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कोरबा

पहले बारिश में मुसीबत बढ़ जाती थी, अब तो चैन से रह पाते हैं..

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चलने-फिरने में असमर्थ मुरलीधर के लिए पीएम आवास योजना बनी सहारा
कोरबा। मैं जब तक सक्षम था..मेरी झोपड़ी में कोई ज्यादा परेशानी नहीं थी। बारिश हो तूफान.. हर मौसम में झोपड़ी में ही मेरा और मेरे परिवार का समय बीता। हालांकि खपरैल वाले मिट्टी के घरों में रहना तकलीफदेह तो है.. लेकिन हाथ पैर सही सलामत हो तो हर तकलीफ दूर की जा सकती है…मैं भी बारिश आते ही परेशानी से बचने के लिए परिवार सहित खपरैल ठीक करता था। बारिश के बाद उखड़ी हुई दीवारों की मरम्मत करता था और तेज बारिश में घर के भीतर गिरने वाली पानी की धार से बचने और घर के सामानों को बचाने के लिए भी तमाम कोशिश करता…कुछ साल पहले अचनाक से मेरे पैरों ने जवाब देना शुरू कर दिया। घुटनो में असहनीय दर्द के बीच चलना-फिरना भी मुश्किल हो गया। इस बीच मेरी चिंता बढ़ गई। बारिश से पहले जहाँ मैं घर के छत पर चढ़कर खपरैल ठीक तो कर लेता था..अब अपने घुटनों की वजह से यह सब करना आसान नहीं रह गया। मैं तनाव में था कि अब क्या होगा? बारिश में फिर वही परेशानी झेलनी होगी ! मेरी इस चिंता के बीच जब पीएम आवास योजना में मेरा नाम आया और पहली किश्त मिली तो मैंने कच्चे मकान को तुड़वाकर पक्का मकान बनाने में देरी नहीं की, आज मेरा घर पक्का बन गया है और अभी तेज बारिश भी हो रही है, इसके बावजूद मुझे कोई परेशानी नहीं है… मैं चैन से अपने घर में रह पा रहा हूँ।


    पोड़ी उपरोड़ा ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम मल्दा में रहने वाले ग्रामीण मुरलीधर निर्मलकर ने बताया कि बीते वर्ष प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ उन्हें मिला। इस योजना का लाभ उठाकर उन्होंने झोपड़ी की जगह पक्का मकान बनवा लिया है। मुरलीधर ने बताया कि उनकी उम्र 65-66 की हो गई है। इस बीच घुटनों में दर्द होने लगा है और कही आना जाना भी मुश्किल हो गया है। घुटनों में दर्द की वजह से उन्हें यहीं चिंता होती थी कि बारिश के दिनों में वह झोपड़ी में होने वाली परेशानियों से कैसे बचेगा, क्योंकि अब तो खपरैल भी ठीक करने के लिए सक्षम नहीं है। उन्होंने बताया कि वह सौभाग्यशाली है कि उनका नाम पीएम आवास योजना में आया और  उन्होंने बिना देर किए राशि मिलते ही अपना मकान पूरा बनवा लिया। ग्रामीण मुरलीधर की पत्नी लच्छमनिया बाई ने बताया कि झोपड़ी में बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा परेशानी होती थी। कच्ची दीवारे उखड़ जाती थी। घर के भीतर पानी की धार गिरने से जगह- जगह गड्ढे बन जाते थे। मेरा काम भी बढ़ जाता था। ग्रामीण मुरलीधर और उनकी पत्नी लच्छमनिया बाई ने पीएम आवास योजना के लिए लाभान्वित किए जाने पर खुशी जताई और प्रधानमंत्री-मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अब पक्का मकान बन गया है और बारिश भी हो रही है तो हम लोग चैन से रह पा रहे हैं, हमें कोई तकलीफ नहीं है।

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कोरबा

Inter-Area Hockey Tournament 2026-27 Inaugurated at SECL Headquarters

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16 Teams from SECL Headquarters and Various Operational Areas Participating in the Tournament

Bilaspur, October 14, 2026: The Inter-Area Hockey Tournament 2026-27, hosted by SECL Headquarters, commenced today with great enthusiasm at the Late Shri B.R. Yadav International Hockey Stadium, Bahatarai, Bilaspur. A total of 16 teams representing SECL Headquarters and various operational areas are participating in the tournament.

Director (Human Resources), Shri Biranchi Das, formally inaugurated the tournament by scoring a goal on the hockey field.

Addressing the gathering as Chief Guest, Shri Das highlighted the importance of teamwork, coordination and mental resilience in a fast-paced sport like hockey. He stated that the qualities developed on the sports field also contribute significantly to success at the workplace. He further emphasised SECL’s commitment to encouraging sporting talent, developing better sports infrastructure and providing opportunities for players to compete at higher levels.

The inaugural ceremony was attended by Heads of Departments from SECL Headquarters, representatives of JCC, Welfare Board, SC/ST Association and other associations, officers, employees and the Principal of DAV School.

At the beginning of the ceremony, General Manager (Welfare), Shri B.C. Sethi, delivered the welcome address and welcomed the Chief Guest. Other distinguished guests were welcomed by Senior Manager (HR), Shri Vivek Singh, and Senior Manager (HR), Shri Astik Sahu.

On the occasion, veteran hockey player and Senior DEO, Welfare Department, Shri Rajesh Henry, administered the oath of sportsmanship, discipline and fair play to all participating players.

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कोरबा

एसईसीएल मुख्यालय में अंतर-क्षेत्रीय हॉकी टूर्नामेंट 2026-27 का भव्य शुभारंभ

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मुख्यालय सहित विभिन्न संचालन क्षेत्रों की 16 टीमें ले रही हैं प्रतियोगिता में भाग

बिलासपुर/कोरबा। एसईसीएल मुख्यालय की मेजबानी में आज दिनांक 14 अक्टूबर 2026 को अंतर-क्षेत्रीय हॉकी टूर्नामेंट 2026-27 का स्व. श्री बी.आर. यादव अंतर्राष्ट्रीय हॉकी मैदान, बहतराई, बिलासपुर में उत्साहपूर्ण शुभारंभ हुआ। इस प्रतियोगिता में एसईसीएल मुख्यालय सहित विभिन्न संचालन क्षेत्रों की कुल 16 टीमें भाग ले रही हैं।

मुख्य अतिथि निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास ने हॉकी मैदान पर गोल कर टूर्नामेंट का औपचारिक शुभारंभ किया।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास उपस्थित रहे। अपने संबोधन में श्री दास ने कहा कि हॉकी जैसे तेज गति के खेल में टीमवर्क, समन्वय और मानसिक दृढ़ता का विशेष महत्व है। खेल के मैदान में सीखे गए ये गुण कार्यस्थल पर भी सफलता प्राप्त करने में सहायक होते हैं। उन्होंने एसईसीएल में खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, बेहतर खेल सुविधाएँ विकसित करने तथा खिलाड़ियों को बड़े मंचों तक पहुँचने के अवसर प्रदान करने पर जोर दिया।

इस अवसर पर मुख्यालय के विभागाध्यक्ष, जेसीसी, कल्याण मण्डल, सिस्टा/एसोसिएशन के प्रतिनिधिगण, अधिकारी , कर्मचारी एवं डीएवीस्कूल प्रिंसिपल उपस्थित रहे।
समारोह के प्रारंभ में महाप्रबंधक (कल्याण) बी.सी. सेठी ने स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया तथा मुख्य अतिथि का स्वागत किया। अन्य विशिष्ट अतिथियों का स्वागत वरिष्ठ प्रबंधक (मानव संसाधन) विवेक सिंह एवं वरिष्ठ प्रबंधक (मानव संसाधन) आस्तिक साहू ने किया।

इस अवसर पर वरिष्ठ हॉकी खिलाड़ी एवं कल्याण विभाग में पदस्थ वरिष्ठ डीईओ राजेश हेनरी ने सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों को खेल भावना, अनुशासन एवं निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा की शपथ दिलाई।

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कोरबा

गरबा के नाम पर पास व्यवस्था पर उठे सवाल, माता की आराधना में कम गरबा में ज्यादा उत्सुकता दिखाते आज ही पीढ़ी : जितेंद्र सारथी

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कोरबा । नवरात्रि का पर्व मां दुर्गा की आराधना, भक्ति, श्रद्धा और शक्ति की उपासना का पावन अवसर है, गरबा और डांडिया हमारी धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े हुए हैं,लेकिन वर्तमान समय में कोरबा जिले के कुछ गरबा पंडालों में पास व्यवस्था को लेकर उठ रहे सवालों ने धार्मिक आयोजनों की मूल भावना पर विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।

वन्यजीव संरक्षण से जुड़े सामाजिक कार्यकर्ता जितेंद्र सारथी ने गरबा आयोजनों के नाम पर पास जारी करने, कपल एंट्री जैसी व्यवस्थाओं और धार्मिक आयोजनों में कथित तौर पर धन वसूली की प्रवृत्ति पर सवाल उठाते हुए कहा कि मां की आराधना के लिए आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को व्यावसायिक गतिविधियों का माध्यम नहीं बनाया जाना चाहिए।

मां की भक्ति के लिए पास क्यों?

जितेंद्र सारथी ने कहा कि जब नवरात्रि का आयोजन मां दुर्गा की उपासना और धार्मिक आस्था के लिए किया जाता है, तो फिर आम श्रद्धालुओं को पास खरीदने की आवश्यकता क्यों पड़नी चाहिए? गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए धार्मिक आयोजनों में शामिल होना आर्थिक बोझ नहीं बनना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि किसी आयोजन में सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और व्यवस्थाओं के संचालन के लिए प्रवेश संबंधी नियम आवश्यक हैं, तो उनकी व्यवस्था पारदर्शी और सबके लिए न्यायसंगत होनी चाहिए, लेकिन धार्मिक आस्था के नाम पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने की प्रवृत्ति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अन्य समितियों से सीखने की जरूरत

सारथी ने कहा कि जिले में ऐसी छोटी-छोटी समितियां भी हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बिना प्रवेश पास बेचे गरबा और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित कर रही हैं, ऐसी समितियां श्रद्धा, सहयोग और सामूहिक सहभागिता के माध्यम से परंपरा को जीवित रखे हुए हैं,जब छोटी समितियां बिना व्यावसायिक प्रवेश व्यवस्था के आयोजन कर सकती हैं, तो बड़े आयोजनों में भी जनसहभागिता और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

आरती में कम भीड़, गरबा में सैकड़ों लोग—क्या यही हमारी धार्मिक प्राथमिकता है?

जितेंद्र सारथी ने धार्मिक आयोजनों में बदलती प्राथमिकताओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि कई स्थानों पर माता की आरती के समय अपेक्षाकृत कम लोग दिखाई देते हैं, जबकि गरबा शुरू होते ही सैकड़ों लोगों की भीड़ जुट जाती है,उन्होंने सवाल उठाया कि क्या नवरात्रि का उद्देश्य केवल मनोरंजन और नृत्य तक सीमित रह गया है? गरबा अवश्य होना चाहिए, लेकिन उसके साथ मां की आराधना, आरती, भक्ति और धार्मिक परंपराओं को भी समान महत्व मिलना चाहिए।

अश्लीलता और धार्मिक मर्यादा के उल्लंघन का विरोध
सारथी ने कुछ आयोजनों में कथित तौर पर अश्लील गीतों और आपत्तिजनक प्रस्तुतियों को लेकर भी चिंता जताई, उन्होंने कहा कि धार्मिक मंचों पर प्रस्तुत किए जाने वाले गीतों, संगीत और कार्यक्रमों की प्रकृति पर आयोजकों को गंभीरता से विचार करना चाहिए,मां दुर्गा की आराधना के नाम पर आयोजित कार्यक्रमों में ऐसा वातावरण बनाया जाना चाहिए, जो धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति और महिलाओं के सम्मान के अनुरूप हो,मनोरंजन के नाम पर धार्मिक आयोजनों की मर्यादा को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।

जितेंद्र सारथी ने सभी गरबा समितियों, श्रद्धालुओं और समाज के जागरूक नागरिकों से अपील की कि वे धार्मिक आयोजनों की पवित्रता बनाए रखने के लिए आगे आएं, ताकि गरबा केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक बना रहे।

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