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कोरबा

युक्तियुक्तकरण के बाद भी जिले के 90 स्कूल रह गए एकल शिक्षक, कलेक्टर ने कहा – सूची शासन को भेजेंगे

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शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के सम्बंध में कलेक्टर ने ली प्रेस वार्ता
युक्तियुक्तकरण की कार्रवाही से किसी भी शाला या शिक्षक का पद नहीं हो रहा समाप्त
प्रकिया से दूरस्थ क्षेत्रों के प्राथमिक शालाओं में पहली बार दो शिक्षकों की हुई व्यवस्था
सभी मीडिल स्कूलों में न्यूनतम 3 शिक्षकों की उपलब्धता हुई सुनिश्चित
जिला प्रशासन व शिक्षा विभाग द्वारा अतिशेष शिक्षकों की कॉउंसलिंग में की गई पूर्ण सहायता
जिले में युक्तियुक्त करण की प्रकिया पूर्ण पारदर्शिता के साथ पूर्ण – कलेक्टर

कोरबा। कोरबा जिले में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया लगभग पूर्ण हो गई। युक्तियुक्तकरण के बाद भी जिले के 90 विद्यालय एकल शिक्षक ही रह गए। कलेक्टर अजीत वसंत ने बताया कि इन 90 विद्यालयों में सेटअप के आधार पर 2-2 शिक्षकों की नियुक्ति के लिए प्रशासन को प्रसताव भेजा जाएगा, तब तक डीएमएफ से एकल शिक्षकीय विद्यालयों में 90 शिक्षकों की नियुक्ति जिला स्तर पर किया जाएगा। शासन स्तर पर आगामी सत्र से पूर्व 5 हजार शिक्षकों की भर्ती होनी है।


कलेक्टर अजीत वसंत ने आज जिले में संपन्न हुए शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के सम्बंध में जानकारी देने हेतु प्रेस वार्ता ली। उन्होंने सभी पत्रकारों को अवगत कराते हुए बताया कि जिले में शालाओं और शिक्षकों का युक्तियुक्त करण की प्रकिया पूर्ण पारदर्शिता के साथ सम्पन्न हुआ है। प्रक्रिया से जिले के पाली, पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के दूरस्थ क्षेत्रों के अनेक प्राथमिक शालाओं में पहली बार दो शिक्षकों की व्यवस्था हुई है एवं जिले में कोई भी शाला शिक्षकविहीन नहीं रह गया है। जिले के सभी माध्यमिक विद्यालयों में न्यूनतम 3 शिक्षकों की पदस्थापना सुनिश्चित की गई है। उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में विषयवार व्याख्याताओं की व्यवस्था हुई है। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित प्रेस वार्ता में कलेक्टर ने बताया कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर और समावेशी बनाने के लिए शालाओं और शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया गया है। प्रक्रिया से छात्र शिक्षक अनुपात में कोई बदलाव नहीं आया है। साथ ही किसी शिक्षक की सेवा या पद की समाप्ति नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि जिले के एक ही परिसर में संचालित विभिन्न स्तर के शालाओं के समायोजन के उपरांत प्राथमिक शाला के 287 सहायक शिक्षक व 14 प्रधान पाठक पूर्व माध्यमिक शाला के 147 शिक्षक, 04 प्रधान पाठक 75 व्याख्याता अतिशेष रहे। जिनकी विभिन्न चरणों में आयोजित कॉउंसलिंग के माध्यम से नई पदस्थापना की गई है। कॉउंसलिंग हेतु राज्य शासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन किया गया है। इस हेतु सर्वप्रथम 60 वर्ष से अधिक आयु के शिक्षक, महिला, सीएससी, शिक्षक संघ के पदाधिकारी एवं शिक्षक को क्रमानुसार वरीयता अनुसार काउंसलिंग की गई। कॉउंसलिंग में दूरस्थ क्षेत्र के विद्यालयों में शिक्षक व्यवस्था हेतु प्राथमिकता दी गई है।


कलेक्टर ने बताया कि युक्तियुक्तकरण की प्रकिया में जिला प्रशासन एवं शिक्षा विभाग द्वारा सभी अतिशेष शिक्षकों को पूर्ण सहयोग प्रदान किया गया है। उन्होंने बताया कि जिले में अतिशेष शिक्षकों की कमी के कारण वर्तमान में केवल 90 प्राथमिक शाला एकलशिक्षकीय रह गए हैं, जिनकी सूची विभाग द्वारा शासन को भेजी जा रही है। जिससे शासन द्वारा इन विद्यालयों में निर्धारित माप दंड अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। साथ ही जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफ से इन एकलशिक्षकीय विद्यालय में शाला प्रारम्भ होने के साथ ही अतिथि शिक्षक की व्यवस्था की जाएगी।
इस दौरान कलेक्टर ने युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के सम्बंध में सामने आने वाली सभी भ्रांतियों एवं अफवाहों पर प्रशासन का पक्ष रखते हुए सभी पत्रकारों की जिज्ञासाओं एवं समस्याओं का समाधान किया। इस अवसर पर जिला पंचायत के सीईओ दिनेश नाग, जिला शिक्षा अधिकारी टी पी उपाध्याय, कोरबा प्रेस क्लब के अध्यक्ष राजेन्द्र जायसवाल सहित विभिन्न प्रिंट , इलेक्ट्रॉनिक एवं सोशल मीडिया एजेंसी के ब्यूरोचीफ, वरिष्ठ पत्रकार व प्रतिनिधि उपस्थित थे।
कोरबा में कोई भी शिक्षक संघ मान्यता प्राप्त नहीं
जिला शिक्षाधिकारी टी पी उपाध्याय ने बताया कि युक्तियुक्तकरण में मान्यता प्राप्त शिक्षक संघ के पदाधिकारियों को प्राथमिकता देने का निर्देश शासन से प्राप्त हुआ था, लेकिन युक्तियुक्तकरण में शिक्षक संघ के पदाधिकारियों को लाभ नहीं मिला, कारण कोरबा में कोई भी शिक्षक संघ शासन स्तर से मान्यता प्राप्त नहीं हैं।
कई अतिशेष व्याख्याता जाएंगे दूसरे जिले
हायर सेकेण्डरी स्कूलों में युक्तियुक्तकरण के बाद कामर्स, जीव विज्ञान के कई व्याख्याता अतिशेष रह गए हैं, जिनकी काऊंसिलिंग संभाग स्तर पर होगी। कलेक्टर ने बताया कि विषय विशेषज्ञ व्याख्याताओं को जिले में रखने का भरसक प्रयास किया गया, लेकिन सेटअप के आधार पर अभी भी कई व्याख्याता अतिशेष रह गए हैं, जिन्हें संभाग स्तर पर होने वाली काऊंसिलिंग में नई पदस्थापना मिलेगी।
5 कक्षाओं के लिए 2 शिक्षकों का सेटअप, कैसे बढ़ेगी शिक्षा की गुणवत्ता
छत्तीसगढ़ सरकार राज्य बनने के बाद से ही शिक्षा में पर्याप्त बजट नहीं रख रही है, जिसके कारण छत्तीसगढ़ से विद्यार्थी बेहतर शिक्षा के लिए अन्य राज्यों की ओर रूख करते हैं। राज्य स्थापना के 27 साल बाद भी सेटअप जस का तस बना हुआ है। प्राथमिक स्कूलों में कक्षा पहली से पांचवीं तक 5 कक्षाओं को 2 शिक्षक ही पढ़ा रहे हैं। युक्तियुक्तकरण के बाद जिले में ही 90 स्कूल एकल शिक्षकीय बने रहेंगे। पूरे प्रदेश में इसी तरह के हालात बने हुए हैं। इसके पूर्व प्रदेश में 1 हजार से भी अधिक स्कूलों में एकल शिक्षक 5 कक्षाओं को संभाल रहे थे। इस तरह के सेटअप से राज्य की शिक्षा व्यवस्था कैसी होगी? समक्ष सकते हैं।
भूपेश सरकार ने 32 हजार शिक्षकों की भर्ती का वादा किया, लेकिन ठगे रह गया युवा वर्ग
सुशासन को भी डेढ़ साल बीते, लेकिन इंतजार जारी है

चुनाव से पूर्व कांग्रेस की भूपेश सरकार ने 32 हजार शिक्षकों की भर्ती का वादा किया था, लेकिन पांच साल में कई युवाओं की उम्र ही निकल गई, लेकिन एक भी भर्ती नहीं हुई और युवा वर्ग ठगा सा रह गया। आज भी प्रदेश में डीएलएड, बीएड, एमएड लाखों की संख्या में बेरोजगार घूम रहे हैं और विष्णु के सुशासन के डेढ़ वर्ष बीत जाने के बाद भी शिक्षकों की भर्ती नहीं हुई। डेढ़ साल बाद विष्णुदेव साय युवा वर्ग को भरोसा दिला रहे हैं कि किश्तों में 32 हजार शिक्षकों की भर्ती की जाएगी। इस सत्र से पहले 5 हजार शिक्षकों की भर्ती करने की घोषणा मुख्यमंत्री ने की है।

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कोरबा

रायपुर : ‘मन की बात’ में बार-बार छत्तीसगढ़ का उल्लेख प्रदेशवासियों के लिए गौरव की बात: मुख्यमंत्री साय

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 ‘मन की बात’ में बार-बार छत्तीसगढ़ का उल्लेख प्रदेशवासियों के लिए गौरव की बात: मुख्यमंत्री श्री साय

मुख्यमंत्री साय ने फाफाडीह में युवाओं और आमजनों के साथ सुनी ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी

प्रधानमंत्री  नरेंद्र मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत कोरबा में जल संरक्षण के उत्कृष्ट प्रयासों की सराहना की

जल संचयन को जन-अभियान बनाने का किया आह्वान

मुख्यमंत्री ने कारगिल विजय दिवस पर वीर शहीदों को दी श्रद्धांजलि

 ‘मन की बात’ में बार-बार छत्तीसगढ़ का उल्लेख प्रदेशवासियों के लिए गौरव की बात: मुख्यमंत्री श्री साय

 ‘मन की बात’ में बार-बार छत्तीसगढ़ का उल्लेख प्रदेशवासियों के लिए गौरव की बात: मुख्यमंत्री श्री साय

रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने आज राजधानी रायपुर के फाफाडीह स्थित दया भवन में युवा साथियों, जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 136वीं कड़ी का श्रवण किया।
कार्यक्रम के उपरांत मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ‘मन की बात’ कार्यक्रम देशवासियों के साथ संवाद का एक ऐसा सशक्त मंच बन गया है, जो समाज के बीच हो रहे सकारात्मक और प्रेरणादायी कार्यों को राष्ट्रीय पहचान दिलाता है। देशभर के लोगों को प्रत्येक माह इस कार्यक्रम की उत्सुकता से प्रतीक्षा रहती है। प्रधानमंत्री इस कार्यक्रम के माध्यम से ऐसे व्यक्तियों, संस्थाओं, नवाचारों और जन-अभियानों को सामने लाते हैं, जो बिना किसी प्रसिद्धि या व्यक्तिगत अपेक्षा के समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

छत्तीसगढ़ के नवाचारों को लगातार मिल रही राष्ट्रीय पहचान

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पिछले कुछ महीनों में ‘मन की बात’ कार्यक्रम में लगातार छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों, सांस्कृतिक विरासत और नवाचारों का उल्लेख किया जाना प्रत्येक प्रदेशवासी के लिए गर्व की बात है। प्रधानमंत्री ने इससे पहले मल्हार की समृद्ध पुरातात्विक विरासत, बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे अभिनव आयोजनों का उल्लेख कर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक शक्ति, जनजातीय परंपराओं और युवा प्रतिभाओं को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया था।

उन्होंने कहा कि आज के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री द्वारा कोरबा में जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण की दिशा में किए जा रहे उत्कृष्ट कार्यों का उल्लेख किया गया। यह छत्तीसगढ़ के लिए एक और गौरवपूर्ण उपलब्धि है। प्रधानमंत्री द्वारा प्रदेश की उपलब्धियों का राष्ट्रीय मंच पर उल्लेख किए जाने से न केवल छत्तीसगढ़वासियों का उत्साह बढ़ता है, बल्कि राज्य के नवाचारों और जनभागीदारी आधारित विकास मॉडल को देशभर में नई पहचान भी मिलती है।

कोरबा के जल संरक्षण प्रयासों की प्रधानमंत्री ने की सराहना

‘मन की बात’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के अंतर्गत देशभर में वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, पुराने जल स्रोतों के पुनर्जीवन और वृक्षारोपण के लिए किए जा रहे प्रयासों की चर्चा की। उन्होंने छत्तीसगढ़ के कोरबा में जल संरक्षण की दिशा में किए जा रहे कार्यों को उत्साहजनक बताते हुए उनकी सराहना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि कोरबा में वैज्ञानिक पद्धति से जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण के लिए भू-स्थानिक मैपिंग, शैलो एक्विफर मैनेजमेंट, रिचार्ज वेल तथा अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। इन प्रयासों का उद्देश्य वर्षा जल को अधिकतम मात्रा में संरक्षित करना, भूजल स्तर में सुधार लाना और क्षेत्र में जल उपलब्धता को दीर्घकालिक रूप से सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ‘कैच द रेन’ अभियान के माध्यम से बारिश की प्रत्येक बूंद को सहेजने का जो संदेश दिया है, वह वर्तमान और भविष्य दोनों की आवश्यकता है। जल केवल प्राकृतिक संसाधन नहीं, बल्कि मानव जीवन, कृषि, पर्यावरण और भावी पीढि़यों के सुरक्षित भविष्य का आधार है।

जल संरक्षण को जनभागीदारी का व्यापक अभियान बनाएगी राज्य सरकार

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण, तालाबों और अन्य परंपरागत जल स्रोतों के संरक्षण तथा वृक्षारोपण की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। सरकार का प्रयास है कि जल संरक्षण के कार्य केवल सरकारी योजनाओं और विभागीय गतिविधियों तक सीमित न रहें, बल्कि प्रत्येक नागरिक की भागीदारी से एक व्यापक जन-अभियान का स्वरूप लें।

कारगिल विजय दिवस पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने ‘मन की बात’ की शुरुआत कारगिल विजय दिवस पर देश के वीर जवानों को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए की। कारगिल विजय दिवस भारतीय सेना के अदम्य साहस, अप्रतिम शौर्य, दृढ़ संकल्प और सर्वाेच्च बलिदान का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कारगिल युद्ध में मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वाेच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों की शौर्यगाथा सदैव देशवासियों को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करती रहेगी।

‘हर घर तिरंगा’ अभियान में उत्साह से सहभागिता की अपील

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने आगामी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को पूरे उत्साह और गौरव के साथ आगे बढ़ाने का आह्वान किया है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर पूरे सम्मान के साथ तिरंगा फहराएं तथा राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव के इस उत्सव में सहभागी बनें।

स्थानीय उत्पादों और स्वदेशी परंपराओं को बढ़ावा देने का संदेश

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कार्यक्रम में ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया।  मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ के जनजातीय हस्तशिल्प, कोसा, हथकरघा वस्त्र, बेलमेटल, बांस शिल्प, माटी कला और वन उत्पादों में अपार संभावनाएं हैं। इन्हें अपनाना स्थानीय कारीगरों के श्रम और सृजनशीलता का सम्मान है।

मिट्टी की गणेश प्रतिमाएं अपनाने का आह्वान

मुख्यमंत्री श्री साय ने आगामी गणेशोत्सव के संदर्भ में प्रधानमंत्री श्री मोदी द्वारा देश की मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को अपनाने की अपील का उल्लेख करते हुए कहा कि पर्यावरण-अनुकूल उत्सव हमारी संस्कृति और प्रकृति के बीच संतुलन बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
उन्होंने कहा कि स्थानीय मिट्टी से निर्मित गणेश प्रतिमाओं की स्थापना से स्थानीय कुम्हारों और शिल्पकारों को रोजगार मिलता है, स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहन मिलता है और जल स्रोतों को रासायनिक प्रदूषण से बचाने में सहायता मिलती है। मिट्टी से बनी प्रतिमाओं का उपयोग परंपरा, पर्यावरण और स्थानीय अर्थव्यवस्था – तीनों के हित में है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए वृक्षारोपण को जनभागीदारी के माध्यम से आगे बढ़ा रही है। उन्होंने प्रदेशवासियों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान में सक्रिय सहभागिता करने का आह्वान किया।

युवा शक्ति की उपलब्धियां देश का गौरव

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री ने खेल, विज्ञान, अंतरिक्ष और नवाचार के क्षेत्र में भारतीय युवाओं की उपलब्धियों की सराहना की। निजी क्षेत्र द्वारा विकसित रॉकेट के सफल प्रक्षेपण, अंतरराष्ट्रीय विज्ञान ओलंपियाड में भारतीय विद्यार्थियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन और खेल जगत में प्राप्त उपलब्धियां नए भारत की युवा शक्ति, प्रतिभा और आत्मविश्वास को दर्शाती हैं।

उन्होंने कहा कि भारत का युवा आज विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष, खेल और नवाचार के क्षेत्र में विश्व पटल पर देश का नाम रोशन कर रहा है। राज्य सरकार भी छत्तीसगढ़ के युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, कौशल विकास, खेल सुविधाएं और नवाचार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।मुख्यमंत्री ने कहा कि युवाओं के सपनों को अवसरों से जोड़ना विकसित भारत और विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। राष्ट्र की युवा शक्ति ही आने वाले समय में भारत को विश्व की अग्रणी शक्ति बनाएगी।

इस अवसर पर विधायक पुरंदर मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, राज्य गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष राजीव लोचन महाराज सहित बड़ी संख्या में युवा, जनप्रतिनिधि, आम नागरिक और गणमान्यजन उपस्थित थे।

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कोरबा

भव्य आध्यात्मिक समारोह में दिव्य मंत्रोच्चार के साथ पाली में नवनिर्मित राधा-कृष्ण धाम में प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न

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कोरबा/पाली। कोरबा जिला के पाली ब्लाक मुख्यालय नगर पंचायत पाली के मंगल भवन के पास ख्यातिलब्ध समाजसेवी प्रशांत मिश्रा के नेतृत्व में जनसहयोग से मंगल भवन के पास राधा-कृष्ण धाम का भव्य मंदिर का निर्माण कराया गया है, जहां राधा-कृष्ण की दिव्य मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के लिए तीन दिवसीय भव्य आध्यात्मिक समारोह का आयोजन किया गया।
प्रथम दिन भव्य रूप से विशाल कलश यात्रा निकाली गई। दूसरे दिन दिव्य मंत्रोच्चार के साथ प्राण प्रतिष्ठा की गई। तीसरे दिन नवनिर्मित मंदिर में महाआरती के साथ विशाल भोग भंडारे का आयोजन किया गया, जहां पर हजारों धर्मानुरागियों ने भोग प्रसाद ग्रहण किया। तीन दिन तक पाली आध्यात्मिक, अलौकिक तथा सद्भाव की पवित्र रसधारा में स्नान किया। पाली के चारों तरफ आध्यात्म की गूंज सुनाई दे रही थी, वहीं दिव्य मंत्रोच्चार से चारों तरफ सत्व का प्रकाश फैल रहा था और घंटे की नाद से प्रकृति भी राधा-कृष्ण की भक्ति का रसपान कर रही थी। बरसात में आसमान की लालिमा भी संदेश दे रही थी कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की दिव्य प्रतिमा से प्रकृति भी प्रसन्नचीत हो रही है और अपनी लालिमा से आसमान भी मानो आयोजकों को आशीर्वाद दे रहा है। इस अद्भूत, अलौकिक और पवित्र क्षण का हजारों लोग साक्षी बने।

समारोह के द्वितीय दिन हुई प्राण प्रतिष्ठा

तीन दिवसीय समारोह के द्वितीय दिवस 19 जुलाई को विद्वान पंडितों, आचार्योंश्री अभिनव शुक्ला, संजय कृष्णा द्विवेदी, वासुदेव पाण्डेय, कृष्णा तिवारी, विवेकानंद पंडा एवं सी डी वैष्णव सहित उपस्थित पंडितों एवं आचार्यों के श्रीमुख से दिव्य मंत्रोच्चारों की गूंज सुनाई दे रही थी, घंटे की नाद से क्षेत्र गुंजायमान हो रहा था, अलौकिक हवन पूजन से पूरा प्रकृति सत्व से नहा रही थी और मुख्य यजमान प्रशांत मिश्रा-श्रीमती अनामिका मिश्रा सहित पूजा में बैठे युगल दम्पत्तियों के हवन पूजन से सभी देवी-देवता पूजन स्थल में पहुंच कर मानो इस महायज्ञ को सफल बना रहे हों और भगवान राधा-कृष्ण की युगल मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा के साक्षी बन रहे हों और इस अद्भूत मूर्ति को देखने के लिए लालायित हो रहे हों।
इस दिव्य समारोह में विधानसभा में नेताप्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित कई दिग्गज और विभूतियां शामिल हुए और इस दिव्य समारोह में स्थापित मूर्तियों का दिव्य दर्शन कर अभिभूत हुए।


आषाढ़ शुक्ल पंचमी 19 जुलाई को शुभ लग्र में भगवान राधा-कृष्ण की दिव्य मूर्ति के साथ भगवान श्रीगणेश के विग्रह की भी प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न हुई। सबसे पहले विघ्न विनाशक भगवान श्रीगणेश राधा-कृष्ण धाम में पधारे और भगवान राधा-कृष्ण की युगल जोड़ी की भव्य प्रतिष्ठा के साक्षी बने। ऐसा अद्भूत और अलौकिक दृष्य से उपस्थित भक्तगण रोमांचित हुए और प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न होने के बाद दिव्य मूर्तियों का दर्शन कर पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया।

कार्यक्रम के अंतिम दिन विशाल भोग भंडारा में हजारों लोगों ने किया प्रसाद ग्रहण

कार्यक्रम के तीसरे और अंतिम दिन आषाढ़ शुक्ल षष्ठी 20 जुलाई को भी भगवान जगन्नाथ के प्राण प्रतिष्ठा समारोह में हवन पूजन, महाआरती का आयोजन किया गया और पूजन सम्पन्न होने के बाद परिसर में विशाल भोग भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें प्रदेश भर से आए धर्मानुरागियों ने भोग प्रसाद ग्रहण कर धन्य हुए और भगवान राधा-कृष्ण धाम का दिव्य दर्शन कर पूण्य लाभ प्राप्त किया।

प्रथम दिन विशाल और भव्य कलश यात्रा निकाली गई

पाली में नवनिर्मित राधा-कृष्ण धाम में तीन दिवसीय आध्यात्मिक समारोह के प्रथम दिन 18 जुलाई को हजारों नारी शक्ति ने कलश यात्रा निकाली और कलश यात्रा के दौरान पूरा पाली भगवामय तथा राधा-कृष्ण भक्तिमय हो गया था। प्रमुख आचार्य एवं पंडितों की अगुवाई में मुख्य यजमान प्रशांत मिश्रा-श्रीमती अनामिका मिश्रा सिर में व्यासपीठ लेकर कलश यात्रा की अगुवाई कर रहे थे। दिव्यता और अलौकिक दृश्य से सभी रोमांचित हो रहे थे। कलश यात्रा नौकोनिहा तालाब से पवित्र जल लेकर शिव मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद निकली और नवनिर्मित राधा-कृष्ण धाम परिसर कथास्थल पर पहुंची। कलश यात्रा पूर्ण होने के बाद कथास्थल में व्यासपीठ की स्थापना करने के बाद हवन-पूजन प्रारंभ हुआ और दूसरे दिन प्राण प्रतिष्ठा की गई।

प्रशांत मिश्रा ने क्षेत्र की सुख समृद्धि की कामना की और आभार जताया

मुख्य यजमान के रूप में प्रशांत मिश्रा-श्रीमती अनामिका मिश्रा ने प्राण प्रतिष्ठा सम्पन्न होने के बाद अपने आराध्य देव भगवान राधा-कृष्ण और श्रीगणेश की पूजा-अर्चना की और सपत्नीक क्षेत्र की खुशहाली, समृद्धि के लिए आशीर्वाद मांगा और प्रदेश में अमन चैन, सद्भाव तथा विश्व में शांति के लिए कामना की।
तीन दिवसीय इस अलौकिक दिव्य समारोह की सफलता में धर्मानुरागियों की सहभागिता रही, प्रशांत मिश्रा ने सभी का आभार जताया। तीन दिवसीय समारोह को जिनका सानिध्य मिला, उन आचार्यों एवं पंडितों का भी आभार जताया, जिनकी विद्वता से यह समारोह भव्य और अलौकिक बन सका। दूर दराज से पधारे धर्मानुरागियों का भी प्रशांत मिश्रा ने ह्दय से अभिनंदन किया और आभार जताया।

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कोरबा

कोरबा में पति-पत्नी ने पीया जहर:रथयात्रा में साथ नहीं ले जाने पर हुआ विवाद, दोनों की हालत खतरे से बाहर

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कोरबा। कोरबा जिले के रजगामार चौकी क्षेत्र केराकछार गांव में एक नवविवाहित जोड़े ने मामूली विवाद के बाद जहर का सेवन कर लिया। 23 वर्षीय अकील सिंह और 21 वर्षीय किरण सिंह को परिजनों ने तत्काल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों की हालत अब खतरे से बाहर है।

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, यह घटना रथयात्रा कार्यक्रम में शामिल होने को लेकर हुए विवाद के बाद हुई। अकील सिंह रथयात्रा में जाने की तैयारी कर रहा था, तभी उसकी पत्नी किरण सिंह ने भी साथ चलने की जिद की। अकील ने मना कर दिया और अकेले ही कार्यक्रम में चला गया।

रात में देर से घर लौटने के बाद अगले दिन सुबह इसी बात को लेकर पति-पत्नी के बीच फिर विवाद हो गया। गुस्से में पहले किरण ने घर में रखा जहर पी लिया। पत्नी के जहर पीने की जानकारी मिलने पर अकील ने भी आवेश में आकर जहर का सेवन कर लिया।

समय पर इलाज से बची दोनों की जान

परिजनों को घटना का पता चलते ही घर में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में दोनों को जिला मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने तुरंत उनका इलाज शुरू किया। जांच के बाद डॉक्टरों ने बताया कि समय पर अस्पताल पहुंचने के कारण दोनों की जान बच गई और उनकी स्थिति अब स्थिर है।

रथयात्रा को लेकर विवाद, पुलिस ने दर्ज किए बयान

घटना की सूचना मिलने पर जिला अस्पताल चौकी पुलिस मेडिकल कॉलेज पहुंची। पुलिस ने अस्पताल से प्राप्त मेमो के आधार पर पति-पत्नी के बयान दर्ज किए हैं। प्रारंभिक पूछताछ में विवाद का मुख्य कारण रथयात्रा में साथ न ले जाना बताया जा रहा है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है।

एक साल पहले हुई थी शादी, ससुराल में रह रही थी पत्नी

बताया गया है कि अकील और किरण की शादी को अभी लगभग एक साल ही हुआ है। उनका विवाह सामाजिक रीति-रिवाजों के अनुसार हुआ था। किरण मूल रूप से धरमजयगढ़ क्षेत्र के जमरगी डीह की निवासी है और शादी के बाद से केराकछार में अपने ससुराल में रह रही थी।

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