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विदेश

ईरान ने इजराइल पर हमले रोके: लेबनान को लेकर खतरनाक चेतावनी भी दी, कहा- “अब फिर गलती की तो…”

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तेहरान, एजेंसी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने सोमवार को घोषणा की कि वह फिलहाल इजराइल के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई रोक रहा है। हालांकि तेहरान ने स्पष्ट कर दिया कि यदि इजराइल ने लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखी, तो ईरान पहले से कहीं अधिक कठोर और विनाशकारी जवाब देगा। यह घोषणा ईरान के आपातकालीन सैन्य मुख्यालय Khatam al-Anbiya Headquarters की ओर से जारी बयान में की गई। ईरानी सैन्य कमान ने अपने बयान में कहा, “सशस्त्र बलों की सैन्य कार्रवाई समाप्त करने की घोषणा की जाती है।” लेकिन इसके साथ ही चेतावनी भी दी गई कि यदि इजराइल की “आक्रामकता और शत्रुतापूर्ण गतिविधियां” जारी रहती हैं, विशेष रूप से दक्षिणी लेबनान में, तो ईरान की प्रतिक्रिया पहले से अधिक कठोर और विनाशकारी होगी।

इस बयान से संकेत मिलता है कि ईरान फिलहाल तनाव कम करने का संदेश देना चाहता है, लेकिन उसने सैन्य विकल्प खुले रखे हैं। यह घोषणा ऐसे समय आई है जब हाल ही में ईरान ने लगभग दो महीने बाद पहली बार इजराइल की ओर मिसाइलें दागी थीं। ईरान के इस हमले के बाद क्षेत्र में युद्ध फैलने की आशंका बढ़ गई थी। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने सार्वजनिक रूप से इजराइल से जवाबी कार्रवाई न करने की अपील की थी और तत्काल युद्धविराम का समर्थन किया था। स्थिति केवल ईरान और इजराइल तक सीमित नहीं है। दक्षिणी लेबनान में इजराइली सेना और Hezbollah के बीच लगातार संघर्ष जारी है। हाल के दिनों में  हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजराइल पर रॉकेट दागे।  जवाब में इजराइल ने बेरूत के दहिया क्षेत्र और दक्षिणी लेबनान में कई ठिकानों पर हमले किए।

इजराइली सेना ने हिजबुल्लाह के सुरंग नेटवर्क और कमांड सेंटरों को निशाना बनाने का दावा किया। संघर्ष में दोनों पक्षों को नुकसान पहुंचा है और सैनिकों की मौत की भी खबरें आई हैं। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी प्रशासन युद्ध को और फैलने से रोकना चाहता है। वहीं इजराइल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई जारी रखेगा। विश्लेषकों का मानना है कि यदि लेबनान मोर्चे पर लड़ाई तेज होती है, तो ईरान सीधे या अपने सहयोगी समूहों के माध्यम से फिर से हस्तक्षेप कर सकता है। तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि इजराइल पर उसके हमले फिलहाल रुके हैं। लेकिन लेबनान में इजराइली सैन्य कार्रवाई जारी रहने पर स्थिति फिर से विस्फोटक हो सकती है। क्षेत्रीय तनाव कम होने की बजाय अभी भी बेहद नाजुक स्थिति में बना हुआ है।

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देश

रूस-यूक्रेन युद्ध में फंसे भारतीय: ओडेसा पोर्ट पर इंडियन क्रू वाले जहाज पर हमला, 2 हिंदुस्तानी नागरिक लापता

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odesa port strike hits vessel with four indians two safe and two untraced

कीव, एजेंसी। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच काला सागर क्षेत्र एक बार फिर हिंसा की चपेट में आ गया है। यूक्रेन के प्रमुख ओडेसा बंदरगाह पर एक व्यापारिक जहाज पर हुए हमले में चार भारतीय नागरिक भी सवार थे। यूक्रेन स्थित भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि दो भारतीय सुरक्षित हैं, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है। दूतावास संबंधित अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और बचाव अभियान पर नजर बनाए हुए है। एमवी एजीएन रैग्नर (MV AGN Ragnar) ओडेसा बंदरगाह पर हमले की चपेट में आ गया। ओडेसा काला सागर क्षेत्र में यूक्रेन का सबसे महत्वपूर्ण बंदरगाह है और 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से यह कई बार हमलों का निशाना बन चुका है।

यूक्रेन में भारतीय दूतावास के अनुसार, घटना के समय जहाज पर चार भारतीय नागरिक मौजूद थे। अब तक मिली जानकारी के अनुसार दो भारतीय नागरिक सुरक्षित हैं। दो अन्य भारतीयों के बारे में अभी कोई पुष्टि नहीं हुई है। उनकी तलाश के लिए सर्च एंड रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। भारतीय दूतावास ने जारी बयान में कहा कि वह इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर रखे हुए है। दूतावास संबंधित यूक्रेनी अधिकारियों के संपर्क में है ताकि लापता भारतीयों का जल्द पता लगाया जा सके और उन्हें हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जा सके। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि जहाज पर हमला किसने किया और किन परिस्थितियों में यह घटना हुई। जहाज पर कुल कितने चालक दल के सदस्य थे, इसकी भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

अधिकारियों ने अभी तक चारों भारतीयों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है। साथ ही जहाज पर उनकी जिम्मेदारियों और पदों के बारे में भी कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है। रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते काला सागर क्षेत्र में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही लगातार जोखिम भरी बनी हुई है। हाल के महीनों में कई व्यापारी जहाज मिसाइल और ड्रोन हमलों की चपेट में आए हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

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नेपाल में भारतीय करंसी पर नए नियम लागू, जानिए कौन-से नोट होंगे मान्य और कितना ले सकेंगे कैश

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नेपाल में भारतीय करंसी पर नए नियम लागू, जानिए कौन-से नोट होंगे मान्य और कितना ले सकेंगे कैश

काठमांडू,

भारत और नेपाल के बीच यात्रा और व्यापार करने वालों के लिए अच्छी खबर है। नेपाल सरकार ने भारतीय और नेपाली नागरिकों को 9 नवंबर 2016 के बाद जारी रू.200 और रू.500 के भारतीय नोट अधिकतम रू.25,000 तक नेपाल लाने और ले जाने की अनुमति दे दी है। नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने नई अधिसूचना जारी कर इस संबंध में नियम स्पष्ट किए हैं। केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि 8 नवंबर 2016 से पहले जारी रू.500 और रू.1,000 के भारतीय नोट पहले की तरह प्रतिबंधित रहेंगे। इन पुराने नोटों को नेपाल में लाने या ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

नेपाली नागरिकों के लिए विशेष नियम
नई अधिसूचना के अनुसार, नेपाली नागरिक भारतीय मुद्रा केवल भारत से नेपाल ला सकेंगे। उन्हें भारतीय करेंसी नेपाल से किसी तीसरे देश में ले जाने की अनुमति नहीं होगी। नेपाल राष्ट्र बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने कहा कि नए नियम से नेपाल आने वाले भारतीय पर्यटकों और भारत के साथ व्यापार करने वाले नेपाली नागरिकों को काफी सुविधा मिलेगी। इससे सीमा पार नकदी लेन-देन की प्रक्रिया भी सरल होगी। नई अधिसूचना के अनुसार, नेपाली नागरिक और विदेशी यात्री 5,000 अमेरिकी डॉलर या उसके बराबर विदेशी मुद्रा बिना कस्टम घोषणा के नेपाल ला सकते हैं। यदि इससे अधिक राशि लाई जाती है तो कस्टम अधिकारियों के समक्ष इसकी घोषणा करना अनिवार्य होगा। एजेंसी।

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विदेशी निवेशकों का बदला मूड, ताइवान-कोरिया से पैसा निकाल भारत-चीन में कर रहे निवेश

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विदेशी निवेशकों का बदला मूड, ताइवान-कोरिया से पैसा निकाल भारत-चीन में कर रहे निवेश

मुंबई,

वैश्विक निवेशकों की रणनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर शेयरों से पैसा निकालकर विदेशी फंड अब भारत, चीन और दक्षिण-पूर्व एशियाई बाजारों के बैंकिंग, आईटी और अन्य अपेक्षाकृत स्थिर सेक्टरों में निवेश बढ़ा रहे हैं। AI निवेश से मिलने वाले रिटर्न को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच यह बदलाव एशियाई बाजारों का निवेश परिदृश्य बदलता दिख रहा है।

ब्‍लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, फिडेलिटी इंटरनेशनल, BNP Paribas और M&G Investments जैसे निवेशकों ने दक्षिण कोरिया और ताइवान के AI एवं सेमीकंडक्टर शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम करना शुरू किया है। विश्लेषकों का कहना है कि AI पर हो रहे भारी निवेश से मिलने वाले वास्तविक रिटर्न को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसे में फंड मैनेजर बैंकिंग, आईटी, ई-कॉमर्स और अन्य अपेक्षाकृत कम जोखिम वाले क्षेत्रों को प्राथमिकता दे रहे हैं। विदेशी बिकवाली का असर दक्षिण कोरिया और ताइवान के शेयर बाजारों पर भी दिखा है। निवेशकों की निकासी से दोनों बाजारों में दबाव बना हुआ है और अस्थिरता बढ़ी है।

भारत और चीन विदेशी निवेशकों का केंद्र

दूसरी ओर, भारत और चीन विदेशी निवेशकों के लिए फिर आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। जुलाई के दौरान भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेश बढ़ा है, जिससे आईटी सहित कई प्रमुख सेक्टरों को समर्थन मिला। वहीं, चीन में इंटरनेट कंपनियों और बैंकिंग शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है। इसके अलावा इंडोनेशिया और थाईलैंड के बाजारों में भी मजबूत तेजी देखने को मिल रही है।

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक निवेशक फिलहाल तेज जोखिम वाले AI शेयरों की तुलना में बेहतर मूल्यांकन और स्थिर रिटर्न वाले बाजारों में निवेश को प्राथमिकता दे रहे हैं।

एजेंसी।

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