जांजगीर-चाम्पा
जांजगीर-चांपा के 3 वार्ड में फैला डायरिया…16 मरीज मिले:जांच में पानी दूषित निकला, लोगों को पानी उबालकर पीने की सलाह; मौत की पुष्टि नहीं
जांजगीर-चांपा। जिले में डायरिया का प्रकोप देखने को मिला है। अकलतरी गांव में कुल 16 लोगों में इस बिमारी के लक्षण मिले है। इनमें से 5 मरीजों को सीएचसी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 2 मरीजों का बिलासपुर के निजी अस्पताल में इलाज चल रहा है। बाकी मरीजों का इलाज गांव में ही किया जा रहा है।
डायरिया से पीड़ित मरीज अकलतरा विकासखंड के वार्ड नंबर 4, 11 और 12 में रहने वाले हैं। इसी वार्ड में पीने की पानी का सैंपल लिया गया जिसमें पानी दूषित निकला है जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को सतर्क किया है। वहीं, अभी तक डायरिया से मौत की कोई पुष्टि नहीं हुई है।

गांव के एक भवन में शिविर लगाकर ग्रामीणों का टेस्ट किया गया।
शिविर में लोगों को दवाइयां बांटी गई
गांव के सरपंच ने बताया कि 3 दिन से ऐसी समस्या बनी हुई है। विभाग के अधिकारी जांच के लिए आए थे। हैंडपंप के पानी से कुछ कीड़े निकले है। अब शिविर लगाकर दवाइयां बांटी गई है।
लोगों को जागरूक किया जा रहा है। डॉक्टर खाने पीने में विशेष ध्यान रखने की बात कह रहे है। मितानिन घर-घर जाकर लोगों को ये बात बता रही है कि पानी उबाल कर पीना है।

सूचना मिलते ही प्रशासन की टीम जांच के लिए पहुंची।
डायरिया से मौत की पुष्टि नहीं
डायरिया का मामला सामने आते ही स्वास्थ्य विभाग ने गांव में अस्थायी उपचार शिविर लगाया है। यहां सभी लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। फिलहाल अभी तक डायरिया से किसी मरीज की मौत की खबर सामने नहीं आई है। सभी मरीजों की स्थिति स्थिर बताई जा रही है।
छत्तीसगढ़
कांग्रेस ने बिजली दरों में वृद्धि का विरोध किया:जांजगीर-चांपा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का पुतला फूंका, राज्यपाल को ज्ञापन सौंपा
जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा में प्रदेश में बिजली दरों में वृद्धि, अघोषित बिजली कटौती और बढ़ती महंगाई के विरोध में जिला कांग्रेस कमेटी जांजगीर-चांपा ने बुधवार को केरा रोड स्थित बिजली कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री का पुतला दहन कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में आयोजित इस प्रदर्शन में जिले भर से कांग्रेस पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने विद्युत विभाग के अधिकारियों को प्रतीकात्मक रूप से चूड़ियां भी भेंट कीं।

प्रदर्शन के दौरान “महंगी बिजली नहीं चलेगी”, “जनविरोधी नीति नहीं चलेगी” और “डबल इंजन सरकार, जनता पर महंगाई की मार” जैसे नारे लगाए गए।
प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेताओं ने महामहिम राज्यपाल के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इसमें बिजली दरों में हाल ही में की गई बढ़ोतरी को तत्काल वापस लेने और प्रदेशभर में जारी अघोषित बिजली कटौती पर रोक लगाने की मांग की गई।
इस अवसर पर जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ कोयला और बिजली उत्पादन के मामले में एक समृद्ध राज्य है। इसके बावजूद जनता को महंगी बिजली खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले ढाई वर्षों में सरकार ने चरणबद्ध तरीके से बिजली दरों में वृद्धि कर आम उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला है।

कांग्रेस नेताओं ने बताया कि पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और आवश्यक वस्तुओं की बढ़ती कीमतों से जनता पहले से ही परेशान है। ऐसे में बिजली दरों में 30 से 50 पैसे प्रति यूनिट तक की वृद्धि ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
उनका कहना था कि बिजली आज आम नागरिकों की बुनियादी जरूरत बन चुकी है और इसकी कीमतों में वृद्धि गरीबों, किसानों, मजदूरों, कर्मचारियों तथा मध्यम वर्ग के हितों पर सीधा असर डाल रही है।
कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि प्रदेश के कई हिस्सों में अघोषित बिजली कटौती जारी है। इससे किसानों की सिंचाई, विद्यार्थियों की पढ़ाई और छोटे व्यापारियों के कामकाज पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि बिजली दर वृद्धि वापस नहीं ली गई और बिजली कटौती बंद नहीं हुई तो कांग्रेस जनता के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन करेगी।
छत्तीसगढ़
जांजगीर में पति ने 2 बेटों संग खाया जहर, मौत:पत्नी मायके से नहीं लौटी तो सुसाइड, गरियाबंद में जंगल में मिली दंपती की लाश
जांजगीर-चांपा/गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के 2 जिलों में 2 अलग-अलग परिवारों के 5 सदस्यों ने सुसाइड कर लिया है। पहला मामला जांजगीर-चांपा के नैला चौकी थाना क्षेत्र का है। पति से विवाद के बाद पत्नी बेटी को लेकर मायके चली गई। पति उसे वापस लेने ससुराल पहुंचा तो उसने लौटने से इनकार कर दिया।
इस बात से नाराज पति ने अपने 2 बच्चों के साथ कीटनाशक पीकर आत्महत्या कर ली। घर के अंदर पिता और बच्चों के शव मिले हैं।

दूसरा मामला गरियाबंद जिले के पायलीखंड थाना क्षेत्र का है, जहां बुजुर्ग दंपती ने आत्महत्या कर ली। दोनों के शव घर से करीब 200 मीटर दूर जंगल में 20 से 30 मीटर की दूरी पर अलग-अलग पेड़ों से लटके हुए मिले। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
केस-1, पति ने 2 बच्चों संग की आत्महत्या
जानकारी के अनुसार, जांजगीर-चांपा के बिरकोनी गांव में रमेश कुमार पटेल (35) पत्नी मंगली बाई (28) और दो बेटे आदर्श (3 वर्ष) और अभिनव (2 वर्ष) और एक बेटी आरुषि (6 वर्ष) के साथ रहता था। रमेश को शराब पीने की लत थी, जिसकी वजह से पति-पत्नी के बीच अक्सर झगड़ा होता था।
4 दिन पहले रमेश का पत्नी से विवाद हुआ था। विवाद के बाद उसकी पत्नी अपनी बेटी आरुषि को लेकर मायके चली गई थी, जबकि दोनों छोटे बेटे आदर्श और अभिनव घर पर ही थे। 16 जून को रमेश पत्नी को वापस लाने उसके मायके गया था, लेकिन वह लौटने के लिए तैयार नहीं हुई।
बुधवार सुबह रमेश के पिता परदेशी पटेल गांव गए हुए थे। इसी दौरान ग्रामीणों ने उन्हें सूचना दी कि रमेश और उसके दोनों बच्चे घर में मृत पड़े हैं।

मौके पर पहुंचकर जांच करती हुई पुलिस की टीम।
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल की जांच कर कीटनाशक के सैंपल जुटाए हैं। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रहा है कि तीनों की मौत कीटनाशक खाने से हुई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
केस-2, दंपती की लाश जंगल में मिली
वहीं, गरियाबंद जिले के पायलीखंड थाना क्षेत्र के जयराम नागेश (65) अपनी पत्नी वेदमती (45) के साथ रहते थे। मंगलवार शाम बुजुर्ग दंपती ने आत्महत्या कर ली। दोनों के शव घर से करीब 200 मीटर दूर जंगल में अलग-अलग पेड़ों से फांसी के फंदे पर लटके मिले।
पुलिस के मुताबिक, पति-पत्नी के बीच अक्सर किसी न किसी बात को लेकर विवाद होता रहता था। रविवार दोपहर को भी दोनों के बीच झगड़ा हुआ था। परिजनों ने बताया कि पहले भी कई बार दोनों के बीच विवाद हो चुका था। दंपती के दो बेटे हैं और दोनों की शादी हो चुकी है।
शुरुआती जांच में पता चला है कि झगड़े के बाद जयराम घर से निकल गए थे। करीब एक घंटे तक वापस नहीं लौटने पर उनकी पत्नी वेदमती भी उन्हें तलाशने जंगल की ओर चली गईं। इसके बाद दोनों घर नहीं लौटे।

गरियाबंद के पायलीखंड में बुजुर्ग दंपती के शव जंगल में मिले।
घरवालों ने पहले इसे सामान्य नाराजगी समझा, क्योंकि दोनों पहले भी कई बार नाराज होकर घर छोड़कर चले जाते थे। लेकिन जब 24 घंटे से ज्यादा समय बीतने के बाद भी दोनों वापस नहीं आए, तो घरवालों को चिंता हुई। इसके बाद ग्रामीणों के साथ मिलकर आसपास और जंगल में तलाश की गई, जहां दोनों के शव मिले।
पुलिस ने शुरुआती जांच में आशंका जताई है कि पति के सुसाइड करने के बाद पत्नी ने भी फांसी लगाकर अपनी जान दे दी होगी। हालांकि, मौत के सही कारणों का खुलासा पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगा। फिलहाल, पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है।
कोरबा
रायपुर : चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना से छत्तीसगढ़ के विकास और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मिलेगी नई शक्ति : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
755 करोड़ रूपए की परियोजना को मंजूरी देने पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति जताया आभार’
डबल इंजन सरकार के प्रयासों से प्रदेश में रेल कनेक्टिविटी का हो रहा अभूतपूर्व विस्तार: मुख्यमंत्री
मोदी सरकार के विशेष फोकस से छत्तीसगढ़ में अधोसंरचना विकास को मिली नई ऊंचाई: रेल कनेक्टिविटी के विस्तार से साकार हो रहा विकसित छत्तीसगढ़ का संकल्प – मुख्यमंत्री साय
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भारतीय रेल द्वारा दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत 755 करोड़ रूपए की लागत से चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दिए जाने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति प्रदेशवासियों की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह परियोजना छत्तीसगढ़ के विकास, औद्योगिक प्रगति और देश की ऊर्जा सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि डबल इंजन सरकार के समन्वित प्रयासों से प्रदेश में रेल अधोसंरचना का निरंतर विस्तार हो रहा है, जिससे विकास को नई गति मिल रही है।

उन्होंने कहा कि परियोजना के पूरा होने पर यात्री सुविधाओं में भी उल्लेखनीय सुधार होगा। अतिरिक्त रेल लाइन उपलब्ध होने से ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुचारु होगी, परिचालन संबंधी बाधाएं कम होंगी तथा भविष्य में अतिरिक्त यात्री ट्रेनों के संचालन का मार्ग प्रशस्त होगा। इससे आम नागरिकों को बेहतर, सुरक्षित और सुविधाजनक रेल सेवाएं प्राप्त होंगी। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कोरबा देश की ऊर्जा राजधानी के रूप में महत्वपूर्ण पहचान रखता है और यहां से देश के विभिन्न हिस्सों तक कोयले की आपूर्ति होती है। चांपा-कोरबा रेल खंड साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) तथा महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) की खदानों को राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कड़ी है। इस परियोजना के पूर्ण होने से कोयला परिवहन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी तथा देश की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए आवश्यक लॉजिस्टिक आधार और अधिक मजबूत होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान में तीसरी रेल लाइन का निर्माण भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया दूरदर्शी निर्णय है। इससे अतिरिक्त माल परिवहन को सुगम बनाया जा सकेगा और रेल परिचालन अधिक दक्ष एवं प्रभावी होगा। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि यह परियोजना केवल कोयला परिवहन तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी व्यापक लाभ मिलेगा। बेहतर रेल संपर्क से उद्योगों को मजबूती मिलेगी, निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी, व्यापारिक गतिविधियों का विस्तार होगा तथा रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। इससे कोरबा, जांजगीर-चांपा सहित आसपास के क्षेत्रों के सामाजिक एवं आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन परियोजना प्रदेश की औद्योगिक और आर्थिक प्रगति को नई ऊर्जा प्रदान करेगी तथा विकसित छत्तीसगढ़ और विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि मजबूत रेल नेटवर्क, सुदृढ़ लॉजिस्टिक व्यवस्था और बेहतर कनेक्टिविटी के माध्यम से छत्तीसगढ़ देश के विकास में और अधिक प्रभावी योगदान देने के लिए निरंतर आगे बढ़ रहा है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विगत वर्षों में छत्तीसगढ़ को रेल अधोसंरचना के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्राथमिकता मिली है। प्रदेश के रेल बजट में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है तथा नई रेल लाइनों, दोहरीकरण, तीसरी-चौथी लाइन और आधुनिक रेलवे स्टेशनों के विकास के माध्यम से कनेक्टिविटी को लगातार सशक्त किया जा रहा है। हाल ही में धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में अधिसूचित किया जाना भी इसी विकास दृष्टि का प्रमाण है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा रेल परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में स्वीकृति मिलना जशपुर सहित पूरे उत्तर छत्तीसगढ़ के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विशेष स्नेह और विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक है। लंबे समय से रेल संपर्क की प्रतीक्षा कर रहे जशपुरांचल को पहली बार रेल नेटवर्क से जोड़ने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह परियोजना केवल एक रेल लाइन नहीं, बल्कि क्षेत्र के आर्थिक, सामाजिक और औद्योगिक विकास की नई आधारशिला है। इससे पर्यटन, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे तथा वनांचल क्षेत्र विकास की मुख्यधारा से और अधिक मजबूती से जुड़ सकेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में रेल एवं शहरी परिवहन अधोसंरचना का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। छत्तीसगढ़ में रेलवे अधोसंरचना के विकास पर 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक की लागत से विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है। वर्ष 1853 से 2014 तक 161 वर्षों में छत्तीसगढ़ में लगभग 1100 रूट किलोमीटर रेल लाइन बिछाई गई थी, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रदेश का रेल नेटवर्क बढ़कर 2200 रूट किलोमीटर से अधिक होने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रदेश की रेल परियोजनाओं के लिए जहां लगभग 300 करोड़ रुपये का बजट मिलता था, वहीं वर्ष 2026-27 में यह बढ़कर 7,470 करोड़ रुपये हो गया है। साथ ही प्रदेश के 32 रेलवे स्टेशनों को 1,680 करोड़ रुपये की लागत से अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत आधुनिक सुविधाओं से विकसित किया जा रहा है, जो छत्तीसगढ़ के विकास को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम है।
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