बिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने राज्य में चल रही युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। हाईकोर्ट ने महासमुंद के टीचर की याचिका पर सुनवाई करते हुए युक्तियुक्तकरण पर रोक लगाई है। हालांकि, यह स्थगन प्रदेश के स्कूलों के लिए नहीं है। लेकिन, इस आधार पर कोर्ट का रुख करने वाले शिक्षकों को राहत मिल सकती है। बतादें कि युक्तियुक्तकरण में प्रदेश के सभी जिलों में नियमों को दरकिनार कर गड़बड़ी करने का आरोप है।
दरअसल, प्रदेश भर के जिले में युक्तियुक्तकरण को लेकर बवाल मचा हुआ है। शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन के अधिकारी मिलकर नियमों को दरकिनार कर शिक्षकों को अतिशेष बताकर युक्तियुक्तकरण कर शिक्षकों को दूरस्थ स्कूलों में पदस्थ करने का आदेश जारी किया है। महासमुंद जिले के गवर्नमेंट अभ्यास प्राइमरी स्कूल में पदस्थ कल्याणी थेकर ने वकील अवध त्रिपाठी के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
याचिका में उन्होंने बताया की स्कूल में 91 स्टूडेंट्स हैं, जिसके मुताबिक शासन के निर्देश पर एक हेडमास्टर, चार टीचर होना चाहिए। लेकिन अफसरों ने दर्ज संख्या कम 88 स्टूडेंट्स बता दिया। जिसके आधार पर उन्हें अतिशेष बता दिया, जिसके कारण उनका नाम युक्तियुक्तकरण की सूची में डाल दिया गया और उनकी पदस्थापना दूर के स्कूल में कर दी।
हाईकोर्ट ने 10 दिन के लिए दिया स्टे इस मामले की सुनवाई के दौरान शासन की तरफ से स्वीकार किया गया कि स्कूल की दर्ज संख्या में त्रुटि हो गई है, जिसके कारण ऐसा हुआ है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि राज्य शासन द्वारा बिना दावा-आपत्ति लिए काउंसलिंग की प्रक्रिया शुरू करना असंवैधानिक है। हाईकोर्ट ने इस केस में 10 दिन के लिए स्थगन आदेश जारी किया है।
अलग-अलग जिलों से लगी है याचिका युक्तियुक्तकरण को लेकर हर जिले में अनियमितता और अतिशेष सूची में मनमानी करने का आरोप है। शिक्षकों का यह भी कहना है कि राज्य शासन ने इसके लिए नियम बनाए हैं, जिसका अफसरों ने पालन नहीं किया है। यहां तक शिक्षकों से दावा आपत्ति तक नहीं ली गई है। जिसे लेकर अब प्रदेश के अलग-अलग जिलों के शिक्षकों ने हाईकोर्ट में अलग-अलग याचिका दायर की है। इसमें दुर्ग, महासमुंद, रायपुर के साथ ही बिलासपुर के टीचर शामिल हैं।
युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया की काउंसलिंग में सामने आई गड़बड़ी
वहीं, बिलासपुर में युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया के तहत हुई काउंसलिंग में जिला प्रशासन के अफसरों की मौजूदगी में नियमों को दरकिनार कर गड़बड़ी करने का मामला सामने आया है। कई टीचर ऐसे हैं, जिनकी पोस्टिंग एक स्कूल में है, लेकिन पद नहीं होने के कारण उनका वेतन किसी दूसरे स्कूल से दिया जा रहा है।
इसके बाद भी अतिशेष सूची में उनका नाम नहीं है। वहीं, एक महिला टीचर को प्राचार्य ने लिखकर दिया है कि स्कूल में एक भी पद अतिशेष नहीं है। फिर भी उन्हें अतिशेष बता दिया गया है।
अतिशेष शिक्षकों ने अफसरों पर लगाए मनमानी करने के आरोप।
पारदर्शिता को लेकर शिक्षकों ने जताई नाराजगी
जिले के जिन 755 शिक्षकों को अतिशेष बताया गया है, उसमें पूरी रात चहेतों का नाम हटाने और जोड़ने का काम चला। जिसके बाद जब काउंसलिंग हुई, तब शहर और आसपास के रिक्त पदों को छिपा दिया गया।
काउंसलिंग में पारदर्शिता नहीं होने के कारण शिक्षकों ने जमकर नाराजगी भी जताई। इस दौरान 150 से ज्यादा शिक्षकों ने सूची पर आपत्ति दर्ज कराई। 50 से ज्यादा ने लिखित असहमति देकर प्रक्रिया में भाग नहीं लिया। आरोप है कि अफसरों ने मनमानी की है।
शिक्षकों के मुताबिक विषय बंधन को समाप्त करने के राजपत्र के नियम को पूर्णतः दरकिनार किया गया है और युक्तियुक्तकरण नियम के मार्गदर्शी निर्देश का भी मिडिल स्कूल और प्राथमिक शालाओं में उल्लंघन किया गया है। हायर सेकेंडरी, हाई स्कूल में अतिशेष घोषित करने में पक्षपात किया गया है।
आट्र्स और कॉमर्स की लिस्ट में साइंस टीचर का नाम
शिक्षकों ने अतिशेष सूची को लेकर गंभीर अनियमितता और मनमानी करने का आरोप लगाया है। जूनियर शिक्षकों को सीनियर बताकर उन्हें सूची से बाहर रखा गया है और कई योग्य शिक्षकों को जानबूझकर अतिशेष दिखाया गया। वहीं, विषयों की भी अनदेखी की गई। विज्ञान विषय के शिक्षकों को कला में और वाणिज्य के शिक्षकों को विज्ञान की सूची में डाल दिया गया।
शिक्षकों की आपत्ति का नहीं किया निराकरण।
बिना मापदंडों के दी रिक्त पदों की जानकारी
शिक्षक नेताओं ने कहा कि मस्तूरी विकासखंड के मानिकचौरी संकुल के प्राथमिक शाला मानिक चौरी में छात्रों की संख्या 318 है, जहां पर तीन सहायक शिक्षक कार्यरत है। यहां एक भी रिक्त पद नहीं बताया गया है।
वहीं, उसी संकुल में शासकीय प्राथमिक शाला रहटाटोर में छात्र संख्या 171 में तीन सहायक शिक्षक कार्यरत है, जहां पर सहायक शिक्षक के 3 रिक्त पद प्रदर्शित कर काउंसलिंग से भरने के लिए दिखाया गया। जबकि, उससे अधिक दर्ज संख्या वाले मानिकचौरी स्कूल में रिक्त पद प्रदर्शित नहीं है। इस तरह की गड़बड़ियां जिले के कई स्कूलों में की गई है।
स्क्रीन में स्कूल का नाम दिखाया, 3 दिन में जॉइन करने का आदेश
जिला प्रशासन के अफसरों ने काउंसलिंग प्रक्रिया को पारदर्शी बताया है। उनका कहना है कि काउंसिलिंग स्थल पर प्रोजेक्टर लगाए गए थे। पहले स्क्रीन पर शिक्षकों का नाम प्रदर्शित किया गया, फिर रिक्त स्कूलों की सूची दिखाई गई।
शिक्षक मंच पर जाकर कुर्सी पर बैठते और स्क्रीन देखकर स्कूल का चयन करते थे। चयन के तत्काल बाद उन्हें पोस्टिंग ऑर्डर दिया गया और 3 दिन के भीतर नवीन पदस्थापन स्थल पर जॉइन करने का निर्देश मिला। मंच से ही यह चेतावनी दी गई कि समय पर जॉइन न करने पर कार्रवाई की जाएगी।
चहेतों का हटाया नाम, नए शिक्षकों को जोड़ा
मंगलवार की रात सूची में हेरफेर भी किया गया है। जीवविज्ञान सहित कई विषयों के व्याख्याताओं का नाम रात में काट दिया गया। वहीं, रातों रात सूची में नए नाम भी जोड़ दिए गए। काउंसलिंग के लिए प्रत्येक चरण में रिक्त पदों की सूची पहले से साझा नहीं की गई थी।
केवल काउंसलिंग के दिन सुबह उसे स्थल पर चस्पा किया गया और वॉट्सऐप के माध्यम से शिक्षकों को जानकारी दी गई। प्रक्रिया के दौरान हंगामे की आशंका को देखते हुए दोनों जगह पुलिस बल भी तैनात किया गया था।
रिटायर होने वाले शिक्षकों पर भी रहम नहीं
युक्तियुक्तकरण और अतिशेष की इस प्रक्रिया में रिटायरमेंट के करीब पहुंचे शिक्षकों पर भी रहम नहीं किया गया है। लिस्ट में 2025 और 2026 में सेवानिवृत्त होने वाले 19 शिक्षक हैं, जिनमें 11 सहायक शिक्षक, एक प्राथमिक शाला प्रधान पाठक और 7 व्याख्याता शामिल हैं। जिन्हें अतिशेष बताकर दूसरी जगह पदस्थ किया गया है।
नियमों को दरकिनार कर की गई युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया।
साझा मंच ने कहा- कोर्ट जाएंगे टीचर
शिक्षक साझा मंच के प्रदेश संचालक संजय शर्मा ने बताया कि बिलासपुर जिले में सहायक शिक्षक, शिक्षक, व्याख्याता सभी संवर्गों की काउंसलिंग आयोजित की गई थी अमूमन सभी संवर्ग में अतिशेष घोषित करने की प्रक्रिया को लेकर असंतोष देखा गया, स्थल में उपस्थित होकर हमने पाया कि विषय बंधन को समाप्त करने के राजपत्र के नियम को दरकिनार किया गया है।
दावा आपत्ति किया गया। लेकिन, जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से पावती नहीं दी गई। वे डरते रहे की पावती देने के बाद शिक्षक चढ़ाई कर देंगे। सहायक शिक्षकों के काउंसलिंग स्थान में भारी असंतोष देखा गया।
अतिशेष घोषित करने की प्रक्रिया और शाला में शिक्षकों को रिक्त पद की प्रक्रिया को गलत तरीके से लागू किया गया है। संजय शर्मा ने कहा कि मंच के माध्यम से शिक्षकों से चर्चा की जाएगी, जिसके बाद काउंसलिंग के विरोध में हाईकोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन के अफसरों की मौजूदगी में गड़बड़ी की गई है। साथ ही शिक्षकों के तर्क और तथ्य को सुनने के बजाय अतिशेष घोषित सूची और स्कूलों की सूची के आधार पर सीधे-सीधे स्थल चयन करने का दबाव बनाया गया है।
युक्तियुक्तकरण का मतलब समझिए
युक्तियुक्तकरण एक सरकारी शब्द है। आसान भाषा में समझा जाए तो इसका मतलब है दो चीजों को साथ में मर्ज कर देना, एक सिस्टम के तहत। उदाहरण से समझिए, किसी कंपनी के एक ही शहर में दो ऑफिस हैं। संसाधन और मैन पावर दोनों ऑफिस में अलग-अलग बंट रहे हैं। लेकिन कंपनी को इसकी नीड नहीं है।
कंपनी, सरकार या संगठन के लिए पॉजिटिव, खर्चे कम होंगे
ऐसे में कंपनी दोनों ऑफिस को एक कैंपस में मर्ज कर देगी और मैन पावर को भी अपने सिस्टम के हिसाब से फिल्टर कर देगी। यही युक्तियुक्तकरण है। जिसे अंग्रेजी भाषा में रेशनेलाइजेशन कहते हैं। कंपनी के लिहाज से देखा जाए तो उन्होंने अपना खर्च बचा लिया। एक ही कैंपस होने से मैनेजमेंट आसान हो गया। मैन पावर भी घट गया। यानी पॉजिटिव चेंज है।
विद्यार्थियों एवं स्टाफ के दांतों का हुआ स्वास्थ्य परीक्षण, नियमित देखभाल के लिए किया गया जागरूक
कोरबा/चैतमा। विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ उनके बेहतर स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की दिशा में इंडियन पब्लिक स्कूल चैतमा द्वारा सराहनीय पहल करते हुए विद्यालय परिसर में विशेष दंत स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में विद्यालय के सभी विद्यार्थियों एवं स्टाफ के दांतों का विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा परीक्षण किया गया। शिविर में मैक्स डेंटल केयर के दंत चिकित्सक डॉ. राहुल मिश्रा एवं डॉ. शिखा एक्का ने विद्यार्थियों एवं स्टाफ के दांतों की जांच की तथा दांतों की स्वच्छता, नियमित ब्रश करने की सही विधि, खान-पान में सावधानी और दांतों से संबंधित समस्याओं से बचाव के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी। विद्यार्थियों को स्वस्थ दांतों के महत्व के प्रति जागरूक करते हुए नियमित रूप से दंत परीक्षण कराने की सलाह भी दी गई।
विद्यालय के डायरेक्टर राकेश मिश्रा के मार्गदर्शन में आयोजित इस स्वास्थ्य शिविर को प्राचार्य संतोष देवनाथ एवं एडमिनिस्ट्रेटर कुणाल महापात्र की निगरानी में व्यवस्थित रूप से संपन्न कराया गया। विद्यालय प्रबंधन द्वारा शिविर के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के साथ स्वस्थ दांत भी विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य का महत्वपूर्ण आधार हैं।
कार्यक्रम को सफल बनाने में हेडमास्टर जयराम सर सहित शिक्षिकाओं सुषमा कैवर्त, अंजलि महंत, कीर्ति भारिया एवं अन्य सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं का सक्रिय सहयोग एवं महत्वपूर्ण योगदान रहा। शिक्षकों ने विद्यार्थियों को स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक सावधानियों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
इंडियन पब्लिक स्कूल चैतमा द्वारा शिक्षा के साथ स्वास्थ्य एवं व्यक्तित्व विकास को भी प्राथमिकता देते हुए इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। विद्यालय प्रबंधन ने कहा कि भविष्य में भी विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए ऐसे उपयोगी कार्यक्रम निरंतर आयोजित किए जाएंगे।
महासमुंद, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के महासमुंद में पुलिस ने मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क की कड़ियां छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा और दूसरे राज्यों तक जुड़ी हैं। पुलिस ने नेटवर्क से जुड़े 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपए कैश बरामद किए गए।
छापेमारी में मजदूरों के पलायन से जुड़े रजिस्टर और डायरियां, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मॉर्गेज से जुड़े दस्तावेज और नोट गिनने की मशीन समेत कई सामान जब्त किए गए हैं।
मामले में पुलिस ने मुकेश चंद्राकर, लता सवर, नंदू मोहंती, पीयूष अग्रवाल और मनीष गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस मुकेश चंद्राकर को नेटवर्क का मुख्य आरोपी और कथित मास्टरमाइंड बता रही है।
महासमुंद में मानव तस्करी और बंधुआ मजदूरी के नेटवर्क पर पुलिस की बड़ी कार्रवाई।
पुलिस की कार्रवाई में 1.48 करोड़ रुपए से ज्यादा नकद बरामद किया गया।
छापेमारी में मजदूरों के पलायन से जुड़े रजिस्टर और दस्तावेज भी जब्त।
अस्पताल के मेमो से शुरू हुई जांच
पूरे मामले की जांच 21 सितंबर 2026 को सरकारी अस्पताल से मिले एक मेमो के बाद शुरू हुई। पुलिस के मुताबिक, मेमो में एक नाबालिग के शारीरिक शोषण और गर्भवती होने की जानकारी सामने आई थी।
इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाई। जांच के दौरान मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी और मजदूरों के संगठित पलायन से जुड़े नेटवर्क के बारे में सुराग मिलने की बात पुलिस ने कही। इसके बाद संदिग्ध ठिकानों और नेटवर्क से जुड़े लोगों की गतिविधियों की जांच शुरू की गई।
नेटवर्क से जुड़े 10 ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई, पांच आरोपी गिरफ्तार।
एडवांस पैसे देकर दूसरे राज्यों में भेजने का आरोप
पुलिस के अनुसार, नेटवर्क से जुड़े लोग आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और मजदूरों को एडवांस पैसे देने का लालच देते थे। इसके बाद मजदूरों को छत्तीसगढ़ से दूसरे राज्यों में ईंट भट्ठों और दूसरे कामों के लिए भेजा जाता था।
पुलिस का आरोप है कि कुछ मामलों में मजदूरों पर डर, दबाव और धमकी का इस्तेमाल किया गया। उनसे कठिन परिस्थितियों में काम कराने और उनकी आवाजाही पर नियंत्रण रखने की बात भी जांच में सामने आई है।
पुलिस के मुताबिक, छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों में बड़ी संख्या में मजदूरों का रिकॉर्ड मिला है। पुलिस इन दस्तावेजों को कथित बंधुआ मजदूरी और मजदूरों के पलायन से जोड़कर जांच कर रही है।
मजदूरों के रिकॉर्ड वाली डायरियां और रजिस्टर पुलिस ने जांच के लिए जब्त किए।
10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी
नेटवर्क से जुड़े संदिग्ध लोगों और ठिकानों की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने 10 जगहों पर एक साथ कार्रवाई की। छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में कैश के अलावा मजदूरों से जुड़े रिकॉर्ड और वित्तीय लेन-देन से संबंधित दस्तावेज जब्त किए गए।
पुलिस के मुताबिक, बरामद दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों से नेटवर्क की कार्यप्रणाली और इससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है।
5 आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में मुकेश चंद्राकर, लता सवर, नंदू मोहंती, पीयूष अग्रवाल और मनीष गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, मुकेश चंद्राकर को नेटवर्क का मुख्य आरोपी और कथित मास्टरमाइंड बताया जा रहा है।
जांच में मजदूरों को एडवांस रकम देकर दूसरे राज्यों में भेजे जाने की बात सामने आई है। पुलिस का आरोप है कि वहां कुछ मजदूरों से दबाव में काम कराया जाता था और उनकी आवाजाही पर नियंत्रण रखा जाता था।
पुलिस अब जब्त दस्तावेजों, मोबाइल फोन और बैंक खातों की जांच कर रही है
1.48 करोड़ रुपए से ज्यादा कैश बरामद
पुलिस ने छापेमारी के दौरान कुल 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपए कैश बरामद किए हैं। मौके से नोट गिनने की मशीन भी मिली है।
पुलिस अब जब्त मोबाइल फोन, दस्तावेजों और बैंक खातों की जांच कर रही है। इसका उद्देश्य नेटवर्क के कथित आर्थिक लेन-देन और अलग-अलग राज्यों में मजदूरों की आवाजाही की पूरी कड़ी का पता लगाना है।
छापेमारी में मजदूरों के पलायन से जुड़े रजिस्टर और दस्तावेज भी जब्त।
यह सामान जब्त किया गया
1,48,54,750 रुपए कैश
मजदूर पलायन से जुड़े रजिस्टर और डायरियां
कई मोबाइल फोन
बैंक पासबुक और चेकबुक
एटीएम कार्ड
मॉर्गेज से जुड़े दस्तावेज
नोट गिनने की मशीन
मानव तस्करी नेटवर्क से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी के दौरान बरामद नकदी और सामान।
नाबालिगों और महिलाओं के शोषण के पहलू की भी जांच
पुलिस अब मानव तस्करी के साथ नाबालिगों की तस्करी, बाल मजदूरी और महिलाओं और नाबालिग बालिकाओं के कथित शोषण के पहलुओं की भी जांच कर रही है। जब्त मोबाइल फोन, बैंक खातों और दस्तावेजों की जांच के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आने की उम्मीद है।
पुलिस यह भी पता लगा रही है कि नेटवर्क में कुल कितने लोग शामिल हैं, कितने मजदूरों को अलग-अलग राज्यों में भेजा गया और पूरे नेटवर्क का आर्थिक लेन-देन कितना बड़ा है।
खल्लारी थाने में दर्ज है केस
मामले में खल्लारी थाने में अपराध क्रमांक 104/2026 दर्ज किया गया है। पुलिस ने BNS की धारा 143(2), 143(3), 143(4), 3(5) और संगठित अपराध से जुड़ी धारा 111 के तहत कार्रवाई की है।
पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। जब्त दस्तावेजों, मोबाइल फोन और अन्य साक्ष्यों के विश्लेषण के आधार पर नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका सामने आने पर उनकी गिरफ्तारी भी की जा सकती है।
धमतरी, एजेंसी। धमतरी जिले में लगातार बारिश के बाद तेज बहाव के कारण हुए अलग-अलग हादसों में एक छात्र की मौत हो गई, जबकि एक छात्रा और रिटायर्ड वनकर्मी लापता हैं। तीनों घटनाओं में पुलिस और SDRF की टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।
ग्राम माकरदोना के 15 वर्षीय हिमांशु कुमार शुक्रवार को गणेश विसर्जन के दौरान तालाब में डूब गए थे। घटना के बाद उनकी तलाश के लिए गोताखोरों को लगाया गया। शनिवार दोपहर गोताखोरों ने हिमांशु का शव बरामद कर लिया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेज दिया है।
बाढ़ का पानी देखने गई छात्रा नाली में बही
वहीं, मेघा गांव की 15 वर्षीय छात्रा तारनी निषाद हादसे का शिकार हो गईं। बताया गया कि वह पेट्रोल पंप के पास बाढ़ का पानी देखने गई थीं। इसी दौरान नाली में पैर फिसलने से वह तेज बहाव में बह गईं। घटना की सूचना के बाद SDRF की टीम उनकी तलाश कर रही है।
रिटायर्ड वनकर्मी भी लापता, नदी किनारे मिले सामान
सिहावा क्षेत्र के सिरसिदा गांव निवासी 65 वर्षीय रिटायर्ड वनकर्मी बाबूलाल साहू भी लापता हैं। उनके मोबाइल, शॉल, डंडा और टॉवेल बालका नदी के किनारे मिले हैं। सामान मिलने के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने घटना की जानकारी पुलिस को दी। इसके बाद पुलिस और SDRF की टीमें नदी क्षेत्र में उनकी तलाश कर रही हैं।
तेज बहाव वाले इलाकों में लोगों से सावधानी की अपील
लगातार बारिश के कारण जिले के कई नदी-नालों और जलाशयों में पानी बढ़ा हुआ है। प्रशासन और पुलिस की ओर से लोगों से तेज बहाव वाले नदी-नालों और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की जा रही है। बच्चों को ऐसे स्थानों के पास नहीं जाने की विशेष सलाह दी गई है।