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अगले वित्त वर्ष में फिर से सात प्रतिशत की वृद्धि दर से बढ़ सकता है भारत: सीईए नागेश्वरन
नई दिल्ली, एजेंसी। मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि वृहद आर्थिक स्थिरता एवं आपूर्ति संबंधी उपायों से भारत वित्त वर्ष 2027-28 में फिर से सात प्रतिशत की वृद्धि दर की राह पर लौट सकता है लेकिन यह बाहरी परिस्थितियों में सुधार पर निर्भर करेगा। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि का अनुमान अप्रैल में लगाए गए 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया। इसके पीछे ऊर्जा और अन्य जिंसों की ऊंची कीमतों के साथ पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण जारी आपूर्ति बाधाओं को वजह बताया गया।

नागेश्वरन ने कहा कि आर्थिक वृद्धि के संबंध में आरबीआई के अनुमानों पर इस समय सवाल उठाने का कोई कारण नहीं है, क्योंकि दिए गए आंकड़ों में ऊपर और नीचे दोनों दिशाओं में संभावनाएं मौजूद हैं। उन्होंने कहा, “यदि वृद्धि दर आरबीआई के अनुमान के अनुरूप सात प्रतिशत से नीचे भी जाती है, तो वृहद आर्थिक स्थिरता के उपाय और आपूर्ति संबंधी कदम हमें वित्त वर्ष 2027-28 में फिर से या बाहरी परिस्थितियों में जैसे ही सुधार हो, सात प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर की राह पर ला सकते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि ये अनुमान इस धारणा पर आधारित हैं कि अमेरिका-ईरान संघर्ष से पहले की स्थिति वित्त वर्ष 2027-28 से पहले बहाल हो जाएगी।
नागेश्वरन ने कहा कि यदि वर्तमान परिस्थितियां बनी रहती हैं, तो अगले वित्त वर्ष के अनुमानों की फिर से समीक्षा की जाएगी। बाजार मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यह उचित अनुमान होगा कि यह बजट 2027 में अनुमानित 10.1 प्रतिशत से अधिक रहेगी, क्योंकि खुदरा मुद्रास्फीति में वृद्धि का रुझान देखा जा रहा है। नागेश्वरन ने कहा, “अच्छी खबर यह है कि बाजार मूल्य पर जीडीपी वृद्धि बजट के अनुमान 10.1 प्रतिशत से काफी अधिक रहने की संभावना है।” सीईए ने कहा कि व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़ा है और 2025-27 में भी इसके और बढ़ने की संभावना है, जिससे चालू खाते पर दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में उभरता हुआ संकट न केवल आपूर्ति पक्ष पर एक बड़ा झटका है, बल्कि यह मांग पक्ष पर भी संभावित कमी का संकेत देता है।
उन्होंने कहा कि थोक मुद्रास्फीति में आपूर्ति पक्ष से मूल्य दबाव उभरने लगे हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत मौसम-विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा मानसून वर्षा के दीर्घावधि औसत (एलपीए) के 90 प्रतिशत रहने के अनुमान से मुद्रास्फीति के दृष्टिकोण पर ऊपर की ओर जोखिम पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वस्तु व्यापार और कुल व्यापार घाटा बढ़ गया है। सीईए ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 में भी इसी तरह का रुझान, संभवतः और अधिक घाटे के साथ, देखने को मिल सकता है। ऐसा होने से चालू खाते पर और दबाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि सफल व्यापार समझौतों, खासकर भारत-अमेरिका और भारत-यूरोपीय संघ व्यापार में प्रगति से उत्पन्न नीतिगत स्पष्टता निर्यात और पूंजी प्रवाह को समर्थन देने की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितता पूंजी प्रवाह की स्थिति पर लगातार दबाव बनाए हुए है।
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सस्ता होगा सोना, 20 हजार रुपए तक गिर सकते हैं दाम, एक्सपर्ट्स का अनुमान
मुंबई, एजेंसी। साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद अब सोने की कीमतों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। जनवरी में अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5,595 डॉलर प्रति औंस का ऑल-टाइम हाई का लेवल छूने के बाद सोना अब 27 फीसदी तक टूट चुका है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में सोने में 16 फीसदी तक और गिरावट आ सकती है, यदि यह अनुमान सही साबित होता है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 3,400 से 3,500 डॉलर प्रति औंस के दायरे तक पहुंच सकता है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिलेगा, जहां सोने की कीमतों में करीब 20,000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक की गिरावट संभव बताई जा रही है।
कमोडिटी बाजार के जानकारों का कहना है कि पिछले दो वर्षों में सोने की कीमतों में असाधारण तेजी आई थी। ऐसे में मौजूदा गिरावट को तकनीकी करेक्शन के तौर पर देखा जा रहा है। उनका मानना है कि लंबी अवधि में सोने का रुख अब भी सकारात्मक बना हुआ है लेकिन निकट भविष्य में कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।
क्यों सस्ता होगा सोना?
विशेषज्ञों के अनुसार, सोने पर दबाव बढ़ने की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है, जिससे महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता बढ़ी है। इसके अलावा अमेरिकी डॉलर की मजबूती ने भी सोने की मांग को प्रभावित किया है। डॉलर मजबूत होने पर अन्य देशों के निवेशकों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी खरीदारी घटती है।
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि 4,000 डॉलर प्रति औंस का स्तर सोने के लिए एक अहम सपोर्ट जोन है। हालांकि, यदि वैश्विक बाजारों में बिकवाली का दबाव और बढ़ता है तो कीमतें अस्थायी रूप से 3,500 डॉलर तक भी जा सकती हैं। इसके बावजूद लंबी अवधि के लिए सोने को लेकर विशेषज्ञ आशावादी बने हुए हैं। उनका अनुमान है कि अगले तीन वर्षों में सोना एक बार फिर नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ सकता है।
केंद्रीय बैंक लगातार गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे
सोने को समर्थन देने वाले प्रमुख कारकों में दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी शामिल है। कई देशों के केंद्रीय बैंक लगातार अपने गोल्ड रिजर्व बढ़ा रहे हैं, जिससे बाजार में सोने की मांग बनी हुई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के हालिया सर्वे के अनुसार, अधिकांश केंद्रीय बैंक अगले 12 महीनों में भी अपने स्वर्ण भंडार में वृद्धि करने की योजना बना रहे हैं। पिछले चार वर्षों में केंद्रीय बैंकों ने औसतन 1,000 टन सोना खरीदा है, जो पिछले दशक के औसत से कहीं अधिक है।
निवेशकों के लिए सलाह
का कहना है कि आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक जोखिम और महंगाई की आशंकाओं के बीच सोना अब भी सुरक्षित निवेश विकल्प बना हुआ है। ऐसे में अल्पकालिक गिरावट के बावजूद लंबी अवधि के निवेशकों के लिए कीमतों में आने वाली कमजोरी को चरणबद्ध खरीदारी के अवसर के रूप में देखा जा सकता है। हालांकि, निवेश से पहले बाजार की स्थिति और अपनी जोखिम क्षमता का आकलन करना जरूरी रहेगा।
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RBI के लक्ष्य से पार पहुंची महंगाई, जून में खुदरा मुद्रास्फीति बढ़कर 4.38%
मुंबई, एजेंसी। जून 2026 में खुदरा महंगाई (Retail Inflation) बढ़कर 4.38 फीसदी पर पहुंच गई है। खाद्य पदार्थों और ईंधन की बढ़ती कीमतों, पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कमजोर मानसून की आशंकाओं के चलते महंगाई पर दबाव बना रहा। 6 महीनों में यह पहली बार है जब खुदरा महंगाई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के टारगेट 4% के पार निकली है।
सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा सोमवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में खुदरा महंगाई दर 3.93 फीसदी थी, जो जून में बढ़कर 4.38 फीसदी हो गई।
RBI का क्या है महंगाई लक्ष्य?
भारतीय रिजर्व बैंक का लक्ष्य खुदरा महंगाई को 4 फीसदी पर बनाए रखना है। हालांकि, केंद्रीय बैंक को इसे 2 फीसदी से 6 फीसदी के दायरे में रखने की अनुमति है। यह लक्ष्य अवधि 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए निर्धारित की गई है।
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देश का निर्यात जून में 15.5 प्रतिशत बढ़कर 40.41 अरब डॉलर पर, व्यापार घाटा 30.43 अरब डॉलर
नई दिल्ली, एजेंसी। देश का निर्यात जून महीने में 15.5 प्रतिशत बढ़कर 40.41 अरब डॉलर रहा। इस दौरान व्यापार घाटा बढ़कर 30.43 अरब डॉलर हो गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आयात जून माह में करीब 31 प्रतिशत बढ़कर 70.84 अरब डॉलर रहा। चालू वित्त वर्ष की अप्रैल-जून तिमाही में निर्यात 15.92 प्रतिशत बढ़कर 129.32 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 19.89 प्रतिशत बढ़कर 216.18 अरब डॉलर हो गया।
चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सोने का आयात बढ़कर 11.01 अरब डॉलर हो गया, जो पिछले साल अप्रैल-जून में 7.49 अरब डॉलर था।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि जून में पश्चिम एशियाई देशों को भारत का निर्यात 7.29 प्रतिशत बढ़कर पांच अरब डॉलर हो गया। अग्रवाल ने कहा कि कच्चे तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और कीमती धातुओं के आयात बढ़ने के कारण कुल आयात बढ़ा है।
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