छत्तीसगढ़
कॉन्स्टेबल भर्ती 2025…कैंडिडेट्स बोले- कम अंक वालों का चयन:बिलासपुर में कहा- मेरिट वालों के नाम लिस्ट से बाहर, एक उम्मीदवार के 3 जगह नाम
बिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ में एसआई भर्ती की तरह अब आरक्षक भर्ती परीक्षा 2025 में भी गड़बड़ी और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए गए हैं। लिखित परीक्षा देने वाले कई जिलों के अभ्यर्थी हाईकोर्ट पहुंचे और दावा किया कि भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताएं की गई हैं।
अभ्यर्थियों के अनुसार कम अंक पाने वालों का चयन किया गया है, जबकि मेरिट वाले कई उम्मीदवारों के नाम लिस्ट से गायब हैं। इतना ही नहीं, एक अभ्यर्थी का नाम एक से अधिक तीन जगहों पर दर्ज मिला है।
योग्य उम्मीदवारों को चयन से वंचित किए जाने के विरोध में अभ्यर्थी गुरुवार को बिलासपुर हाईकोर्ट के बाहर जमा हुए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें वहां से हटा दिया। बाद में सभी अभ्यर्थी पुलिस ग्राउंड में इकट्ठा हुए और आज (शुक्रवार) याचिका दाखिल करने पर सहमति बनी है।

प्रतियोगियों का आरोप है कि मैरिट में आए युवाओं की जगह कम अंक पाने वालों का चयन हुआ है।
बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का आरोप
दरअसल, प्रदेश के सभी 33 जिलों में आरक्षकों के कुल 5,967 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू हुई थी। प्रक्रिया पूरी होने के बाद 9 दिसंबर को जिला स्तर पर चयन सूची जारी की गई। परिणाम घोषित होने के बाद से परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों ने बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
10 दिसंबर को जिला स्तर पर रणनीति बनाने के बाद हजारों युवा 11 दिसंबर को बिलासपुर पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अभ्यर्थियों से जिलेवार जानकारी लेकर गड़बड़ी की लिस्ट बनाई है, जिसके बाद अब वो न्याय के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाने की तैयारी कर रहे हैं। युवाओं ने शुक्रवार यानि आज याचिकाएं प्रस्तुत करने पर सहमति जताई है।

बड़ी संख्या में कैंडिडेट्स हाईकोर्ट पहुंचे। जहां पुलिस बल भी मौजूद रहा।
एक उम्मीदवार का नाम कई जिलों में
युवाओं का आरोप है कि एक कैंडिडेट का नाम 5-6 जगह आया है। लेकिन एक युवा सिर्फ एक जगह ही जॉइन करेगा, ऐसे में पूरे पद भर पाना संभव नहीं है। हालांकि यह भर्ती 2007 के राजपत्र के अनुसार हुई है, जिसके तहत एक कैंडिडेट हर जिले में फॉर्म भर सकता है।
शारीरिक परीक्षा पास करने के बाद उम्मीदवार अपनी सुविधानुसार किसी एक जिले से परीक्षा देकर वहीं जॉइन कर सकता है। अब युवाओं का कहना है कि कई स्थानों पर नाम आने की वजह से 5967 पद किसी भी हाल में नहीं भरा जा सकता।
इसका कारण यह है कि एक कैंडिडेट सिर्फ एक जगह से ही जॉइन करेगा, जबकि 4-5 जगह पद खाली रह जाएंगे। इससे योग्य उम्मीदवार चयन से वंचित रह जाएंगे।

प्रतियोगियों ने आरोप लगाया कि चयन सूची के साथ वेटिंग लिस्ट भी जारी की गई है।
कम अंक वालों का चयन, ज्यादा नंबर वाले बाहर
अभ्यर्थियों का आरोप है कि चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी की गई है। शारीरिक परीक्षा में 200 में से 76, लिखित परीक्षा में 100 में से 60 मिलाकर कुल 136 अंक मिले हैं। लेकिन ओबीसी वर्ग से होते हुए भी मुंगेली जिले के एक अभ्यर्थी का चयन नहीं हुआ।
आरोप है कि मुंगेली से ही कई ऐसे कैंडिडेट हैं, जिनका नंबर उससे कम है, लेकिन उनका चयन सामान्य वर्ग से हो गया है। उनका आरोप है कि इस तरह की गड़बड़ी कई जिलों में सामने आई है।

भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने के लगाए आरोप।
वेटिंग लिस्ट में भी की गई गड़बड़ी, योग्य को नहीं मिलेगा मौका
प्रतियोगियों ने आरोप लगाया कि चयन सूची के साथ वेटिंग लिस्ट भी जारी की गई है। जिसमें भी गड़बड़ी की गई है। उन्होंने बताया कि अनारक्षित वर्ग में जिस अभ्यर्थी का नाम वेटिंग लिस्ट में है। उसी का नाम रिजर्व कैटेगरी में भी है।
एक लिस्ट में एक अभ्यर्थी का इस तरह से दो जगह नाम होना गलत है। वेटिंग लिस्ट के बाद दूसरी वेटिंग लिस्ट भी जारी नहीं की जाएगी। ऐसे में योग्य अभ्यर्थी भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे।
आवेदन का एक नंबर पर अलग-अलग नाम
युवाओं का कहना है कि हर जिले से 40-50 कैंडिडेट ऐसे हैं जिनका चयन गलत तरीके से हुआ है। कोंडागांव में समान एप्लिकेशन नंबर पर अलग-अलग नाम दर्ज हैं। इसी तरह नारायणपुर जिले में एप्लिकेशन नंबर समान होते हुए अलग-अलग नाम हैं।

अभ्यर्थियों ने कम अंक वालों को सिलेक्ट करने का आरोप लगाया है।
पहचान छिपाने का भी प्रयास
कई जिलों में परिणाम आवेदन नंबर के साथ दिया गया है, जबकि कुछ में रजिस्ट्रेशन और आवेदन के साथ दिया गया है। वहीं, कई में नाम, पिता का नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ दिया गया है।
बिलासपुर जिले में सिर्फ नाम और आवेदन नंबर के साथ दिया गया है। ऐसे में आरोप लगाया जा रहा है कि इस तरह से कुछ चयनितों के नाम छिपाने का प्रयास किया गया है।
पुलिस ग्राउंड से हटाया, एसएसपी से मिले कैंडिडेट्स
गुरुवार (11 दिसंबर) की शाम अभ्यर्थी हाईकोर्ट से निकलकर पुलिस ग्राउंड में एकत्र हुए, जहां आरआई और पुलिस जवानों ने उन्हें हटने की चेतावनी दी, जिस पर अभ्यर्थी एसएसपी ऑफिस पहुंच गए। यहां उन्होंने एसएसपी रजनेश सिंह से मुलाकात की। साथ ही प्रदेश के कई जिलों की भर्ती में गड़बड़ियां होने की बात कही।
इस पर एसएसपी रजनेश सिंह ने प्रमाण मांगा, तब अभ्यर्थियों ने इस संबंध में चर्चा करने और जानकारी एकत्र करने की बात कही। इसके लिए पुलिस ग्राउंड में जगह देने की मांग की। इस पर एसएसपी सिंह ने आरआई को निर्देशित किया कि युवाओं को पुलिस ग्राउंड से न हटाया जाए।
कोरबा
रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए सहायक ग्रेड-02 प्रदीप मिश्रा निलंबित
कोरबा। कार्यालय उप पुलिस अधीक्षक, एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी), बिलासपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार एसीबी/ईओडब्ल्यू इकाई बिलासपुर द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) के अंतर्गत दर्ज अपराध क्रमांक 0/2026 की कार्रवाई में कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, पोड़ी उपरोड़ा में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 प्रदीप मिश्रा को 29 मई 2026 को प्रार्थी अमृत बघेल से 40,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।

एसीबी की कार्रवाई के बाद आरोपी मिश्रा को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा द्वारा यह माना गया कि उनका यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों के विपरीत है।
फलस्वरूप, प्रदीप मिश्रा, सहायक ग्रेड-02, कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, पोड़ी उपरोड़ा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, कटघोरा निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय कार्यों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जा रही है तथा ऐसे मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।
कोरबा
अगले तीन घंटे में तूफानी बारिश के आसार
कोरबा। मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अगले तीन घंटों में कोरबा सहित छत्तीसगढ़ के रायगढ़, सक्ती और सरगुजा के कुछ इलाकों में तूफानी बारिश के आसार हैं। तेज हवाओं के साथ भारी बारिश एवं बिजली गिरने की संभावना मौसम विभाग ने जताई है।

कोरबा
संस्कृत विषय बचाओ अभियान: घोषणा को अमल में लाने संस्कृत शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन
कोरबा। प्रदेश अध्यक्ष दौलत राम साहू के नेतृत्व में संघ के पदाधिकारी नोयन कुमार बुडेक, मनोज कुमार वर्मा, डॉ नारायण प्रसाद, गंगाराम साहू, हेमंत कुमार हिरवानी, दुर्गेश कुमार साहू, कुलेश्वर प्रसाद, दिनेश मंडावी, सुनील महार, ईश्वरी यदु कामिनी पिल्लई, रेणुका लदेर, शारदा साहू, सुरेखा सेन, सोमप्रभा साहू सहित प्रदेश के पांच शिक्षा संभाग के शिक्षक एवं शिक्षिकाएं भारतीय संविधान में आठवीं अनुसूची की भाषा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप संस्कृत विषय के संवर्धन एवं संरक्षण हेतु उल्लेख किया गया है को ध्यान में रखते हुए गजेंद्र यादव शिक्षा मंत्री द्वारा 30 अप्रैल को विधानसभा से घोषणा किया गया कि संस्कृत भाषा को अनिवार्य कर रहे हैं, जिनका लघु चलचित्र सोशल मीडिया पर बहुत प्रसारित हैं।

इसे देख सुनकर प्रदेश भर के संस्कृत शिक्षकों में शासन की सौहार्द्रपूर्ण निर्णय से हर्ष की लहर है। संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा, सभ्यता और संस्कार परक एक राष्ट्रभाषा है, जिनमें सनातन संस्कृति पूर्ण रूप से समाहित है। संघ के पदाधिकारियों द्वारा 10 मई एवं 26 मई 2026 को नवा रायपुर स्थित एम -14 आवास में शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर घोषणा के धरातल पर क्रियान्वयन के लिए शीघ्र अति शीघ्र शासकीय आदेश जारी करवाने हेतु मांग पत्र सौपा, जिससे शिक्षक आश्वस्त हो जावे तथा मंत्री द्वारा संस्कृत विषय को अनिवार्य करने विभागीय अधिकारी को निर्देश दिए यह शिक्षकों के लिए बहुत बड़ा पुरस्कार है, किन्तु आज पर्यन्त कोई कार्यवाही नहीं हुई है। पदाधिकारियों ने आगे बताया कि इस पावन कार्य के लिए निरंतर प्रदेश के जिला शिक्षा अधिकारी, जिला कलेक्टर, विधायकगण, वित्त मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री अरूण साव, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय , राज्यपाल रमेन डेका , संचालक लोक शिक्षण संचालनालय, मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन, सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, सचिव छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, सचिव सहायक संचालक छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्या मण्डलम्, प्रदेश संयोजक व अध्यक्ष अधिकारी कर्मचारी फेड़रेशन कमल वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, डॉ अतुल कोठारी राष्ट्रीय सचिव शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली, आयुक्त राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा सहित 50 से भी अधिक आवेदन बारंबार संस्कृत विषय को पूर्व की भांति अनिवार्य करने तथा नवीन व्यावसायिक शिक्षा को सातवें विषय के रूप में रखने के लिए मांग पत्र ज्ञापन सौपा गया था। 25 अगस्त 2025 को शिक्षा मंत्री की समीक्षा बैठक में एससीईआरटी रायपुर को कक्षा छठवीं से लेकर कक्षा दसवीं का संस्कृत विषय को अनिवार्य करने निर्देशित भी किया गया था। इसी क्रम में 07 सितंबर 2025 को सरयू पारिण भवन मठपुरेना में आयोजित विराट संस्कृत विद्वत सम्मेलन में उपस्थित मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह को भी मांग पत्र सौपा गया था। वहां पर अध्यक्ष ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत संकल्प का विषय है विकल्प का नहीं। संस्कृत भाषा के साथ अन्याय नहीं होगा। एक तरफ पूरा विश्व संस्कृत भाषा के महत्व को अपना रहा है। अपने देश के विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों में संस्कृत भाषा को अनिवार्य शिक्षा कर रहे हैं तथा अनुच्छेद 351 आठवीं अनुसूची की भाषाओं के सम्मान के लिए बनाया गया है।
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