छत्तीसगढ़
2 ट्रकों की टक्कर..जिंदा जलकर ड्राइवर की मौत:रायगढ़ के घरघोड़ा में हादसा, पहले गाड़ी निकालने के चक्कर में संकरे पुल पर भिड़े
रायगढ़,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में 2 ट्रकों की टक्कर के बाद जिंदा जलकर एक ट्रक ड्राइवर की मौत हो गई। घटना घरघोड़ा थाना क्षेत्र के कुडुमकेला मार्ग पर दोपहर 1 बजे हुई।
जहां हादसा हुआ कुरकुट नाला का पुल संकरा है। दोनों गाड़ी के ड्राइवर ने अनुमान लगाया कि वे पहले गाड़ी निकाल लेंगे। लेकिन स्पीड कंट्रोल नहीं होने के कारण दोनों की भिंड़त हुई, और ट्रकों में आग लग गई।
टक्कर के बाद एक ड्राइवर केबिन में फंस गया, बाहर नहीं निकल पाया और जिंदा जल गया। मृतक सूरजपुर का रहने वाला था। वहीं दूसरे गाड़ी के ड्राइवर ने कूदकर अपनी जान बचा ली। घटना के 3 घंटे बाद आग पर काबू पाया गया। केबिन में फंसे ड्राइवर के जले शव को बाहर निकाला गया।

घटना घरघोड़ा से कुडुमकेला मार्ग पर पुल के ऊपर हुआ।

वाहनों से उठता धुआं दूर-दूर तक दिखाई दिया। करीब 3 घंटे बाद आग बुझ पाया।

टक्कर इतनी भीषण थी कि, कुछ ही मिनटों में दोनों वाहनों में आग लग गई।
गाड़ियों में सरिया और कोयला लोड था
DSP सुशांतो बनर्जी के मुताबिक, एक ट्रक जामपाली माइंस से बालोद रेल्वे साइडिंग तक कोयला लेकर जा रही थी। दूसरी ट्रक में सरिया लोड था। वह बालोद से जामपाली की ओर जा रही थी।
दोनों गाड़ियों के ड्राइवरों ने पहले गाड़ी निकालने के चक्कर में आमने सामने टकरा गए। टक्कर इतनी भीषण थी कि, कुछ ही मिनटों में दोनों गाड़ियों में आग लग गई। दोनों वाहनों के ड्राइवर केबिन में अंदर फंस गए थे। उन्हें बाहर निकलने का मौका नहीं मिल सका।
फायर ब्रिगेड ने पाया काबू
इनमें एक ट्रक ड्राइवर की जिंदा जलकर मौत की पुष्टि हो चुकी है। मृतक की पहचान कमलेश प्रसाद देवांगन (52) के रुप में हुई है। वह सूरजपुर का रहने वाला था, विपुल कंपनी में कार्यरत था। दूसरे ड्राइवर ने कूदकर अपनी जान बचाई थी।
सूचना के बाद मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने आग पर काबू पा लिया। जली गाड़ियों को हटाकर पुल से आवागमन शुरू कर दिया गया है।
दूर तक दिखा धुआं, सड़क पर लगा जाम
हादसे के बाद दूर-दूर तक धुआं दिखाई दे रहा था। जिसके बाद स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे, लेकिन आग इतनी भयंकर थी कि किसी को बचाया नहीं जा सका।
घटना के चलते रायगढ़-घरघोड़ा मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। आग पर पूरी तरह से अभी भी काबू नहीं पाया सका है।
सूचना मिलते ही घरघोड़ा पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं थी। आग पर काबू पाने के लिए 3 ये ज्यादा दमकल वाहनों की मदद ली गई थी।

वाहनों में टक्कर लगने के बाद आग लग गई। दूर से धुंआ नजर आ रहा है।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताई लापरवाही
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि, हादसे की मुख्य वजह ट्रक ड्राइवर की तेज रफ्तार और लापरवाही हो सकती है। अचानक हुई टक्कर के कारण ड्राइवर को संभलने का मौका नहीं मिला। स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि, यह क्षेत्र पहले से ब्लैक स्पॉट के रूप में चिन्हित है। यहां पहले भी कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं।
1 ड्राइवर के मौत की पुष्टि
घरघोड़ा टीआई गौरव कुमार ने बताया कि घटना में 1 की मौत की पुष्टि हुई है और दूसरा ड्राइवर संभवतः बच कर निकल गया है। मामले में घटना की पूरी जानकारी का पता लगाया जा रहा है।
कोरबा
अखबार वितरक संघ कार्यालय को रेडक्रास सोसायटी ने भेंट किया वाटर स्पेंसर (वाटर कूलर)
छोटे-छोटे कामों से मिलती है बड़ी सफलता-रामसिंह अग्रवाल
कोरबा। 13 मार्च को रेडक्रास सोसायटी कोरबा ने अखबार वितरक संघ जिला इकाई कोरबा के कार्यालय को वाटर स्पेंसर(वाटर कूलर) भेंट किया, इससे अखबार वितरक संघ कार्यालय को शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकी। कुछ दिन पूर्व संघ के पदाधिकारियों ने इसकी मांग रेडक्रास सोसायटी के अध्यक्ष रामसिंह अग्रवाल से की थी। श्री अग्रवाल ने पहल करते हुए इसकी व्यवस्था के लिए संरक्षक मोहम्मद शफी से आग्रह किया और मोहम्मद शफी ने वाटर स्पेंसर की व्यवस्था की।

अखबार वितरक संघ जिला इकाई कोरबा ने 13 मार्च को शाम 8.00 बजे एक कार्यक्रम आयोजित किया और बतौर मुख्य अतिथि के रूप में रेडक्रास सोसायटी के अध्यक्ष रामसिंह अग्रवाल उपस्थित हुए। विशिष्ट अतिथि के रूप में उपाध्यक्ष राजेंद्र तिवारी, संरक्षक मोहम्मद शफी, राहुल मोदी-चेयरमेन, यूथ रेडक्रास सोसायटी, राजू सिंह उपस्थित हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता अखबार वितरक संघ के प्रदेश अध्यक्ष पद्मसिंह चंदेल ने किया। संघ ने उपस्थित अतिथियों का शाल, श्रीफल से सम्मान किया।

संक्षिप्त उद्बोधन में रामसिंह अग्रवाल ने अखबार वितरक संघ जिला इकाई के रचनात्मक कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि छोटे-छोटे कार्यों से ही बड़ी सफलता मिलती है और एकता से सभी काम आसान हो जाते हैं। अखबार वितरण करने वाले बच्चों ने संघ बनाकर एकता का जो मिशाल पेश किया है, वह आने वाले दिनों के लिए सुनहरा अवसर लेकर आएगा। उन्होंने कहा कि रेडक्रास सोसायटी सामाजिक सरोकार से जुड़े कार्यों के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि एक साल में ही 1000 सदस्य बनाकर बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। 80 लाख रूपए से रेडक्रास भवन का निर्माण हो रहा है, 28 लाख की लागत से ब्लड कलेक्शन सर्वसुविधायुक्त एम्बुलेंस का शीघ्र ही लोकार्पण होगा। कार्य करने का जज्बा हो तो कोई भी कार्य असम्भव नहीं रहता, आप भी लगे रहिए, एक दिन यह संघ अपनी पहचान खुद ब खुद बना लेगा।

इस अवसर पर जिलाअध्यक्ष विपेन्द्र कुमार साहू, सचिव जयसिंह नेताम, कोषाध्यक्ष लक्ष्मी राठौर, सहसचिव रायसिंह, रामा, कृष्ण निर्मलकर, तपेश्वर राठौर,, राजकुमार पटेल, सरोज, हर्ष नेताम, राहुल, पप्पू, विजय, ओमकार , दीपक, अज्जू सहित बड़ी संख्या में संघ के सदस्य उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में जिलाध्यक्ष विपेन्द्र कुमार साहू ने सभी का आभार जताया।



कोरबा
अमित जोगी का ‘खटिया खड़ी’ आंदोलन संपन्न:बालको में मजदूरों के लिए प्रदर्शन, प्रबंधन ने मानी तीन मांगें
कोरबा। कोरबा में जनता कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी का ‘खटिया खड़ी’ आंदोलन कुछ ही घंटों में संपन्न हो गया। यह आंदोलन बालको में असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के अधिकारों के लिए किया गया था। अमित जोगी ने दावा किया कि यह सफल रहा, क्योंकि प्रबंधन ने उनकी तीन प्रमुख मांगें मान ली हैं।
बालको परसाभाटा स्थित गेट के सामने अमित जोगी ने एक टेंट लगाकर प्रदर्शन शुरू किया। उन्होंने वहां मौजूद मजदूरों की समस्याओं को उठाया और उनके साथ गेट की ओर बढ़ने का प्रयास किया। इस दौरान पुलिस बल ने उन्हें रोका, जिससे कुछ देर तक हल्की धक्का-मुक्की चलती रही।

अमित जोगी ने कहा, ‘खटिया खड़ी’ आंदोलन सफल
मीडिया से बात करते हुए अमित जोगी ने बताया कि उन्होंने अपने पिता अजीत जोगी द्वारा 2004 में बालको में किए गए आंदोलन की तर्ज पर ही मजदूरों के हक में यह संघर्ष किया है।
जोगी ने पुष्टि की कि उनका ‘खटिया खड़ी’ आंदोलन सफल रहा है। उन्होंने बताया कि बालको प्रबंधन ने उनकी तीन मांगों को स्वीकार कर लिया है।

आंदोलन में शामिल होने से मजदूरों को रोका गया
अमित जोगी ने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल होने से मजदूरों को रोका गया था। उन्होंने दावा किया कि प्रबंधन ने आदेश जारी किए थे कि जो भी इस आंदोलन में शामिल होगा, उसे काम और सुविधाओं से वंचित कर दिया जाएगा। जोगी ने कहा कि ऐसी स्थिति में वह खुद बालको की यूनिफॉर्म पहनकर आंदोलन करेंगे।
छत्तीसगढ़
PTJNMC की बड़ी उपलब्धि; DM कार्डियोलॉजी की दो-सीट मंजूर:NMC अप्रूवल पर स्वास्थ्य मंत्री ने दी बधाई, स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के स्टाइपेंड का मुद्दा भी गर्माया
रायपुर,एजेंसी। राजधानी स्थित पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय, रायपुर को बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि मिली है। नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए मेडिकल कॉलेज में डीएम-कार्डियोलॉजी (सुपर स्पेशियलिटी) की दो पीजी सीटों को मंजूरी प्रदान की है।
हालांकि इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने डीएम यानी डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन करने वाले डॉक्टरों के स्टाइपेंड और कैडर व्यवस्था को लेकर सवाल भी खड़े किए हैं।
विशेषज्ञ समिति की समीक्षा के बाद मिली अनुमति
मेडिकल कॉलेज ने आवेदन पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति हेल्थ साइंसेज और आयुष विश्वविद्यालय, रायपुर के माध्यम से प्रस्तुत किया था। इसके बाद एनएमसी के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड ने कॉलेज की स्व-मूल्यांकन रिपोर्ट (SAF) और मूल्यांकनकर्ताओं की रिपोर्ट का परीक्षण किया।
विशेषज्ञों की समीक्षा के बाद न्यूनतम मानकों के आधार पर डीएम-कार्डियोलॉजी की दो सीटों को मंजूरी दी गई।
हृदय रोग विशेषज्ञों की संख्या बढ़ने की उम्मीद
सुपर स्पेशियलिटी कोर्स शुरू होने से प्रदेश में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है। इससे गंभीर हृदय रोगों के इलाज के लिए मरीजों को राज्य के बाहर जाने की जरूरत कम हो सकती है। साथ ही उन्नत हृदय चिकित्सा सेवाओं और शोध गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।
इस उपलब्धि पर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन, चिकित्सकों और स्वास्थ्य विभाग की टीम को बधाई दी है।
स्टाइपेंड और कैडर को लेकर उठे सवाल
डीएम-कार्डियोलॉजी की सीटों की मंजूरी के साथ ही छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन का कहना है कि छत्तीसगढ़ में अभी तक डॉक्टरेट ऑफ मेडिसिन (DM), सर्जिकल सुपर स्पेशियलिटी (MCh) और डॉक्टरेट ऑफ नेशनल बोर्ड (DrNB) के डॉक्टरों के लिए अलग कैडर या अलग स्टाइपेंड संरचना तय नहीं की गई है।
इसी वजह से कई जगहों पर सुपर स्पेशियलिटी कोर्स कर रहे डॉक्टरों को भी डॉक्टर ऑफ मेडिसिन या मास्टर ऑफ सर्जरी पीजी रेजिडेंट के बराबर ही स्टाइपेंड मिल रहा है, जबकि DM कोर्स MD के बाद किया जाने वाला उच्च स्तर का विशेषज्ञता कोर्स है।
कई बार भेजे जा चुके हैं प्रस्ताव
डॉक्टरों और संस्थानों की ओर से इस मुद्दे पर कई बार सरकार को पत्र लिखकर DM/MCh/DrNB के लिए अलग कैडर और बेहतर वेतन संरचना तय करने की मांग की जा चुकी है। लेकिन अभी तक इस पर कोई स्पष्ट निर्णय नहीं लिया गया है।
नए DM छात्रों के सामने भी चुनौती
अब जब रायपुर मेडिकल कॉलेज में DM-कार्डियोलाॅजी की पढ़ाई शुरू होने जा रही है, तो यह सवाल भी उठ रहा है कि अगर स्टाइपेंड और कैडर की स्थिति स्पष्ट नहीं होगी तो दूसरे राज्यों के डॉक्टर यहां सुपर स्पेशियलिटी पढ़ाई के लिए कितने आकर्षित होंगे।
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