देश
पंजाब में अफसर सुसाइड केस में पूर्व AAP मंत्री अरेस्ट:भुल्लर ने सरेंडर करने का दावा किया, शाह ने CBI जांच कराने का आश्वासन दिया था
अमृतसर,एजेंसी। पंजाब में वेयरहाउस के डिस्ट्रिक्ट मैनेजर (DM) गगनदीप सिंह रंधावा के सुसाइड केस में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के पूर्व मंत्री लालजीत भुल्लर को गिरफ्तार कर लिया गया है। अमृतसर के DCP रविंदर पाल ने कहा कि उन्होंने फतेहगढ़ साहब पुलिस की मदद से लालजीत सिंह भुल्लर को मंडी गोविंदगढ़ से गिरफ्तार किया है।
DCP ने कहा- भुल्लर को कल कोर्ट में पेश करेंगे। वहीं, लालजीत सिंह भुल्लर ने सोशल मीडिया (फेसबुक) पर पोस्ट डालकर दावा किया कि उन्होंने सरेंडर किया है। पुलिस ने भुल्लर को अभी तक थाना मंडी गोविंदगढ़ से बाहर नहीं निकला है। बताया जा रहा कि पुलिस रात को अमृतसर लेकर आएगी। गिरफ्तारी के बाद राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने भुल्लर का इस्तीफा मंजूर कर लिया है।

परिवार कल रंधावा के पोस्टमॉर्टम के लिए मान गया है। फिलहाल उनकी लाश अमृतसर के अस्पताल में रखी गई है। DCP ने बंद कमरे में परिवार के साथ बात की।
DCP परिवार से गगनदीप का मोबाइल भी लेना चाहते थे। DCP ने कहा कि उसमें कुछ सबूत हो सकते हैं। लेकिन परिवार ने देने से मना कर दिया। पत्नी ने कहा कि- CBI से जांच कराई जाए।
अब इस मामले की जांच CBI को सौंपी जा सकती है। कांग्रेस सांसद गुरजीत औजला ने लोकसभा में यह मुद्दा उठाया। जिसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि वह CBI को जांच दे देंगे। शाह ने लोकसभा में कहा-
यह पंजाब राज्य का मामला है। पंजाब के सारे सांसदों से मेरा निवेदन है कि मुझे लिखकर दे दें, मैं केस CBI को ट्रांसफर कर दूंगा।
इसके बाद कांग्रेस के 7 में से 4 सांसदों ने अमित शाह को लेटर भेज दिया। लेटर पर जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी, गुरदासपुर से सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा, अमृतसर के सांसद गुरजीत सिंह औजला और पटियाला से सांसद धर्मवीर गांधी के साइन हैं। इसके साथ अकाली दल की बठिंडा से सांसद हरसिमरत कौर बादल ने भी लेटर लिखा।

DM गगनदीप रंधावा CCTV में जहर खाते दिखे। उनकी मां आज रोते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईं। अस्पताल के बाहर बैठे रंधावा समर्थक।
सुसाइड का वीडियो सामने आया
इससे पहले पहली बार रंधावा के सुसाइड करते हुए का CCTV फुटेज सामने आया। करीब 3 मिनट के इस फुटेज में रंधावा 21 मार्च की सुबह पौने 6 बजे घर के आंगन में टहलते दिख रहे हैं। इस दौरान वह कुछ सोचते हुए नजर आते हैं। फिर टहलते हुए अचानक रुकते हैं और सल्फास की गोलियां मुंह में डालकर पानी पी लेते हैं। इसके बाद ही उन्होंने दूसरा वीडियो मोबाइल से बनाया था। जिसमें कहा था कि दोस्तों, मैंने सल्फास खा ली, मिनिस्टर लालजीत भुल्लर से तंग आकर, अब मैं नहीं बचूंगा।
पत्नी ने अल्टीमेटम दिया था
रंधावा की पत्नी उपिंदर कौर ने कहा कि जब तक लालजीत भुल्लर और उनके पिता सुखदेव भुल्लर की गिरफ्तारी नहीं होती, तब तक वह पोस्टमॉर्टम और अंतिम संस्कार नहीं करेंगे। पत्नी ने अमृतसर में घर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि मंत्री भुल्लर को गिरफ्तार करो वर्ना वह 2 बेटियों व एक बेटे को लेकर सड़क पर बैठ जाएंगी।
रंधावा ने 21 मार्च की सुबह सुसाइड किया था। इसके बाद CM भगवंत मान ने ट्रांसपोर्ट मंत्री लालजीत भुल्लर से इस्तीफा ले लिया। देर रात मंत्री भुल्लर, उनके पिता सुखदेव भुल्लर और PA दिलबाग पर केस दर्ज कर लिया।
रंधावा के सुसाइड से जुड़े PHOTOS…
घर के बाहर बैचेनी में टहलते दिखे
21 मार्च की सुबह 5.47 बजे की इस फोटो में DM गगनदीप रंधावा बैचेनी में टहलते हुए दिख रहे हैं।

बाहर की तरफ झांकते रहे
टहलते हुए रंधावा बाहर भी देखते रहे कि कहीं कोई आ तो नहीं रहा या फिर उन्हें देख तो नहीं रहा।

मुंह में सल्फास डाल पानी पिया
5.50 बजे जब उनके घर के बाहर सड़क पर गाड़ियों की आवाजाही थम गई तो रंधावा ने मुंह में सल्फास डाली और पानी पी लिया।

जहर खाने के बाद VIDEO बनाया
जहर खाने के बाद रंधावा ने 12 सेकेंड का वीडियो बनाया। जिसमें कहा कि मिनिस्टर लालजीत भुल्लर से तंग आकर उन्होंने जहर खाया।

DM ने जहर खाने के बाद यह वीडियो बनाया था।
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सोने में आज ₹12 हजार, चांदी में ₹31 हजार गिरावट:ईरान जंग से 24 दिन में सोना ₹24 हजार सस्ता, चांदी ₹65 हजार नीचे आई
नई दिल्ली,एजेंसी। अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग के बीच सोने चांदी की कीमतों में लगातार गिरावट जारी है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 12,077 रुपए घटकर 1.35 लाख रुपए पर आ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 40 साल में सोने के कीमत में इतनी बड़ी गिरावट हुई है। इससे पहले इसकी कीमत 1.47 लाख थी।
वहीं, एक किलो चांदी की कीमत 30,864 रुपए घटकर 2.01 लाख रुपए पर आ गई है। इससे पहले शुक्रवार को इसकी कीमत 2.32 लाख रुपए किलो थी। अमेरिका-ईरान जंग के कारण सोना 24 दिन में 23,956 और चांदी 65,200 सस्ती हुई है।

अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें
- ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: सोना एक शहर से दूसरे शहर ले जाने में ईंधन और भारी सुरक्षा का खर्च आता है। आयात केंद्रों से दूरी बढ़ने पर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय दाम बढ़ जाते हैं।
- खरीदारी की मात्रा : दक्षिण भारत जैसे इलाकों में खपत ज्यादा (करीब 40%) होने के कारण ज्वेलर्स भारी मात्रा में सोना खरीदते हैं। इससे मिलने वाली छूट का फायदा ग्राहकों को कम दाम के रूप में मिलता है।
- लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: हर राज्य और शहर के अपने ज्वेलरी एसोसिएशन (जैसे तमिलनाडु में मद्रास ज्वेलर्स एसोसिएशन) होते हैं। ये संगठन स्थानीय मांग और सप्लाई के आधार पर अपने इलाके के लिए सोने का रेट तय करते हैं।
- पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स ने अपना स्टॉक किस रेट पर खरीदा है, यह भी मायने रखता है। जिन ज्वेलर्स के पास पुराने और सस्ते रेट पर खरीदा हुआ स्टॉक होता है, वे ग्राहकों से कम कीमत वसूल सकते हैं।
सोने की कीमतों का सफर:रु.1.76 लाख से रु.1.35 लाख तक
सोने में इस साल की शुरुआत में तेजी दिखी थी, लेकिन पिछले कुछ हफ्तों में मुनाफावसूली और वैश्विक कारणों से इसमें गिरावट आई है।
शुरुआती स्तर (31 दिसंबर 2025): रु.1.33 लाख
ऑल टाइम हाई (29 जनवरी 2026): रु.1.76 लाख (सिर्फ एक महीने में भारी उछाल)
मौजूदा स्थिति: अपने उच्चतम स्तर से सोना अब तक रु.41 हजार सस्ता हो चुका है।
चांदी की कीमतों में भारी क्रैश:रु.3.86 लाख से रु.2.01 लाख तक
चांदी में सोने के मुकाबले कहीं ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। यह अपने ऑल टाइम हाई से बहुत तेजी से नीचे आई है।
शुरुआती स्तर (31 दिसंबर 2025): रु.2.30 लाख
ऑल टाइम हाई (29 जनवरी 2026): रु.3.86 लाख (ऐतिहासिक बढ़त)
गिरावट का आंकड़ा: पिछले 53 दिन में चांदी रु.1.84 लाख सस्ती हो गई है।
गिरावट के मुख्य कारण: मेटल छोड़कर ‘कैश’ पर भरोसा
आमतौर पर जंग के माहौल में सोने-चांदी के दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार स्थिति थोड़ी अलग है:
- कैश की बचत: मिडिल ईस्ट जंग के कारण निवेशक जोखिम नहीं लेना चाह रहे हैं। वे अपने गोल्ड और सिल्वर को बेचकर ‘कैश’ इकट्ठा कर रहे हैं ताकि अनिश्चितता के समय उनके पास लिक्विड मनी रहे।
- प्रॉफिट बुकिंग: जनवरी में कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थीं, इसलिए बड़े निवेशकों ने ऊंचे दामों पर अपनी होल्डिंग बेचना शुरू कर दिया, जिससे बाजार में सप्लाई बढ़ गई और कीमतें गिर गईं।
- ब्याज दरों का असर: अमेरिका में फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाने से भी कीमती धातुओं की चमक थोड़ी फीकी हुई है।
कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोना-चांदी के दाम में आगे भी ये गिरावट जारी रह सकती है। ऐसे में निवेशकों को अभी सोने-चांदी में निवेश से बचना चाहिए।
ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान
1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।
2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है।
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14KG के सिलेंडर में 10KG घरेलू गैस देने की तैयारी:दाम भी घटेंगे, ईरान युद्ध के चलते तेल कंपनियों का स्टॉक बचाने का प्लान
नई दिल्ली,एजेंसी। सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) अब घरों में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के LPG गैस सिलेंडर में 10 किलो गैस भरकर देने की तैयारी कर रही है। इसका मकसद लिमिटेड स्टॉक को ज्यादा से ज्यादा परिवारों तक पहुंचाना है। इसके साथ ही सिलेंडर के दाम भी कम किए जा सकते हैं।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तेल कंपनियों का मानना है कि 14.2 किलो का सिलेंडर औसतन 35 से 40 दिन चलता है। अगर इसमें सिर्फ 10 किलो गैस भरी जाए, तो एक परिवार का काम लगभग एक महीने तक चल जाएगा। इससे जो गैस बचेगी, उसे उन घरों तक पहुंचाया जा सकेगा जहां किल्लत है।

मार्च के पहले हफ्ते में घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत 60 रुपए बढ़ी थी।
मिडिल-ईस्ट जंग से LPG गैस की किल्लत बढ़ सकती है
तेल कंपनियों के पास अब ज्यादा रास्ते नहीं बचे हैं, क्योंकि खाड़ी देशों (मिडिल-ईस्ट) से गैस की नई खेप भारत नहीं आ पा रही है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच चल रही जंग के कारण हालात बिगड़ गए हैं। हाल ही में ईरान ने वहां के एनर्जी प्लांट्स पर मिसाइल हमले किए, जिससे गैस उत्पादन को नुकसान हुआ है।

इसके अलावा, होर्मुज रूट भी बंद है, जहां से गैस के जहाज भारत आते हैं। इससे आने वाले दिनों में भारत में LPG की किल्लत और ज्यादा बढ़ सकती है। इसी संकट को देखते हुए तेल कंपनियों ने सिलेंडर में गैस कम करने का फैसला लेने का प्लान बना रही है।
सिलेंडर के दाम भी घटेंगे, पहचान के लिए स्टिकर लगेगा
अगर यह योजना लागू होती है, तो सिलेंडर की कीमतें भी उसी अनुपात में कम की जाएंगी। अभी दिल्ली में 14.2 किलो के सिलेंडर की कीमत ₹913 और मुंबई में ₹912.50 है। 10 किलो गैस मिलने पर ग्राहकों को कम पैसे चुकाने होंगे। पहचान के लिए इन सिलेंडरों पर एक नया स्टिकर लगाया जाएगा, जिस पर गैस की सही मात्रा लिखी होगी।
बॉटलिंग प्लांट्स में होगा बदलाव: सिस्टम रीकैलिब्रेट करने की जरूरत
इस बदलाव को लागू करना इतना आसान भी नहीं है। बॉटलिंग प्लांट्स को अपने वजन करने वाले सिस्टम को फिर से सेट करना होगा। साथ ही इसके लिए कई रेगुलेटरी मंजूरियों की भी जरूरत पड़ेगी। अधिकारियों को डर है कि अचानक इस बदलाव से लोगों में भ्रम और विरोध की स्थिति पैदा हो सकती है, खासकर तब जब कुछ राज्यों में चुनाव नजदीक हैं।
सप्लाई की स्थिति चिंताजनक: 6 टैंकर फारस की खाड़ी में फंसे
पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने पिछले हफ्ते कई बार कहा कि LPG की सप्लाई ‘चिंताजनक’ है और इसे बचाना जरूरी है। भारत अपनी जरूरत की 60% एलपीजी इम्पोर्ट करता है, जिसमें से 90% हिस्सा खाड़ी देशों से आता था।
पिछले हफ्ते होर्मुज रूट से दो जहाज भारत आए, जिनमें सिर्फ एक दिन की खपत जितनी गैस थी। फिलहाल भारत के 6 गैस टैंकर फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं और रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं।
क्रूड और गैस के दाम बढ़ने की 2 वजहें
1. कतर का रास लफ्फान प्लांट बंद
ईरान के ड्रोन हमलों में कतर के रास लफ्फान को काफी नुकसान पहुंचा है। यह दुनिया का सबसे बड़ा LNG हब है और ग्लोबल सप्लाई का करीब पांचवां हिस्सा (20%) यहीं से आता है। हमले के बाद इस प्लांट को फिलहाल बंद कर दिया गया है। इससे सप्लाई रुक गई है।
2. ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का लगभग बंद होना
भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा।
दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।
LPG संकट को लेकर अब सरकार ने ये कदम उठाए
- 6 मार्च: घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के लिए 21 दिन का लॉक-इन पीरियड शुरू किया गया (यानी एक सिलेंडर मिलने के 21 दिन बाद ही दूसरा बुक होगा)।
- 9 मार्च: डिमांड बढ़ने पर शहरों में लॉक-इन पीरियड बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया।
- 12 मार्च: ग्रामीण इलाकों के लिए सिलेंडर बुकिंग का गैप बढ़ाकर 45 दिन किया गया।
- 14 मार्च: पेट्रोलियम मंत्रालय ने PNG (पाइप गैस) यूजर्स के लिए LPG सिलेंडर रखना गैर-कानूनी घोषित किया। अब PNG कनेक्शन वालों को अपना सिलेंडर सरेंडर करना होगा और वे रिफिलिंग नहीं करा पाएंगे।
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शंकराचार्य 2.18 लाख सैनिकों की चतुरंगिणी सेना बनाएंगे:काशी में कहा- गाय, शास्त्र और मंदिर की रक्षा करेंगे, पहले रोकेंगे-टोकेंगे फिर ठोकेंगे
वाराणसी,एजेंसी। वाराणसी में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सोमवार को चतुरंगिणी सेना बनाने का ऐलान किया। उन्होंने कहा- चतुरंगिणी सेना में 2 लाख 18 हजार 700 सैनिक होंगे। इसमें देशभर से लोग भर्ती होंगे।
उन्होंने बताया- यह सेना गोरक्षा, धर्म रक्षा, शास्त्र रक्षा और मंदिर रक्षा का कार्य करेगी। उनकी ड्रेस पीली होगी। हाथ में परशु (फरसा) होगा।
अविमुक्तेश्वरानंद ने चतुरंगिणी सेना बनाने के लिए श्रीशंकराचार्य चतुरंगिणी सभा का गठन किया है। इसमें 27 सदस्य होंगे। इसका अध्यक्ष वे खुद होंगे।
शंकराचार्य ने अपनी सेना के काम करने के तरीके बताए। उन्होंने कहा-
पहले टोको, यानी टोकेंगे। कहो कि यह गलत हो रहा है। नहीं माने तो रोको। भाई, आपको रुकना पड़ेगा। नहीं तो फिर ठोको। ठोको का मतलब सीधे प्रहार करना नहीं है। मुकदमा करना, शिकायत करना और पंचायत करना भी ठोको में आएगा। ये सभी संवैधानिक तरीके अपनाते हुए काम करेंगी।

शंकराचार्य बोले- एक टीम में 10 लोग होंगे
शंकराचार्य ने कहा- 1 पत्ती (टीम) में 10 लोग होंगे। 21 हजार 870 टीमें बनेंगी तो सेना तैयार हो जाएगी। भारत में अभी करीब 800 जिले हैं। अगर हर जिले में 27 टीमें, यानी 270 लोग तैयार हो गए, तो 2 लाख 16 हजार लोग तैयार हो जाएंगे।
‘धार्मिक परिसर में वही लोग जाएं, जो उस धर्म को मानते हैं’
उत्तराखंड के बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर में गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक के मामले में शंकराचार्य ने कहा- मक्का-मदीना में 40 किलोमीटर पहले ही दूसरे धर्म के लोगों को रोक दिया जाता है। वह गलत नहीं है। ठीक है।
वैसे ही हमारे भी धर्म स्थल हैं। हमें भी अपनी पवित्रता चाहिए। हमें भी अपने ढंग से पूजा-पाठ करना है। वहां दूसरा क्यों जाएगा। हमारे यहां परंपरा है कि धार्मिक परिसरों में वही लोग जा सकते हैं, जो उस धर्म को मानते हैं।

शंकराचार्य ने बताया- चतुरंगिणी सेना की एक टीम में 10 लोग होंगे।
शंकराचार्य को चतुरंगिणी सेना बनाने की जरूरत क्यों पड़ी
- आदि शंकराचार्य ने आठवीं सदी में 13 अखाड़े बनाए थे। इन अखाड़ों का गठन हिंदू धर्म और वैदिक संस्कृति की रक्षा के लिए किया गया था। धर्म की रक्षा के लिए नागा साधुओं की एक सेना की तर्ज पर ही अखाड़ों को तैयार किया गया था। जिसमें उन्हें योग, अध्यात्म के साथ शस्त्रों की भी शिक्षा दी जाती है। इन अखाड़ों को शंकराचार्य की सेना भी कहा जाता था।
- आजादी के बाद 1954 में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद (ABAP) का गठन हुआ था। 1954 के प्रयाग (इलाहाबाद) कुंभ में मची भगदड़ के बाद, व्यवस्था सुधारने के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पहल पर, 13 अखाड़ों के प्रतिनिधियों ने मिलकर इस संस्था की स्थापना की।
- ऐसा माना जाता है कि अखाड़ा परिषद बनने के बाद इनकी कमान परिषद के अध्यक्ष के हाथ में आ गई और धीरे-धीरे शंकराचार्यों का कमांड इन पर से कम हो गया।
- 18 जनवरी (मौनी अमावस्या) को शंकराचार्य प्रयागराज माघ मेले में अपने शिविर से पालकी में सवार होकर संगम स्नान के लिए रवाना हुए। पालकी को संगम नोज तक ले जाने को लेकर विवाद हो गया। इसके बाद शंकराचार्य धरने पर बैठ गए, लेकिन किसी भी अखाड़े ने उनका समर्थन नहीं किया।
- उस वक्त अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवींद्र पुरी ने कहा था- मुख्यमंत्री को लेकर शंकराचार्य की कड़े शब्दों में की गई टिप्पणियां गलत हैं। 10 दिन बाद 28 जनवरी को शंकराचार्य बिना स्नान किए काशी लौट गए। इसके बाद वे यूपी सरकार पर लगातार हमलावर रहे।
- उन्होंने ‘गो-प्रतिष्ठा धर्मयुद्ध’ यात्रा का ऐलान किया और साधु-संतों से साथ आने की अपील की। 7 मार्च को काशी से शुरू हुई यात्रा 11 मार्च को लखनऊ पहुंची। यहां शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने गोरक्षा अभियान का शंखनाद किया, लेकिन साधु-संतों की भागीदारी सीमित दिखी।
- 11 मार्च को शंकराचार्य ने कहा था कि साधु समाज में विकृति आ गई है। एक लकीर खिंच गई है। उन्होंने सभी अखाड़ों को पत्र लिखकर यह पूछने की बात कही कि वे किसके साथ हैं।
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