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छत्तीसगढ़

वार्ड 7 में जर्जर बिजली खंभा तारों के सहारे, हादसे का डर

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सक्ती। नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 7 में बिजली का खंभा जर्जर हो गया है। वार्डवासियों का कहना है कि वे लगातार बिजली विभाग को सूचना दे रहे हैं। इसके बाद भी अधिकारी-कर्मचारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। खंभा तारों के सहारे खड़ा है। वार्डवासी इसे तुरंत ठीक कराने की मांग कर रहे हैं।

इस मामले में वार्ड क्रमांक 7 की पार्षद दीपा अग्रवाल ने बिजली विभाग के कनिष्ठ अभियंता को पत्र लिखा है। पत्र में बताया गया है कि बाबूलाल बर्तन भंडार के सामने लगा बिजली खंभा पूरी तरह जर्जर हो चुका है। खंभा सड़ चुका है। अभी वह सिर्फ बिजली के तारों के सहारे टिका है। इसके गिरने की आशंका बनी हुई है। इससे आसपास के रहवासियों, राहगीरों, वाहनों के लिए गंभीर दुर्घटना का खतरा है। पत्र में खंभे की अतिशीघ्र मरम्मत की मांग की गई है। अब देखना है कि समस्या का समाधान कब तक होता है।

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छत्तीसगढ़ शराब घोटाला, चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से राहत:हाईकोर्ट से मिली बेल बरकरार, ईडी ने 1000 करोड़ के लेन-देन का लगाया है आरोप

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बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के चर्चित शराब घोटाले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत को चुनौती देने वाली प्रवर्तन निदेशालय (ED) और एंटी करप्शन ब्यूरो/आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ACB/EOW) की अपील खारिज कर दी।

इसके साथ ही हाईकोर्ट से मिली जमानत बरकरार रहेगी। हाईकोर्ट में जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा गया था। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए चैतन्य बघेल को राहत दी।

ED और ACB/EOW ने हाईकोर्ट के आदेश को अवैधानिक बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन शीर्ष अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

चैतन्य बघेल को पहले प्रवर्तन निदेशालय ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत गिरफ्तार किया था। इसके बाद भ्रष्टाचार से जुड़े मामले में ACB/EOW ने भी उन्हें जेल में रहते हुए गिरफ्तार किया।

1000 करोड़ के लेन-देन का आरोप

ED का दावा है कि वर्ष 2019 से 2022 के बीच कथित शराब सिंडिकेट के संचालन में चैतन्य बघेल की अहम भूमिका थी। एजेंसी के अनुसार उन्होंने करीब 1000 करोड़ रुपए के लेन-देन को व्यक्तिगत रूप से संभाला।

वहीं ACB/EOW का आरोप है कि उन्हें कथित तौर पर 200 से 250 करोड़ रुपए का हिस्सा मिला और पूरे शराब घोटाले की राशि 3,200 करोड़ रुपए से अधिक हो सकती है। हालांकि इन आरोपों पर अभी न्यायिक प्रक्रिया जारी है और अदालत ने दोष तय नहीं किया है।

क्या है छत्तीसगढ़ का शराब घोटाला

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में ED जांच कर रही है। ED ने ACB में FIR दर्ज कराई है। दर्ज FIR में 3200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की बात कही गई है। इस घोटाले में राजनेता, आबकारी विभाग के अधिकारी, कारोबारी सहित कई लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज है।

ED ने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन भूपेश सरकार के कार्यकाल में IAS अफसर अनिल टुटेजा, आबकारी विभाग के एमडी AP त्रिपाठी और कारोबारी अनवर ढेबर के सिंडिकेट के जरिए घोटाले को अंजाम दिया गया था।

फरवरी 2019 में बना था सिंडिकेट

कारोबारी अनवर ढेबर ने सिंडिकेट बनाने के लिए फरवरी 2019 में जेल रोड स्थित होटल वेनिंगटन में प्रदेश के 3 डिस्टलरी मालिकों को बुलाया। इस मीटिंग में छत्तीसगढ़ डिस्टलरी से नवीन केडिया, भाटिया वाइंस प्राइवेट लिमिटेड से भूपेंदर पाल सिंह भाटिया और प्रिंस भाटिया शामिल हुए।

साथ ही वेलकम डिस्टलरी से राजेंद्र जायसवाल उर्फ चुन्नू जायसवाल के साथ हीरालाल जायसवाल और नवीन केडिया के संपर्क अधिकारी संजय फतेहपुरिया पहुंचे।

मीटिंग में इनके अलावा एपी त्रिपाठी और अरविंद सिंह भी मौजूद थे। मीटिंग में अनवर ढेबर ने तय किया कि डिस्टलरी से जो शराब सप्लाई की जाती है, उसमें प्रति पेटी कमीशन देना होगा। कमीशन के बदले रेट बढ़ाने का आश्वासन डिस्टलरी संचालकों को दिया गया। पैसे का हिसाब-किताब करने के लिए आरोपियों ने पूरे कारोबार को ए, बी और सी पार्ट में बांटा।

कवासी लखमा समेत 13 लोगों की हो चुकी है गिरफ्तारी

EOW के मुताबिक, विदेशी शराब पर सिंडिकेट द्वारा लिए गए कमीशन का विश्लेषण किया जा रहा है। इस मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा, अरुणपति त्रिपाठी, अरविंद सिंह, अनवर ढेबर, त्रिलोक सिंह ढिल्लन, अनुराग द्विवेदी, अमित सिंह, दीपक दुआरी, दिलीप टुटेजा और सुनील दत्त समेत 13 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। कुछ आरोपी बेल पर बाहर हैं, जबकि कुछ अन्य की तलाश ED और ACB के अधिकारी कर रहे हैं।

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छत्तीसगढ़

अतिथि शिक्षकों को 27 जुलाई तक स्कूल लौटने के निर्देश:नहीं तो जाएगी नौकरी, 22 दिन से आंदोलन कर रहे शिक्षकों को पुलिस ने हटाया

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दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। छत्तीसगढ़ स्कूल शिक्षा विभाग ने 22 दिन से आंदोलन कर रहे अतिथि शिक्षकों की सेवाएं खत्म करने का अल्टीमेटम दिया है। विभाग ने डीईओ को निर्देश जारी कर कहा है कि 27 जुलाई तक सभी शिक्षक स्कूल नहीं लौटे तो नौकरी जाएगी। इसके साथ ही वैकल्पिक शिक्षकों की व्यवस्था के निर्देश भी दिए हैं।

बता दें कि सभी शिक्षक बस्तर और आदिवासी क्षेत्रों में पदस्थ है। समान वेतन, मानदेय बढ़ाने और संविलियन की मांग को लेकर दुर्ग जिले में हड़ताल कर रहे थे। बुधवार की रात पुलिस ने हिंदी भवन के सामने धरना स्थल से टेंट हटा दिया।

इसके बाद आज (गुरुवार) सुबह धरना स्थल पहुंचे करीब 50 अतिथि शिक्षकों को पुलिस बसों में बैठाकर ले गई। धरनास्थल पर पुलिस बल तैनात है। बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है, ताकि कोई नया प्रदर्शनकारी आंदोलन में शामिल न हो सके।

पुलिस ने धरना समाप्त करने की दी थी चेतावनी

इससे पहले दिन में पुलिस ने धरना समाप्त करने की चेतावनी दी थी। चेतावनी के बावजूद शिक्षक धरने पर डटे रहे, जिसके बाद देर रात यह कार्रवाई की गई। पुलिस की कार्रवाई के बाद भी अतिथि शिक्षकों ने साफ कहा कि उनका आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है।

शिक्षकों का कहना है कि वे फिर से धरना देने की कोशिश करेंगे और जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि अब तक सरकार के साथ केवल चर्चा हुई है, लेकिन किसी भी मांग पर फैसला नहीं लिया गया है।

शिक्षा मंत्री के घर का किया था घेराव

इससे पहले अतिथि शिक्षकों ने स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के दुर्ग स्थित निवास का करीब 24 घंटे तक घेराव किया था। मंत्री से चर्चा कराने के आश्वासन के बाद शिक्षक वहां से लौटकर हिंदी भवन के सामने फिर धरने पर बैठ गए थे। उन्हें उम्मीद थी कि बातचीत के बाद उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

बुधवार दोपहर दुर्ग पुलिस बड़ी संख्या में जवानों के साथ धरना स्थल पहुंची। प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का आरोप है कि पुलिस अधिकारियों ने उन्हें शाम तक धरना समाप्त करने के लिए कहा था। साथ ही चेतावनी दी थी कि धरना जारी रहा तो अगले दिन से वहां बैठने नहीं दिया जाएगा। इसके बाद देर रात पुलिस ने कार्रवाई करते हुए धरना स्थल से टेंट हटाकर जब्त कर लिया।

दो दिन पहले शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के निवास का घेराव किया था।

दो दिन पहले शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के निवास का घेराव किया था।

समान वेतन और सेवा सुरक्षा की मांग पर अड़े अतिथि शिक्षक

अतिथि शिक्षक संघ का कहना है कि उनका आंदोलन संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान कार्य के बदले समान वेतन और मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर है। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षक कई सालों से स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, लेकिन आज भी उन्हें नियमित कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने दूर-दराज और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के स्कूलों में भी अपनी सेवाएं दी हैं। इसके बावजूद उनके भविष्य को लेकर अब तक कोई स्थायी नीति नहीं बनाई गई है। उनका आरोप है कि हर बार सिर्फ आश्वासन दिया जाता है, लेकिन उनकी मांगों पर कोई ठोस फैसला नहीं लिया जाता।

धरना स्थल पर पुलिस ने किया फ्लैग मार्च

बुधवार को भारी पुलिस बल के साथ प्रशासनिक अधिकारी धरना स्थल पहुंचे थे। पुलिस ने अतिथि शिक्षकों से शाम 6 बजे तक धरना समाप्त कर अपने-अपने घर लौटने को कहा था। इस दौरान पुलिस ने इलाके में फ्लैग मार्च भी किया।

पुलिस की कार्रवाई के बाद आंदोलनकारी शिक्षकों ने कहा कि टेंट हटाने से उनका आंदोलन नहीं रुकेगा। जब तक सरकार उनकी मांगों पर लिखित और ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

फिलहाल सरकार और अतिथि शिक्षक संघ के बीच बातचीत की संभावना बनी हुई है, लेकिन अब तक किसी भी मांग पर सहमति नहीं बन सकी है। ऐसे में आंदोलन आगे और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि समाधान होने तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।

27 जुलाई तक स्कूल लौटने के निर्देश

22 दिन से हड़ताल कर रहे अतिथि शिक्षकों को स्कूल शिक्षा विभाग ने अल्टीमेटम दिया है। विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों (डीईओ) को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि 27 जुलाई तक यदि हड़ताल पर गए अतिथि शिक्षक वापस काम पर नहीं लौटते हैं, तो उनकी सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी। इसके बाद स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित न हो, इसके लिए तत्काल वैकल्पिक व्यवस्था करने के भी निर्देश दिए गए हैं।

दूसरे शिक्षकों की व्यवस्था करने के निर्देश

यदि कोई अतिथि शिक्षक तय समय सीमा तक स्कूल नहीं लौटता है, तो विभागीय निर्देशों के खंड 7.3 के तहत उसकी नौकरी तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी जाएगी। साथ ही पढ़ाई जारी रखने के लिए दूसरे शिक्षकों की व्यवस्था करने को कहा गया है।

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छत्तीसगढ़

रायपुर में खम्हारडीह थाने के बाहर कांग्रेस का प्रदर्शन:12 कांग्रेसियों पर FIR से भड़के दीपक बैज, बोले- मंत्री-विधायकों पर भी दर्ज हो काउंटर केस

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रायपुर, एजेंसी। रायपुर में बुधवार को भाजपा और कांग्रेस के प्रदर्शन के दौरान जमकर बवाल हुआ। पुलिसकर्मियों के घायल होने पर 12 नामजद और कई अज्ञात कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ गैर-जमानती धाराओं पर FIR दर्ज की गई। अब इसके विरोध में प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज समेत कई नेता खम्हारडीह थाने में बीजेपी पर काउंटर FIR दर्ज कराने पहुंचे हैं।

थाने के बाहर बैठकर कांग्रेसी प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि बैज समेत कई नेता अंदर पुलिस अधिकारियों से चर्चा कर रहे हैं। कांग्रेस ने कहा कि, जितने मंत्री, विधायक और कार्यकर्ता आए, उन पर भी काउंटर FIR दर्ज हो। दीपक बैज ने कहा कि, वो पत्थर मारेंगे, तो हम पुलिस के भरोसे बैठे रहेंगे क्या? फिलहाल, अधिकारियों से बातचीत का दौर जारी है।

इससे पहले, प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि, हम चुप बैठने वाले नहीं हैं, हमने चूड़ियां नहीं पहनी हैं। बीजेपी की यह कार्रवाई पूरी तरह से बदले की भावना से प्रेरित है। कांग्रेस इस कानूनी और राजनीतिक कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देगी।

वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि, कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर सुनियोजित हमला किया गया। उन्होंने पुलिस अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि, भाजपा सरकार कुछ ही महीनों की मेहमान है।

कांग्रेस की मांगें और शिकायत पत्र में क्या-क्या दावे किए गए?

रायपुर में बुधवार (22 जुलाई) को राजीव भवन (कांग्रेस प्रदेश कार्यालय) के बाहर हुए भीषण उपद्रव और पथराव के मामले में छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने खम्हारडीह थाने में लिखित शिकायत दी है। कांग्रेस ने बीजेपी के कई मंत्रियों, विधायकों और संगठन के दिग्गजों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

मंत्री और विधायकों पर भी दर्ज हो FIR, इन्होंने भीड़ को उकसाया- विकास उपाध्याय

पूर्व कांग्रेस विधायक विकास उपाध्याय ने कहा कि, डिप्टी सीएम अरुण साव, मंत्री टंकराम वर्मा, विधायक राजेश मूरत, सुनील सोनी, अनुज शर्मा समेत कई मंत्री-विधायक यहां मौजूद थे। सबकी वीडियो क्लिपिंग है। इन्होंने भीड़ को उकसाया और हमारे तरफ भेजने का काम किया। उनके खिलाफ भी FIR होना चाहिए।

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