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विदेश

इजरायल-लेबनान के बीच संघर्ष विराम 3 हफ्ते और बढ़ा, राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में की अहम बैठक

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वाशिंगठन, एजेंसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि इजरायल और लेबनान के बीच चल रहे संघर्ष विराम को तीन सप्ताह के लिए बढ़ा दिया गया है। इस अवधि के दौरान, दोनों देशों के नेताओं के व्हाइट हाउस में मिलने की संभावना है। राष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र में स्थिरता लाने के प्रयासों के तहत ईरान को हिजबुल्लाह के लिए अपनी फंडिंग बंद करनी होगी।

व्हाइट हाउस में उच्च-स्तरीय चर्चा
यह फैसला ओवल ऑफिस में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद लिया गया, जिसमें ट्रंप ने इजरायली राजदूत येचिएल लीटर और लेबनानी राजदूत नादा मोआवाद के साथ दूसरे दौर की मध्यस्थता वार्ता की। इस बैठक में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और इजरायल व लेबनान के लिए अमेरिकी राजदूत भी शामिल थे। ट्रंप ने चर्चा को बेहद उत्पादक बताया और कहा कि अमेरिका लेबनान को हिजबुल्लाह के प्रभाव से बचाने में मदद करेगा।

नेतन्याहू और जोसेफ औन की हो सकती है मुलाकात
राष्ट्रपति ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि वह निकट भविष्य में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन की व्हाइट हाउस में मेजबानी करेंगे। उन्होंने इस बैठक में शामिल होने को एक ‘ऐतिहासिक सम्मान’ बताया।

तनाव के बीच राहत की खबर
संघर्ष विराम का यह विस्तार ऐसे समय में आया है जब हाल ही में इजरायली हवाई हमलों में कम से कम पांच लोग मारे गए थे, जिनमें लेबनानी पत्रकार अमल खलील भी शामिल थीं। 16 अप्रैल को युद्धविराम लागू होने के बाद से यह सबसे घातक दिन था। लेबनानी अधिकारियों के मुताबिक, 2 मार्च को संघर्ष शुरू होने के बाद से लेबनान में करीब 2,500 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।

हिजबुल्लाह का रुख
हिजबुल्लाह के सांसद हसन फजलल्लाह ने कहा है कि उनका समूह संघर्ष विराम जारी रखने का समर्थन करता है, लेकिन इसके लिए शर्त यह है कि इजरायल इसके नियमों का पूरी तरह पालन करे। हालांकि, उन्होंने इजरायल के साथ सीधे बातचीत के प्रस्ताव को खारिज कर दिया है।

दशकों की शत्रुता के बाद, इजरायल और लेबनान के बीच यह सीधी बातचीत संबंधों में एक असामान्य बदलाव का संकेत दे रही है, जिससे क्षेत्र में शांति की उम्मीद जगी है।

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देश

Cannes में राजस्थान की बेटी ने रचा इतिहास, घूंघट ओढ़ रेड कार्पेट पर उतरीं Ruchi Gurjar…महिलाओं की आजादी के लिए उठाई आवाज

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कान, एजेंसी। जहां एक तरफ बॉलीवुड की बड़ी-बड़ी हस्तियां लाखों-करोड़ों की ड्रेस पहनकर कान फिल्म फेस्टिवल में शिरकत कर रही हैं। वहीं इसी मंच पर राजस्थान की बेटी ने एक नया इतिहास रच दिया है। आपको बता दें कि अभिनेत्री रुचि गुज्जर ने मॉडर्न ड्रेस न पहनते हुए उन्होंने राजपूती पोशाक पहनकर सबका ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है। इतना ही नहीं घाघरा चोली पहनकर उन्होंने साथ में घुघंट भी किया है। रूचि गुज्जर का यह लुक पूरे सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रहा है। इसी के साथ सोशल मीडिया पर अपनी फोटोज के साथ रूचि के एक कैप्शन भी लिखा है। उन्होंने इस कैप्शन में बताया है कि लाइमलाइट लूटने के लिए उन्होंने घूघंट नहीं किया बल्कि इसके पीछे मकसद कुछ और ही था। तो चलिए देखते हैं रूचि गुज्जर की ट्रेंडिंग तस्वीर-

Ruchi Gurjar  Cannes 2026

रूचि गुज्जर ने इंटरनेशनल मंच पर राजस्थान की परंपरा और संस्कृति की एक नई कहानी लिख दी है। यह पोशाक पहनकर वो हर जगह चर्चा का विषय बन चुकी हैं। 

Ruchi Gurjar  Cannes 2026

फोटोज के साथ उन्होंने लिखा है- ”मेरा घूंघट चुप्पी नहीं, विरोध है Freedom From Ghughat”

Ruchi Gurjar  Cannes 2026

कान फेस्टिवल में पहुंचकर उन्होंने महिलाओं के लिए आवाज उठाई है। इसी के साथ उन्होंने कहा है कि हमें घूंघट से आजादी चाहिए, ये मेरी चुप्पी नहीं है। 

Ruchi Gurjar  Cannes 2026

अपने इस खास लुक के जरिए रुचि गुज्जर ने सिर्फ फैशन नहीं दिखाया, बल्कि एक मजबूत सामाजिक संदेश भी दिया। उन्होंने घूंघट प्रथा के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हुए महिलाओं की स्वतंत्रता और पहचान की बात की।

Ruchi Gurjar  Cannes 2026

आपको बता दें कि रूचि गुज्जर ने जो ये पोशाक पहनी है वो रूपा शर्मा द्वारा डिज़ाइन की गई है। गुलाबी रंग की इस लहंगा-चोली पर सिल्वर जरी वाली कढ़ाई की गई है।

Ruchi Gurjar  Cannes 2026

इसी के साथ उन्होंने कोई सोने-चांदी के गहने नहीं बल्कि राजस्थानी गहने, चूड़ियां पहनी हैं। कान फेस्टिवल में उन्होंने घूघंट के साथ एंट्री की लेकिन बाद में इसे हटा दिया। 

कैसे फेमस हुई Ruchi Gurjar ?
इसी के साथ आपको बता दें कि रूचि गुज्जर का पिछले साल वाला लुक भी काफी वायरल हुआ था। पिछली बार उन्होंने अपने गले में  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर का हार पहना था। इसी नेकलेस के बाद उनकी लोकप्रियता पहले से ज्यादा बढ़ गई। 

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विदेश

ईरान की संसद में विवादित प्रस्तावः ट्रंप-नेतन्याहू की हत्या करने वाले को मिलेगा ₹500 करोड़ का ईनाम !

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तेहरान, एजेंसी। ईरान (Iran) में इन दिनों एक बेहद विवादित प्रस्ताव को लेकर चर्चा तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी संसद में ऐसा बिल लाने की तैयारी की जा रही है जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की हत्या करने वाले को लगभग 58 मिलियन डॉलर (रू.500 करोड़) का इनाम देने की बात कही गई है। रिपोर्ट्स के अनुसार यह कदम फरवरी में तेहरान पर हुए हमलों के बाद सामने आया है। दावा किया गया कि उन हमलों में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई (Ali Khamenei) मारे गए थे।

ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के प्रमुख इब्राहिम अज़ीज़ी (Ebrahim Azizi) ने कथित तौर पर कहा कि संसद जल्द इस प्रस्ताव पर चर्चा कर सकती है। एक अन्य सांसद महमूद नबावियन( Mahmoud Nabavian) ने भी ट्रंप और नेतन्याहू के खिलाफ “कार्रवाई” की बात कही। इसी बीच ईरान समर्थक कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म और साइबर समूहों ने भी “Kill Trump” जैसे अभियान चलाने के दावे किए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता की कोशिशें भी जारी हैं। पाकिस्तान और खाड़ी देशों की मध्यस्थता से बातचीत चल रही है, लेकिन अभी तक कोई बड़ा समझौता नहीं हो पाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ सकता है। इजराइल और अमेरिका पहले ही ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं। हालांकि अभी तक ईरानी सरकार की ओर से इस प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी मिलने की पुष्टि नहीं हुई है। कई विश्लेषक इसे राजनीतिक दबाव और प्रचार रणनीति भी मान रहे हैं।

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विदेश

यूक्रेन युद्ध के बीच रूस ने दिखाई परमाणु ताकत ! 64000 सैनिकों संग न्यूक्लियर ड्रिल की शुरू, 200 मिसाइल L व 13 पनडुब्बियां भी शामिल

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मॉस्को, एजेंसी। रूस ने मंगलवार से तीन दिन का बड़ा परमाणु सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया है। रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि इस दौरान बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइल लॉन्च का अभ्यास भी किया जाएगा। इस अभ्यास में करीब 64 हजार सैनिक और 7,800 सैन्य उपकरण शामिल हैं। रूस का कहना है कि यह अभ्यास युद्ध जैसी स्थिति में परमाणु बलों की तैयारी जांचने के लिए किया जा रहा है।

रूस ने बताया कि ड्रिल में 200 से ज्यादा मिसाइल लॉन्चर, 140 से ज्यादा विमान, 73 युद्धपोत और 13 पनडुब्बियां शामिल हैं। इनमें 8 रणनीतिक परमाणु पनडुब्बियां भी हैं। रूस की रॉकेट फोर्स, नॉर्दर्न फ्लीट, पैसिफिक फ्लीट और लंबी दूरी की एयर फोर्स इस अभ्यास में हिस्सा ले रही हैं। रूस ने यह भी कहा कि Belarus में तैनात सामरिक परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी इस दौरान दी जाएगी।

यह सैन्य अभ्यास ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया पहले से रूस-यूक्रेन युद्ध, मध्य पूर्व तनाव और नाटो के साथ बढ़ते टकराव जैसी स्थितियों से गुजर रही है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ सैन्य अभ्यास नहीं बल्कि रूस का शक्ति प्रदर्शन भी है। माना जा रहा है कि Vladimir Putin पश्चिमी देशों और NATO को रूस की परमाणु ताकत का संदेश देना चाहते हैं। हालांकि रूस का कहना है कि यह एक नियमित सैन्य अभ्यास है।

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