कोरबा
इंटेंसिफाईड एचआईवी/एड्स सघन जागरूकता हेतु प्रचार रथ रवाना, करेंगे एचआईवी/एड्स के सम्बन्ध में जागरुक
कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन में 28 जनवरी को इंटेंसिफाईड एचआईवी/एड्स जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत सघन प्रचार प्रसार हेतु एड्स जागरूकता रथ तथा कला जत्त्था दल को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के द्वारा हरी झंडी दिखा कर रवाना किया गया। इस अवसर पर डॉ.सी.के.सिंह, जिला स्वास्थ्य अधिकारी, डॉ. बी.आर.रात्रे नोडल अधिकारी एड्स, कुमार पुष्पेश, जिला टीकाकरण अधिकारी, पद्माकर शिन्दे, जिला कार्यक्रम प्रबंधक, कला जत्था के सदस्य तथा अन्य अधिकारी, कर्मचारी उपस्थित थे।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.एन.केशरी ने बताया कि इंटेंसिफाईड एचआईवी/एड्स जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत सघन प्रचार प्रसार हेतु एड्स जागरूकता रथ तथा कला जत्त्था दल के द्वारा जिले के समस्त विकासखंडों के चिन्हांकित ग्रामों में कार्यक्रम आयोजित कर एचआईवी ( ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस), इसके बचाव, नियंत्रण के सम्बन्ध में जागरूक किया जायेगा तथा लोगों को एचआईवी/एड्स के मरीजों के अधिकारों की रक्षा के लिए 2017 में बनाये गए एक्ट की जानकारी, गर्भवती महिलाओं को प्रथम तिमाही में एचआईवी जाँच कराने तथा एचआईवी के सम्बन्ध में कहीं भी कभी भी किसी भी समय प्राप्त करने के लिए टोल फ्री नंबर 1097 कि जानकारी दिया जायेगा।
उन्होंने बताया कि दिया एक वायरस है जो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली पर हमला करता है, खासकर सीडी 4 कोशिकाओं को नष्ट करता है, जिससे शरीर संक्रमणों और बिमारियों से ठीक से लड़ नहीं पाता और अंततः एड्स बिमारी नामक गंभीर स्थिति हो सकती है, लेकिन सही इलाज से इसे नियंत्रित करके स्वस्थ्य जीवन जिया जा सकता है।
उन्होंने बताया कि यह जानना जरूरी है कि आप एचआईव्ही पॅाजिटिव हैं या नहीं क्योकि कई बार मरीज में एचआईवी का कोई अपना लक्षण नहीं होता है। यह हमेशा दूसरी बिमारियों का लक्षण लिए हुए होता है। जिसमें प्रायः यह देखने को मिलता है कि व्यक्ति को एक महीने या अधिक समय तक लगातार फ्लू, बुखार, थकान, सिरदर्द, गले में खरास, रात को पसीना हो सकती है कोई भी एैसी बिमारी जैसे उल्टी, दस्त, निमनिया, मुँह में छाले’ टीबी जैसे संक्रमण वाली बिमारिया हो सकती है एैसी परिस्थिती में प्रत्येक व्यक्ति को एचआईवी जॉंच जीवन में कम से कम एक बार जरूर कराना चाहिए, साथ ही यौन रूप से सक्रिय लोगों को हर साल या जोखिम के आधार पर जिसमें असुरक्षित यौन संबंध, सुई साझा करना या किसी व्यक्ति को यौन संचारित रोग हो तो उन्हे प्रत्येक 3 से 6 माह में अवश्य जॉंच कराना चाहिए इसके साथ ही प्रत्येक गर्भवती महिला को प्रथम तिमाही में एचआईवी की जॉंच कराना अनिवार्य है। और अगर जॉंच और उपचार नहीं हुआ तो एड्स बिमारी हो सकती है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.एन.केशरी ने आग्रह किया है कि जिन व्यक्तियों में उपरोक्त लक्षण हों मेडिकल कॉलेज (जिला चिकित्सालय) के आइटीसी सेंटर, समस्त विकासखण्ड के आईटीसी सेंटर तथा टोल फ्री नंबर 1097 में संपर्क कर अपना निःशुल्क स्वास्थ्य जॉंच करा सकते है।
कोरबा
दुर्घटना की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग ने की आवश्यक कार्रवाई
आपातकालीन सेवाओं को और सुदृढ़ बनाने हेतु की जा रही आवश्यक कार्यवाही
कोरबा। ग्राम लामपहाड़ में घटित सड़क दुर्घटना की घटना को जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा गंभीरता से लेते हुए तत्काल तथ्यात्मक जांच कराई गई। जांच हेतु खंड चिकित्सा अधिकारी, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पताढ़ी को वस्तुस्थिति का परीक्षण कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे। संबंधित अधिकारियों से प्राप्त प्रतिवेदन एवं स्थल स्तर पर उपलब्ध जानकारी के परीक्षण उपरांत घटना से संबंधित वस्तुस्थिति स्पष्ट हुई है। साथ ही आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन में सामने आई चुनौतियों के निराकरण हेतु आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई भी प्रारंभ कर दी गई है।
प्राप्त प्रतिवेदन के अनुसार 08 जून 2026 की रात्रि लगभग 8ः30 बजे ग्राम लामपहाड़ में एक बाइक दुर्घटना की सूचना सेक्टर मेडिकल ऑफिसर लेमरू को प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही संबंधित अधिकारियों द्वारा उपलब्ध आपातकालीन संसाधनों के माध्यम से तत्काल कार्रवाई प्रारंभ की गई। इस दौरान लेमरू स्थित 108 एम्बुलेंस पूर्व से एक रेफर मरीज को कोरबा पहुंचाने के कार्य में लगी हुई थी तथा ड्यूटी अवधि पूर्ण होने एवं आवश्यक मानव संसाधन की अनुपलब्धता के कारण समय पर दुर्घटना स्थल तक नहीं पहुंच सकी।
जांच में यह भी पाया गया कि 108 एम्बुलेंस सेवा का संचालन संबंधित एजेंसी द्वारा किया जाता है। वर्तमान में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू में अवस्थित 108 एम्बुलेंस की आवश्यकता पड़ने पर कॉल कंन्ट्रोल सेंटर रायपुर को कॉल करने पर कोरबा में पॉयलेट को सीधे कॉल लगने की सुविधा नहीं है। पॉयलेट के निजी नम्बर पर कॉल किया जाता है। नेटवर्क सम्बन्धी समस्या के कारण कॉल कनेन्ट नही हो पाता है जिससे तत्कालीन अवधि में परेशानी का सामना करना पड़ता है। इस संबंध में सेक्टर प्रभारी द्वारा तत्काल 108 सेवा के जिला समन्वयक से संपर्क कर स्थिति से अवगत कराया गया। लेमरू क्षेत्र में नेटवर्क संबंधी बाधाओं तथा द्वितीय व तृतीय पाली में डयूटी करने हेतु पर्याप्त पायलट एवं ईएमटी (इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन) की उपलब्धता नहीं होने से आपातकालीन सेवा संचालन में व्यावहारिक कठिनाइयां उत्पन्न हुईं।
दुर्घटना से प्रभावित व्यक्ति को तत्पश्चात 112 वाहन के माध्यम से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू लाया गया, जहां चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान उसे मृत पाया गया। इसके बाद नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए शव को सुरक्षित रखकर उच्च अधिकारियों को घटना की जानकारी दी गई।
जांच प्रतिवेदन में यह स्पष्ट हुआ है कि 108 एम्बुलेंस सेवा एक सतत (24×7) आपातकालीन सेवा है, जिसके सुचारू संचालन के लिए प्रत्येक शिफ्ट में पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध होना आवश्यक है। संबंधित एजेंसी द्वारा तीनों पालियों के लिए पृथक-पृथक पायलट एवं ईएमटी की व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण उक्त स्थिति निर्मित हुई।
मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा 108 संजीवनी एक्सप्रेस के जिला समन्वयक से स्पष्टीकरण प्राप्त करने की कार्रवाई की गई है। साथ ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र लेमरू में संचालित नवीन 108 संजीवनी एक्सप्रेस के लिए तीनों शिफ्टों में पृथक पायलट एवं ईएमटी की नियुक्ति सुनिश्चित करने हेतु उप संचालक (108), संचालनालय स्वास्थ्य सेवाएं, रायपुर को पत्र प्रेषित किया गया है।
जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा दूरस्थ एवं वनांचल क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता को सर्वाेच्च प्राथमिकता दी जा रही है। घटना के संबंध में प्राप्त तथ्यों के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कदम प्रारंभ कर दिए गए हैं, ताकि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में नागरिकों को और अधिक त्वरित एवं प्रभावी स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जनहित से जुड़े प्रत्येक मामले में संवेदनशीलता, जवाबदेही एवं त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना उसकी सर्वाेच्च प्राथमिकता है तथा स्वास्थ्य सेवाओं के निरंतर सुदृढ़ीकरण की दिशा में प्रभावी प्रयास जारी है।
कोरबा
मछलियों के संरक्षण हेतु 15 अगस्त तक बंद ऋतु घोषित
मत्स्य आखेट पर रहेगा प्रतिबंध,
प्रतिबंधित अवधि पर मछली पकड़ने पर देना होगा 25 हजार रूपये जुर्माना
कोरबा। जिले में वर्षा ऋतु में मछलियों की वंश वृद्धि को ध्यान में रखकर उनके संरक्षण के लिए छत्तीसगढ़ नदीय मत्स्योद्योग अधिनियम के तहत 16 जून से 15 अगस्त तक की अवधि को बंद ऋतु (क्लोज सीजन) घोषित किया गया है। इस अधिनियम के अंतर्गत जिले के सभी तालाबों एवं जल स्त्रोतों जिनका संबंध नदी नालों से नहीं है, के अतिरिक्त जलाषयों में किये जा रहे केज कल्चर को छोड़कर सभी प्रकार के जल संसाधनों में मत्स्याखेट कार्य 16 जून से 15 अगस्त 2026 तक पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा।
सहायक संचालक मछली पालन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार नियमों का उल्लंघन करने तथा अपराध सिद्ध होने पर छत्तीसगढ़ राज्य मत्स्य क्षेत्र अधिनियम के तहत 25 हजार रूपए का जुर्माने का प्रावधान है। उन्होंने बताया कि उक्त नियम केवल छोटे तालाब या अन्य जल स्रोत जिनका संबंध किसी नदी-नाले से नहीं है और उनके अतिरिक्त जलाशय जिनमें केज कल्चर का कार्य किया जा रहा है, उनमें मत्स्य अधिनियम लागू नहीं होंगे।
कोरबा
राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान के संबंध में बैठक 16 को
कोरबा। राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान 28 जून 2026 के संबंध में कलेक्टर कुणाल दुदावत की अध्यक्षता में जिला स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक कलेक्टोरेट सभा कक्ष में दोपहर 01 बजे आयोजित की गई है। सर्व संबंधितों को बैठक में उपस्थित होने कहा गया है।
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