Connect with us

कोरबा

बालको ने बाल दिवस पर आयोजित किया पुस्तक महोत्सव

Published

on

बालकोनगर। वेदांता समूह की कंपनी भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको) ने बाल दिवस के अवसर पर सात दिवसीय पुस्तक महोत्सव का आयोजन किया है। शिक्षा और साक्षरता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कंपनी ने विद्या भवन सोसाइटी के सहयोग से अपने सामुदायिक विकास पहल ‘प्रोजेक्ट कनेक्ट’ के अंतर्गत महोत्सव आयोजित किया। यह महोत्सव बच्चों, परिवारजन तथा सभी उम्र के पुस्तक प्रेमियों के लिए खुला है जो समुदाय को साहित्य से जुड़ने के लिए आमंत्रित करता है। 17 नवंबर, 2024 तक चलने वाला महोत्सव पुस्तकों का एक जीवंत वातावरण प्रदान करता है जहाँ बच्चे आलोचनात्मक पठन कौशल के साथ नई रुचियों को खोजने तथा सीखने की ललक को बढ़ा सकते हैं। पिछले 3 दिनों में इस महोत्सव में 1200 से अधिक लोगों ने भाग लिया है, जो समुदाय की मजबूत भागीदारी और उत्साह को दर्शाता है।

पुस्तक महोत्सव का उद्देश्य युवाओं में साहित्य तथा पढ़ने के प्रति रूचि उत्पन्न करना है। 2000 से अधिक पुस्तकों के साथ बच्चों की विविध रुचियों के अनुरूप इंटरैक्टिव कहानी सत्र, आकर्षक कार्यशालाएँ तथा शैक्षिक खिलौने शामिल हैं। जानकारीपूर्ण पुस्तक संग्रह के साथ महोत्सव में रोचक पठन सत्र, लेखक चर्चा, शब्दावली निर्माण तथा गणित-केंद्रित गतिविधियाँ भी शामिल हैं। ये सभी रोचक जानकारी जिज्ञासा जगाने तथा साझा सीखने का अवसर प्रदान करती हैं। इंटरैक्टिव माहौल में बच्चों तथा अभिभावकों के लिए शैक्षिक खेल भी शामिल हैं जिससे परिवार के साथ जुड़ने का अनुभव तथा आलोचनात्मक सोच तथा रचनात्मकता का विकास होता है।

बालको के मुख्य कार्यकारी अधिकारी एवं निदेशक राजेश कुमार ने कहा कि कहा कि हम अपने समुदाय में युवाओं के समग्र विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हमारा बाल दिवस पुस्तक महोत्सव पढ़ने के उत्सव के साथ एक आनंदमय समागम है जो परिवार और समुदाय के बंधन को मजबूत करता है। प्रोजेक्ट कनेक्ट के माध्यम से हम कोरबा में शैक्षिक मानकों को उंचाई प्रदान कर रहे हैं। अगली पीढ़ी को सशक्त बनाने के लिए सार्थक मार्ग तैयार कर रहे हैं जिससे उज्जवल भविष्य की नींव रखी जा सके।

जिला शिक्षा संस्थान (डाइट) के प्राचार्य रामहरी शराफ कार्यक्रम में अपने विचार साझा करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम युवा दिमागों को प्रेरणा प्रदान करने का कार्य करती हैं जो सीखने की लालसा को बढ़ावा देने तथा उनके भविष्य की यात्रा का मार्गदर्शन करते हैं। पुस्तक महोत्सव के माध्यम से बालको का बाल दिवस समारोह बच्चों को उनके विकास में मदद करने के लिए आवश्यक उपकरण और संसाधन प्रदान कर रहा है।
बेटी के साथ कार्यक्रम में शामिल होने वाली सुश्री आशा ने कहा कि हमारे समुदाय में इस तरह के आयोजन को देखना उत्साहजनक है। मेरी बेटी नई पुस्तकों की खोज करने के लिए उत्साहित है। उसके पढ़ने के प्रति विकसित लगाव को देखकर मैं रोमांचित हूं। महोत्सव बच्चों के लिए सीखने, बढ़ने और कल्पनाओं को प्रज्वलित करने का एक शानदार अवसर है।

बालको अपने प्रोजेक्ट कनेक्ट के माध्यम से कोरबा के 6 सरकारी स्कूलों में कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों के लिए नियमित कक्षाएं आयोजित करता है। कक्षा 6 से 8 तक बुनियादी साक्षरता और कक्षा 9 से 12 के लिए विज्ञान, अंग्रेजी, गणित और वाणिज्य (सेमा) विषय पर केंद्रित है। शिक्षण और अतिरिक्त शिक्षण घंटों के साथ छात्रों की भागीदारी को बढ़ावा देना और शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार करना है। अबतक प्रोजेक्ट कनेक्ट से 2,500 से अधिक छात्र लाभान्वित हुए हैं। इसमें करियर परामर्श, शिक्षक प्रशिक्षण और ग्रीष्मकालीन एवं शीतकालीन शिविर और रीडिंग मेला जैसी सुविधा प्रदान की गई हैं। एक समग्र शिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र बनाकर प्रोजेक्ट कनेक्ट कोरबा समुदाय में आत्मविश्वास से भरपूर शिक्षार्थियों को आकार देता है।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

कोरबा

न्यू कोरबा अस्पताल में न्यूरो केयर की बड़ी पहल: 30 दिवसीय मेगा न्यूरो कैंप शुरू, 100 से अधिक लोग लाभान्वित

Published

on

कोरबा। कोसाबाड़ी स्थित न्यू कोरबा अस्पताल में न्यूरो संबंधी मरीजों के लिए एक बड़ी और राहत भरी पहल शुरू की है। अस्पताल में 30 दिवसीय मेगा न्यूरो कैंप की शुरुआत की गई है, जो 31 जनवरी तक पूरे माह चलेगा। इस कैंप के तहत मरीजों को न्यूरो परामर्श निशुल्क एवं आवश्यक जांच में अधिकतम छूट उपलब्ध कराई जा रही है।
मेगा कैंप में प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. शिवानी प्रगदा एवं न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मनीष गोयल द्वारा प्रतिदिन निशुल्क ओपीडी सुबह 11 से 2 बजे तक व शाम 6 से 8 बजे तक परामर्श दिया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, न्यूरो केयर डिपार्टमेंट में सुविधाओं के विस्तार की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरो फिजियोथैरेपिस्ट, न्यूरोसर्जन के साथ न्यूरो साइकाइट्री की सुविधा भी जोड़ दी गई है, जिससे न्यूरो से संबंधित किसी भी आवश्यकता वाले मरीजों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि अब सभी न्यूरो जांच, परामर्श, फिजियोथेरेपी और सर्जरी की सुविधा एक ही छत के नीचे उपलब्ध है, जो कोरबा जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में न्यूरो बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण मरीज समय पर डॉक्टर तक नहीं पहुंच पाते। अधिकांश मरीज तब अस्पताल आते हैं जब बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है। ऐसे में इस तरह के मेगा कैंप समय पर जांच और उपचार के माध्यम से बीमारी को बढ़ने से रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि ठंड के मौसम में बुजुर्गों में ब्रेन हेमरेज और लकवा (पैरालिसिस) का खतरा अधिक रहता है, जिसके प्रमुख कारण हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ती उम्र और नशे की आदतें हैं। उन्होंने प्राथमिक देखभाल की जानकारी देते हुए कहा कि बेहोश मरीज को खाना या पानी नहीं देना चाहिए और अस्पताल ले जाते समय मरीज को करवट देकर रखना चाहिए। मिर्गी (एपिलेप्सी) को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों पर चिंता जताते हुए डॉक्टरों ने कहा कि यह कोई अभिशाप नहीं, बल्कि एक सामान्य न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। झाड़-फूंक और अंधविश्वास के कारण मरीजों को प्रताड़ित करना गलत है और इससे बीमारी और गंभीर हो सकती है। न्यू कोरबा अस्पताल का यह 30 दिवसीय मेगा न्यूरो कैंप न सिर्फ इलाज बल्कि जनजागरूकता की दिशा में भी एक सराहनीय पहल माना जा रहा है, जिससे जिले के आम लोगों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। पिछले 15 दिनों में 100 से भी अधिक मरीजों ने अपना रजिस्टेशन कराकर निशुल्क ओपीडी परामर्श लिया।

Continue Reading

कोरबा

सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य आयोजन

Published

on

220 मातृशक्तियों की सहभागिता, नन्हे भैया-बहनों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया पारिवारिक संस्कारों का संदेश
कोरबा। सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी, कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य, सुव्यवस्थित एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्राचार्य राजकुमार देवांगन रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में दीपक सोनी (कोरबा विभाग समन्वयक) एवं संजय कुमार देवांगन (प्रधानाचार्य, पूर्व माध्यमिक) उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत विद्यालय परिवार द्वारा पारंपरिक रीति से किया गया।


अपने संबोधन में अतिथियों ने मातृशक्ति की भूमिका को बाल संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में माता का योगदान सबसे निर्णायक होता है। इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे भैया-बहनों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। बच्चों ने आकर्षक नृत्य, गीत एवं लघु प्रस्तुतियों के माध्यम से पारिवारिक वातावरण, नैतिक मूल्यों, अनुशासन एवं संस्कारों का संदेश दिया। बच्चों की सहज एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित माताओं एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।


कार्यक्रम में कुल 220 मातृशक्तियों की गरिमामयी सहभागिता रही, जिससे मातृसंगोष्ठी अत्यंत सफल रही। माताओं ने विद्यालय की शिक्षण पद्धति, संस्कार आधारित शिक्षा एवं गतिविधियों की सराहना की। शिशु नगरी कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय की 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं एवं सहयोगी संस्थाओं की जीवंत प्रदर्शनी लगाई गई। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास, कौशल निर्माण, संस्कार शिक्षा एवं व्यवहारिक ज्ञान को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। अभिभावक बंधुओं के सहयोग से आनंद मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्राथमिक विभाग के भैया-बहनों ने विभिन्न खेलों, गतिविधियों एवं मनोरंजन कार्यक्रमों में भाग लेकर भरपूर आनंद उठाया। आनंद मेला बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।


कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रधानाचार्य पंकज तिवारी ने सभी अतिथियों, मातृशक्तियों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यालय एवं परिवार के बीच सहयोग और विश्वास और अधिक मजबूत होता है। उप-प्रधानाचार्य श्रीमती सीमा त्रिपाठी सहित समस्त आचार्य परिवार ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

Continue Reading

कोरबा

बॉयोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन कर संजय सुमन ने कमाए साल में 3.20 लाख

Published

on

कोरबा। विकासखंड करतला के ग्राम बड़मार निवासी संजय सुमन ने मछली पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत नवीन बॉयोफ्लॉक तकनीक अपनाकर उन्होंने कम भूमि में अधिक उत्पादन कर उल्लेखनीय आय अर्जित की है।
संजय सुमन ने अपनी 25 डिसमिल भूमि पर बॉयोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया। इस तकनीक में तालाब में लाइनर बिछाकर पानी भरा जाता है और तेजी से बढ़ने वाली उन्नत प्रजाति की मछलियों का पालन किया जाता है। इसकी विशेषता है कि वर्ष में दो बार उत्पादन लेकर अधिक आय प्राप्त की जा सकती है।
सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत उन्हें 8.40 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। पिछले वर्ष संजय सुमन ने बॉयोफ्लॉक तालाब से 6 मैट्रिक टन मछली उत्पादन किया, जिसे बेचकर 07 लाख 20 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई। उत्पादन लागत निकालने के बाद उन्हें 03 लाख 20 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
सफलता से उत्साहित संजय सुमन इस वर्ष अपने कार्य का विस्तार कर उत्पादन एवं आय को दुगुना करने की योजना बना रहे हैं। बॉयोफ्लॉक तकनीक की खासियत यह है कि कम भूमि में अधिक उत्पादन संभव होता है, जिससे किसानों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
संजय सुमन की यह कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

Continue Reading
Advertisement

Trending