छत्तीसगढ़
CM ने मंत्री–विधायकों के साथ सुनी मन की बात:स्वदेशी उत्पाद के उपयोग की अपील की, मुख्यमंत्री बोले- GST 2.0 कारोबारी-खरीददार दोनों को फायदा
रायपुर,एजेंसी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार (28 सितंबर) को राजधानी रायपुर के शंकर नगर स्थित सिंधु पैलेस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रेडियो वार्ता ‘मन की बात’ की 126वीं कड़ी सुनी। इस मौके पर उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम करोड़ों देशवासियों को जोड़ने, प्रेरित करने और नवाचार व उत्कृष्ट कार्यों को सामने लाने का सशक्त माध्यम है।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह और स्वर कोकिला लता मंगेशकर को उनकी जयंती पर नमन किया और श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने प्रदेशवासियों को शक्ति उपासना के पर्व नवरात्रि की शुभकामनाएं भी दीं।

सीएम साय मीडिया से चर्चा करते हुए।
स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना जरूरी – CM
सीएम साय ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देशभर में जीएसटी बचत उत्सव मनाया जा रहा है। जीएसटी दरों में कटौती से अब दैनिक जरूरत की वस्तुओं से लेकर वाहन, कृषि उपकरण और मशीनरी तक सस्ती हुई हैं। इससे आम लोगों को बड़ी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना जरूरी है।

मन की बात कार्यक्रम सुनते हुए सीएम-विधायक और बीजेपी के पदाधिकारी।
खादी उत्पादों के उपयोग की अपील
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम स्वदेशी वस्तुएं खरीदते हैं, तो हम केवल सामान नहीं लेते, बल्कि एक परिवार की उम्मीद, कारीगर की मेहनत और उद्यमी के सपनों को सम्मान देते हैं।
उन्होंने खादी उत्पादों की बढ़ती लोकप्रियता का उल्लेख करते हुए सभी से इसके उपयोग की अपील की।
इस अवसर पर रायपुर उत्तर विधायक पुरंदर मिश्रा, सीजीएमएससी अध्यक्ष दीपक म्हस्के, अल्पसंख्यक आयोग अध्यक्ष अमरजीत छाबड़ा समेत बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।
कोरबा
शीतल जल, नींबू, जलजीरा और शरबत से मिल रही राहत, मानव सेवा जल केंद्र में प्रतिदिन सैकड़ों लोग लाभान्वित
भीषण गर्मी में राहत का ठिकाना,राहगीरों से लेकर ग्रामीणों का सहारा बना मानव सेवा जल केंद्र, उमश भारी बढ़ती गर्मी में बढ़ रही भीड़
कोरबा। मानव सेवा और जनकल्याण की भावना से प्रेरित द्वारिका नगरी सामाजिक विकास ट्रस्ट द्वारा संचालित ‘मानव सेवा जल केंद्र’ इन दिनों लोगों के लिए बड़ा राहत का केंद्र बना हुआ है। एसपी कार्यालय के सामने सारनिया होटल के बगल में स्थापित इस जल सेवा केंद्र में प्रतिदिन सैकड़ों राहगीरों, कर्मचारियों, ग्रामीणों एवं जरूरतमंद नागरिकों को नींबू जलजीरा, शीतल शरबत एवं ठंडा पेयजल निःशुल्क उपलब्ध करा रहा है।

प्रदेश में बढ़ती गर्मी और लू की स्थिति को देखते हुए कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों से अधिक से अधिक प्याऊ संचालित करने की अपील की थी। इसी क्रम में नगर पालिक निगम कोरबा के सहयोग से द्वारिका नगरी सामाजिक विकास ट्रस्ट ने नौतपा की भीषण गर्मी के दौरान मानव सेवा जल केंद्र की शुरुआत की थी।

हालांकि अब नौतपा समाप्त हो चुका है, लेकिन गर्मी का प्रकोप अभी भी बरकरार है। तेज धूप और उमस भरे मौसम के बीच लोगों को राहत पहुंचाने के उद्देश्य से ट्रस्ट द्वारा यह सेवा लगातार जारी रखी गई है। परिणामस्वरूप प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर शीतल पेयजल, नींबू जलजीरा और शरबत का लाभ उठा रहे हैं। यह पेय पदार्थ लोगों की प्यास बुझाने के साथ-साथ उन्हें गर्मी और लू के प्रभाव से भी राहत प्रदान कर रहा है।

मानव सेवा जल केंद्र में सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक लगातार सेवा दी जा रही है। इसका लाभ एसपी कार्यालय, कलेक्टर कार्यालय, जिला एवं सत्र न्यायालय, सिविल लाइन थाना, स्टेट बैंक सहित आसपास स्थित विभिन्न सरकारी एवं निजी कार्यालयों में आने वाले नागरिक उठा रहे हैं। वहीं आसपास के दुकानदार और कर्मचारी भी यहां पहुंचकर ठंडा पानी एवं शीतल पेय का सेवन कर राहत महसूस कर रहे हैं।

जल सेवा केंद्र के समीप जनपद पंचायत कार्यालय एवं जिला पंचायत कार्यालय स्थित होने के कारण दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले ग्रामीणजन भी बड़ी संख्या में इस सेवा का लाभ उठा रहे हैं। पंचायत संबंधी कार्यों के लिए कार्यालय पहुंचने वाले लोगों के लिए यह केंद्र भीषण गर्मी में राहत का महत्वपूर्ण साधन बन गया है।

स्थानीय लोगों ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि जहां नौतपा समाप्त होने के बाद भी गर्मी से राहत नहीं मिली है, वहीं मानव सेवा जल केंद्र लगातार लोगों की सेवा कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। ट्रस्ट द्वारा किए जा रहे इस निःस्वार्थ सेवा कार्य की चारों ओर प्रशंसा हो रही है।
“गर्मी अभी बाकी है, इसलिए सेवा भी जारी है”

द्वारिका नगरी सामाजिक विकास ट्रस्ट के पदाधिकारियों एवं सदस्यों ने बताया कि यह जल सेवा केंद्र नौतपा की भीषण गर्मी को देखते हुए शुरू किया गया था। हालांकि नौतपा समाप्त हो चुका है, लेकिन क्षेत्र में अभी भी तेज गर्मी और उमस का दौर जारी है। यही कारण है कि प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचकर शीतल पेयजल, नींबू जलजीरा और शरबत का लाभ उठा रहे हैं।

ट्रस्ट के सदस्यों ने कहा कि मानव सेवा जल केंद्र में लगातार बढ़ रही लोगों की भीड़ और जरूरत को देखते हुए यह सेवा कार्य फिलहाल जारी रखा गया है। जब तक लोगों को गर्मी से पूरी तरह राहत नहीं मिल जाती, तब तक यह जनसेवा अभियान निरंतर संचालित किया जाएगा। ट्रस्ट का उद्देश्य भीषण गर्मी के दौरान राहगीरों, ग्रामीणों, कर्मचारियों और जरूरतमंद नागरिकों को राहत पहुंचाना है।
छत्तीसगढ़
रायपुर : नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और पॉपकॉर्न स्टेटस से बाहर निकलने की आवश्यकता है – रमेन डेका
पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में शामिल हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री
9 हजार 194 विद्यार्थियों को प्रदान की गई उपाधि


रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने कहा है कि डिजिटल एडिक्शन आज की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बनती जा रही है। यह केवल व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पारिवारिक और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर रहा है। नई पीढ़ी को डिजिटल एडिक्शन और ‘पॉपकॉर्न मेंटल स्टेटस‘ से बाहर निकलने की आवश्यकता है, क्योंकि इससे सोचने-समझने की क्षमता प्रभावित होती है और केवल कृत्रिम संतुष्टि प्राप्त होती है।

राज्यपाल रमेन डेका ने आज पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह के अध्यक्षीय उद्बोधन में उक्त बातें कही। समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। समारोह में मेडिकल, डेंटल, आयुर्वेद, होम्योपैथिक, मेडिकल बायोटेक, बीपीपी, एमपीटी, नर्सिंग, बीएएसएलपी सहित अन्य संकायों में 7545 स्नातक और 1645 स्नातकोत्तर एवं 5 सुपर स्पेशयलिटी उपाधि प्रदान की गई तथा विभिन्न संकायों में सर्वाेच्च अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियांे को विभिन्न स्वर्ण पदक प्रदान किए गए।

राज्यपाल ने कहा कि यदि दृढ़ संकल्प के साथ प्रयास किया जाए तो 30 दिनों के भीतर डिजिटल एडिक्शन से काफी हद तक मुक्ति पाई जा सकती है। बच्चों को मोबाइल फोन से दूर रखते हुए खेल-कूद और बाहरी गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। आज के बच्चे सीमित दायरे में रह रहे हैं, जिससे उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है।

राज्यपाल ने नवस्नातक चिकित्सकों से कहा कि जिस प्रकार वे राज्यपाल होने के नाते प्रदेश की जनता के हित के बारे में सोचते हैं, उसी प्रकार आपका दायित्व मरीजों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति समर्पित रहना है। चिकित्सकों के सफेद कोट पर कभी कोई दाग नहीं आना चाहिए। उन्होंने कहा कि आप सभी ने मानवता की सेवा के उद्देश्य से इस क्षेत्र का चयन किया है। कठिन परिश्रम के बाद प्राप्त यह डिग्री आपके जीवन की दूसरी पारी की शुरुआत है। जहां भी कार्य करें, मरीज के हित को सर्वाेच्च प्राथमिकता दें और ऐसा कार्य करें जो देश, प्रदेश और समाज में मिसाल बने।
श्री डेका ने कहा कि वर्तमान समय में नेबरहुड डॉक्टरों की सबसे अधिक आवश्यकता है। पहले फैमिली फिजिशियन की परंपरा थी, जो मरीज और उसके परिवार की परिस्थितियों को भलीभांति समझते थे। चिकित्सा क्षेत्र में उस आत्मीयता को पुनर्जीवित करने की जरूरत है। किसी भी मरीज के लिए गोल्डन ऑवर अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में चिकित्सकों की त्वरित निर्णय क्षमता मरीज का जीवन बचा सकती है। राज्यपाल ने कहा कि आज के छात्र इंटरनेट युग के विद्यार्थी हैं। विज्ञान निरंतर आगे बढ़ रहा है और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाएं खोल रही है। टेलीमेडिसिन जैसी तकनीकों का उपयोग दूरस्थ क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल ने सभी विद्यार्थियों और नागरिकों से ‘एक पेड़ मां के नाम‘ अभियान के तहत पौधारोपण करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पशु, मानव और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है और इसके लिए प्रत्येक व्यक्ति को अपना योगदान देना चाहिए।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आज का दिन केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं है बल्कि समाज और मानवता के प्रति नई दायित्वों के निर्वहन का संकल्प लेने का अवसर है। विद्यार्थियों की सफलता उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ-साथ छत्तीसगढ़ के प्रगति और विश्वविद्यालयों की प्रतिष्ठा को दर्शाता है।
श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ केवल खनिज और कृषि आधारित राज्य के रूप में ही नहीं बल्कि ज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के प्रमुख केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित करें यह हमारा लक्ष्य होना चाहिए। श्री साय ने छत्तीसगढ़ में स्वास्थ अधोसंरचना विस्तार, साथ ही बस्तर में नक्सल उन्मूलन के पश्चात विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्याे का भी उल्लेख किया।
लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य करना लोगों की सेवा का बड़ा अवसर और महती जिम्मेदारी है। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार पर विस्तृत जानकारी दी।
अध्यक्ष, राष्ट्रीय विशेषज्ञ पैनल, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग, नई दिल्ली एवं दीक्षांत समारोह अभिभाषक डॉ वेदप्रकाश मिश्रा ने भी अपना संबोधन दिया। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. पी. के. पात्रा ने स्वागत उद्बोधन एवं अकादमिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा सहित विश्वविद्यालय के कार्यपरिषद के सदस्य, अधिष्ठाता, प्राध्यापकगण, विद्यार्थी एवं अभिभावक उपस्थित थे।
छत्तीसगढ़
अधिक मास में सेवा का संकल्प: सुखाश्रम पहुंचकर बुजुर्गों का किया सम्मान
सनातनी व्रत परम्पराओं के माध्यम से स्वस्थ एवं संवेदनशील समाज का निर्माण हमारा लक्ष्य: रेखा आहुजा
सुनील चिंचोलकर
बिलासपुर। अधिक मास में ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के विशेष आध्यात्मिक महत्व के अवसर पर सामाजिक संस्था “सेवा एक नई पहल” द्वारा नर सेवा को नारायण सेवा मानते हुए स्थानीय जोरापारा स्थित सुवाणी शांतिधाम सुखाश्रम में सेवा कार्यक्रम आयोजित किया गया। संस्था के सदस्यों ने आश्रम में निवासरत बुजुर्ग प्रभुजनों का सेवा-सत्कार कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।

कार्यक्रम संस्था की संयोजिका रेखा आहुजा के मार्गदर्शन एवं सहयोग से संपन्न हुआ। इस अवसर पर चकरभाटा से पधारी समाजसेवी इंदिरा दादी, रेनू, प्रिया, अंजू लाल, उर्वी आहुजा तथा आश्रम संचालक श्याम तिवारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में सहयोग के लिए डिवाइन ग्रुप के प्रति भी आभार व्यक्त किया गया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में संस्था की संयोजिका रेखा आहुजा ने कहा कि अधिक मास और सनातन व्रत परम्पराएं केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि समाज में संवेदनशीलता, सेवा और समरसता के संस्कार विकसित करने का सशक्त माध्यम हैं।
उन्होंने कहा, “हमारी सेवाओं का उद्देश्य केवल भौतिक अथवा दैनिक उपयोग की वस्तुओं का वितरण नहीं है। हमारा मुख्य ध्येय सनातनी व्रत परम्पराओं को माध्यम बनाकर एक स्वस्थ, संस्कारित और संवेदनशील समाज का निर्माण करना है। हम चाहते हैं कि समाज का कोई भी व्यक्ति—चाहे वह बालक हो, वृद्ध हो, परित्यक्त हो या किसी भी परिस्थिति में जीवन यापन कर रहा हो—अपने आपको अकेला या निराश्रित महसूस न करे। उनके जीवन में उत्साह, आत्मीयता और उल्लास का संचार हो, यही हमारी संस्था की सबसे बड़ी सफलता होगी।”
कार्यक्रम के दौरान बुजुर्गों के साथ आत्मीय संवाद भी किया गया, जिससे आश्रम का वातावरण स्नेह, सम्मान और अपनत्व की भावना से सराबोर हो गया। उपस्थित सभी सदस्यों ने भविष्य में भी ऐसे सेवा कार्यों को निरंतर जारी रखने का संकल्प लिया।
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