Connect with us

कोरबा

मेहनत की मिट्टी में उम्मीद की फसल, महतारी वंदन से सुनीता के सपनों को मिला संबल

Published

on

हर महीने की एक हजार रुपये की आस ने सुनीता के जीवन में जगाई नई उम्मीद

पैसों से नथनी, मिक्सी सहित अन्य घरेलू सामान भी खरीदी

कोरबा 24 अगस्त 2026। कोरबा विकासखंड के ग्राम भटगांव में रहने वाले अनिल कुमार राठिया और उनकी पत्नी सुनीता राठिया का जीवन मेहनत और संघर्ष से भरा है। कभी मजदूरी, तो कभी मौसम के अनुरूप अपने छोटे से खाली स्थान पर सब्जियां उगाकर उन्हें बाजार में बेचकर यह दंपति अपने परिवार का गुजर-बसर करता है। आमदनी सीमित है, लेकिन परिवार की जरूरतें और बच्चों के सपने बड़े हैं।

अनिल और सुनीता के दो बच्चे हैं, जो स्कूल में पढ़ते हैं। बच्चों की पढ़ाई, घर का राशन और रोजमर्रा की जरूरतों के बीच परिवार की छोटी-सी आय को संतुलित करना आसान नहीं होता। ऐसे समय में छत्तीसगढ़ शासन की महतारी वंदन योजना सुनीता के लिए आर्थिक सहारे के साथ-साथ भरोसे का आधार बनी है।
सुनीता बताती हैं कि योजना के तहत उनके बैंक खाते में हर महीने एक हजार रुपये की राशि आती है। उनके लिए यह रकम भले ही छोटी दिखाई दे, लेकिन परिवार की जरूरतों के बीच इसका महत्व बहुत बड़ा है। वह कहती हैं कि जब खाते में राशि आने का भरोसा रहता है, तो घर की छोटी-बड़ी जरूरतों को पूरा करने की चिंता कुछ कम हो जाती है।
आजकल सुनीता अपने घर के पास थोड़ी-सी खाली जमीन में बरबट्टी उगा रही हैं। मेहनत से तैयार की गई सब्जी को वह बाजार में बेचती हैं और उससे मिलने वाली राशि से घर का कुछ खर्च निकाल लेती हैं। इसी तरह अपनी मेहनत और शासन की सहायता को जोड़कर वह परिवार को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रही हैं।
सुनीता बताती हैं कि महतारी वंदन योजना से मिलने वाली राशि को वह जरूरत के अनुसार उपयोग करती हैं और कभी-कभी कुछ महीनों की राशि बचाकर घर के लिए उपयोगी सामान भी खरीद लेती हैं। इसी बचत से उन्होंने अपने लिए नाक की नथनी, घर में मिक्सी सहित अन्य जरूरी सामान भी खरीदा है। उनके चेहरे पर इन छोटी-छोटी उपलब्धियों की खुशी साफ दिखाई देती है।
सुनीता के लिए यह योजना केवल हर महीने मिलने वाली राशि नहीं है, बल्कि मुश्किल समय में मिलने वाला एक भरोसा है। वह कहती हैं कि पहले किसी जरूरत के लिए पैसे जुटाने में काफी सोच-विचार करना पड़ता था, लेकिन अब हर महीने खाते में एक हजार रुपये आने की उम्मीद रहती है। इससे उन्हें अपने छोटे-छोटे सपनों को पूरा करने का अवसर मिलता है।
रक्षाबंधन के पर्व पर सुनीता मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहती हैं, ”मुख्यमंत्री विष्णु देव साय अपनी बहनों के लिए हर महीने राशि भेजते हैं, इससे हमें बहुत खुशी होती है। रक्षाबंधन के अवसर पर एक भाई के रूप में उनके लिए मेरा आशीर्वाद है कि वे हमेशा स्वस्थ रहें और हम बहनों के लिए इसी तरह सहयोग करते रहें।“
गांव की मिट्टी में मेहनत से उगाई गई बरबट्टी की हर फली सुनीता के लिए सिर्फ सब्जी नहीं है, बल्कि आत्मनिर्भर बनने की उनकी कोशिश का प्रतीक है। एक ओर वह अपने पति के साथ मेहनत कर परिवार की जरूरतें पूरी कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर महतारी वंदन योजना से मिलने वाली नियमित आर्थिक सहायता उनके छोटे-छोटे सपनों को आकार दे रही है।
सुनीता की कहानी यह बताती है कि जब मेहनत के साथ शासन का संबल जुड़ता है, तो सीमित साधनों वाला परिवार भी उम्मीद के साथ आगे बढ़ सकता है। महतारी वंदन योजना उनके लिए आर्थिक सहायता से बढ़कर आत्मविश्वास, सम्मान और अपने परिवार के बेहतर भविष्य की एक मजबूत आस बन गई है।

Continue Reading

कोरबा

पीएम जनमन योजना से मिला पक्का मकान, दुजराम के जीवन में आई सुरक्षा और नई उम्मीद

Published

on

पहाड़ी कोरवा जनजाति के दिव्यांग हितग्राही को मिला सुरक्षित आशियाना
कोरबा 12 अक्टूबर 2026। जिले के विकासखंड कोरबा के ग्राम पंचायत अमलडीहा निवासी दुजराम, पिता समारू, पहाड़ी कोरवा विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह से आते हैं। मूक दिव्यांगता के साथ जीवन की रोजमर्रा की चुनौतियों का सामना कर रहे दुजराम के लिए जर्जर कच्चे मकान में रहना कठिन था।

उनके पुराने मिट्टी के मकान की छत पर तिरपाल लगी थी। बारिश के दिनों में पानी टपकता, जिससे घर का सामान भीगने और खराब होने की आशंका बनी रहती थी। तेज हवा और खराब मौसम में मकान की सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ जाती थी। ऐसे में परिवार के लिए एक सुरक्षित और पक्के घर की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी।

वित्तीय वर्ष 2023-24 में पीएम जनमन योजना के तहत दिव्यांग श्रेणी में दुजराम का आवास स्वीकृत हुआ। स्वीकृति के बाद किस्तें मिलने पर पक्के मकान का निर्माण पूरा कराया गया। अब दुजराम अपने नए, मजबूत और सुरक्षित घर में रह रहे हैं।

यह आवास उनके लिए केवल एक पक्का ढांचा नहीं, बल्कि बारिश और मौसम की चिंता से राहत तथा सुरक्षित जीवन की नई शुरुआत है। पक्का घर मिलने से दुजराम और उनके परिवार को सम्मानजनक आशियाना मिला है। पीएम जनमन योजना के माध्यम से विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के परिवारों तक बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास दुजराम के जीवन में आए इस बदलाव में दिखाई देता है।

Continue Reading

कोरबा

श्रम विभाग की सहायता से बेटी के आईटीआई प्रशिक्षण को मिला संबल

Published

on

मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना से मिली राशि से जमा की बेटी की फीस
कोरबा 12 अक्टूबर 2026। जिले के गणेश चौक, पोड़ीबहार निवासी श्रीमती सावित्री बाई तंवर के पति बुढवा सिंह तंवर मिस्त्री का काम करते हैं। परिवार की आजीविका मेहनत-मजदूरी पर निर्भर है। श्रीमती सावित्री बाई का छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल में मजदूर रेजा-कुली के रूप में पंजीयन है।

श्रम विभाग से उन्हें मुख्यमंत्री नोनी सशक्तिकरण सहायता योजना की जानकारी मिली। योजना के अंतर्गत उनकी द्वितीय संतान को 20 हजार रुपये की सहायता राशि प्राप्त हुई। इस सहायता से उन्होंने अपनी बेटी की आईटीआई की फीस जमा की। बेटी तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त कर अपने भविष्य को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
श्रीमती सावित्री बाई को महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिल रहा है। वे कहती हैं कि शासन की योजनाओं से परिवार को सहारा मिला है और बेटी की पढ़ाई जारी रखने में मदद मिली है। उन्होंने श्रम विभाग, कोरबा और छत्तीसगढ़ सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया।

Continue Reading

कोरबा

रानी अटारी में 32 मजदूरों को काम से निकालने के खिलाफ आक्रोशकिसान सभा ने 13 अक्टूबर को खदान ठप्प करने की दी चेतावनी

Published

on

कोरबा। एसईसीएल के चिरमिरी क्षेत्र अंतर्गत कोरबा जिले में पड़ने वाले रानी अटारी एवं विजय वेस्ट भूमिगत खदान में आउट सोर्सिंग कंपनी जेएमएस द्वारा 32 मजदूरों को बिना नोटिस दिए खनन कार्य से निकाले जाने पर ग्रामीणों में जबरदस्त आक्रोश है। इस आक्रोश को स्वर दिया है अखिल भारतीय किसान सभा से संबद्ध छत्तीसगढ किसान सभा ने। किसान सभा के राज्य अध्यक्ष प्रशांत झा ने इन मजदूरों को काम पर रखे जाने के साथ ही, इन मजदूरों को निकाले जाने की अवधि की मजदूरी देने की भी मांग की है।

उल्लेखनीय है कि रानी अटारी कोयला खदान में खनन प्रभावित गांवों के किसान ठेका मजदूर के रूप में काम करते हैं। इनमें से अधिकांश आदिवासी छोटे किसान परिवार से आते हैं, खदान में होने वाले सभी कार्यों में प्रभावित क्षेत्र के प्रभावितों को नियमित और स्थाई रोजगार देने की जिम्मेदारी एसईसीएल की है। एसईसीएल अपनी यह जिम्मेदारी तो पूरा कर ही नहीं रहा है बल्कि ठेका मजदूरों के रूप में काम कर रहे किसानों को रोजगार की सुरक्षा देने से भी इंकार कर रहा है, जबकि इन ठेका मजदूरों का सेवायोजक एसईसीएल ही है।

हड़ताल से पूर्व प्रबंधन और किसान सभा नेताओं के बीच हुई वार्ता का कोई नतीजा नहीं निकला, जिसके बाद 13 अक्टूबर को किसान सभा ने खदान बंद का आह्वान किया है। वार्ता में प्रबंधन की ओर से सब एरिया मैनेजर सौरभ कुमार, नंद किशोर मीणा, राहुल बंसोड, सी एस जोशिया तथा किसान सभा की ओर से प्रशांत झा, दामोदर श्याम, बृजलाल, रामेश्वर समेत कई ठेका श्रमिक शामिल थे। खदान बंदी में खनन प्रभावित गांवों के किसानों के भी भारी संख्या में शामिल होने की संभावना है।

छत्तीसगढ़ किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रशांत झा ने आरोप लगाया है कि पूरे एसईसीएल क्षेत्र में आउटसोर्सिंग कंपनियां किसानों और मजदूरों का बेरहमी से शोषण कर रही है और एसईसीएल प्रबंधन की इन कंपनियों के साथ पूरी मिलीभगत है।

किसान सभा के कोरबा जिला सचिव दीपक साहू ने कहा है कि एक तरफ तो केंद्र सरकार नए लेबर कोड का कड़ाई से पालन कराने की बात कर रही है, वहीं दूसरी ओर सरकारी कंपनी एसईसीएल में इन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। इसलिए खदान बंद होने तथा आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना और कानून-व्यवस्था की स्थिति या वित्तीय नुकसान की संपूर्ण जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन की होगी।

मांगें

  1. आउट सोर्सिंग कंपनी जेएमएस द्वारा काम से निकाले गए सभी 32 कर्मचारियों को तत्काल बहाल किया जाए एवं बैठाए गए दिनों की भी मजदूरी दी जाए।
  2. जिन प्रभावितों का वीटीसी कराया गया है, उन्हें तत्काल खदान में काम उपलब्ध कराया जाएं।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677