूनिवर्सिटी में विरोध करने वाले छात्रों का पंजीयन रोकने पर बार काउंसिल को फटकार

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नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी, NALSAR से जुड़े विवाद पर काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को फटकार लगाई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि भले ही छात्रों का फैसला गलत हो या उन्हें किसी ने गलत सलाह दी हो, फिर भी उन्हें अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है।

जस्टिस सूर्यकांत ने BCI के उस सर्कुलर पर भी नाराजगी जताई जिसमें NALSAR के 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स का वकील के तौर पर एनरोलमेंट रोकने को कहा गया था। CJI ने कहा- यह मेरे और छात्रों के बीच का मामला है। इसे मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं थी। बार काउंसिल इसमें दखल देने वाला कौन होता है?

सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस भी जारी किया और यूनिवर्सिटी के किसी छात्र या फैकल्टी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया। NALSAR के करीब 450 छात्र जस्टिस सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह 2026का चीफ गेस्ट बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं।

CJI की टिप्पणी से नाराज हैं छात्र

NALSAR यानी नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च, हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी है। यहां करीब 1,400 छात्र पढ़ते हैं। इनमें से करीब 450 छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिखकर CJI को चीफ गेस्ट बनाने का न्योता वापस लेने की मांग की थी। समारोह की तारीख अभी तय नहीं है।

छात्रों की नाराजगी CJI की पिछले महीने की एक टिप्पणी को लेकर थी। यह टिप्पणी दिल्ली में NEET प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान की गई थी।

बार काउंसिल ने सभी 2026 ग्रेजुएट्स का एनरोलमेंट रोक दिया था

  • बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 13 अगस्त को सभी स्टेट बार काउंसिलों को निर्देश दिया कि NALSAR के 2026 बैच के किसी भी ग्रेजुएट को अगले आदेश तक वकील के तौर पर एनरोल न किया जाए।
  • साथ ही यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर से तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई थी। यूनिवर्सिटी से उन लोगों की पहचान करने को कहा गया, जो कैंपेन शुरू करने, उसका ड्राफ्ट तैयार करने, उसे फैलाने, छात्रों को जुटाने, मीडिया से संपर्क करने, ऑनलाइन ग्रुप चलाने या बहिष्कार की अपील करने में मुख्य भूमिका में थे।
  • काउंसिल ने अपने शुरुआती लेटर में कहा था कि कानून के छात्र से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद के प्रति सम्मान की उम्मीद की जाती है। सम्मान न करने वाले छात्र भविष्य में जिम्मेदार वकील, शिक्षक या जज बनने की भूमिका के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते। BCI ने यह भी आरोप लगाया था कि कुछ शिक्षकों के बीच ग्रुपिज्म और गंदी राजनीति ने छात्रों को कैंपेन के लिए उकसाने में भूमिका निभाई।

कुछ घंटे बाद ही BCI ने आदेश बदला

आदेश जारी होने के कुछ घंटे बाद BCI ने अपना रुख बदल दिया। काउंसिल ने कहा कि NALSAR के 2026 बैच के ज्यादातर छात्र निर्दोष हैं और वे CJI के अनादर वाले किसी अभियान में शामिल होने के इच्छुक नहीं थे। BCI ने कहा कि कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों ने निर्दोष छात्रों को इस अभियान में शामिल करने की कोशिश की।

इसके बाद सभी छात्रों को अपनी पसंद की स्टेट बार काउंसिल में एनरोल होने की अनुमति दे दी गई। हालांकि उस समय BCI ने कहा था कि वह NALSAR के वाइस चांसलर की रिपोर्ट का इंतजार करेगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी BCI के एक्शन पर सवाल उठाए

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के शुरुआती आदेश पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और सीनियर वकील विकास सिंह ने भी आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे मनमाना, गैरकानूनी और जरूरत से ज्यादा कार्रवाई बताते हुए कहा था कि छात्रों को अपनी बात रखने के कारण वकालत में प्रवेश से वंचित करने की धमकी नहीं दी जानी चाहिए।

CJI सूर्यकांत के हाल की 3 बयान, जिसपर विवाद हुए

15 मई: CJI ने कहा था- कुछ युवा कॉकरोच की तरह भटक रहे

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान युवाओं पर टिप्पणी की थी। CJI सूर्यकांत ने कहा था- कॉकरोच की तरह ऐसे युवा हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। इनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया और कुछ RTI और दूसरे तरह के एक्टिविस्ट बन रहे हैं। ये हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।’

इस बयान के बाद ही 16 जुलाई को अभिजीत दीपके नाम के शख्स ने कॉकरोच जनता पार्टी नाम से सोशल मीडिया पेज बनाया। इसने ही दिल्ली जंतर-मंतर पर 35 दिन तक प्रदर्शन किया था।

22 जुलाई: CJI ने कहा था- हमें वीडियो देखने में दिलचस्पी नहीं है

दरअसल, 22 जुलाई को एक वकील ने CJI की अगुआई वाली 3 जजों की बेंच के सामने जनहित याचिका लगाई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील ने कहा- छात्र महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे हैं। लेकिन उन पर पुलिस की बर्बरता के वीडियो भी हैं। यदि संभव हो तो मामले की सुनवाई जल्द की जाए।

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा था, ‘हमें वीडियो में दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास देखने का समय नहीं है।’ जब वकील ने छात्रों के साथ मारपीट के वीडियो देखने का दूसरी बार अनुरोध किया तो CJI ने कहा, ‘हमारा और अपना समय बर्बाद मत कीजिए।

24 जुलाई: CJI ने कहा था- किसी भी याचिका की सुनवाई से इनकार नहीं किया

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की हिंसा से जुड़ी 2 याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें कई राज्य पक्षकार के तौर पर शामिल हैं। इनका जिक्र पहले इसलिए नहीं किया गया क्योंकि वे डायरी नंबर का इंतजार कर रहे थे। इन दलीलों के बाद CJI ने कहा, “इसे लिस्टिंग में आने दें, हम इस पर सुनवाई करेंगे।”

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आजादी के बाद पहली बार जनगणना में जाति पूछी जाएगी:कोविड वैक्सीन कहां लगवाई, कितने बैंक अकाउंट जैसे 40 सवाल पूछेंगे, लिस्ट जारी

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नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सरकार ने जनगणना-2027 के लिए 40 सवालों की लिस्ट जारी कर दी है। इसमें लोगों से SC, ST या अन्य जाति के बारे में पूछा जाएगा। आजादी के बाद यह पहली बार होगा जब सभी समुदायों की जाति की जानकारी जनगणना में दर्ज की जाएगी।

इससे पहले 2011 की जनगणना के फॉर्म में 29 सवाल थे। इसमें जाति से जुड़ी जानकारी के लिए सिर्फ SC/ST का विकल्प था। जनगणना-2027 के सवालों की लिस्ट में जाति से जुड़ा सवाल नंबर 10 पर है, जिसमें SC/ST के साथ जाति शब्द भी जोड़ा गया है।

खास बात यह है कि लोगों से कोविड वैक्सीन कहां लगवाई थी, यह सवाल भी पूछा जाएगा। इसके साथ मोबाइल नंबर, आधार, वोटर ID और बैंक अकाउंट से जुड़े सवाल भी होंगे।

1. पहचान और परिवार: 12 सवालों में नाम से जाति तक जानकारी

जनगणना में व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्मतिथि और उम्र पूछी जाएगी। साथ ही वैवाहिक स्थिति, शादी के समय उम्र, पति या पत्नी का नाम, राष्ट्रीयता, धर्म और SC/ST/जाति की जानकारी ली जाएगी। माता-पिता की जानकारी भी दर्ज होगी।

2. शिक्षा और भाषा: 5 सवालों में पढ़ाई और डिजिटल साक्षरता

इस हिस्से में दिव्यांगता, मातृभाषा और दूसरी भाषाएं, साक्षरता और डिजिटल साक्षरता की जानकारी ली जाएगी। साथ ही शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाई की स्थिति और उच्चतम शैक्षणिक योग्यता, स्ट्रीम या विषय पूछा जाएगा।

3. रोजगार: 8 सवालों में काम और नौकरी की जानकारी

व्यक्ति ने पिछले एक साल में काम किया या नहीं, उसकी आर्थिक गतिविधि, व्यवसाय और काम का क्षेत्र पूछा जाएगा। इसके अलावा कामगार की श्रेणी, गैर-आर्थिक गतिविधि, काम की तलाश या उपलब्धता और काम की जगह तक आने-जाने की जानकारी भी ली जाएगी।

4. जन्म और माइग्रेशन: 8 सवालों में जन्मस्थान से बच्चों तक की जानकारी

इस सेक्शन में जन्म स्थान, पिछला निवास स्थान, माइग्रेशन का कारण और वहां रहने की अवधि पूछी जाएगी। स्थायी निवास का पता भी दर्ज होगा। महिलाओं से जीवित बच्चों, अब तक जन्मे बच्चों और पिछले एक साल में जन्मे बच्चों की संख्या भी पूछी जाएगी।

5. बैंक डिटेल्स और आधार नंबर: 7 सवालों में डॉक्यूमेंट्स की जानकारी

इसमें कोविड-19 वैक्सीन कहां लगवाई, कुल बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर पूछा जाएगा। साथ ही आधार नंबर, वोटर ID, पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध है या नहीं इसकी जानकारी भी ली जाएगी।

देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी

जनगणना 2027 देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। डेटा डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जाएगा और लोगों को खुद अपनी जानकारी देने यानी सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प भी मिलेगा। जनगणना की कानूनी प्रक्रिया सेंसस एक्ट, 1948 और सेंसस रूल्स, 1990 के तहत होगी।

केंद्र के मुताबिक, लोगों की दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सेंसस एक्ट की धारा 15 के तहत इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, RTI के तहत नहीं दिया जा सकता और किसी कोर्ट में सबूत के तौर पर भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जनगणना पहले 2021 में होने वाली थी। इसे कोरोना महामारी के कारण टाल दिया गया था।

जनगणना के लिए 11,718 करोड़ का बजट मंजूर

केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 11,718.24 करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दी है। जनगणना पूरे देश में केंद्र के समन्वय से होगी। राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें इसके क्रियान्वयन में मदद करेंगी।

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पंजाब के पूर्व डिप्टी-CM सुखबीर बादल पर गुरुद्वारे में हमला:नांदेड़ में निहंग ने कृपाण मारी, 2024 में भी गोल्डन टेंपल में सुखबीर पर हुई थी फायरिंग

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लुधियाना/महाराष्ट्र,एजेंसी। महाराष्ट्र के नांदेड़ में गुरुवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर हमला हुआ। पुलिस के मुताबिक, गुरुद्वारा माता साहिब कौर में एक निहंग ने उन पर कृपाण से हमला किया। बादल के हाथ में चोट लगी है। हमले के दौरान उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी भी घायल हो गया। घटना दोपहर करीब 1 बजे की बताई जा रही है। पुलिस ने हमले के आरोपी निहंग जसपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। सुखबीर बादल परिवार के साथ नांदेड़ के गुरुद्वारे में माथा टेकने पहुंचे थे। हमले के बाद उन्हें यशोसाई अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सुखबीर बादल पर 4 दिसंबर 2024 को भी हमला हुआ था। गोल्डन टेंपल में सेवादार की धार्मिक सजा भुगतने के दौरान उन पर फायरिंग की गई थी।

सुखबीर सिंह बादल ने अपने परिवार के साथ तख्त श्री हजूर साहिब में मत्था टेका।

सुखबीर सिंह बादल ने अपने परिवार के साथ तख्त श्री हजूर साहिब में मत्था टेका।

हमले के बाद सुखबीर सिंह बादल को अस्पताल ले जाया गया।

हमले के बाद सुखबीर सिंह बादल को अस्पताल ले जाया गया।

यशोसाईं अस्पताल के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

यशोसाईं अस्पताल के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।

हमले से पहले बादल अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल के साथ नांदेड़ में तख्त श्री हजूर साहिब गए थे।

हमले से पहले बादल अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल के साथ नांदेड़ में तख्त श्री हजूर साहिब गए थे।

महाराष्ट्र सीएम फडणवीस ने जांच के आदेश दिए

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नांदेड़ के पुलिस अधीक्षक से बात की और सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले की जांच के आदेश दिए।

इस हमले के दौरान बादल के सुरक्षाकर्मी संतोष हेगड़े ने भी हमलावर को रोकने का प्रयास किया, जिसमें वह भी घायल हुआ। हमलावर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। घटना से जुड़े CCTV फुटेज तथा चश्मदीद लोगों से जानकारी जुटाई जा रही है।

हमलावर को सम्मानित करने का दावा

इस घटना के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि हमला करने वाले निहंग जसपाल सिंह को सम्मानित किया गया। हालांकि, वीडियो को लेकर किए जा रहे दावे की पुष्टि अभी नहीं हुई है।

दावा है कि जिस निहंग को दस्तार बांधा जा रहा है उसी ने हमला किया है। मौके पर एक पुलिसवाला भी मौजूद है, जो बाद में इसे पकड़कर ले गया।

दावा है कि जिस निहंग को दस्तार बांधा जा रहा है उसी ने हमला किया है। मौके पर एक पुलिसवाला भी मौजूद है, जो बाद में इसे पकड़कर ले गया।

अकाली दल के प्रवक्ता बोले- सिख धर्म विरोधी ताकतों की साजिश

इस मामले में अकाली दल के प्रवक्ता एडवोकेट अर्शदीप सिंह कलेर ने कहा कि सुखबीर बादल पूरी तरह स्वस्थ हैं। मामला महाराष्ट्र का है, इसलिए वहां की पुलिस जांच करेगी कि हमलावर कौन है?। उसने किसके कहने पर हमला किया?।उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे कुछ सिख धर्म विरोधी ताकतों की साजिश हो सकती है।

अकाल तख्त जत्थेदार ने कहा- हमलावर सच्चा सिख नहीं

इस बारे में सिखों की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब ऐसी जगह है, जहां श्रद्धालु सभी की भलाई के लिए अरदास करने आते हैं। सच्चा सिख किसी ऐसे व्यक्ति पर हमला नहीं कर सकता, जो गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने आया हो। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से गुरुद्वारों की मर्यादा को ठेस और पूरे सिख समुदाय की छवि को नुकसान पहुंची है।

2024 में भी हुआ था हमला

गोल्डन टेम्पल में सुखबीर सिंह बादल पर दिसंबर 2024 में हुए हमले की तस्वीर।

गोल्डन टेम्पल में सुखबीर सिंह बादल पर दिसंबर 2024 में हुए हमले की तस्वीर।

एक बुजुर्ग व्यक्ति भीड़ के बीच से धीरे-धीरे सुखबीर बादल की ओर बढ़ा। उसने अपनी जेब से 9mm की पिस्टल निकाली और सीधे बादल पर निशाना साधकर गोली चला दी।

सुखबीर सिंह बादल पर 4 दिसंबर 2024 को अमृतसर के गोल्डन टेंपल के प्रवेश द्वार पर जानलेवा फायरिंग की गई थी। इसमें वह बाल-बाल बच गए थे।

यह हमला उस समय हुआ था जब वह अकाल तख्त की ओर से सुनाई गई एक धार्मिक सजा (तनखैया) काट रहे थे।

सुखबीर बादल को सिखों की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त ने धार्मिक रूप से दोषी घोषित किया था। यह सजा अकाली दल सरकार के दौरान हुई गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं के प्रायश्चित के रूप में दी गई थी।

उस दिन उनकी सजा का दूसरा दिन था। पैर में फ्रैक्चर होने के कारण वह व्हीलचेयर पर बैठे थे। गले में पट्टी लटकी हुई थी, नीली पोशाक पहने थे और हाथ में भाला लेकर द्वार पर पहरेदार के रूप में सेवा दे रहे थे।

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