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विदेश

स्विट्जरलैंड के रिसॉर्ट में न्यू ईयर सेलिब्रेशन के दौरान ब्लास्ट:40 लोगों के मारे जाने की खबर

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100 घायल, इनमें कई विदेशी नागरिक, रात 1.30 बजे हादसा

बर्न, एजेंसी। स्विट्जरलैंड के क्रांस मोंटाना शहर के ‘अल्पाइन स्की रिसॉर्ट’ में गुरुवार को न्यू ईयर सेलिब्रेशन के दौरान विस्फोट हुआ। न्यूज मीडिया ‘द मिरर’ ने लोकल मीडिया से हवाले से बताया कि विस्फोट में 40 लोग मारे गए हैं, जबकि 100 से ज्यादा घायल हैं।

स्विट्जरलैंड पुलिस ने गुरुवार को स्थानीय समय के मुताबिक सुबह 10 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें बताया कि विस्फोट रिसॉर्ट के कॉन्स्टेलेशन बार में रात 1:30 बजे हुआ। हालांकि पुलिस ने मरने वालों की संख्या नहीं बताई गई लेकिन कहा कि कई दर्जन लोगों की मौत की आशंका है, जिनमें कई देशों के नागरिक शामिल हैं।

फिलहाल क्रांस-मोंटाना शहर को नो फ्लाई जोन घोषित कर दिया गया है। पुलिस और इमरजेंसी टीम मौके पर पहुंचकर रेस्क्यू में जुटी हैं। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के मुताबिक अस्पताल झुलसे हुए मरीजों से भर गए हैं। कई घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है।

वर्ल्ड फेमस टूरिस्ट प्लेस इंटरलाकेन से 100km दूर है क्रांस मोंटाना

हादसे वाली जगह क्रांस मोंटाना एडवेंचर गेम्स के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध टूरिस्ट प्लेस इंटरलाकेन से करीब 100km की दूरी पर है। वहां पैराग्लाइडिंग, स्कीइंग और ट्रेकिंग के लिए दुनियाभर के लोग पहुंचते हैं। थून और ब्रिएंज झील के बीच बसे इंटरलाकेन से आल्प्स माउंटेन रेंज के आइगर, मोंक और जुंगफ्राउ पर्वतों तक आसानी से पहुंचा जा सकता है।

हादसे से जुड़ी तस्वीरें…

यह तस्वीर हादसे के बाद की है, जब रेस्क्यू टीम घायलों को हॉस्पिटल ले जाने के लिए पहुंची थी।

यह तस्वीर हादसे के बाद की है, जब रेस्क्यू टीम घायलों को हॉस्पिटल ले जाने के लिए पहुंची थी।

घटनास्थल को सील कर दिया गया है और स्विस पुलिस के अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं।

घटनास्थल को सील कर दिया गया है और स्विस पुलिस के अधिकारी घटनास्थल पर मौजूद हैं।

हादसे के बाद गुरुवार सुबह इलाके में सन्नाटा था, यहां पुलिस और रेस्क्यू दस्ता ही दिखाई दिया।

हादसे के बाद गुरुवार सुबह इलाके में सन्नाटा था, यहां पुलिस और रेस्क्यू दस्ता ही दिखाई दिया।

घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम भी जांच के लिए पहुंची हैं। रेस्क्यू टीम लोगों की मदद कर रही है।

घटनास्थल पर फॉरेंसिक टीम भी जांच के लिए पहुंची हैं। रेस्क्यू टीम लोगों की मदद कर रही है।

आतिशबाजी की वजह से ब्लास्ट की आशंका

स्विस न्यूज आउटलेट ब्लिक के मुताबिक यह धमाका और उसके बाद लगी आग शायद एक कॉन्सर्ट के दौरान आतिशबाजी की वजह से हुई हो सकती है।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, फायर ब्रिगेड और एम्बुलेंस की टीमें मौके पर पहुंच गईं। विस्फोट वाली जगह और आसपास का इलाका सील कर दिया गया है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि धमाके के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। हर 10 मिनट में रेस्क्यू हेलिकॉप्टर उड़ते नजर आए।

स्विस मीडिया के मुताबिक, सभी उपलब्ध रेस्क्यू हेलिकॉप्टर मदद के काम में लगाए गए हैं। इटली ने भी एक हेलिकॉप्टर भेजा है।

स्विट्जरलैंड का सबसे महंगा इलाका क्रांस-मोंटाना

क्रांस-मोंटाना स्विट्जरलैंड के आल्प्स पर्वत क्षेत्र में स्थित एक लग्जरी स्की रिसॉर्ट है। यह जगह स्विस राजधानी बर्न से करीब दो घंटे की दूरी पर है और यहां हर साल बड़ी संख्या में टूरिस्ट आते हैं, खासकर सर्दियों और नए साल के समय।

15,000 की आबादी वाला यह शहर देश के सबसे खास और महंगे इलाकों में गिना जाता है और सालभर मिलने वाली धूप के लिए मशहूर है। इसकी वजह यह है कि यह रोन घाटी में दक्षिण की ओर ढलान वाले पठार पर स्थित है।

क्रांस-मोंटाना से मैटरहॉर्न पहाड़ दिखाई देता है, जिसे स्विट्जरलैंड की सबसे मशहूर पहचान माना जाता है। इसके अलावा यहां से मोंट ब्लांक जैसी अन्य ऊंची चोटियों के भी शानदार नजारे मिलते हैं।

कॉन्स्टेलेशन बार की पुरानी तस्वीरें…

कॉन्स्टेलेशन बार स्विट्जरलैंड के मशहूर लग्ज़री स्की रिसॉर्ट शहर क्रांस मोंटाना में स्थित है, जो स्विस आल्प्स के बीच बसा हुआ है।

कॉन्स्टेलेशन बार स्विट्जरलैंड के मशहूर लग्ज़री स्की रिसॉर्ट शहर क्रांस मोंटाना में स्थित है, जो स्विस आल्प्स के बीच बसा हुआ है।

यह बार पर्यटकों और लोकल लोगों के बीच नाइटलाइफ और पार्टियों के लिए जाना जाता है, खासकर स्की सीजन और छुट्टियों के दौरान।

यह बार पर्यटकों और लोकल लोगों के बीच नाइटलाइफ और पार्टियों के लिए जाना जाता है, खासकर स्की सीजन और छुट्टियों के दौरान।

नए साल, क्रिसमस और खास मौकों पर यहां न्यू ईयर ईव पार्टियां और लाइव इवेंट्स आयोजित किए जाते रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।

नए साल, क्रिसमस और खास मौकों पर यहां न्यू ईयर ईव पार्टियां और लाइव इवेंट्स आयोजित किए जाते रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।

कॉन्स्टेलेशन बार जिस इलाके में है, वह होटल्स, स्की स्लोप्स और लग्जरी रेस्टोरेंट्स के पास माना जाता है, इसलिए यहां अक्सर इंटरनेशनल टूरिस्ट आते हैं।

कॉन्स्टेलेशन बार जिस इलाके में है, वह होटल्स, स्की स्लोप्स और लग्जरी रेस्टोरेंट्स के पास माना जाता है, इसलिए यहां अक्सर इंटरनेशनल टूरिस्ट आते हैं।

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देश

अपराधी एपस्टीन और मंत्री हरदीप पुरी की फोटो वायरल:मंत्री ने कहा था- कभी अकेले नहीं मिला; कांग्रेस का सवाल- फिर तस्वारें कहां से आईं

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नई दिल्ली, एजेंसी। अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन के साथ पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी की कई तस्वीरें वायरल हैं। ये तस्वीरे इसलिए अहम मानी जा रही हैं, क्योंकि पुरी लगातार कहते रहे हैं वे एपस्टीन से केवल प्रतिनिधिमंडल के साथ मिले, अलग से कभी मुलाकात नहीं हुई।

तस्वीरें सामने आने के बाद कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा- जब पुरी ने कहा था कि वे एपस्टीन से कभी अकेले नहीं मिले, तो इन तस्वीरों के क्या मायने हैं?

TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा- पुरी कहते थे कि वे एपस्टीन से तीन-चार बार डेलिगेशन के साथ मिले थे, दोनों तस्वीरों में बाकी सदस्य कहां थे।

दैनिक भास्कर ने ऑनलाइन तस्वीर को रिवर्स सर्च किया, तो अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट की साइट पर यह फोटो मिला।

इन तस्वीरों को जस्टिस डिपार्टमेंट की तरफ जारी जारी दस्तावेजों के नौवें सेट में रखा गया था। इस सेट में कम से कम 11 तस्वीरें हैं। मंगलवार को यह तस्वीर सोशल मीडिया पर चर्चा में आई।

इन तस्वीरों में दोनों लगभग एक ही स्थिति में बैठे दिखाई देते हैं। तस्वीरों के कोण में मामूली अंतर है।

अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट की वेबसाइट का लिंक- https://www.justice.gov/epstein/files/DataSet%209/EFTA01191294.pdf

राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया था

इस साल फरवरी में हरदीप सिंह पुरी ने लोकसभा में राहुल गांधी की ओर से एपस्टीन फाइलों को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज किया था।

पुरी ने बताया था कि वह संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत का पद छोड़ने के बाद और 2017 में केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होने से पहले एपस्टीन से मिले थे। उन्होंने इन मुलाकातों को पूरी तरह पेशेवर बताया था और कहा था कि उनका एपस्टीन के खिलाफ लगे आपराधिक आरोपों से कोई संबंध नहीं था।

पुरी ने फरवरी में एक इंटरव्यू में कहा था कि वह इंटरनेशनल पीस इंस्टीट्यूशन (IPI) से जुड़े एक डेलिगेशन के रूप में गए थे। उसी दौरान एपस्टीन से मिले। वे सार्वजनिक जीवन में कई तरह के लोगों से मिलते हैं, जिनमें से कुछ का आपराधिक रिकॉर्ड भी हो सकता है। पुरी के मुताबिक IPI में उनके बॉस टेर्जे रोड-लार्सन एपस्टीन को जानते थे।

पुरी ने कहा-

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पहली बार मुलाकात के दौरान मुझे नहीं पता था कि एपस्टीन कौन हैं। हमने उनके बारे में गूगल पर सर्च किया। फिर हमने आपस में भी चर्चा की कि हमें उनसे मिलना चाहिए या नहीं?QuoteImage

नवंबर 2025 में पहली बार सामने आया नाम

  • निगरानी समिति की ईमेल में जिक्र: हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री एपस्टीन के संपर्क का मामला पहली बार नवंबर 2025 में सार्वजनिक चर्चा में आया था। उस समय हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स की निगरानी समिति की ओर से जारी एक ईमेल में एपस्टीन और पुरी के बीच की बातचीत का जिक्र हुआ था।
  • ईमेल कब के हैं: इसके बाद अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) ने 30 जनवरी को एपस्टीन से जुड़े लाखों पन्नों के दस्तावेज जारी किए थे। इनमें जून 2014 से जून 2017 के बीच के ईमेल शामिल हैं।
  • तीन मुलाकातों का जिक्र: ईमेल के मुताबिक पुरी 4 फरवरी 2015, 6 जनवरी 2016 और 19 मई 2017 को न्यूयॉर्क में एपस्टीन के घर गए थे।
  • एपस्टीन यौन अपराधी साबित हो चुका था: 2008 में एपस्टीन यौन अपराध के मामले में दोषी ठहराया जा चुका था। यानी पुरी की बताई गई मुलाकातें उस समय हुईं, जब एपस्टीन का आपराधिक रिकॉर्ड पहले से मौजूद था।
  • ‘एक्जॉटिक आइलैंड’ का जिक्र: एक ईमेल में पुरी ने एपस्टीन के ‘एक्जॉटिक आइलैंड’ यानी अनोखे द्वीप का जिक्र किया और उसे ‘हैव फन’ कहा, जिसका मतलब है ‘मौज करो’। पुरी ने बाद में कहा कि ‘हैव फन’ उनके बोलने का आम तरीका है।

हरदीप सिंह पुरी और एपस्टीन से जुड़ा ईमेल

यह ईमेल हरदीप सिंह पुरी ने 24 दिसंबर 2014 को जेफ्री एपस्टीन को भेजा था।

यह ईमेल हरदीप सिंह पुरी ने 24 दिसंबर 2014 को जेफ्री एपस्टीन को भेजा था।

इसमें लिखा है- प्रिय जेफ, त्योहारों की शुभकामनाएं। जब आप अपने द्वीप से वापस आएं, तो मुझे जरूर बताइएगा।मैं आपसे बातचीत करने के लिए मिलना चाहूंगा। साथ ही, भारत में रुचि जगाने के लिए आपको कुछ किताबें भी देना चाहूंगा।

करोड़पति फाइनेंसर था यौन अपराधी एपस्टीन

जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी।

उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया।

उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली।

उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है।

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विदेश

निजी स्कूल की अचानक छत ढहने से हाहाकार; 28 मासूमों व एक टीचर की मौत, मलबे में फंसे बच्चों की तलाश जारी

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पेशावर, एजेंसी। पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर की दिर कॉलोनी में एक निजी स्कूल की छत गिरने से कई बच्चों की मौत हो गई और बड़ी संख्या में लोग घायल हो गए। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। बचाव दल मलबा हटाकर उसमें दबे बच्चों और स्कूल कर्मचारियों को निकालने में जुटे हैं।  इस दर्दनाक हादसे में कम से कम 28 बच्चों और एक शिक्षिका की मौत हो गई। तीन दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं।

 

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, कुछ घायलों की हालत गंभीर है।आपातकालीन सेवाओं के प्रवक्ता बिलाल फैजी ने बताया कि हादसे के बाद कई बच्चे मलबे के नीचे फंसे हुए थे। बचावकर्मी मलबा हटाकर उन तक पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। अस्पताल के प्रवक्ता मोहम्मद आसिम ने मृतकों और घायलों की जानकारी की पुष्टि की। 

अस्पताल के प्रवक्ता के मुताबिक, हादसे में मारे गए और घायल हुए सभी बच्चे 13 वर्ष या उससे कम उम्र के थे। घायलों को उपचार के लिए सरकारी लेडी रीडिंग अस्पताल पहुंचाया गया, जहां घायलों की संख्या और उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए आपातकाल घोषित कर दिया गया। चिकित्साकर्मी घायलों के इलाज में जुटे रहे। हादसे में मृतकों की अंतिम संख्या अभी स्पष्ट नहीं है और बचाव अभियान के दौरान इसमें बदलाव हो सकता है।

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देश

चीन ने लद्दाख की 28 जगहों को अपना बताया:भारत ने नाम बदले थे, इनमें गोगरा-हॉट स्प्रिंग, जहां 2020 में दोनों देशों की सेनाएं टकराईं

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बीजिंग/नई दिल्ली, एजेंसी। चीन ने लद्दाख की 28 जगहों पर अपना बताया है। चीन ने मंगलवार को इन जगहों के नाम तय करने के भारत के फैसले पर आपत्ति भी जताई। चीन ने कहा- ये इलाके हमारे हैं और भारत के नाम बदलने या नया नाम रखने से जमीन पर मालिकाना हक नहीं बदलेगा।

भारत ने 2 अक्टूबर को इन जगहों के नाम आधिकारिक तौर पर तय किए थे। इनमें गोगरा और हॉट स्प्रिंग जैसे इलाके भी शामिल हैं, जहां 2020 में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच तनाव हुआ था।

चीन बोला- लद्दाख को भारत का UT नहीं मानते

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को कहा कि चीन लद्दाख को भारत की ओर से बनाया गया केंद्र शासित प्रदेश नहीं मानता। चीन ने भारत के इस कदम को गैरकानूनी बताते हुए कहा कि सीमा के पश्चिमी हिस्से के ये इलाके उसके हैं।

माओ के मुताबिक, भारत के इस फैसले से सीमा के पश्चिमी हिस्से में उन इलाकों पर चीन का दावा नहीं बदल सकता, जिन्हें वह अपना क्षेत्र मानता है।

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को भारत के लद्दाख के इलाकों का नाम तय करने या बदलने का विरोध किया।

चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने मंगलवार को भारत के लद्दाख के इलाकों का नाम तय करने या बदलने का विरोध किया।

भारत बोला- लद्दाख हमारा हिस्सा, इनकार करने से हकीकत नहीं बदलेगी

चीन की आपत्ति पर भारत ने भी जवाब दिया है। विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि लद्दाख भारत का हिस्सा है। चीन के इनकार करने से यह हकीकत नहीं बदलेगी।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि इन जगहों के नाम सर्वे ऑफ इंडिया के आधिकारिक नक्शे में दर्ज किए गए हैं। यह काम लद्दाख प्रशासन और स्थानीय लोगों से सलाह लेकर किया गया है।

जायसवाल ने कहा कि इन जगहों के नाम नक्शे में दर्ज करने का मकसद उनकी सही पहचान करना और लोगों को उनके बारे में जानकारी देना है।

भारत ने 28 जगहों के नाम क्यों तय किए?

  • भारत के गृह मंत्रालय ने 2 अक्टूबर को आधिकारिक तौर पर लद्दाख की 28 जगहों और क्षेत्रों के नाम तय किए थे।
  • भारत का फैसला 2023 में चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के इलाकों के नाम बदलने के जवाब में उठाया गया था। चीन अरुणाचल प्रदेश को ‘जांगनान’ यानी दक्षिणी तिब्बत कहता रहा है।

गोगरा और हॉट स्प्रिंग पूर्वी लद्दाख के संवेदनशील इलाके

भारत ने जिन जगहों के नाम तय किए, इनमें गोगरा और हॉट स्प्रिंग भी शामिल हैं। ये पूर्वी लद्दाख के संवेदनशील इलाके हैं, जहां भारत और चीन के सैनिकों के बीच सीमा पर तनाव रहा है। इन जगहों पर भारतीय सैनिक गश्त भी करते हैं।

मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद बढ़ गया था। 5 मई को पैंगोंग झील के पास दोनों देशों के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई थी।

2020 के जून में गलवान घाटी में भी दोनों सेनाओं के बीच हिंसक संघर्ष हुआ था। इसके बाद दोनों देशों ने सीमा पर तनाव कम करने और सैनिकों को पीछे हटाने के लिए बातचीत शुरू की। सैनिकों को पीछे हटाने की प्रक्रिया 2022 में शुरू हुई।

लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर पैंगोंग झील के इलाके में दोनों देशों के सैन्य अधिकारी मिले थे। तस्वीर 10 फरवरी 2022 की है।

लद्दाख में भारत-चीन सीमा पर पैंगोंग झील के इलाके में दोनों देशों के सैन्य अधिकारी मिले थे। तस्वीर 10 फरवरी 2022 की है।

28 जगहों में कौन-कौन से नाम शामिल हैं?

भारत की ओर से तय किए गए 28 नामों में पहाड़, दर्रे, ग्लेशियर, जमीन के हिस्से, घाटियां और जल स्रोत शामिल हैं।

पहाड़-चोटियां: अतीशा गिरि, कनीष्क पीक, करुण पीर पर्वत, मार्तंड गिरि, द्रक कार्पो, जोलमोरी, रिनचेन जांगपो, साक्यश्री गिरि, मारपा लोत्सावारी, मिलारेपा कांगरी, शिव री, जोरावर पीक और महेश्वररी।

दर्रे-ग्लेशियर: चापचिंगल दर्रा, शाचमिरिक दर्रा, पारपिक ग्लेशियर और स्कामरी ग्लेशियर।

जमीन के इलाके: ब्रांगसा, कुकसेल, देहरा कम्पास, गोगरा, कुमारायण पॉइंट, पंगलुंग और शमाल लुंगपा।

घाटी-जल स्रोत: श्कोर्गा घाटी, गुरु रिनपोछे झील, यांगपा नदी और हॉट स्प्रिंग।

इन जगहों के नाम तय करके सरकारी नक्शे में शामिल करने का मकसद उनकी सही पहचान बताना है।

गलवान में भारत और चीन के बीच हिंसक झड़प हुई थी

जून 2020 में लद्दाख की गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच सीमा विवाद को लेकर हिंसक झड़प हुई थी। भारत के मुताबिक, 6 जून को दोनों देशों के सैन्य अधिकारियों के बीच सैनिकों को पीछे हटाने पर सहमति बनी थी, लेकिन 15 जून की रात फिर टकराव हो गया।

इस दौरान सैनिकों के बीच पत्थरों और डंडों से लड़ाई हुई। झड़प में भारत के 20 सैनिकों की मौत हुई थी। चीन ने फरवरी 2021 में अपने 4 सैनिकों की मौत की बात स्वीकार की थी। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया और सीमा पर सैनिकों की तैनाती बढ़ा दी गई।

जून 2020 में गलवान घाटी में भारत-चीन सीमा पर झड़प के दौरान आमने-सामने खड़े दोनों देशों के सैनिक।

जून 2020 में गलवान घाटी में भारत-चीन सीमा पर झड़प के दौरान आमने-सामने खड़े दोनों देशों के सैनिक।

अरुणाचल प्रदेश को लेकर भी दोनों देशों के बीच विवाद

भारत और चीन के बीच अरुणाचल प्रदेश को लेकर लंबे समय से सीमा विवाद है। चीन अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है और इसे ‘जांगनान’ यानी दक्षिणी तिब्बत कहता है।

इसी दावे के तहत चीन 2017 से कई बार अरुणाचल प्रदेश की जगहों के चीनी नाम जारी कर चुका है। 2023 में चीन ने 11 और 2024 में करीब 30 जगहों के नाम जारी किए थे। भारत हर बार इसका विरोध करता रहा है।

भारत का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश उसका अभिन्न हिस्सा है और चीन के नाम बदलने से जमीन पर स्थिति नहीं बदल सकती। भारत की नजर में यह सिर्फ नामों का मामला नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र पर चीन के दावे से जुड़ा विवाद है।

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