छत्तीसगढ़
“चैंपियन ऑफ द वर्ल्ड” बने दिव्यांशु देवांगन, 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग में वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ जीता स्वर्ण पदक
स्वर्ण पदक के साथ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर वतन लौटे रायगढ़ के लाडले दिव्यांशु, प्रेस कॉन्फ्रेंस में साझा किया जीत का सफर
लक्ष्य पर सटीक निशाना: वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर इतिहास के पन्नों में दर्ज हुए रायगढ़ के दिव्यांशु
रायगढ़। रायगढ़ शहर के लिए आज का दिन स्वर्णिम अक्षरों में लिखा जाएगा। शहर के उभरते हुए निशानेबाज दिव्यांशु देवांगन ने काहिरा (मिस्र) में आयोजित ISSF जूनियर वर्ल्ड कप 2026 में अपनी अद्भुत प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए 10 मीटर एयर राइफल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतकर विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है।ऐतिहासिक स्कोर: दिव्यांशु और उनकी साथी शाम्भवी क्षीरसागर ने मिक्स्ड टीम इवेंट के फाइनल में 499.9 का स्कोर बनाकर एक नया जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया।

क्वालिफिकेशन में भी दबदबा

फाइनल से पहले क्वालिफिकेशन राउंड में भी इस जोड़ी ने 632.0 का स्कोर कर शीर्ष स्थान प्राप्त किया था।
कड़ भारतीय टीम ने चीनी ताइपे (498.3) और फ्रांस जैसी दिग्गज टीमों को पछाड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की।
आज रायगढ़ में उनके निवास चक्रधर कला एवं संगीत महाविद्यालय के कैंपस में स्थानीय पत्रकारों से भेंट करके प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिव्यांशु ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता-पिता (शैलेंद्र देवांगन एवं श्रीमती यामिनी देवांगन), अपने कोच और रायगढ़ की मिट्टी को दिया। उन्होंने कहा”यह पदक केवल मेरा नहीं, बल्कि पूरे देश और मेरे शहर रायगढ़ का है। वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना एक सपना था, जो आज मेहनत और आप सबके आशीर्वाद से पूरा हुआ है। मेरा लक्ष्य अब ओलंपिक में तिरंगा लहराना है।”
दिव्यांशु की इस वैश्विक उपलब्धि से रायगढ़ सहित पूरे छत्तीसगढ़ में जश्न का माहौल है। छत्तीसगढ़ सर्व समाज संगठन और खेल प्रेमियों ने इसे क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक गौरव बताया है।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद रायगढ़ आगमन पर पत्रकारों से चर्चा करते हुए दिव्यांशु और उनके परिवार ने अपनी खुशी साझा की।प्रेस वार्ता के दौरान भावुक होते हुए दिव्यांशु के माता-पिता (श्रीमती यामिनी देवांगन एवं शैलेंद्र देवांगन) ने कहा, “हमें अपने बेटे की मेहनत पर अटूट विश्वास था। वह घंटों अभ्यास में बिताता था और आज उसकी तपस्या सफल हुई है। एक माता-पिता के लिए इससे बड़ा गर्व का दिन नहीं हो सकता कि उनका बेटा तिरंगे का मान विश्व स्तर पर बढ़ा रहा है।
दिव्यांशु के नाना ने अपने नाती को आशीर्वाद देते हुए कहा, “दिव्यांशु ने बचपन से ही लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करना सीखा था। उसकी यह सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा है। हमें पूर्ण विश्वास है कि वह ओलंपिक में भी स्वर्ण जीतकर देश का मस्तक ऊंचा करेगा।”
स्वर्ण पदक और विश्व कीर्तिमान

दिव्यांशु ने अपनी साथी खिलाड़ी के साथ मिलकर फाइनल राउंड में 499.9 का स्कोर खड़ा किया, जो एक नया जूनियर वर्ल्ड रिकॉर्ड है। उन्होंने कड़ी प्रतिस्पर्धा में चीन और फ्रांस जैसे देशों के निशानेबाजों को पीछे छोड़ते हुए यह मुकाम हासिल किया।
पत्रकारों से बात करते हुए चैंपियन ऑफ द वर्ल्ड दिव्यांशु देवांगन ने कहा, “यह जीत मेरे माता-पिता के त्याग और नाना जी के आशीर्वाद का प्रतिफल है। रायगढ़ के पत्रकारों और शहरवासियों ने हमेशा मेरा उत्साहवर्धन किया है। मेरा अगला लक्ष्य आगामी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत के लिए और अधिक पदक जीतना है।”
वर्ल्ड रिकॉर्डधारी दिव्यांशु देवांगन का रायगढ़ आगमन: जीत का गर्व और व्यवस्थाओं पर सवाल

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की तिरंगे को शान से लहराने वाले रायगढ़ के उभरते सितारे दिव्यांशू देवांगन का शहर वापसी पर भव्य स्वागत किया गया। 10 मीटर एयर राइफल शूटिंग स्पर्धा में न केवल स्वर्ण पदक जीतकर, बल्कि वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम कर उन्होंने छत्तीसगढ़ और देश का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया है।
अपनी इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए दिव्यांशु ने अपनी यात्रा, संघर्ष और भविष्य के लक्ष्यों पर विस्तार से बात की। उनके शब्दों में इस जीत की खुशी के साथ-साथ राज्य की खेल नीति को लेकर एक टीस भी साफ दिखाई दी।
अपनी सफलता पर मीडिया से चर्चा करते हुए दिव्यांशु ने कहा विश्व स्तर पर स्वर्ण पदक जीतना और वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना मेरे लिए एक सपने जैसा है। जब विदेशी धरती पर भारत का राष्ट्रगान बजता है, तो वह गर्व शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। यह जीत मेरी वर्षों की कड़ी मेहनत और मेरे परिवार के अटूट विश्वास का परिणाम है।”
शासन और खेल विभाग की बेरुखी पर सवाल

अपनी उपलब्धि के साथ ही दिव्यांशु ने छत्तीसगढ़ शासन और खेल विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा दुर्भाग्य की बात है कि इतनी बड़ी अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा की तैयारी और भागीदारी के दौरान मुझे शासन या खेल विभाग से कोई सहयोग प्राप्त नहीं हुआ। एक खिलाड़ी जब वैश्विक मंच पर जाता है, तो उसे आर्थिक और मानसिक संबल की आवश्यकता होती है, लेकिन यहाँ मुझे अपने दम पर ही आगे बढ़ना पड़ा।
संसाधनों का अभाव: “रायगढ़ जैसे शहर में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन यहाँ अंतरराष्ट्रीय स्तर की अभ्यास सुविधाएं शून्य हैं। मुझे अभ्यास के लिए दूसरे राज्यों या बड़े शहरों का रुख करना पड़ता है।”
रायगढ़ में शूटिंग एकेडमी की मांग
दिव्यांशू ने प्रशासन और सरकार के सामने एक अहम प्रस्ताव रखा: एकेडमी की पहल: उन्होंने मांग की कि शासन को रायगढ़ में एयर राइफल शूटिंग एकेडमी की शुरुआत करनी चाहिए।
भविष्य की प्रतिभाएं: “अगर रायगढ़ में ही वर्ल्ड क्लास ट्रेनिंग सेंटर और आधुनिक उपकरण उपलब्ध हों, तो यहाँ से मेरे जैसे कई और खिलाड़ी निकल सकते हैं जो ओलंपिक में भारत का नाम रोशन करेंगे। शासन को केवल जीत के बाद बधाई देने के बजाय, तैयारी के दौर में खिलाड़ियों का हाथ थामना चाहिए।”
परिवार का संघर्ष और संदेश

दिव्यांशू के परिवार ने भी इस अवसर पर अपनी खुशी साझा की, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि एक मध्यमवर्गीय परिवार के लिए बिना सरकारी मदद के अंतरराष्ट्रीय स्तर का खेल खर्च उठाना कितना चुनौतीपूर्ण है। परिवार का मानना है कि यदि प्रशासन समय पर सहयोग करे, तो छत्तीसगढ़ के युवा खेल जगत में क्रांति ला सकते हैं।
दिव्यांशु देवांगन की यह उपलब्धि रायगढ़ के लिए गौरव का विषय है, लेकिन उनका ‘वर्शन’ राज्य की खेल व्यवस्था के लिए एक आईना भी है। अब देखना यह है कि क्या शासन दिव्यांशु की मांग पर ध्यान देकर रायगढ़ में शूटिंग के भविष्य को संवारने के लिए कदम उठाता है, या खिलाड़ी इसी तरह अपने संघर्षों के बल पर पदक लाते रहेंगे।
कोरबा
मितानिनों का जनसैलाब उमड़ा, घंटाघर चौक से कलेक्ट्रेट तक गूंजा अधिकारों का स्वर
कोरबा। भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ ने मोदी की गारंटी का नाम देकर वर्ष 2023 के चुनावी घोषणा-पत्र में मितानिनों से किए गए वादों को पूरा कराने की मांग को लेकर गुरुवार को कोरबा में मितानिनों का अभूतपूर्व जनसमूह सड़कों पर उतर आया। प्रातः 11 बजे प्रदेश स्वास्थ्य मितानिन संघ के आह्वान पर जिले भर से आईं हजारों मितानिनें घंटाघर चौक में एकत्रित हुईं और अपनी न्यायोचित मांगों के समर्थन में एक दिवसीय सांकेतिक धरना दिया।

धरना उपरांत मितानिनों ने अनुशासन और एकजुटता का अद्भुत परिचय देते हुए घंटाघर चौक से कलेक्ट्रेट तक विशाल रैली निकाली। कतारबद्ध होकर आगे बढ़ रही हजारों महिलाओं का यह शांतिपूर्ण कारवां कोरबा शहर के लिए एक ऐतिहासिक दृश्य बन गया। जहां तक नजर जाती, वहां केवल मितानिनों का जनसैलाब दिखाई दे रहा था। इस अभूतपूर्व उपस्थिति को देखकर नगरवासी भी आश्चर्यचकित रह गए और पूरे शहर में इस विशाल रैली की चर्चा होती रही।

रैली के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। इसके बावजूद मितानिनों ने पूर्ण संयम, अनुशासन और शांति का परिचय देते हुए लोकतांत्रिक मर्यादाओं का पालन किया, जिससे पूरे कार्यक्रम का संचालन अत्यंत शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ।
कलेक्ट्रेट पहुंचकर मितानिन प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन प्राप्त करते हुए कलेक्टर ने आश्वस्त किया कि मितानिनों की मांगों एवं ज्ञापन को शीघ्र ही मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा, ताकि उनकी समस्याओं पर सकारात्मक विचार किया जा सके।

मितानिनों ने अपने ज्ञापन में वर्ष 2023 के चुनावी घोषणा-पत्र में किए गए वादों के अनुरूप राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत संविलियन, मानदेय में 50 प्रतिशत वृद्धि, ठेका प्रथा समाप्त करने तथा 24 वर्षों की सेवा के आधार पर वन-टाइम रिलैक्सेशन प्रदान करने की प्रमुख मांगें रखीं।

मितानिनों ने स्पष्ट किया कि उनका संघर्ष किसी टकराव का नहीं, बल्कि अपने अधिकारों, सम्मान और वर्षों की निस्वार्थ सेवा के उचित मूल्यांकन का संघर्ष है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि राज्य सरकार अपने वादों का सम्मान करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेकर हजारों मितानिनों के साथ न्याय करेगी।


कोरबा
वेदांता ने एक दशक में सरकारी खजाने में करीब रु5 लाख करोड़ का योगदान दिया
मुंबई। विविध प्राकृतिक संसाधनों में देश की अग्रणी कंपनी वेदांता लिमिटेड (बीएसईः 500295 और एनएसईः वीईडीएल) ने कंपनी की 11वीं टैक्स ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 26 में सरकारी खजाने में रु 62,722 करोड़ का योगदान दिया है। यह रिपोर्ट देश के निर्माण और पारदर्शी प्रशासन गवर्नेंस के लिए वेदांता की प्रतिबद्धता को और मजबूत बनाती है। यह योगदान कंपनी के संचालन से होने वाले कुल राजस्व का 36 फीसदी है, जो भारत के आर्थिक विकास में अहम भूमिका निभाता है।
यह पिछले साल की तुलना में योगदान में 13.3 फीसदी की बढ़ोतरी है, जिसके साथ पिछले दस सालों में सरकारी खजाने में वेदांता का कुल योगदान रु4,83,034 करोड़ हो गया है। कंपनी ने वित्तीय अनुशासन, राष्ट्र-निर्माण और विकसित भारत मिशन को समर्थन देने पर विशेष रूप से ध्यान दिया है। यह ग्रुप सरकारी खजाने में योगदान देने वाले भारत के टॉप 3 प्राइवेट सेक्टरों के सदनों में शामिल है।
सरकारी खजाने में यह योगदान वित्तीय वर्ष 26 में वेदांता के सबसे अच्छे फाइनेंशियल परफॉर्मेंस की वजह से हुआ। इस अवधि में कंपनी का राजस्व 15 फीसदी बढ़कर रु 1,74,075 करोड़ हो गया – जो कंपनी के इतिहास में सबसे ज़्यादा है – जबकि म्ठप्ज्क्। 29 फीसदी बढ़कर रु55,976 करोड़ पर पहुंच गया। इसी तरह कर के बाद मुनाफ़ा (पीएटी) 22 फीसदी बढ़कर रु25,096 करोड़ हो गया। कंपनी की बैलेंस शीट भी काफी मज़बूत हुई, शुद्ध ऋण म्ठप्ज्क्। के मुकाबले 1.22 गुना से बेहतर होकर 0.95गुना हो गया – जो 14 तिमाहियों में इसका सबसे अच्छा स्तर है।
वेदांता के अलग-अलग तरह के बिज़नेस पोर्टफोलियो – जिसमें जिंक-लेड-सिल्वर, एल्युमीनियम, कॉपर, आयरन ओर, स्टील, पावर, निकेल, क्रोम और ऑयल एंड गैस शामिल हैं – में मज़बूत ऑपरेशनल परफॉर्मेंस की वजह से कंपनी का फाइनेंशियल परफॉर्मेंस भी बहुत अच्छा रहा।
ज़िंक ने रु 19,053 करोड़ के साथ सबसे अधिक योगदान दिया, इसके बाद एल्युमीनियम (जिसे अब वेदांता एल्युमीनियम के तौर पर लिस्ट किया गया है) का योगदान रु 15,788 करोड़ और ऑयल एंड गैस (जिसे अब वेदांता ऑयल एंड गैस के तौर पर लिस्ट किया गया है) का योगदान रु 11,697 करोड रहा – यह महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा के क्षेत्र में वेदांता के पोर्टफोलियो के विस्तार और विविधता को दर्शाता है।
वेदांता लिमिटेड की टैक्स ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट के मुख्य बिंदु।
इस रिपोर्ट का 11वां संस्करण वित्त वर्ष 2025-26 के लिए वेदांता के टैक्स योगदान का विस्तृत ब्यौरा देता हैः
सरकारी रॉयल्टी और प्रॉफ़िट पेट्रोलियम (रु14,840 करोड़): इसमें राजस्थान, ओडिशा, गुजरात, आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गोवा, कर्नाटक और असम की राज्य सरकारों को बॉक्साइट, लेड-ज़िंक, सिल्वर, आयरन ओर, क्रूड ऑयल और नैचुरल गैस के लिए दी गई रॉयल्टी, साथ ही प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट के तहत भारत सरकार को दिया गया प्रॉफ़िट पेट्रोलियम शामिल है।
इनकम और कैपिटल पर टैक्स (रु8,290 करोड़): इसमें सभी अधिकार क्षेत्रों में कानूनी रिटर्न में फ़ाइल किए गए कॉर्पोरेट इनकम टैक्स शामिल हैं।
अन्य टैक्स (रु 11,897 करोड़): इसमें एक्सपोर्ट और इम्पोर्ट पर रु5,980 करोड़ की ड्यूटी, रु2,503 करोड़ का ऑयल सेस/एनसीसीडी, रु 1,252 करोड़ की इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी और रु 1,663 करोड़ का इनएलिजिबल जीएसटी शामिल है।
इनडायरेक्ट टैक्स (रु21,777 करोड़): इसमें सभी बिज़नेस युनिट्स में माल और सर्विस की बिक्री से सीजीएसटी, एसजीएसटी और आईजीएसटी शामिल हैं।
विदहोल्डिंग टैक्स (रु3,188 करोड़): इसमें पेरोल टैक्स और वेंडर और कॉन्ट्रैक्टर पेमेंट पर सोर्स पर काटे गए टैक्स शामिल हैं।
भारत सरकार को कॉर्पोरेट डिविडेंड (रु1,180 करोड़): हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड में भारत सरकार की 27.92फीसदी हिस्सेदारी के ज़रिए पेमेंट किया गया।
कर में पारदर्शिता वेदांता के बड़े एनवायरनमेंटल, सोशल और गवर्नेंस (ईएसजी) एजेंडा का मुख्य हिस्सा है। लगातार 11 सालों से बरकरार अपने स्वैच्छिक एवं सक्रिय डिस्क्लोजर के ज़रिए कंपनी का उद्देश्य हितधारकों का भरोसा बढ़ाना और कॉर्पोरेट प्रशासन के सर्वोच्च मानक सुनिश्चित करना है। वेदांता के कर सिद्धानत बी-टीम रिस्पॉन्सिबल टैक्स प्रिंसिपल और एक्सट्रैक्टिव इंडस्ट्रीज ट्रांसपेरेंसी इनिशिएटिव के साथ करीब से जुड़े हुए हैं, जो ज़िम्मेदार कॉर्पोरेट नागरिकता के लिए इसकी प्रतिबद्धता को और मजबूत बनाते हैं।
वित्तीय वर्ष 26 की टैक्स ट्रांसपेरेंसी रिपोर्ट देखने के लिए विज़िट करेंः tax-transparency-report.pdf

कोरबा
संविधान हत्या दिवस पर भाजपा की संगोष्ठी, आपातकाल को बताया लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय
आपातकाल ने कुचली थीं लोकतांत्रिक आवाजें : संविधान हत्या दिवस पर भाजपा की संगोष्ठी
कोरबा। भारतीय जनता पार्टी जिला कोरबा द्वारा देश के लोकतांत्रिक इतिहास के सबसे काले अध्याय माने जाने वाले आपातकाल के 51 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर “संविधान हत्या दिवस” के स्मरण में एक विचार संगोष्ठी का आयोजन किया गया। सीएसईबी स्थित सीनियर क्लब में आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ताओं ने आपातकाल को संविधान, लोकतंत्र की आवाज़ और नागरिक स्वतंत्रता पर किया गया सबसे बड़ा प्रहार बताते हुए उस दौर के संघर्षों को याद किया। संगोष्ठी में मुख्य रूप से विद्या भारती के प्रांतीय अध्यक्ष जुड़ावन ठाकुर एवं भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी उपस्थित रहे।

आपातकाल लोकतंत्र का काला अध्याय, नई पीढ़ी को बतानी होगी सच्चाई – जुड़ावन ठाकुर
जुड़ावन ठाकुर ने कहा कि 25 जून 1975 को लगाया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का ऐसा काला अध्याय है, जिसने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मौलिक अधिकारों और लोकतांत्रिक संस्थाओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया। उस समय लाखों लोगों की आवाज दबाने का प्रयास किया गया, और प्रेस पर सेंसरशिप लागू कर दी गई। जुड़ावन ठाकुर ने आगे कहां कि लोकतंत्र सेनानियों के संघर्ष और बलिदान के कारण ही देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था पुनः स्थापित हो सकी। आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी को आपातकाल के उस दौर की वास्तविकता से अवगत कराया जाए ताकि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति समाज में जागरूकता बनी रहे।कार्यक्रम में लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों को श्रद्धापूर्वक स्मरण करते हुए संविधान की मर्यादा और लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत बनाने का संकल्प भी लिया गया।

आपातकाल के दौरान लगभग 1 लाख लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया – गोपाल मोदी
भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने कहा कि 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक लागू आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे विवादास्पद और काला अध्याय था। इस दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाया गया, और राजनीतिक विरोधियों को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि आपातकाल के दौरान लगभग 1 लाख लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया, जबकि हजारों राजनीतिक कार्यकर्ताओं, सामाजिक नेताओं और पत्रकारों को मीसा जैसे कानूनों के तहत हिरासत में रखा गया। गोपाल मोदी ने कहा कि यह दौर लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का प्रतीक रहा, जिससे देशवासियों को लोकतंत्र की रक्षा के प्रति सदैव सजग रहने की सीख मिलती है।
इस अवसर पर सह संभाग प्रभारी डॉ. राजीव सिंह, जिला महामंत्री संजय शर्मा, एमआईसी सदस्य हितानंद अग्रवाल, वरिष्ठ नेता विकास अग्रवाल, योगेश जैन, रेणुका राठिया, नवीन अरोड़ा, कमला बरेठ, सतीश झा, नवीन मारकंडे, अर्जुन गुप्ता, योगेश मिश्रा, मनोज लहरे, मनीष मिश्रा, प्रीति स्वर्णकार, अजय चंद्रा, कुलसिंह कंवर, प्रकाश अग्रवाल, राजेश लहरे द्वारिका शर्मा, मोंटी पटेल, अविनाश दुबे सहित बड़ी संख्या में आमजन, प्रबुद्धजन, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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