देश
2026 में भारत-PAK युद्ध संभव, अमेरिकी थिंक टैंक का दावा:कश्मीर में आतंकी गतिविधि वजह बनेगी, दोनों देशों ने हथियारों की खरीद बढ़ाई
वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। अमेरिका के बड़े थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR) ने चेतावनी दी है कि 2026 में भारत और पाकिस्तान के बीच फिर युद्ध हो सकता है। CFR की रिपोर्ट ‘कॉन्फ्लिक्ट्स टू वॉच इन 2026’ के अनुसार, कश्मीर में आतंकी गतिविधियां बढ़ने से दोनों देशों के बीच टकराव की संभावना है।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर भारत-पाकिस्तान के बीच संघर्ष होता है, तो उसका असर अमेरिका के हितों पर भी पड़ सकता है। हालांकि जम्मू-कश्मीर में अभी कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ है, लेकिन खुफिया एजेंसियों के अनुसार इस सर्दी में जम्मू क्षेत्र में 30 से ज्यादा पाकिस्तानी आतंकी सक्रिय हैं।
इधर भारत-पाकिस्तान के बीच 10 मई को हुए संघर्ष विराम के बाद दोनों देशों ने हथियारों की खरीद तेज कर दी है। भारत में रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) ने हाल ही में 79 हजार करोड़ रुपए के रक्षा सौदों को मंजूरी दी है, जिसमें ड्रोन, एयर-टू-एयर मिसाइल और गाइडेड बम शामिल हैं।
उधर पाकिस्तान ने भी तुर्किये और चीन से नए ड्रोन और एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने के लिए बातचीत शुरू की है, ताकि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सामने आई कमजोरियों को दूर किया जा सके।

भारत-पाकिस्तान के बीच मई 2025 में हुए युद्ध में भारत ने PAK के 9 एयरबेस तबाह किए थे।
अफगानिस्तान-पाकिस्तान संघर्ष की भी आशंका
रिपोर्ट में एक और बड़े खतरे की ओर इशारा किया गया है। CFR के मुताबिक, 2026 में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच भी सशस्त्र संघर्ष की संभावना है। हालांकि इसका असर अमेरिकी हितों पर कम होगा।
अक्टूबर में 2600 किलोमीटर लंबी डूरंड लाइन पर पाकिस्तान और तालिबान शासित अफगानिस्तान के बीच भीषण झड़पें हुई थीं। दोनों देशों की सेनाओं ने कई इलाकों में एक-दूसरे पर गोलीबारी की थी और सीमा चौकियां तबाह होने के दावे किए थे। इसके बाद दोनों देशों के रिश्ते और व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।

पाकिस्तान ने अक्टूबर में अफगानिस्तान की राजधानी काबुल पर हमला किया था।
अमेरिकी नीति निर्धारकों के लिए चेतावनी
CFR की यह रिपोर्ट अमेरिकी विदेश नीति विशेषज्ञों के सर्वे पर आधारित है। इसका मकसद अमेरिकी नीति-निर्माताओं को उन क्षेत्रों के बारे में सतर्क करना है, जहां भविष्य में संघर्ष भड़क सकता है। रिपोर्ट में संघर्षों को तीन श्रेणियों टियर-1, टियर-2 और टियर-3 में बांटा गया है, ताकि यह समझा जा सके कि कहां संघर्ष की संभावना और उसका असर कितना गंभीर हो सकता है।
रिपोर्ट यह संकेत देती है कि दक्षिण एशिया आने वाले सालों में एक बार फिर बड़े भू-राजनीतिक तनाव का केंद्र बन सकता है, जिसमें भारत-पाकिस्तान और पाकिस्तान-अफगानिस्तान दोनों मोर्चों पर हालात बिगड़ने का खतरा बना हुआ है।
रूस-यूक्रेन युद्ध समेत 4 बड़े खतरे और
1) रूस-यूक्रेन युद्धः 2026 में रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध और तेज हो सकता है। दोनों देश एक-दूसरे के शहरों और अहम ढांचों पर हमले बढ़ा सकते हैं। इससे यूरोप की सुरक्षा पर बड़ा असर पड़ेगा और अमेरिका के सीधे दखल की आशंका भी बनी रहेगी।
2) गाजा और वेस्ट बैंक में हिंसाः इजराइल और फिलिस्तीनियों के बीच गाजा पट्टी और वेस्ट बैंक में संघर्ष बढ़ने की संभावना है। हमास और इजराइली सेना के बीच टकराव से मानवीय संकट और गहराएगा, जिससे पूरा मध्य पूर्व अस्थिर हो सकता है।
3) चीन-ताइवान तनावः चीन का ताइवान पर बढ़ता दबाव 2026 में बड़े सैन्य संकट का रूप ले सकता है। रिपोर्ट के अनुसार यह टकराव अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को सीधे युद्ध में खींच सकता है, इसलिए इसे उच्च प्रभाव वाला खतरा माना गया है।
4) ईरान-इजराइल टकरावः ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसके समर्थित संगठनों के कारण इजराइल से सीधा युद्ध छिड़ने की आशंका है। CFR के मुताबिक ऐसा संघर्ष पूरे पश्चिम एशिया को युद्ध की आग में झोंक सकता है और अमेरिका के हितों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
अब CFR के बारे में जानिए…
काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR) अमेरिका का एक प्रमुख और प्रभावशाली थिंक टैंक है। इसकी स्थापना साल 1921 में हुई थी। यह संस्था अमेरिका की विदेश नीति, राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर रिसर्च करती है और रिपोर्ट जारी करती है। CFR में पूर्व राजनयिक, सैन्य अधिकारी, प्रोफेसर और नीति विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
इस थिंक टैंक की रिपोर्ट्स और सुझावों का असर अमेरिकी सरकार, व्हाइट हाउस और कांग्रेस की नीतियों पर भी पड़ता है। यह थिंक टैंक दुनियाभर के संकटों, युद्धों और भू-राजनीतिक हालात का आकलन कर भविष्य की संभावनाओं को लेकर चेतावनी देता है।

काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR) ने 2026 में होने वाले युद्धों की आशंका को लेकर रिपोर्ट जारी की है।
भारत और पाकिस्तान में अब तक 5 बार जंग
भारत और पाकिस्तान में अब तक 5 बार जंग हुई है। सभी में पाकिस्तान को हार का सामना करना पड़ा है। पाकिस्तान की सबसे बड़ी हार 1971 के बांग्लादेश मुक्ति युद्ध में हुई थी। जब पूर्वी पाकिस्तान बांग्लादेश बना था और पाकिस्तान के 91 हजार सैनिकों ने आत्मसमर्पण किया था।
देश
महिला आरक्षण से जुड़ा बिल 54 वोट से गिरा:पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298; मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम
नई दिल्ली,एजेंसी। महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान (131वां) संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। लोकसभा में मौजूद 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह ये बिल 54 वोट से गिर गया। लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, लेकिन 3 सीटें खाली होने की वजह से मौजूदा सांसद 540 है।

सरकार ने दो बिल वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किए
पहला- परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026
दूसरा- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026
सरकार ने इन पर वोटिंग से इनकार किया। कहा कि ये बिल एक-दूसरे से लिंक है इसलिए वोटिंग की जरूरत नहीं है।
12 साल के शासन में यह पहला मौका जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई। इससे पहले अमित शाह ने एक घंटा स्पीच दी थी। कहा कि अगर ये बिल पास नहीं होते हैं तो जिम्मेदारी विपक्ष की होगी। देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी राह का रोड़ा कौन है।
बिल गिरने के बाद विपक्ष ने कहा- हमने हरा दिया
- राहुल गांधी ने कहा- हमने संविधान पर हुए हमले को हरा दिया है। हमने साफ कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है।
- प्रियंका ने कहा– यह हमारे लोकतंत्र और देश की एकता के लिए एक बड़ी जीत है। जैसा कि मैंने अंदर कहा, यह संविधान पर हमला था, और हमने इसे विफल कर दिया है, जो कि एक अच्छी बात है।
- शशि थरूर ने कहा– हमने हमेशा कहा है कि हम महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करते हैं और आज भी इसके पक्ष में मतदान करने को तैयार हैं। हालांकि, इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
- एमके स्टालिन ने कहा- 23 अप्रैल को हम दिल्ली का अहंकार और उस अहंकार का समर्थन करने वाले गुलामों को हराएंगे।
संसद के बाहर भाजपा महिला सांसदों के प्रदर्शन की तस्वीरें…

बिल गिरने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया।

महिला सांसदों ने ‘महिला का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ के नारे लगाए।
सरकार को पता था बिल पास नहीं होगा, मोदी ने 3, शाह ने एक अपील की
सरकार जानती थी कि उसके पक्ष में लोकसभा में नंबर नहीं है, इसीलिए सरकार बार-बार सभी सांसदों से समर्थन की मांग कर रही थी। पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू समेत बीजेपी और NDA नेताओं ने विपक्ष से बिल को सपोर्ट करने की अपील की।
पीएम की 3 अपील
- 13 अप्रैल एक कार्यक्रम में: मैं आपसे आग्रह करता हूं कि अपने स्थानीय सांसदों को पत्र लिखें और इस ऐतिहासिक संसद सत्र में हिस्सा लेते समय उनका हौसला बढ़ाएं।
- 16 अप्रैल लोकसभा में: ‘हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने को तैयार हूं। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं।’
- 17 अप्रैल सोशल मीडिया में: सभी सांसद वोटिंग से पहले अपनी अंतर्रात्मा की आवाज सुनें।

शाह ने कहा- महिलाएं माफ नहीं करेंगी
17 अप्रैल लोकसभा में अमित शाह ने कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है। यहां पर तो शोर-शराबा करके बच जाओगे लेकिन माताओं-बहनों का आक्रोश बाहर पता चलेगा। चुनाव में वोट मांगने जाएंगे तो मातृशक्ति हिसाब मांगेगी।

देश
‘परिसीमन एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा’- शशि थरुर का केंद्र सरकार पर तीखा हमला
नई दिल्ली,एजेंसी। लोकसभा में शुक्रवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ और ‘परिसीमन’ (Delimitation) पर चल रही बहस के दौरान कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया की तुलना ‘नोटबंदी’ से करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र की आत्मा के लिए खतरा बताया।

थरुर ने अपने भाषण में कहा
शशि थरूर ने कहा कि दशकों से महिला आरक्षण का वादा किया गया और इसे टाला गया। आज जब इस पर राजनीतिक सहमति बनी है, तब सरकार ने इसे परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रिया से बांधकर महिलाओं की आकांक्षाओं को ‘बंधक’ बना लिया है। थरूर ने सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा, “आपने परिसीमन का प्रस्ताव वैसी ही जल्दबाजी में पेश किया है जैसी नोटबंदी के समय दिखाई थी। हम सब जानते हैं कि नोटबंदी ने देश का क्या हाल किया था। परिसीमन भी एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा, इसे मत कीजिए।”


थरूर ने उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच शक्ति संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई। उन्होंने तर्क दिया कि केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और मानव विकास में बेहतरीन काम किया है। यदि परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो जनसंख्या नियंत्रण में विफल रहने वाले राज्यों को अधिक राजनीतिक ताकत मिलेगी और अच्छा काम करने वाले राज्य हाशिए पर चले जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आर्थिक रूप से समृद्ध और विकासशील राज्यों की आवाज को दबाया गया, तो इससे देश के संघीय ढांचे पर बुरा असर पड़ेगा। उनके अनुसार, यह “बहुसंख्यकवाद की तानाशाही” (Tyranny of the democratic majority) पैदा करने जैसा होगा।

छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ ब्लास्ट हादसा: धमाके में 20 श्रमिकों की मौत के बाद वेदांता कंपनी के चेयरमैन, कई अन्य के खिलाफ मामला दर्ज
सक्ती,एजेंसी। छत्तीसगढ़ पुलिस ने सक्ती जिले में वेदांता के विद्युत संयंत्र में हुए धमाके में 20 लोगों की मौत की घटना के बाद वेदांता कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत संयंत्र प्रबंधन के अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सक्ती पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने बताया, ”डाभरा पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।” अधिकारी ने बताया कि इस मामले में वेदांता कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, कंपनी प्रबंधक देवेन्द्र पटेल सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

यह धमाका 14 अप्रैल को सिंघीतराई गांव में स्थित संयंत्र में हुआ था। उस समय बॉयलर से टर्बाइन तक उच्च दाब वाली भाप ले जाने वाला एक स्टील का पाइप फट गया था, जिससे कई मजदूर बुरी तरह झुलस गए थे। इस घटना में 20 लोगों की मौत हो गई थी और 16 लोग घायल हो गए। ठाकुर ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया कि यदि जांच के दौरान और लोग भी दोषी पाए जाते हैं, तो उनका नाम भी प्राथमिकी में जोड़ा जाएगा।
उन्होंने बताया कि घटना की जांच जारी है और मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट सहित कई रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि धमाके के कारणों की जांच के लिए एक तकनीकी टीम भी बनाई गई है। पुलिस अधीक्षक ने कहा, ”सभी रिपोर्ट मिलने के बाद, अगर जरूरत पड़ी तो प्राथमिकी में और धाराएं भी जोड़ी जाएंगी।” इस घटना के बाद, विपक्षी दल कांग्रेस ने संयंत्र प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की थी।

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