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छत्तीसगढ़

राजनांदगांव में राइस मिलर के घर ED का छापा:कस्टम मिलिंग घोटाले की जांच के लिए पहुंची टीम; एक हफ्ते में दूसरी बड़ी कार्रवाई

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राजनांदगांव, एजेंसी। राजनांदगांव में गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय ने दबिश दी है। कस्टम मिलिंग में हुए घोटाले की जांच करने के लिए ED की टीम राइस मिल एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष के घर पहुंची है। ED की 6 सदस्यीय टीम सुबह राइस मिलर्स संतोष ऊर्फ टिल्लू अग्रवाल के ठिकानों पर जांच कर रही है। इनकी राइस मिल चिचोला में स्थित है।

छापा कस्टम मिलिंग में प्रोत्साहन राशि के घोटाले को लेकर मारा गया है। अभी कुछ दिन पहले ही डोंगरगढ़ के राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल के घर भी ED ने छापा मारा था। फिलहाल टिल्लू अग्रवाल के निवास में क्या मिला है इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है। ED की टीम अनुपम नगर स्थित घर में जांच पड़ताल कर रही है।

एक हफ्ते के अंदर दूसरी बड़ी कार्रवाई

राइस मिलर्स पर ED का एक्शन लगातार देखने को मिल रहा है। 8 जून को एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल के घर भी छापा मारा गया था। मनोज अग्रवाल बम्लेश्वरी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष भी हैं। उनके घर में ED की कार्रवाई 18 घंटे तक चली। शनिवार सुबह 5 बजे से शुरू हुई कार्रवाई रात 11 बजे तक चली। इसके बाद ED की टीम घर से कैश और दस्तावेज लेकर रवाना हो गई।

कस्टम मिलिंग घोटाले की जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय के अफसरों की टीम MH पासिंग और CG 04 पासिंग कार से अग्रवाल के डोंगरगढ़ और रायपुर स्थित घर पहुंची थी। देर रात स्थानीय पुलिस के साथ 2 सील बंद बैग लेकर ED के अधिकारी रायपुर के लिए रवाना हुए। बताया जा रहा है कि मनोज अग्रवाल के घर से बरामद हुए रुपए गिनने के लिए टीम को 2 मशीनें मंगवानी पड़ी थीं।

कमीशन के संबंध में सवाल-जवाब कर रही ED

ED का आरोप है कि मार्कफेड के अधिकारी और राज्य चावल मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मिलकर कस्टम मिलिंग घोटाले को अंजाम दिया है। इसके लिए अधिकारी और मिलर्स ने विशेष प्रोत्साहन राशि का दुरुपयोग किया है। करोड़ों की रिश्वत कमाने की साजिश रची है।

दो साल से चल रहा था खेल

कारोबारियों के अनुसार, मार्कफेड के पूर्व एमडी मनोज सोनी और उनके सहयोगियों का खेल दो साल से चल रहा था। इसके लिए पूरी टीम बनाई गई थी। टीम में मॉर्कफेड के अफसर और छत्तीसगढ़ स्टेट मिलर्स एसोसिएशन के पदाधिकारी भी शामिल थे। आरोप है कि कस्टम मिलिंग, डीओ काटने, मोटे धान को पतला करने, पतले धान को मोटा करने, FCI को नान में कंवर्ट करने का पैसा लिया जाता था।

इस तरह बनाया गया था वसूली सिस्टम

ED की जांच में ये पाया गया कि, तत्कालीन जिला मार्केटिंग ऑफिसर प्रीतिका पूजा केरकेट्टा को मनोज सोनी ने रोशन चंद्राकर के माध्यम से निर्देश दिया था। इसमें कहा गया था कि उन्हीं राइस मिलर्स के बिल का भुगतान किया जाना है, जिन्होंने वसूली की राशि रोशन चंद्राकर को दे दी है।

किन राइस मिलर्स को भुगतान किया जाना है, इसकी जानकारी संबंधित जिले के राइस मिलर्स एसोसिएशन के जरिए मिलती थी। रोशन चंद्राकर जिन मिलर्स की जानकारी प्रीतिका को देता थे, उनका भुगतान कर बाकी मिलर्स की राशि रोक दी जाती थी।

कस्टम मिलिंग मामले में हुई भष्टाचार की जांच और मनोज सोनी की गिरफ्तारी के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने राइस मिलर्स को समंस जारी किया है। वहीं, एसोसिएशन से जुड़े कई लोगों ने ED दफ्तर पहुंच कर अपने बयान दर्ज कराए हैं। पूछताछ में सहयोग नहीं करने और समंस के बाद भी नहीं आने वाले अधिकारियों और एसोसिएशन से जुड़े लोगों को जल्द ही ED गिरफ्तार कर सकती है।

अक्टूबर 2023 में ED की टीम ने छापा मारा था

20 अक्टूबर 2023 को ED ने छापा मारा था। ED ने अपने ऑफिशियल X अकाउंट पर लिखा कि, 20-21 अक्टूबर को मार्कफेड के पूर्व MD, छत्तीसगढ़ राइस मिलर्स संगठन के कोषाध्यक्ष और कुछ सदस्यों, राइस मिलर्स और कस्टम मिलिंग से जुड़े लोगों के घर पर जांच की गई।

चावल घोटाले से जुड़ी इस जांच में कई संदिग्ध दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और 1 करोड़ 6 लाख कैश मिला। ED ने इनकम टैक्स की शिकायत के आधार पर जांच शुरू की। इस जांच के बाद ED की स्थानीय टीम ने प्रतिवेदन दिया और उसके बाद एफआईआर हुई।

BJP विधायक शिवरतन शर्मा ने विधानसभा में उठाया था मुद्दा

6 मार्च 2023 को विधानसभा में बीजेपी विधायक शिवरतन शर्मा ने कस्टम मिलिंग में प्रति टन 20 रुपए वसूली का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि जो मिलर्स वसूली देते है, उनको ही भुगतान होता है। इसके बाद तत्कालीन मंत्री मोहम्मद अकबर ने सबूत मांगा था और सदन में जमकर हंगामा हुआ था।

फोर्टिफाइड राइस के भुगतान पर भी वसूली का आरोप

राइस मिलर्स ने फोर्टिफाइड राइस का भुगतान करने पर पैसे मांगने का आरोप लगाया था। उनके अनुसार, केंद्र सरकार ने PDS के जरिए गरीबों को दिए जाने वाले अनाज की पौष्टिकता बढ़ाने के लिए फोर्टिफाइड राइस की मात्रा बढ़ाने का आदेश दिया था।

सरकार के आदेश के मुताबिक, FCI और नागरिक आपूर्ति निगम में जमा होने वाले चावल में एक प्रतिशत फोर्टिफाइड राइस कर्नेल होना चाहिए। 99 किलो सामान्य चावल का पैमाना तय किया गया था। आरोप है कि इसमें कमीशनखोरी और घूसखोरी का खेल चला।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : ’विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल डेका ने लगाए पौधे’

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’विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल श्री डेका ने लगाए पौधे’
’विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल श्री डेका ने लगाए पौधे’
’विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल श्री डेका ने लगाए पौधे’
’विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल श्री डेका ने लगाए पौधे’

रायपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर राज्यपाल मेन डेका ने आज यहां रायपुर स्थित लोकभवन परिसर और निर्माणाधीन लोकभवन परिसर नवा रायपुर में पौधे लगाए। उन्होंने सभी से अपील की कि ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाएं और पर्यावरण को सुरक्षित रखने में योगदान करे। इस अवसर पर राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना भी उपस्थित थे।

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कोरबा

छप्पर तोड़कर दो दुकानों में चोरी, CCTV में कैद बदमाश:कुसमुंडा के विकास नगर शॉपिंग सेंटर में नकदी और इलेक्ट्रॉनिक सामान ले उड़े

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कोरबा। कोरबा जिले के कुसमुंडा क्षेत्र के विकास नगर शॉपिंग सेंटर में बीती रात चोरों ने दो दुकानों को निशाना बनाते हुए नकदी और इलेक्ट्रॉनिक सामान पर हाथ साफ कर दिया। चोरों ने छप्पर और फॉल सीलिंग तोड़कर दुकानों में प्रवेश किया। पूरी वारदात दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।

पहली घटना एक बिजली दुकान में हुई, जहां चोर सीमेंट शीट हटाकर और फॉल सीलिंग तोड़कर अंदर घुसे। दुकान संचालक मनोज सिंह के मुताबिक, चोरों ने सबसे पहले सीसीटीवी कैमरे के तार काटे, लेकिन डीवीआर सुरक्षित रहने से उनकी गतिविधियां रिकॉर्ड हो गईं। दुकान से 400 से 500 रुपये नकद, ट्रिमर, टॉर्च, बैटरी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान चोरी किया गया।

चोरी के मामले को इन्वेस्टीगेट करती हुई पुलिस

चोरी के मामले को इन्वेस्टीगेट करती हुई पुलिस

नगदी ले कर फरार हुए चोर

वहीं दूसरी वारदात सामने स्थित सौरभ अग्रवाल की डेयरी में हुई। सुबह दुकान खोलने पर चोरी का पता चला। डेयरी संचालक के अनुसार, चोर गल्ले में रखी 7 से 8 हजार रुपये की चिल्हर नकदी लेकर फरार हो गए।

CCTV में दिखे दो बदमाश

सीसीटीवी फुटेज में दो संदिग्ध चोर नजर आए हैं। दोनों चप्पल पहनकर दुकान में घुसे थे। भागने के दौरान वे बिजली कार्यालय की दीवार के पास अपनी चप्पल छोड़ गए, जिसे पुलिस ने जांच के लिए जब्त किया है।

CCTV कैमरे में चोरी करते हुए कैद हुए आरोपी

CCTV कैमरे में चोरी करते हुए कैद हुए आरोपी

पुराने गिरोह पर संदेह

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि कुछ महीने पहले विकास नगर कॉलोनी के गुरुद्वारा कॉम्प्लेक्स स्थित एक रेडीमेड दुकान और इमली छापर चौक की कपड़ा दुकान में भी इसी तरह छप्पर तोड़कर चोरी की घटनाएं हुई थीं। व्यापारियों को आशंका है कि इन सभी वारदातों के पीछे एक ही गिरोह सक्रिय है।

रात्रि गश्त बढ़ाने की मांग

सूचना मिलने पर कुसमुंडा पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान करने में जुटी है। लगातार हो रही चोरी की घटनाओं से नाराज व्यापारियों ने क्षेत्र में रात्रि गश्त बढ़ाने और जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : विशेष लेख : विकसित छत्तीसगढ़ का नया विजन: पारंपरिक डिग्रियों से ‘ग्लोबल करियर’ की ओर बढ़ते युवाओं के कदम

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सिर्फ साक्षरता नहीं, सक्षमता का नया दौर

  •     विष्णु प्रसाद वर्मा, सहायक संचालक (जनसंपर्क)

      छत्तीसगढ़, जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, घने वनों और खनिज संपदा के लिए जाना जाता है, आज एक नई पहचान के साथ उभर रहा है,एक ज्ञान-आधारित, प्रगतिशील राज्य। 21वीं सदी की वैश्विक अर्थव्यवस्था में वह समाज सफल होगा जिसके पास अत्याधुनिक ज्ञान, तकनीकी कौशल और नवाचार की शक्ति हो। इसी सोच के साथ मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ‘उत्कृष्टता केंद्र (Center of Excellence) योजना’ शुरू की है। यह पहल पारंपरिक उच्च शिक्षा मॉडल को बदलकर कॉलेजों को युवाओं के लिए आधुनिक लॉन्चपैड बनाने की महत्वाकांक्षा रखती है।

कौशल और रोजगार के बीच की खाई

     छत्तीसगढ़ में उच्च शिक्षा अक्सर सैद्धांतिक ज्ञान तक सीमित रही है। परिणामस्वरूप, युवाओं को डिग्रियाँ मिलती रहीं पर उद्योग की बदलती तकनीकी मांगों—जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल स्किलिंग और डेटा एनालिटिक्स—और वास्तविक कौशल के बीच एक गहरी खाई बन गई। खासकर वनांचल और ग्रामीण इलाकों के मेधावी छात्र आधुनिक संसाधनों, प्रयोगशालाओं और वैश्विक मार्गदर्शन के अभाव में पिछड़ जाते थे। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) 2020 की दिशानिर्देशों को अपनाते हुए, सरकार ने इसी खाई को पाटने और बहुसांस्कृतिक, अनुसंधान-उन्मुख संस्थान स्थापित करने का निर्णय लिया है।
      यह योजना दावे भर नहीं है—इसके पीछे ठोस बजटीय प्रावधान और चरणबद्ध रोडमैप मौजूद है। राज्य के 36 प्रमुख महाविद्यालयों जिनमें 3,000 से अधिक नामांकन हैं,उसे ‘उत्कृष्टता केंद्र’ के रूप में अपग्रेड किया जाएगा। प्रारम्भिक चरण में 25 कॉलेजों के लिए प्रति कॉलेज 3 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं और अगले चरण में प्रमुख कॉलेजों के लिए 15 करोड़ रुपए तक का विशेष वित्तीय प्रावधान रखा गया है। साथ ही ‘राज्य रिसर्च एवं इनोवेशन योजना’ जैसी पहलें प्राध्यापकों और छात्रों को वैश्विक मानक के अनुसंधान के लिए वित्तीय व प्रशासनिक सहायता देंगी।

फाइव‑पिलर आर्किटेक्चर: शिक्षा के पाँच स्तंभ

      ये उत्कृष्टता केंद्र सिर्फ भौतिक सुविधाएँ नहीं होंगे; इनके कार्य-तत्व पांच मुख्य स्तंभों पर आधारित होंगे, जो छात्रों को विश्वस्तरीय अवसर प्रदान करेंगे।

अत्याधुनिक प्रयोगशालाएँ

      विज्ञान, कंप्यूटर साइंस, तकनीकी और कृषि विषयों में अंतरराष्ट्रीय मानक की लैब सुविधाएँ उपलब्ध कराई जाएंगी, जिससे थ्योरी के साथ ‘करके सीखना’ सुनिश्चित होगा।डिजिटल लर्निंग सेंटर: हाई-स्पीड इंटरनेट, स्मार्ट क्लासरूम और ई‑लाइब्रेरी के जरिए दूरस्थ और वनांचल के छात्र भी वैश्विक ज्ञान स्रोतों से जुड़ सकेंगे। रिसर्च एवं इनोवेशन लैब: स्थानीय कृषि, जनजातीय कला, हर्बल चिकित्सा और माइनिंग जैसे क्षेत्रीय चुनौतियों का समाधान खोजने के लिए शोध को प्रेरित किया जाएगा, ताकि ‘लोकल’ शोध को ‘ग्लोबल’ पहचान मिल सके। 

रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण

      कोडिंग, आईटी कौशल, उद्यमिता और स्टार्टअप इनक्यूबेशन सेल्स के माध्यम से छात्रों को मार्केट-रेडी बनाया जाएगा। 

करियर एवं प्लेसमेंट गाइडेंस

     इन‑हाउस काउंसलिंग, कैंपस प्लेसमेंट और प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे UPSC, CGPSC, बैंकिंग) की तैयारी के लिए संरचित मार्गदर्शन उपलब्ध होगा। 

जमीनी असर: लाभ किस तरह पहुंचेगा?

     यह योजना व्यक्तिगत छात्रवृत्ति या लोन नहीं, बल्कि संस्थागत सशक्तिकरण पर आधारित है। चयनित उत्कृष्टता केंद्रों के नियमित छात्र बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के इन सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। कौशल विकास, रिसर्च और इनक्यूबेशन प्रोग्राम्स के लिए विस्तृत परवर्ती पंजीकरण की व्यवस्था रहेगी, जो सरल और पारदर्शी रखी गई है ताकि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र कागजी बाधाओं में न फ़ँसें।

बौद्धिक पलायन पर अंकुश और आर्थिक सशक्तिकरण

     जब राष्ट्रीय स्तर की सुविधाएँ और वैश्विक मानक का शिक्षण वातावरण छात्रों के अपने जिलों में उपलब्ध होगा तो दूर के महानगरों की ओर पलायन कम होगा। यह युवाओं को स्थानीय स्तर पर ही नई उद्यमी गतिविधियाँ आरम्भ करने और नये रोजगार सृजित करने के लिए प्रेरित करेगा, जिससे छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था ‘लोकल से ग्लोबल’ की दिशा में जीतेगी।

मुख्यमंत्री का विजन: रोजगार मांगने वाले नहीं, रोजगार देने वाले बनें युवा

    मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का संदेश स्पष्ट है कि छत्तीसगढ़ के युवा प्रतिभाशाली हैं; उन्हें सही अवसर और आधुनिक संसाधन मिले तो वे न केवल नौकरी पाएँगे बल्कि नये उद्यम भी खोलकर रोजगार के अवसर पैदा करेंगे। यही इस योजना की आत्मा है।युवाओं को रोजगार संचयित करने की बजाय रोजगार सृजन के लिये सक्षम बनाना है।
         ‘उत्कृष्टता केंद्र योजना’ छत्तीसगढ़ के शैक्षणिक इतिहास में एक निर्णायक मील का पत्थर है। यह राज्य को परंपरागत ‘उपभोक्ता’ पहचान से उठाकर एक ‘नॉलेज स्टेट’ में बदलने की दिशा में एक ठोस कदम है। आने वाले वर्षों में इन केंद्रों से निकले प्रशिक्षित युवा केवल कागजी प्रमाणपत्र नहीं लेकर बाहर जाएंगे; उनके पास आधुनिक कौशल, नवाचार की चाह और आत्मनिर्भरता की भावना होगी। यह पहल निःसंदेह छत्तीसगढ़ को समृद्धि और वैश्विक प्रतिस्पर्धा दोनों में मजबूती देगी।

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