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IMC 2024: PM Modi ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2024 किया उद्घाटन, कही ये बड़ी बात

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नई दिल्ली, एजेंसी। भारत मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2024 का 8वां संस्करण आज से शुरू हो गया है। यह इवेंट दूरसंचार विभाग और COAI की साझेदारी में आयोजित किया गया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने इसका उद्घाटन किया, जबकि केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी उपस्थित रहे। इसके पहले, पीएम मोदी ने दिल्ली के भारत मंडपम में ITU-WTSA का उद्घाटन भी किया।

भारत में मोबाइल और ब्रॉडबैंड उपयोगकर्ताओं की वृद्धि
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने IMC 2024 के दौरान भारत के टेलीकॉम सेक्टर की बढ़ती प्रभावशीलता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि मोबाइल फोन के माध्यम से परिवारों को बैंकिंग सेवाओं से लेकर सरकारी वेलफेयर स्कीमों तक पहुंच मिलती है।

  • उपयोगकर्ताओं की संख्या: भारत में मोबाइल यूजर्स की संख्या 904 मिलियन से बढ़कर 1.16 बिलियन (116 करोड़) हो गई है।
  • ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क: ऑप्टिकल फाइबर (OFC) की पहुंच 11 मिलियन किलोमीटर से बढ़कर 41 मिलियन किलोमीटर तक हो गई है।

“We march with the world in #5G, but we shall lead the world in 6G” – @JM_Scindia @Officejmscindia

“In India, 5G is anticipated to inject an astounding 450 billion dollars into the economy by 2040. We have rolled out 5G across all 36 states & UTs covering 98% of our districts… pic.twitter.com/YzOQDLJ5Vn

— India Mobile Congress (@exploreIMC) October 15, 2024

5G रोल आउट की उपलब्धियाँ
सिंधिया ने बताया कि भारत अब दुनिया में सबसे तेज 5G रोल आउट करने वाला देश बन गया है।

टेलीकॉम ऑपरेटरों के सुझाव
इस मेगा टेक इवेंट में Jio के चेयरमैन आकाश अंबानी ने AI पर आत्मनिर्भरता और डेटा सेंटर नीति पर सुझाव दिए।

“India should urgently embrace AI with a holistic strategy driven by Atmanirbhar efforts” – @AkashMAmbani @reliancejio at #IMC2024 #TheFutureIsNow

” With #AI , India has the potential to completely transform into the new-age factory and service centre for the world.”… pic.twitter.com/NFi2oCk0IM

— India Mobile Congress (@exploreIMC) October 15, 2024

  • Airtel की पहल: Airtel के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल ने फर्जी कॉल निरस्त करने की टेक्नोलॉजी की लॉन्चिंग की जानकारी दी।
  • Vodafone-Idea का रोडमैप: Vi के चेयरमैन कुमार मंगलम बिरला ने फर्जी कॉल्स और फिशिंग को रोकने के लिए अपनी योजनाओं का जिक्र किया।

भारत में 120 करोड़ मोबाइल यूजर्स
पीएम मोदी ने IMC 2024 के उद्घाटन के बाद कहा कि भारत आज टेलीकॉम और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सबसे गतिशील देशों में से एक है।

  • उपयोगकर्ताओं की संख्या: भारत में 120 करोड़ मोबाइल यूजर्स और 95 करोड़ इंटरनेट यूजर्स हैं।
  • डिजिटल ट्रांजेक्शन का हिस्सा: भारत का 40 प्रतिशत से अधिक रीयल टाइम डिजिटल ट्रांजेक्शन होता है।

क्वालिटी ऑफ सर्विस पर ध्यान
पीएम मोदी ने WTSA और IMC का एक साथ होना महत्वपूर्ण बताया और कहा कि भारत क्वालिटी ऑफ सर्विस पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

  • ग्लोबल स्टैंडर्ड: WTSA का लक्ष्य ग्लोबल स्टैंडर्ड पर काम करना है, जबकि IMC सेवाओं से जुड़ी है।

भारत की मोबाइल यात्रा: एक अध्ययन का विषय
पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी में भारत की मोबाइल यात्रा एक अध्ययन का विषय है।

  • समावेशिता: मोबाइल और टेलीकॉम को कनेक्टिविटी के साथ-साथ इक्विटी का माध्यम बनाया गया है।

डिजिटल इंडिया के चार स्तंभ
पीएम मोदी ने डिजिटल इंडिया के चार मुख्य स्तंभों का उल्लेख किया:

  1. डिवाइस की कीमत में कमी
  2. डिजिटल कनेक्टिविटी का विस्तार
  3. डेटा की पहुंच सभी के लिए
  4. डिजिटल फर्स्ट होना

अवसंरचना में सुधार
भारत ने पहाड़ी और दूरदराज के क्षेत्रों में हजारों मोबाइल टावर स्थापित किए हैं।

  • वाई-फाई सेवाएँ: रेलवे स्टेशनों और सार्वजनिक स्थलों पर वाई-फाई की सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
  • ऑप्टिकल फाइबर केबल: अंडमान में समुद्र के नीचे ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाया गया है।

भविष्य की तकनीकी दृष्टि
पीएम मोदी ने कहा कि भारत ने टेलीकॉम क्षेत्र में अद्भुत काम किया है।

Hon’ble PM @narendramodi inaugurates the great grand #indiamobilecongress2024 in the presence of @ITUstandards and accompanied by all #telecom stakeholders announcing successful roll out of #5g in India @DoT_India @CDOT_India @Officejmscindia @IndiaPodcasts @hfclg #IMC2024… pic.twitter.com/uP1GUIZ9XU

— India Mobile Congress (@exploreIMC) October 15, 2024

  • 6G की तैयारी: 5G रोल आउट के साथ-साथ 6G की तैयारियों पर भी जोर दिया गया है।
  • डाटा की लागत: भारत में डेटा की कीमत लगभग 12 सेंट प्रति GB है।

साइबर सुरक्षा पर ध्यान
पीएम मोदी ने साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए वैश्विक फ्रेमवर्क की आवश्यकता पर जोर दिया।

  • महिलाओं के लिए पहल: महिलाओं के लिए ‘ड्रोन दीदी’ और ‘महिला ई-हाट’ जैसी योजनाएं चलायी जा रही हैं।

इस प्रकार, IMC 2024 न केवल तकनीकी नवाचार का मंच है, बल्कि यह भारत की डिजिटल क्रांति और समावेशिता का प्रतीक भी है।

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60 Kg Silver Missing: राम मंदिर में प्राण प्रतिष्ठा के दौरान भेंट की गई 60 किलो चांदी गायब, SIT जांच तेज

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अयोध्या, एजेंसी। अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े दान विवाद में एक नया मोड़ सामने आया है। जांच के दौरान पता चला है कि मंदिर को दान में मिली करीब 60 किलो चांदी का कोई साफ रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) अब दान में मिले नकद, सोना-चांदी और अन्य कीमती वस्तुओं के रिकॉर्ड की गहन पड़ताल कर रही है।

 प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान भेंट की गई 60 किलो चांदी गायब  
जानकारी के अनुसार, यह चांदी रामलला की प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दौरान भेंट की गई थी। दानदाताओं का दावा है कि इस चांदी का उपयोग मंदिर की नींव से जुड़े कार्यों में किया जाना था, लेकिन जांच एजेंसियों को अब तक इसके इस्तेमाल या सुरक्षित रखे जाने से संबंधित कोई ठोस दस्तावेज नहीं मिले हैं।

सूत्रों के मुताबिक, SIT पिछले कई दिनों से मंदिर में प्राप्त दान, उनके भंडारण और उपयोग से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है। अब तक जांच में 60 किलो चांदी की प्राप्ति, रखरखाव और उपयोग से जुड़ी कोई स्पष्ट ऑडिट ट्रेल सामने नहीं आई है।

ज्वेलर्स एसोसिएशन का दान का दावा
इस बीच, ज्वेलर्स एसोसिएशन ने दावा किया है कि उनके पास चांदी मंदिर ट्रस्ट को सौंपने की आधिकारिक रसीद मौजूद है। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का कहना है कि यह चांदी देशभर के सर्राफा व्यापारियों के सहयोग से दान की गई थी। हालांकि, सवाल यह उठ रहे हैं कि यदि चांदी मंदिर को सौंपी गई थी तो उसका उल्लेख मंदिर के रिकॉर्ड में क्यों नहीं है और नींव निर्माण में इसके उपयोग के प्रमाण क्यों नहीं मिल रहे हैं।

जांच के दौरान दान और भेंट प्रबंधन से जुड़े कई लोगों से पूछताछ की गई है। इनमें कुछ पुजारी और मंदिर प्रशासन से जुड़े कर्मचारी भी शामिल हैं। जांच अधिकारियों ने उन व्यक्तियों से भी सवाल किए हैं जो मंदिर में आने वाली भेंट और कीमती वस्तुओं के प्रबंधन से जुड़े रहे हैं।

बताया जा रहा है कि जांच केवल चांदी तक सीमित नहीं है। सोना, चांदी, हीरे के आभूषण, हार और चरण पादुका समेत कई अन्य दान की गई वस्तुओं की भी जांच की जा रही है। कुछ आरोपों में यह भी कहा गया है कि मूल दान की गई वस्तुओं की जगह दूसरी वस्तुएं रखी गईं या रिकॉर्ड में गड़बड़ी हुई।

SIT खंगाल रही दस्तावेज और रिकॉर्ड
यह विवाद तब सामने आया जब मंदिर को मिले करोड़ों रुपये के दान और कीमती सामानों के गायब होने को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हुई। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय SIT का गठन कर मामले की जांच के आदेश दिए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि जांच मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर शुरू की गई है और पूरी जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। उन्होंने लोगों से जांच पूरी होने तक धैर्य रखने की अपील की है। फिलहाल SIT दस्तावेजों, गवाहों के बयानों और दान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच कर रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि कथित रूप से गायब 60 किलो चांदी और अन्य कीमती दान की गई वस्तुओं का वास्तविक स्थिति क्या है।

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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के जंगलों से मिलेगी राजस्थान को बिजली:90 लाख टन कोयले की कमी दूर होगी, ये जयपुर को डेढ़ साल रोशन करने जितना

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जयपुर/सरगुजा, एजेंसी। राजस्थान में बिजली की बढ़ती मांग और कोयले की कमी के बीच राज्य सरकार को बड़ी राहत मिली है। राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RVUNL) को छत्तीसगढ़ (सरगुजा) के हसदेव-अरण्य क्षेत्र में स्थित केंते एक्सटेंशन ओपन कास्ट कोल ब्लॉक के लिए केंद्र सरकार से वन भूमि उपयोग की सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है।

इससे राजस्थान के छबड़ा (बारां) और सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट्स के लिए कोयले की आपूर्ति बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की वन सलाहकार समिति की सिफारिश के बाद यह मंजूरी दी गई है।

परियोजना के तहत करीब 1743 हेक्टेयर वन भूमि को खनन (माइनिंग) के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। आसान भाषा में समझें तो यह क्षेत्र 80 से 200 बड़े क्रिकेट स्टेडियमों के बराबर माना जा सकता है।

इस कोयला खदान से अगले 33 से 36 साल तक करीब 90 लाख टन कोयला निकाला जा सकेगा। इसे छह चरणों में विकसित किया जाएगा।

जयपुर की 14-17 महीने की बिजली जरूरत के बराबर है यह कोयला

केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक से निकलने वाला कोयला राजस्थान के अपने बिजली संयंत्रों (पावर प्लांट) में इस्तेमाल किया जाएगा। इससे छबड़ा और सूरतगढ़ जैसे बड़े थर्मल पावर प्लांटों को कोयले की बेहतर और नियमित आपूर्ति मिल सकेगी।

आसान भाषा में समझें तो यह मात्रा जयपुर शहर की करीब 14 से 17 महीने की औसत बिजली जरूरत के बराबर मानी जा सकती है। हालांकि, इस कोयले से बनने वाली बिजली सीधे सिर्फ जयपुर को नहीं मिलेगी। यह बिजली राजस्थान के पूरे पावर ग्रिड का हिस्सा होगी।

यदि कोयले की सप्लाई लगातार बनी रहती है, तो बिजलीघर पूरी क्षमता से काम कर सकेंगे और बिजली उत्पादन में स्थिरता आएगी। इसका फायदा आम उपभोक्ताओं को भी मिल सकता है।

छत्तीसगढ़ का हसदेव-अरण्य क्षेत्र, जहां कोल ब्लॉक के लिए मंजूरी मिली है।

छत्तीसगढ़ का हसदेव-अरण्य क्षेत्र, जहां कोल ब्लॉक के लिए मंजूरी मिली है।

हर साल 24.05 मिलियन टन कोयले की आवश्यकता

राजस्थान में बिजली उत्पादन का बड़ा हिस्सा कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट पर निर्भर है। खासतौर पर छबड़ा और सूरतगढ़ थर्मल पावर प्लांट राज्य की बिजली व्यवस्था के महत्वपूर्ण केंद्र हैं।

इन बिजली संयंत्रों को पूरी क्षमता से चलाने के लिए हर साल करीब 24.05 मिलियन टन कोयले की आवश्यकता होती है। मौजूदा कोयला स्रोतों से इतनी आपूर्ति नहीं हो पा रही थी। इसके कारण हर साल करीब 90 लाख टन कोयले की कमी बनी हुई थी।

इसी कमी को पूरा करने और भविष्य में बिजली उत्पादन को सुरक्षित रखने के लिए राजस्थान को नए कोयला ब्लॉक की जरूरत पड़ी। केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक शुरू होने के बाद राज्य के बिजलीघरों को लंबे समय तक कोयले की नियमित आपूर्ति मिल सकेगी। इससे दूसरे राज्यों या खुले बाजार से महंगा कोयला खरीदने पर निर्भरता भी कम होगी और बिजली उत्पादन अधिक स्थिर हो सकेगा।

जंगल पर बड़ा असर पड़ेगा

केंते एक्सटेंशन कोल ब्लॉक छत्तीसगढ़ के हसदेव-अरण्य क्षेत्र में स्थित है। यह क्षेत्र घने साल जंगलों और जैव विविधता के लिए जाना जाता है। परियोजना के लिए कुल 1742.60 हेक्टेयर वन भूमि का उपयोग खनन के लिए किया जाएगा। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार इस परियोजना से जंगल पर बड़ा असर पड़ेगा। हजारों पेड़ काटे जाएंगे।

हाथियों और वन्यजीवों के क्षेत्र में होगा खनन

हसदेव-अरण्य क्षेत्र केवल जंगल नहीं बल्कि वन्यजीवों का महत्वपूर्ण इलाका है। केंते एक्सटेंशन क्षेत्र के आसपास हाथी, तेंदुआ, स्लॉथ भालू, चीतल, लकड़बग्घा, सियार और पैंगोलिन जैसी प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। यह क्षेत्र लेमरू हाथी रिजर्व के करीब 3.625 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यही वजह है कि परियोजना में वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए विशेष योजना लागू करने की शर्त रखी गई है।

राजस्थान की बिजली कंपनी पर आएगा आर्थिक भार

केंते एक्सटेंशन परियोजना से केवल कोयला नहीं मिलेगा, बल्कि इसके साथ कई आर्थिक जिम्मेदारियां भी RVUNL पर आएंगी। वन भूमि डायवर्जन के बदले कंपनी को नियमों के अनुसार नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) का भुगतान करना होगा। यह राशि वन क्षेत्र की श्रेणी और सरकार द्वारा निर्धारित दरों के अनुसार तय होगी। इसके अलावा वन भूमि के बदले 636.557 हेक्टेयर क्षेत्र में जितने जंगल का उपयोग बदलेगा, उसकी भरपाई के लिए नए वन विकसित करने की जिम्मेदारी भी राजस्थान की कंपनी की होगी।

वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए परियोजना में करीब 16.73 करोड़ रुपए का Wildlife Mitigation Plan लागू करना होगा। खनन से मिट्टी के कटाव और जल स्रोतों पर असर कम करने के लिए करीब 15.01 करोड़ रुपए के Soil and Moisture Conservation Plan का भी प्रावधान किया गया है।

मंजूरी मिली है, लेकिन कई शर्तों के साथ

केंते एक्सटेंशन को मिली मंजूरी अभी अंतिम खनन अनुमति नहीं है। यह स्टेज-1 सैद्धांतिक वन मंजूरी है, जिसमें कई शर्तें तय की गई हैं। खनन को दो चरणों में करने की योजना है। पहले चरण में करीब 1001.95 हेक्टेयर वन भूमि पर खनन किया जाएगा।

यह अवधि अधिकतम 15 साल तक होगी। इसके बाद दूसरे चरण में शेष 740.65 हेक्टेयर क्षेत्र में खनन तभी आगे बढ़ेगा, जब पहले चरण में पर्यावरणीय शर्तों, जैव विविधता प्रबंधन की स्थिति संतोषजनक होगी। RVUNL को प्रतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation) की जमीन से जुड़े रिकॉर्ड, वन विभाग की औपचारिकताएं और अन्य पर्यावरणीय शर्तें तय समय में पूरी करनी होंगी।

कोयला निकालना ही नहीं, राजस्थान तक पहुंचाना भी चुनौती

खदान शुरू होने के बाद सिर्फ कोयला निकालना ही पर्याप्त नहीं होगा। उसे राजस्थान के बिजली संयंत्रों तक पहुंचाने के लिए परिवहन व्यवस्था, वॉशरी, रेलवे कनेक्टिविटी और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना होगा। इस पूरी प्रक्रिया में पर्यावरणीय मंजूरियां और अतिरिक्त खर्च भी जुड़े होंगे।

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सरकार का बड़ा फैसला: 16 कॉम्बिनेशन दवाओं पर लगा तुरंत बैन

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नई दिल्ली, एजेंसी। देश में लोगों की सेहत की सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने पूरे भारत में 16 फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं के बनाने, बेचने, बांटने और सप्लाई करने पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है।

यह कड़ा फैसला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940’ की धारा 26A के तहत एक नोटिफिकेशन जारी करके लिया गया है। एक्सपर्ट्स की जांच में सामने आया है कि इन दवाओं को मिलाकर बेचना वैज्ञानिक और मेडिकल तौर पर सही नहीं था।  यह कदम एक वैज्ञानिक समीक्षा के बाद उठाया गया है। 

क्यों लगाया गया इन दवाओं पर बैन?
क्या होती हैं FDC दवाएं? FDC (Fixed-Dose Combination) दवाएं वे होती हैं, जिनमें दो या दो से ज्यादा दवाओं के एक्टिव साल्ट (सामाग्री) को एक निश्चित मात्रा में मिलाकर एक ही दवा (जैसे एक टैबलेट या सिरप) के रूप में तैयार किया जाता है।

बैन की वजह: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ‘ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड’ ने एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी। जांच में पाया गया कि इन 16 कॉम्बिनेशन दवाओं को एक साथ मिलाकर देने का कोई मेडिकल आधार नहीं था। सरकार के मुताबिक, इन दवाओं के फायदे से ज्यादा इनके नुकसान या जोखिम होने की आशंका थी, इसलिए इन्हें ‘असुरक्षित और अतार्किक’ माना गया।

कौन-कौन सी दवाओं पर लगी है रोक?  
बैन की गई दवाएं अलग-अलग बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होती थीं, जिनमें एंटीबायोटिक, दर्द निवारक, पेट दर्द और स्किनकेयर (त्वचा) की दवाएं शामिल हैं:

1. पेट दर्द, दर्द और ऐंठन की दवाएं:
एसिटाइल सैलिसिलिक एसिड + एथोहेप्टाज़ीन 

डाइसाइक्लोमाइन + पैरासिटामोल + क्लिडिनियम ब्रोमाइड 

डाइसाइक्लोमाइन + पैरासिटामोल + क्लिडिनियम ब्रोमाइड + क्लोरडायज़ेपॉक्साइड 

पैरासिटामोल + लिग्नोकेन 

2. डायबिटीज की दवा:
ग्लिक्लाज़ाइड + क्रोमियम पिकोलिनेट 

3. एंटीबायोटिक दवाओं के कॉम्बिनेशन:
एमोक्सिसिलिन + सेराटियोपेप्टिडेज़

एमोक्सिसिलिन + सेराटियोपेप्टिडेज़ + लैक्टोबैसिलस स्पोरोजेन्स 

एमोक्सिसिलिन + क्लोक्सासिलिन + लैक्टिक एसिड बैसिलस + सेराटियोपेप्टिडेज़ 

सेफैड्रोक्सिल + प्रोबेनेसिड 

सेफुरोक्सिम + सेराटियोपेप्टिडेज़

4. स्किनकेयर और क्रीम :
ऐसी क्रीम या लोशन जिनमे एलोवेरा (Aloe extract) के साथ नीचे दिए गए तत्वों को मिलाया गया था, उन पर भी रोक लगा दी गई है जैसे कि… Vitamin E, Jojoba oil, Orange oil, Wheat germ oil, Tea tree oil, Allantoin, D-Panthenol का कॉम्बिनेशन।

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