कोरबा
बीसीपीपी कालोनी की समस्याओं पर आयुक्त ने ली एनटीपीसी व बालको प्रबंधन की बैठक
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5 months agoon
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Divya Akashमहापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने भी बीसीपीपी कालोनी का दौरा कर वहॉं की समस्याएं देखी थी´

कोरबा। कोरबा नगर निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने बीसीपीपी कालोनी की समस्याओं को लेकर एनटीपीसी व बालको प्रबंधन के अधिकारियो की बैठक ली, उन्होने कहा कि कालोनी में रह रहे नागरिकों का हक है कि उन्हें आवश्यक मूलभूत सुविधाएं मिले, अतः वहॉं की समस्याओं को दूर करने, नियमित साफ-सफाई कराने व उचित प्रबंधन किए जाने का कार्य प्रतिष्ठान करें।
उल्लेखनीय है कि एनटीपीसी कालोनी कृष्णा विहार में बालको की बीसीपीपी कालोनी स्थित है, जहॉं पर नियमित साफ-सफाई, कचरे का संग्रहण आदि का कार्य नहीं हो रहा, साथ ही वहॉं पर अन्य समस्याएं भी व्याप्त हैं, इसकी जानकारी प्राप्त होने पर विगत दिनों महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत ने भी बीसीपीपी कालोनी का दौरा कर वहॉं की समस्याएं देखी थी तथा निराकरण के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए थे। वहॉं आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने भी बीसीपीपी कालोनी का दौरा किया, मेयर इन काउंसिल सदस्य एवं वार्ड पार्षद अजय कुमार चन्द्रा व निगम अधिकारियों के साथ कालोनी का भ्रमण करते हुए उन्होने वहॉं की समस्याओं का जायजा लिया तथा इस संबंध में एनटीपीसी व बालको प्रबंधन की बैठक बुलाई। नगर पालिक निगम कोरबा के मुख्य प्रशासनिक भवन साकेत स्थित कक्ष में आयुक्त श्री पाण्डेय ने दोनों प्रतिष्ठानों के अधिकारियों की बैठक लेते हुए कहा कि कालोनी में रह रहे नागरिकों को मूलभूत सुविधाएं मिलनी चाहिए, कालोनी में साफ-सफाई का बेहद अभाव है, वहॉं न तो नियमित सफाई के कार्य हो रहे, और न कचरे का प्रबंधन किया जा रहा है, अतः इस दिशा में प्रतिष्ठान अपने दायित्वों का निर्वहन करें। बैठक के दौरान एनटीपीसी के अधिकारियों ने कहा कि उक्त कालोनी में 360 आवासगृह स्थित हैं, जिनमें पानी, बिजली व सीवर संबंधी कार्यो के लिए उन्हें बालको प्रबंधन से राशि मिलती है तथा यह कार्य हम करते हैं, किन्तु कालोनी की नियमित साफ-सफाई, कचरे का संग्रहण व अपशिष्ट का प्रबंधन का कार्य बालको प्रबंधन का है, अतः बालको इस कार्य को करें। आयुक्त श्री पाण्डेय ने बालको प्रबंधन से कहा कि इस संबंध में वे अपने दायित्व को निभाएं तथा साफ-सफाई के नियमित कार्य हों, कचरे का उचित प्रबंधन हो, डोर-टू-डोर अपशिष्ट संग्रहण की व्यवस्था हो, वहॉं पर गार्डन भी है, जो उजाड़ स्थिति में है, उसकी हालत सुधरनी चाहिए, अतः बालको प्रबंधन इस दिशा में कार्य करें। बालको प्रबंधन के अधिकारियों ने कहा कि कालोनी की एक बार सम्पूर्ण सफाई का कार्य कराने के साथ ही वहॉं पर नियमित सफाई कार्य व कचरा प्रबंधन पर हम कार्य करेंगे किन्तु कचरा डम्पिंग की समस्या वहॉं पर रहेगी, इस पर एनटीपीसी प्रबंधन ने कचरा डम्पिंग की समस्या पर विचार करने का आश्वासन दिया।
बैठक के दौरान अपर आयुक्त विनय मिश्रा, बालको के एक्सटर्नल अफेयर हेड कुशाग्र कुमार, एनटीपीसी के एजीएम शशिशेखर, बालको के लैण्ड एण्ड लीगल टीम हेड प्रमोद नायक, एनटीसीसी के सीनियर मैनेजर शशांक झाजेड, निगम के स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. संजय तिवारी, जोन कमिश्नर तपन तिवारी आदि उपस्थित थे।
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कोरबा
न्यू कोरबा अस्पताल में न्यूरो केयर की बड़ी पहल: 30 दिवसीय मेगा न्यूरो कैंप शुरू, 100 से अधिक लोग लाभान्वित
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4 hours agoon
January 17, 2026By
Divya Akashकोरबा। कोसाबाड़ी स्थित न्यू कोरबा अस्पताल में न्यूरो संबंधी मरीजों के लिए एक बड़ी और राहत भरी पहल शुरू की है। अस्पताल में 30 दिवसीय मेगा न्यूरो कैंप की शुरुआत की गई है, जो 31 जनवरी तक पूरे माह चलेगा। इस कैंप के तहत मरीजों को न्यूरो परामर्श निशुल्क एवं आवश्यक जांच में अधिकतम छूट उपलब्ध कराई जा रही है।
मेगा कैंप में प्रसिद्ध न्यूरोसर्जन डॉ. शिवानी प्रगदा एवं न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मनीष गोयल द्वारा प्रतिदिन निशुल्क ओपीडी सुबह 11 से 2 बजे तक व शाम 6 से 8 बजे तक परामर्श दिया जा रहा है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, न्यूरो केयर डिपार्टमेंट में सुविधाओं के विस्तार की लंबे समय से आवश्यकता महसूस की जा रही थी। अब न्यूरोलॉजिस्ट, न्यूरो फिजियोथैरेपिस्ट, न्यूरोसर्जन के साथ न्यूरो साइकाइट्री की सुविधा भी जोड़ दी गई है, जिससे न्यूरो से संबंधित किसी भी आवश्यकता वाले मरीजों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि अब सभी न्यूरो जांच, परामर्श, फिजियोथेरेपी और सर्जरी की सुविधा एक ही छत के नीचे उपलब्ध है, जो कोरबा जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि वर्तमान समय में न्यूरो बीमारियों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, लेकिन जागरूकता की कमी के कारण मरीज समय पर डॉक्टर तक नहीं पहुंच पाते। अधिकांश मरीज तब अस्पताल आते हैं जब बीमारी गंभीर रूप ले चुकी होती है। ऐसे में इस तरह के मेगा कैंप समय पर जांच और उपचार के माध्यम से बीमारी को बढ़ने से रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि ठंड के मौसम में बुजुर्गों में ब्रेन हेमरेज और लकवा (पैरालिसिस) का खतरा अधिक रहता है, जिसके प्रमुख कारण हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ती उम्र और नशे की आदतें हैं। उन्होंने प्राथमिक देखभाल की जानकारी देते हुए कहा कि बेहोश मरीज को खाना या पानी नहीं देना चाहिए और अस्पताल ले जाते समय मरीज को करवट देकर रखना चाहिए। मिर्गी (एपिलेप्सी) को लेकर समाज में फैली भ्रांतियों पर चिंता जताते हुए डॉक्टरों ने कहा कि यह कोई अभिशाप नहीं, बल्कि एक सामान्य न्यूरोलॉजिकल बीमारी है। झाड़-फूंक और अंधविश्वास के कारण मरीजों को प्रताड़ित करना गलत है और इससे बीमारी और गंभीर हो सकती है। न्यू कोरबा अस्पताल का यह 30 दिवसीय मेगा न्यूरो कैंप न सिर्फ इलाज बल्कि जनजागरूकता की दिशा में भी एक सराहनीय पहल माना जा रहा है, जिससे जिले के आम लोगों को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिल सके। पिछले 15 दिनों में 100 से भी अधिक मरीजों ने अपना रजिस्टेशन कराकर निशुल्क ओपीडी परामर्श लिया।
कोरबा
सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य आयोजन
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1 day agoon
January 16, 2026By
Divya Akash220 मातृशक्तियों की सहभागिता, नन्हे भैया-बहनों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से दिया पारिवारिक संस्कारों का संदेश
कोरबा। सरस्वती शिशु मंदिर सीएसईबी, कोरबा पूर्व में मातृ संगोष्ठी एवं शिशु नगरी का भव्य, सुव्यवस्थित एवं प्रेरणादायी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्राचार्य राजकुमार देवांगन रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में दीपक सोनी (कोरबा विभाग समन्वयक) एवं संजय कुमार देवांगन (प्रधानाचार्य, पूर्व माध्यमिक) उपस्थित रहे। अतिथियों का स्वागत विद्यालय परिवार द्वारा पारंपरिक रीति से किया गया।

अपने संबोधन में अतिथियों ने मातृशक्ति की भूमिका को बाल संस्कार एवं राष्ट्र निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रारंभिक शिक्षा में माता का योगदान सबसे निर्णायक होता है। इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे भैया-बहनों द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। बच्चों ने आकर्षक नृत्य, गीत एवं लघु प्रस्तुतियों के माध्यम से पारिवारिक वातावरण, नैतिक मूल्यों, अनुशासन एवं संस्कारों का संदेश दिया। बच्चों की सहज एवं भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने उपस्थित माताओं एवं अभिभावकों का मन मोह लिया।

कार्यक्रम में कुल 220 मातृशक्तियों की गरिमामयी सहभागिता रही, जिससे मातृसंगोष्ठी अत्यंत सफल रही। माताओं ने विद्यालय की शिक्षण पद्धति, संस्कार आधारित शिक्षा एवं गतिविधियों की सराहना की। शिशु नगरी कार्यक्रम के अंतर्गत विद्यालय की 12 शैक्षिक व्यवस्थाओं एवं सहयोगी संस्थाओं की जीवंत प्रदर्शनी लगाई गई। इन प्रदर्शनियों के माध्यम से बच्चों के सर्वांगीण विकास, कौशल निर्माण, संस्कार शिक्षा एवं व्यवहारिक ज्ञान को प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया गया। अभिभावक बंधुओं के सहयोग से आनंद मेले का भी आयोजन किया गया, जिसमें प्राथमिक विभाग के भैया-बहनों ने विभिन्न खेलों, गतिविधियों एवं मनोरंजन कार्यक्रमों में भाग लेकर भरपूर आनंद उठाया। आनंद मेला बच्चों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रधानाचार्य पंकज तिवारी ने सभी अतिथियों, मातृशक्तियों एवं अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजनों से विद्यालय एवं परिवार के बीच सहयोग और विश्वास और अधिक मजबूत होता है। उप-प्रधानाचार्य श्रीमती सीमा त्रिपाठी सहित समस्त आचार्य परिवार ने कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
कोरबा
बॉयोफ्लॉक तकनीक से मछली पालन कर संजय सुमन ने कमाए साल में 3.20 लाख
Published
1 day agoon
January 16, 2026By
Divya Akashकोरबा। विकासखंड करतला के ग्राम बड़मार निवासी संजय सुमन ने मछली पालन को अपना मुख्य व्यवसाय बनाकर सफलता की नई मिसाल कायम की है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत नवीन बॉयोफ्लॉक तकनीक अपनाकर उन्होंने कम भूमि में अधिक उत्पादन कर उल्लेखनीय आय अर्जित की है।
संजय सुमन ने अपनी 25 डिसमिल भूमि पर बॉयोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया। इस तकनीक में तालाब में लाइनर बिछाकर पानी भरा जाता है और तेजी से बढ़ने वाली उन्नत प्रजाति की मछलियों का पालन किया जाता है। इसकी विशेषता है कि वर्ष में दो बार उत्पादन लेकर अधिक आय प्राप्त की जा सकती है।
सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत उन्हें 8.40 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। पिछले वर्ष संजय सुमन ने बॉयोफ्लॉक तालाब से 6 मैट्रिक टन मछली उत्पादन किया, जिसे बेचकर 07 लाख 20 हजार रुपये की आय प्राप्त हुई। उत्पादन लागत निकालने के बाद उन्हें 03 लाख 20 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ।
सफलता से उत्साहित संजय सुमन इस वर्ष अपने कार्य का विस्तार कर उत्पादन एवं आय को दुगुना करने की योजना बना रहे हैं। बॉयोफ्लॉक तकनीक की खासियत यह है कि कम भूमि में अधिक उत्पादन संभव होता है, जिससे किसानों की आय में अभूतपूर्व वृद्धि होती है।
संजय सुमन की यह कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन रही है।

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