छत्तीसगढ़
प्रदेश में नवीन औद्योगिक क्षेत्र स्थापित करने पर जोर: उद्योग मंत्री देवांगन


रायपुर । वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन ने सीएसआईडीसी की बैठक में कहा है कि प्रदेश की नई औद्योगिक नीति 01 नवम्बर 2024 से लागू होगी। नई औद्योगिक नीति के आधार पर यहां निवेश करने का एक बड़ा आकर्षण होगा, जो न केवल राज्य के विकास को तेजी से आगे बढ़ाने में मदद करेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को और मजबूती प्रदान करेगा। इससे प्रदेश में बेहतर औद्योगिक वातावरण का निर्माण होगा और प्रदेश के निवासियों को रोजगार मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खनिज संसाधनों से भरपूर छत्तीसगढ़ में उद्योग धंधे स्थापित करने की भरपूर संभावनाएं हैं।
छत्तीसगढ़ राज्य औद्योगिक विकास निगम (सीएसआईडीसी) के संचालक मण्डल की 152वीं बैठक वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सह अध्यक्ष सीएसआईडीसी लखन लाल देवांगन की अध्यक्षता में उद्योग भवन में संपन्न हुई। बैठक में सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग अंकित आनंद, संचालक नगर तथा ग्राम निवेश सौरभ कुमार, सीएसआईडीसी के प्रबंध संचालक पी. अरूण प्रसाद, वित्त विभाग के उप सचिव श्रीमती पूजा शुक्ला मिश्रा उपस्थित थे। बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिये गये।
नवा रायपुर, अटल नगर सेक्टर-22 में मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा की गई घोषणा के अनुरूप 141.84 एकड़ में फार्मास्युटिकल पार्क की स्थापना किये जाने की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई। पार्क की स्थापना से नवीन निवेश के साथ – साथ स्थानीय रोजगार को बढावा मिलेगा। जिला जांजगीर-चांपा के ग्राम गतवा, बिर्रा एवं सिलादेही में निगम के आधिपत्य की 881.60 एकड भूमि पर आदर्श औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना हेतु सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई। जिला जांजगीर-चांपा के ग्राम भागोडीह, ग्राम मुक्ताराजा, ग्राम सरहर एवं ग्राम रिस्दा में निगम के आधिपत्य की भूमि में 245.29 एकड़ में आदर्श औद्योगिक क्षेत्र एवं 111.02 एकड में टैक्सटाईल पार्क की स्थापना हेतु सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई। जिला-राजनांदगांव के ग्राम बिजेतला की 421.9 एकड़ भूमि में नवीन आदर्श औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना हेतु सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई। भारत सरकार की एमएसई-सीडीपी योजनांतर्गत छत्तीसगढ राज्य में सीएसआईडीसी के अधीनस्थ स्थापित 13 औद्योगिक क्षेत्रों के उन्नयन कार्यों हेतु परियोजना प्रस्तावों का अनुमोदन किया गया।
राज्य के समस्त एच.ओ.डी एवं अन्य कार्यालयो का संचालन अटल नगर, नवा रायपुर में किया जाना प्रारंभ हो गया है। इस अनुक्रम में सीएसआईडीसी के नवा रायपुर स्थित भूमि पर उद्योग भवन का निर्माण किये जाने की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई। उपरोक्त निर्णय छत्तीसगढ़ राज्य में औद्योगिक निवेश को बढ़ाने, फलस्वरूप औद्योगिकीकरण को बढ़ाने तथा नवीन निवेश आकर्षित करने एवं स्थानीय रोजगार को बढ़ावा प्रदान किये जाने की दिशा में बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है जो कि विकसित भारत, विकसित छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार किये जाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।
छत्तीसगढ़
अंबिकापुर : किसानों से किया हर एक वादा पूरा कर रही है हमारी सरकार : मुख्यमंत्री साय
मुख्यमंत्री ने दो दिवसीय राज्य स्तरीय तिलहन किसान मेले का किया शुभारंभ
आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने और तिलहन उत्पादन बढ़ाने के उपायों पर विशेष जोर
“एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत मुख्यमंत्री ने लगाया साल का पौधा
दलहन-तिलहन के उत्पादन को बढ़ावा देने वाले प्रयासों से किसानों को मिल रहा है लाभ




अंबिकापुर । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज सरगुजा जिले के अंबिकापुर स्थित राजमोहिनी देवी कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केन्द्र में दो दिवसीय राज्य स्तरीय तिलहन किसान मेले का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण कर किसानों को दी जा रही आधुनिक कृषि तकनीकों और तिलहन उत्पादन बढ़ाने के उपायों की सराहना की। मुख्यमंत्री ने विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर महाविद्यालय परिसर में “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के तहत साल का पौधा रोपित किया और पर्यावरण संरक्षण के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण करने की अपील की।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है, जहां लगभग 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार किसानों से धान की खरीदी 21 क्विंटल प्रति एकड़ की दर से 3100 रुपये में कर रही है तथा अंतर की राशि का भुगतान भी एकमुश्त किया जा रहा है। श्री साय ने कहा कि पिछले 2 वर्षों से हमारी सरकार किसानों से किया हर एक वादा पूरा कर रही है। उन्होंने किसानों से संवाद कर होली के पूर्व धान के अंतर की राशि का भुगतान तथा योजनाओं का लाभ मिलने की जानकारी भी ली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर हो चुका है, लेकिन तिलहन उत्पादन में अभी भी कमी है। वर्तमान में देश अपनी आवश्यकता का लगभग 57 प्रतिशत ही तिलहन उत्पादन कर पा रहा है, शेष 43 प्रतिशत आयात करना पड़ता है। इस कमी को दूर करने के लिए तिलहन विकास परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे वैज्ञानिकों के सुझावों को अपनाकर तिलहन उत्पादन बढ़ाएं। उन्होंने जानकारी दी कि कृषक उन्नति योजना की तर्ज पर तिलहन फसलों के लिए प्रति एकड़ 11 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि देने की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही पशुपालन, दुग्ध उत्पादन और मत्स्य पालन जैसे सहायक व्यवसायों को अपनाकर आय बढ़ाने पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया कि जीएसटी में सुधार के बाद कृषि यंत्रों की कीमतों में कमी आई है, जिससे किसानों को लाभ मिल रहा है।
कृषि मंत्री राम विचार नेताम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना आवश्यक है। उन्होंने किसानों से दलहन एवं तिलहन फसलों का उत्पादन बढ़ाने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. गिरीश चंदेल ने तिलहन विकास कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि किसानों को विश्वविद्यालय के माध्यम से उन्नत बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं। राज्य में संचालित 28 कृषि महाविद्यालयों, 27 कृषि विज्ञान केंद्रों एवं अनुसंधान संस्थानों के जरिए हर वर्ष लगभग 50 हजार किसानों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इस अवसर पर मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े, सांसद चिंतामणि महाराज, विधायक प्रबोध मिंज, विधायक रामकुमार टोप्पो, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, महापौर श्रीमती मंजूषा भगत, जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष राम किशुन सिंह, सभापति हरविंदर सिंह, राम लखन पैंकरा, संभाग आयुक्त नरेंद्र कुमार दुग्गा, जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

कोरबा
महिला पंच के अपहरण का दावा झूठा निकला:अविश्वास प्रस्ताव से पहले सरपंच पर लगा था अगवा करने का आरोप
कोरबा। कोरबा जिले में सरपंच चुनाव से पहले एक महिला पंच, उनके पति और दो बच्चों के अपहरण का मामला झूठा निकला। यह आरोप करूमौहा ग्राम पंचायत की सरपंच और उनके समर्थकों पर लगाया गया था। पुलिस जांच में सामने आया कि परिवार अपने एक रिश्तेदार के यहां घूमने गया था। यह मामला राजगामार चौकी क्षेत्र का है।
ग्वाल राम यादव नामक व्यक्ति ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में कहा गया था कि 16 मार्च को वार्ड क्रमांक 4 की पंच निर्मला, उनके पति दिलमोहन और दो बच्चों को सरपंच कविता कांदे सहित लक्ष्मीनारायण खांडे, अंतुलाल रात्रे, गंगा राम रात्रे, चैतराम मंझवार, छबिराम मंझवार और चंद्रकुमारी रात्रे एक सफेद टाटा पंच कार में ले गए थे।

पूछने पर बताया गया था कि वे चंद्रहासिनी देवी के दर्शन कर देर शाम तक लौट आएंगे, लेकिन तीन दिन बाद भी वे घर नहीं लौटे और न ही उनसे संपर्क हो पाया।
अविश्वास प्रस्ताव से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला ग्राम पंचायत करूमौहा में सरपंच के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव से जुड़ा है। बीते वर्ष हुए पंचायत चुनाव में कविता कांदे सरपंच चुनी गई थीं। हालांकि, बाद में पंचों ने उन पर मनमानी और गांव के विकास में बाधा डालने का आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव लाया। अनुविभागीय अधिकारी राजस्व ने इस प्रस्ताव पर मतदान के लिए 25 मार्च की तिथि निर्धारित की है।
कोरबा सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने इस मामले पर जानकारी देते हुए बताया कि अपहरण की बात पूरी तरह से झूठी है। शिकायत मिलने के बाद तत्काल जांच शुरू की गई। परिजनों से बातचीत में पता चला कि परिवार अपने रिश्तेदार के यहां घूमने गया था। उनके लौटने के बाद बयान दर्ज किए जाएंगे और आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

छत्तीसगढ़
बीजापुर में दो DEO की नियुक्ति पर विवाद:विधायक विक्रम मंडावी ने सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र
बीजापुर,एजेंसी। बीजापुर जिले में एक ही कार्यालय में दो जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) की पदस्थापना का मामला अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है। क्षेत्रीय विधायक विक्रम मंडावी ने शुक्रवार को विधानसभा के शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाया और सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए।
विधायक मंडावी ने आरोप लगाया कि जिले में एक ही समय पर दो जिला शिक्षा अधिकारी कार्यरत हैं, जिससे प्रशासनिक भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने इसे ‘अव्यवस्थित व्यवस्था’ बताते हुए कहा कि इसका सीधा असर जिले की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है, जो अब पटरी से उतरती दिख रही है।

मंडावी ने शिक्षा मंत्री को लिखा पत्र
मंडावी ने इस मामले को लेकर राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव को पत्र भी लिखा है। पत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि वर्तमान में बीजापुर में एन.एल. धनेलिया जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में पदस्थ हैं, वहीं राजकुमार कठौते सहायक संचालक और प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं।

बताया गया है कि 10 जुलाई 2025 से दोनों अधिकारी एक ही कार्यालय से कार्य संचालन कर रहे हैं। इससे विभागीय कार्यों में टकराव और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो रही है। विधायक ने मंत्री से मांग की है कि स्थिति स्पष्ट करते हुए एक ही अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके।
इस पूरे मामले ने जिले की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस पर क्या कदम उठाती है।

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