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कोरबा

शहर सौदंर्यीकरण को मिल रहा नया लुक , डिवाईडर बन रहे ग्रीन बेल्ट

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महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने आयुक्त आशुतोष पाण्डेय की उपस्थिति में किया रोड डिवाईडर प्लाटेंशन का लोकार्पण

कोरबा। नगर पालिक निगम कोरबा द्वारा शहर में सौदंर्यीकरण को नित नये आयाम दिये जा रहे हैं, सड़कों को नया लुक मिल रहा है एवं डिवाईडर ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित हो रहे हैं, डिवाईडरों में हरीतिमा के साथ रंग बिरंगे फूल मुस्कुरा रहे हैं। आज महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय की उपस्थिति में टीपीनगर से पावर हाउस मुख्य मार्ग क्षेत्र में निगम द्वारा किये गये रोड डिवाईडर प्लांटेशन का लोकार्पण किया।

निगम द्वारा शहर की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने के साथ-साथ शहर का सौदंर्यीकरण कर इसे संजाने संवारने की दिशा में नित नये काम किये जा रहे हैं, एक ओर जहॉं शहर की स्वच्छता पर फोकस रखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर थीम आधारित पेंटिंग चित्रकारी लघु उद्यानिकी कार्य के साथ-साथ थीम आधारित रोड साईट व डिवाईडर प्लांटेशन पर भी कार्य हो रहा है। इसी कड़ी में निगम द्वारा टीपीनगर से पावर हाउस मुख्य मार्ग क्षेत्र में स्थित मुख्य मार्ग साईट डिवाईडर पर 160 पाम के पौधें रोपित कर ग्रीन बेल्ट का स्वरूप दिया गया है। 

आज महापौर श्रीमती संजूदेेवी राजपूत ने आयुक्त आशुतोष पाण्डेय की उपस्थिति में उक्त रोड डिवाईडर प्लांटेशन का लोकार्पण किया। इस मौके पर उद्यान अधीक्षक आनंद राठौर ने बताया कि उक्त सम्पूर्ण मार्ग पर निगम द्वारा 600 पाम के पौधे रोपित किये जायेंगे, ताकि इस सम्पूर्ण मुख्य मार्ग को ग्रीन बेल्ट के रूप में विकसित व सुसज्जित किया जा सके।

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कोरबा

अब सूरज से रोशन होता है घर, बिजली बिल की चिंता हुई दूर

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प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना से आयुष अग्रवाल के परिवार को मिली आर्थिक राहत, स्वच्छ ऊर्जा से पर्यावरण संरक्षण की ओर बढ़े कदम

कोरबा। सूरज की रोशनी अब केवल घर को उजाला देने का माध्यम नहीं रही, बल्कि परिवारों के लिए बचत और आत्मनिर्भरता का जरिया भी बन रही है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना ने आम परिवारों को अपने घर की छत पर सौर ऊर्जा का उत्पादन करने का अवसर दिया है। इससे जहां बिजली खर्च में राहत मिल रही है, वहीं स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देकर पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ रहा है।
कोरबा जिले के डीडीएम रोड निवासी आयुष अग्रवाल के परिवार ने भी इस योजना का लाभ उठाकर अपने घर की ऊर्जा जरूरतों को सौर ऊर्जा से जोड़ दिया है। संयुक्त परिवार में रहने वाले आयुष के घर में बिजली की खपत अपेक्षाकृत अधिक थी। पंखे, कूलर, फ्रिज, एसी सहित कई घरेलू उपकरणों के नियमित उपयोग के कारण सामान्य दिनों में भी बिजली की खपत लगभग 700 यूनिट रहती थी, जबकि गर्मियों में यह बढ़कर 1200 से 1300 यूनिट तक पहुंच जाती थी। ऐसे में हर महीने आने वाला बिजली बिल परिवार के बजट पर अच्छा-खासा असर डालता था।
आयुष बताते हैं कि प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना की जानकारी उन्हें अपने जीजा जी के माध्यम से मिली। योजना के बारे में जानकारी मिलने के बाद उन्होंने इसका लाभ लेने का निर्णय लिया। उन्होंने अपने ताऊ जी के नाम से आवेदन कर अपने घर की छत पर 10 किलोवाट क्षमता का सोलर पैनल सिस्टम स्थापित कराया। योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी और जिला प्रशासन एवं ऊर्जा विभाग से प्राप्त आवश्यक मार्गदर्शन के कारण सोलर संयंत्र स्थापित करने की प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी हो सकी।
सोलर पैनल स्थापित होने के बाद आयुष के परिवार के बिजली खर्च में बड़ा बदलाव आया है। पहले जहां हर महीने बिजली बिल के रूप में हजारों रुपये खर्च होते थे, वहीं अब बिजली बिल लगभग शून्य के करीब पहुंच गया है। बिजली खर्च में हुई इस बचत से परिवार को आर्थिक राहत के साथ मानसिक सुकून भी मिला है। अब उन्हें न मीटर की रीडिंग की चिंता रहती है और न ही हर महीने बिजली बिल आने का इंतजार रहता है।
आयुष कहते हैं, “हमारे संयुक्त परिवार में बिजली की खपत काफी ज्यादा थी। सामान्य दिनों में करीब 700 यूनिट और गर्मियों में 1200 से 1300 यूनिट तक बिजली की खपत हो जाती थी। प्रधानमंत्री सूर्यघर योजना के तहत सोलर पैनल लगवाने के बाद बिजली बिल लगभग खत्म हो गया है। अब जो राशि बिजली बिल में खर्च होती थी, वह बचत के रूप में हमारे काम आ रही है।”
सौर ऊर्जा अपनाने से आर्थिक लाभ के साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी आयुष का परिवार अपनी भूमिका निभा रहा है। वे कहते हैं, “अब मैं गर्व से कह सकता हूं कि हमारे घर की बिजली की जरूरत स्वच्छ और हरित ऊर्जा से पूरी हो रही है। सूरज से मिलने वाली ऊर्जा का उपयोग कर हम अपने परिवार के खर्च को कम करने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान दे रहे हैं।”
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना ने आयुष जैसे परिवारों के लिए ऊर्जा आत्मनिर्भरता का नया रास्ता खोला है। घर की छत पर स्थापित सोलर पैनल अब उनके लिए केवल बिजली उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक बचत, स्वच्छ ऊर्जा और बेहतर भविष्य की उम्मीद बन गए हैं। आवश्यकता से अधिक बिजली उत्पादन होने पर उसे ग्रिड में भेजने की संभावनाओं ने इस योजना को और भी उपयोगी बना दिया है।
आयुष अग्रवाल की कहानी यह संदेश देती है कि जब आधुनिक तकनीक और जनकल्याणकारी योजनाएं एक-दूसरे से जुड़ती हैं, तो उसका सीधा लाभ परिवार की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों को मिलता है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के माध्यम से कोरबा में भी घरों की छतें अब केवल धूप सेंकने की जगह नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन और आत्मनिर्भरता के नए केंद्र बन रही हैं। सूरज की हर किरण अब परिवारों की बचत और पर्यावरण के संरक्षण की नई कहानी लिख रही है।

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कोरबा

पीएम आवास शहरी 2.0 ने बदली गुंजा साहू की जिंदगी, साकार हुआ पक्के मकान का सपना

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जहां हर बरसात डराती थी, अब वहीं पक्का घर देता है सुकून- हितग्राही- गुंजा साहू

कोरबा। कभी कच्चे मकान की दीवारों और टपकती छत के बीच गुजर-बसर करने वाली काशीनगर निवासी श्रीमती गुंजा साहू के लिए अपना पक्का मकान किसी सपने से कम नहीं था। सीमित आमदनी के कारण परिवार के लिए पक्का घर बनाना आसान नहीं था। बरसात आते ही छत से पानी टपकने लगता था, दीवारों और फर्श में सीलन भर जाती थी और मिट्टी के घर में जहरीले सांप-बिच्छुओं का डर भी हमेशा बना रहता था। ऐसे में हर मौसम परिवार के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होता था।
श्रीमती गुंजा साहू अपने अनुभव साझा करते हुए कहती हैं, “पहले हमारा घर कच्चा था। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता था और दीवारों व फर्श में सीलन हो जाती थी। घर में बच्चों और परिवार के सदस्यों को लेकर हमेशा चिंता रहती थी। मिट्टी के घर में सांप-बिच्छू आने का डर भी बना रहता था। पक्का मकान बनाने की बहुत इच्छा थी, लेकिन परिवार की सीमित आमदनी में यह संभव नहीं हो पा रहा था।”
उनके पति सोनू राम साहू ठेका कर्मी के रूप में कार्य करते हैं। सीमित आय के बीच परिवार की रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना ही प्राथमिकता थी। ऐसे समय में पीएम आवास शहरी 2.0 योजना उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर आई। योजना के तहत आवास निर्माण के लिए उन्हें तीन किश्तों में लगभग 2.50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्राप्त हुई। शासन से मिली सहायता और अपनी बचत की राशि को मिलाकर परिवार ने अपने पक्के मकान का निर्माण पूरा किया।
श्रीमती गुंजा साहू कहती हैं, “जब हमें पीएम आवास योजना का लाभ मिला, तो लगा कि अब हमारा भी पक्का घर बन सकता है। शासन से मिली सहायता ने हमारे लिए यह सपना पूरा करना आसान कर दिया। आज हमारा अपना पक्का मकान है। अब बारिश में छत से पानी टपकने की चिंता नहीं रहती, न दीवारों और फर्श में सीलन की परेशानी है और न ही सांप-बिच्छुओं का डर सताता है। परिवार सुरक्षित माहौल में आराम से रह रहा है।”
पक्का मकान मिलने के बाद केवल घर की तस्वीर ही नहीं बदली, बल्कि परिवार के जीवन में सुरक्षा, सुविधा और आत्मविश्वास भी बढ़ा है। जिस घर में कभी हर बारिश चिंता लेकर आती थी, आज वही पक्का आशियाना परिवार को सुकून और सुरक्षित भविष्य का भरोसा दे रहा है। गुंजा साहू के लिए यह मकान महज ईंट और सीमेंट से बना घर नहीं, बल्कि वर्षों की चिंता से मुक्ति और सम्मानपूर्वक जीवन जीने का आधार बन गया है।
अपने अनुभव को व्यक्त करते हुए श्रीमती गुंजा साहू कहती हैं, “हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारा पक्के घर का सपना इतनी जल्दी पूरा होगा। आज अपने घर में परिवार के साथ बहुत खुशी और सुकून मिलता है। हमारे लिए यह घर बहुत बड़ी सौगात है। इसके लिए हम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय  और शासन के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।”
पीएम आवास शहरी 2.0 योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को केवल पक्की छत ही नहीं मिल रही, बल्कि उनके जीवन में सुरक्षा, सम्मान, स्थायित्व और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद भी जुड़ रही है। गुंजा साहू का पक्का मकान इसी बदलाव की एक सशक्त मिसाल है।

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कोरबा

बिलासपुर जोन की 10 ट्रेनें कैंसिल:13-14 सितंबर को रायपुर-उरकुरा सेक्शन में काम, तीजा पर मायके जाने वाली महिलाओं की बढ़ी परेशानी

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बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में तीज पर्व पर मायके जाने की तैयारी कर रही महिलाओं और दूसरे यात्रियों की परेशानी बढ़ सकती है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल में उरकुरा स्टेशन पर यार्ड रीमॉडलिंग के लिए प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन-इंटरलॉकिंग का काम किया जाएगा।

इसके चलते 13 और 14 सितंबर को रायपुर, बिलासपुर, कोरबा, गेवरा रोड और इतवारी के बीच चलने वाली 10 ट्रेनें रद्द रहेंगी। वहीं 2 मेमू ट्रेनों का परिचालन बिलासपुर तक सीमित रहेगा। रेलवे के मुताबिक यह काम उरकुरा-रायपुर स्टोर डिपो के बीच दोहरीकरण परियोजना के तहत उरकुरा स्टेशन के यार्ड रीमॉडलिंग के लिए किया जा रहा है।

यात्रियों के लिए जरूरी बात

तीजा पर्व के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं और परिवार मायके आने-जाने के लिए ट्रेनों का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में 13 और 14 सितंबर को यात्रा से पहले ट्रेन नंबर जरूर चेक कर लें। रद्द ट्रेन से यात्रा की योजना है तो वैकल्पिक ट्रेन या बस की व्यवस्था पहले कर लेना बेहतर होगा।

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