गाजा,एजेंसी। इजराइल ने हमास के खिलाफ जंग के बाद रविवार को पहली बार गाजा में मानवीय सहायता पहुंचाई है। इजराइली सेना IDF ने आटा, चीनी, दवाई और डिब्बाबंद खाना गाजा में हवाई मार्ग से पहुंचाया। यह कदम अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ मिलकर उठाया गया।
वहीं, इजराइल ने गाजा के कुछ हिस्सों में सीजफायर और संयुक्त राष्ट्र (UN) के लिए सुरक्षित रास्ते बनाने का भी ऐलान किया ताकि वहां की जनता को मदद पहुंचाया जा सके। मार्च से मई तक इजराइल ने गाजा में बाहरी सहायता पर रोक लगा दी थी।
अब इजराइल का कहना है कि वह UN की सहायता वितरण में रुकावट नहीं डाल रहा। गाजा में इजराइल-हमास जंग को शुरू हुए 22 महीने हो चुके हैं। अब तक इस लड़ाई की वजह से 124 लोग भूख से मारे गए हैं, जिनमें से 81 बच्चे हैं। जुलाई महीने में ही भूख से 40 लोगों की मौत हुई, जिनमें 16 बच्चे हैं।
26 जुलाई, 2025 को इजराइली वायु सेना के विमान में मानवीय सहायता के बक्से लादे गए।
गाजा को एयर रूट से मदद मिलाना शुरू
इजराइली सेना ने पुष्टि की कि उन्होंने गाजा में एयर रूट से मदद भेजना शुरू कर दिया है। इससे पहले एक इजराइली सुरक्षा अधिकारी ने शुक्रवार को CNN को बताया था कि गाजा में भुखमरी के संकट पर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय आलोचना के बीच इजराइल विदेशी देशों को गाजा में एयर रूट से मदद भेजने की इजाजत देगा।
अमेरिका में इजराइल के राजदूत येचील लेइटर ने शनिवार को बताया कि इजराइली सेना रविवार से गाजा के लिए ‘ह्यूमेटेरियन कॉरिडोर’ खोलेगी। इनका मकसद गाजा की आबादी के लिए मानवीय सहायता बढ़ाना है।
लगातार बढ़ रही कुपोषण से मरने वालों की संख्या
गाजा में रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों ने बताया कि वहां 50 ग्राम के बिस्किट के पैकेट की कीमत 750 रुपए है। नकद पैसे निकालने के लिए 45% तक कमीशन देना पड़ता है।
हालात इतने खराब हैं कि लोग नमक खाकर और पानी पीकर काम चला रहे हैं। एक पत्रकार ने बताया कि 21 महीने में मेरा वजन 30 किलो घट गया है। थकान बनी रहती है और चक्कर आते रहते हैं।
दक्षिणी गाजा के नासिर अस्पताल में काम करने वाले एक हेल्थ अधिकारी का कहना है कि गाजा में सभी भुखमरी के संकट से जूझ रहे हैं। कुपोषण से मरने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
उनका कहना है कि गाजा में जब युद्ध शुरू हुआ तो अस्पताल से सबसे ज्यादा संख्या हवाई हमलों में घायल होने वाले लोगों की होती थी, लेकिन अब उनकी जगह कुपोषण के शिकार बच्चों ने ले ली है। वहीं, UN का कहना है कि गाजा में एक तिहाई आबादी को कई दिनों में एक बार भोजन नसीब हो रहा है।
गाजा में भुखमरी की तस्वीरें…
गाजा की एक महिला हिदाया के 18 महीने छोटे बेटे मोहम्मद जकारिया की कुपोषण के चलते रीढ़ की हड्डी उभर आई है।
7 साल का मोहम्मद और 10 साल की जीना भुखमरी के संकट से जूझ रहे हैं, उनका परिवार पानी पीकर अपनी भूख मिटा रहा है।
UN का कहना है कि गाजा में एक तिहाई आबादी को कई दिनों तक खाना नहीं मिल रहा है।
अलग-अलग मानवीय संगठनों के मुताबिक गाजा की 20 लाख से ज्यादा आबादी पूरी तरह बाहरी मदद पर निर्भर है।
युद्ध की वजह से गाजा में भुखमरी की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, क्योंकि सटीक आंकड़े नहीं मिल पाए हैं।
ब्रिटेन-फ्रांस-जर्मनी बोले- अब गाजा युद्ध खत्म करने का वक्त
गाजा में भुखमरी को देखते हुए ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। उन्होंने कहा- ‘बंधकों की रिहाई से पहले तत्काल युद्धविराम करना चाहिए।
गाजा के नागरिकों को बिना किसी देरी के भोजन और पानी उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इजराइल को अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता कानून के तहत अपने दायित्वों को निभाना चाहिए।’
वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि हमास शांति नहीं चाहता, बल्कि ‘मरना चाहता है।’ उन्होंने इजराइल से गाजा में ‘मकसद पूरा करने’ और सैन्य अभियान तेज करने को कहा है।
ट्रम्प ने कहा, ‘अब वक्त आ गया है कि इजराइल हमास का सफाया करे। उन्हें इसे साफ करना होगा।’ यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका मध्यस्थता से अलग हो गया है।
इजराइल पर फिलिस्तीनियों को ड्रग्स देने का भी आरोप
गाजा के सरकारी मीडिया ऑफिस (GMO) ने पिछले महीने इजराइली आर्मी पर फिलिस्तीनियों को ड्रग्स देने का आरोप लगाया था। GMO का कहना था कि गाजा ह्यूमैनिटेरियन फाउंडेशन (GHF) ने फिलिस्तीनी लोगों को जो आटे की बोरियां दी हैं, उनमें ऑक्सीकोडोन नाम की नशीली गोलियां मिली हैं।
GHF को इजराइली सेना चलाती है और इसे अमेरिका से सपोर्ट मिलाता है। GMO ने कहा था कि यह लोगों को नशे की लत लगाने की साजिश है। इजराइल नशीली दवाओं को हथियार के तौर में इस्तेमाल कर रहा है।
गाजा में 70% बिल्डिंग्स तबाह
गाजा के मीडिया कार्यालय (GMO) ने इजराइल पर आरोप लगाया कि वह गाजा पट्टी से फिलिस्तीनी आबादी खाली करने की साजिश रच रहा है। ऑफिस ने कहा कि इजराइली सेना जबरन बेदखली, बमबारी और सहायता रोककर गाजा को तबाह कर रही है। यह नरसंहार और नस्लीय सफाई है।
GMO ने दावा किया था कि गाजा का 70% से ज्यादा बिल्डिंग्स तबाह हो चुकी हैं और 19 लाख लोग (85% आबादी) अपने घरों से बेघर हो गए हैं।
नई दिल्ली,एजेंसी। संयुक्त राष्ट्र की संस्था United Nations Economic and Social Commission for Asia and the Pacific की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध और उससे पैदा हुए ऊर्जा संकट के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। इस वित्त वर्ष में भारत की GDP ग्रोथ 6.4% रहने का अनुमान है, जिससे भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले साल भारत की ग्रोथ 7.4% थी, जो इस साल थोड़ी कम होकर 6.4% रहेगी, लेकिन अगले साल फिर बढ़कर 6.6% हो सकती है। यह अनुमान उस समय के हालात पर आधारित है जब Iran युद्ध चल रहा था और Strait of Hormuz पर असर पड़ने लगा था।
एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में भारत की स्थिति बेहतर है। China की ग्रोथ इस साल 4.3% रहने का अनुमान है, जबकि Pakistan की ग्रोथ और कमजोर रह सकती है। इससे साफ है कि भारत क्षेत्र में सबसे आगे बना हुआ है। भारत की मजबूत ग्रोथ के पीछे घरेलू मांग, खासकर ग्रामीण इलाकों में बढ़ता खर्च, सबसे बड़ा कारण बताया गया है। इसके अलावा सर्विस सेक्टर जैसे आईटी और बैंकिंग भी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रहे हैं। सरकार की नीतियां और गरीब वर्ग के लिए दी गई आर्थिक मदद ने भी बाजार में पैसा बनाए रखा।
ESCAP के अधिकारी Hamza Malik के अनुसार, भारत की बढ़ती उत्पादकता और बड़ी आबादी उसकी आर्थिक मजबूती का बड़ा आधार है। इससे देश लंबे समय तक ऊंची ग्रोथ बनाए रख सकता है। हालांकि कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं, जैसे अमेरिका को निर्यात में गिरावट और वैश्विक ऊर्जा संकट का असर। फिर भी, इन मुश्किलों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर बनी हुई है और दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रही है।
वाशिंगठन/बीजिंग, एजेंसी। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना द्वारा जब्त किए गए ईरानी मालवाहक जहाज M/V Touska को लेकर अब चीन कनेक्शन सामने आया है, जिससे इस पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। सरल शब्दों में समझें तो यह जहाज ईरान के एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा बताया जा रहा है, जो चीन के बंदरगाहों से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक यह जहाज हाल ही में चीन के झुहाई पोर्ट पर दो बार गया था और इसके जरिए ऐसे सामान ले जाए जाने की आशंका है, जो नागरिक और सैन्य दोनों तरह के उपयोग में आ सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों ने इस जहाज को उस समय रोका जब यह अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को पार करने की कोशिश कर रहा था। चेतावनी के बाद भी न रुकने पर अमेरिकी बलों ने फायरिंग कर जहाज के इंजन को निष्क्रिय किया और फिर उस पर कब्जा कर लिया। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि जहाज में क्या सामान था, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह “डुअल-यूज़” यानी संवेदनशील सामग्री हो सकती है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि यह जहाज मलेशिया के पोर्ट क्लांग और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई रास्तों से होकर आया था। ऐसे रूट्स का इस्तेमाल अक्सर माल के असली स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता है। समुद्र में जहाज-से-जहाज ट्रांसफर के जरिए ट्रैकिंग को मुश्किल बना दिया जाता है।
चीन ने इस मामले में साफ कहा है कि वह ईरान को हथियार नहीं देता और उसके पास डुअल-यूज़ सामान के निर्यात पर नियंत्रण है। लेकिन चीन अमेरिकी प्रतिबंधों को नहीं मानता, इसलिए यह विवाद और गहरा हो गया है। बीजिंग ने जहाज जब्त किए जाने पर चिंता जताई है और संयम बरतने की अपील की है। इस घटना ने यह भी दिखा दिया है कि ईरान-यूएस संघर्ष अब सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और सप्लाई नेटवर्क से भी जुड़ चुका है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री रास्ते पर तनाव बढ़ने से दुनिया की तेल सप्लाई और बाजार पर असर पड़ रहा है। कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ एक जहाज की जब्ती नहीं, बल्कि ईरान, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक टकराव का संकेत है, जो आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है।
वाशिंगठन/नई दिल्ली, एजेंसी। अपने विवादित बयानों और रवैये कारण सुर्खियों में रहने वाले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) एक बार फिर अपने व्यवहार को लेकर चर्चा में हैं। भारत का सहयोगी होने का दावा करने वाले ट्रम्प का दोगला चेहरा फिर बेनकाब हो गया है। व्हाइट हाऊस ( White House) में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक महिला पत्रकार के भारत के बारे में पूछे सवाल पर वह अचानक भड़क गए और उसे बीच में ही “OUT” कहकर बाहर जाने को कह दिया।
Tried to ask the President about two vessels in the Strait of Hormuz who were allegedly fired upon by Iranian gunboats.
दरअसल, CBS News की रिपोर्टर ओलिविया रिनाल्डी (Olivia Rinaldi) ने होर्मुज (Strait of Hormuz) में भारतीय जहाजों पर ईरानी हमले को लेकर सवाल पूछा। ट्रंप ने सवाल पूरा होने से पहले ही उन्हें रोक दिया और बाहर का रास्ता दिखा दिया, जिससे प्रेस रूम का माहौल तनावपूर्ण हो गया। होर्मुज से गुजर रहे दो भारतीय जहाजों पर ईरानी गनबोट्स द्वारा फायरिंग की घटना को लेकर सवाल पर ट्रम्प के इस रवैये से दुनिया हैरान है । इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
2024 अमेरिकी चुनाव अभियान को कवर कर चुकी और CBS Evening News में प्रोडक्शन टीम का हिस्सा रहींओलिविया रिनाल्डी ने खुद भी क्लिप शेयर करते हुए बताया कि उन्होंने जहाजों पर हमले से जुड़ा सवाल पूछा था, लेकिन जवाब देने के बजाय उन्हें बाहर जाने को कह दिया गया। इस बीच ट्रम्प ने ईरान पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि उसने संघर्षविराम का उल्लंघन किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान नहीं माना, तो उसके बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है।