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छत्तीसगढ़

जग्गी हत्याकांड, 20 साल बाद अमित जोगी को उम्रकैद:हाईकोर्ट बोला- समान साक्ष्य में आरोपी से भेदभाव नहीं होगा, SC में 20 अप्रैल को सुनवाई

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बिलासपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि जब सभी आरोपियों पर एक ही अपराध में शामिल होने का आरोप हो, तो किसी एक आरोपी के साथ जानबूझकर अलग व्यवहार नहीं किया जा सकता।

अदालत ने यह भी कहा कि जब सभी आरोपियों के खिलाफ एक जैसे सबूत हों, तो किसी एक को बरी कर देना और बाकी को उन्हीं सबूतों के आधार पर दोषी ठहराना सही नहीं है, जब तक कि उसे छोड़ने का कोई ठोस और अलग कारण साबित न हो। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविन्द वर्मा की स्पेशल डिविजनल बेंच ने फैसला सुनाया है।

अमित जोगी को IPC की धारा 302 और 120-बी के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद और 1000 रुपए जुर्माने की सजा दी गई। जुर्माना न देने पर 6 महीने अतिरिक्त सजा होगी।

हाईकोर्ट ने अमित जोगी को 3 हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया है। इसके खिलाफ जोगी ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।

विद्याचरण शुक्ल ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बनाया था। (फाइल इमेज)

विद्याचरण शुक्ल ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बनाया था। (फाइल इमेज)

सुप्रीम कोर्ट में 20 को होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट से अमित जोगी को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है, हालांकि कोर्ट ने मामले को सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है और 20 अप्रैल को इसकी सुनवाई होगी। जोगी की ओर से दो आदेशों को चुनौती दी गई है पहला, जिसमें CBI को अपील करने की अनुमति दी गई और दूसरा, हाईकोर्ट का वह फैसला, जिसमें उन्हें हत्या का दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई।

दोनों मामलों को सुप्रीम कोर्ट ने एक साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। प्रारंभिक सुनवाई जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संजीव मेहता की बेंच में हुई। जोगी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा और सिद्धार्थ दवे ने पक्ष रखा।

वकीलों ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने अपने फैसलों में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया और बिना सुनवाई का मौका दिए आदेश पारित कर दिए। सुप्रीम कोर्ट ने जोगी को 20 अप्रैल से पहले अंतिम निर्णय के खिलाफ अपील करने की छूट दी है, ताकि सभी मामलों की एक साथ सुनवाई की जा सके।

जग्गी हत्याकांड के बारे में जानिए

4 जून 2003 को राजधानी रायपुर में एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी।

हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए अमित जोगी को बरी कर दिया था। रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी। जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया।

हाईकोर्ट का आदेश।

हाईकोर्ट का आदेश।

हत्याकांड के दोषियों की अपील खारिज

डिवीजन बेंच ने 2 साल पहले रामावतार जग्गी हत्याकांड के दोषियों की अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें डिवीजन बेंच ने आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा था। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने CBI की अपील स्वीकार करते हुए मामला फिर से छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट भेजने का निर्देश दिया था, जिससे मामले पर विस्तार से सुनवाई हो सके।

हत्याकांड के बाद पुलिस की शुरूआती जांच में पक्षपात और असंतोष के आरोप लगने पर राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंपी थी, तब CBI ने अपनी जांच में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी समेत कई लोगों पर हत्या और साजिश के आरोप लगाए थे।

सतीश जग्गी का आरोप- तत्कालीन राज्य सरकार की प्रायोजित थी हत्या

हाईकोर्ट में अपील पर रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी के अमित जोगी की दोषमुक्ति के खिलाफ पेश क्रिमिनल अपील पर उनके अधिवक्ता बीपी शर्मा ने तर्क दिया था। उन्होंने बताया था कि हत्याकांड की साजिश तत्कालीन राज्य सरकार की ओर से प्रायोजित थी।

जब CBI की जांच शुरू हुई, तब सरकार के प्रभाव में सारे सबूतों को मिटा दिया गया था। ऐसे केस में सबूत अहम नहीं हैं, बल्कि षड्यंत्र का पर्दाफाश जरूरी है। लिहाजा इस केस के आरोपियों को सबूतों के अभाव में दोषमुक्त नहीं किया जा सकता।

कौन थे रामावतार जग्गी

कारोबारी बैकग्राउंड वाले रामावतार जग्गी देश के बड़े नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे, जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ-साथ गए। विद्याचरण ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बना दिया था।

हत्याकांड में 28 लोग पाए गए दोषी

जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत, विश्वनाथ राजभर दोषी पाए गए थे।

2 CSP, थाना प्रभारी समेत अन्य को हुई थी सजा

इस हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाने वालों में 2 तत्कालीन CSP और एक तत्कालीन थाना प्रभारी के अलावा रायपुर मेयर एजाज ढेबर के भाई याहया ढेबर और शूटर चिमन सिंह शामिल हैं।

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कोरबा

कोरबा में एकलव्य आवासीय स्कूल में छात्रों का हंगामा:विधायक-जिला पंचायत अध्यक्ष की गाड़ी रोककर प्रिंसिपल हटाने की मांग, कार्रवाई के दिए निर्देश

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कोरबा। कोरबा के कटघोरा थाना क्षेत्र स्थित शासकीय एकलव्य आवासीय विद्यालय में सोमवार को छात्रों और अभिभावकों का आक्रोश फूट पड़ा। शाला प्रवेश उत्सव से लौट रहे कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल और जिला पंचायत अध्यक्ष की गाड़ी रोककर उन्होंने विद्यालय के प्राचार्य डॉ. अहमद खान को हटाने की मांग की। छात्रों ने भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं और विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर आरोप लगाए।

छात्रों का कहना है कि उन्हें रोजाना घटिया और अस्वच्छ भोजन दिया जाता है। आरोप है कि बरसात के पानी से खाना बनाया जाता है और भोजन में कई बार कीड़े भी निकलते हैं। प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने कथित तौर पर एक्सपायरी डेट वाले दूध के पैकेट और खाद्य सामग्री भी दिखाई, जिनकी तारीखें मिटाई गई थीं।

स्वास्थ्य सुविधाओं पर भी उठाए सवाल

छात्रों ने बताया कि कई बच्चे खाज-खुजली और त्वचा संबंधी बीमारियों से पीड़ित हैं, लेकिन उन्हें समय पर उचित इलाज नहीं मिल रहा। आरोप यह भी लगाया गया कि छात्रों को एक्सपायरी डेट वाली दवाइयां दी जा रही हैं।

अभिभावकों ने भी जताई नाराजगी

अभिभावकों ने प्राचार्य के कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि 240 छात्रों के अभिभावकों को पैरेंट्स मीटिंग के लिए अलग-अलग दिनों में बुलाया जाता है, जिससे उन्हें बार-बार विद्यालय आना पड़ता है। साथ ही छात्रों को बाहर से जरूरत का सामान लाने पर रोक लगाने का भी आरोप लगाया गया।

शिक्षकों की मारपीट का मामला भी उठा

प्रदर्शन के दौरान अभिभावकों ने बताया कि हाल ही में विद्यालय के दो शिक्षकों के बीच हुए विवाद और मारपीट में कुछ छात्र भी घायल हो गए थे। इस मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई जा चुकी है।

विधायक ने दिए जांच के निर्देश

छात्रों और अभिभावकों की शिकायतें सुनने के बाद विधायक प्रेमचंद पटेल ने मौके पर मौजूद सहायक आयुक्त को पूरे मामले की जांच कर सभी समस्याओं का शीघ्र समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि छात्रों की सुविधाओं से किसी भी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : ई-ऑफिस एवं समयबद्ध उपस्थिति में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारी-कर्मचारी सम्मानित

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विभागाध्यक्ष कार्यालयों और जिलों में भी हर माह आयोजित होंगे सम्मान कार्यक्रम- मुख्य सचिव

रायपुर। मुख्य सचिव विकासशील ने आज मंत्रालय महानदी भवन, नवा रायपुर अटल नगर में आयोजित मासिक सम्मान कार्यक्रम में ई-ऑफिस के माध्यम से फाइलों (नस्तियों) के त्वरित एवं प्रभावी निराकरण तथा समयबद्ध उपस्थिति सुनिश्चित करने वाले मंत्रालयीन अधिकारियों एवं कर्मचारियों को जून माह के लिए प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम में मंत्रालय के अधिकारी-कर्मचारी, सभी विभागाध्यक्ष तथा प्रदेश के सभी जिलों के कलेक्टर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए।

जिला व विभागाध्यक्ष स्तर पर सम्मान
   
         मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि मंत्रालय की तर्ज पर विभागाध्यक्ष कार्यालयों एवं जिला स्तर पर भी हर माह उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहित करने के लिए नियमित सम्मान कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। 100% डिजिटल ऑनबोर्डिंग: ई-एचआरएमएस (e-HRMS), स्पैरो (SPARROW) और ई-ऑफिस प्रणालियों में सभी अधिकारी-कर्मचारियों की शत-प्रतिशत ऑनबोर्डिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। ऑनलाइन एसीआर व बायोमेट्रिक उपस्थिति: वर्ष 2025-26 के लिए वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन (ACR) ऑनलाइन भरने और आधार-सक्षम बायोमेट्रिक प्रणाली से उपस्थिति दर्ज कराने को अनिवार्य किया गया है।

राज्य स्तर पर पुरस्कार
 
       अगले माह से ई-ऑफिस में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विभागाध्यक्ष कार्यालय और सर्वश्रेष्ठ जिला कार्यालय को राज्य स्तर पर सम्मानित किया जाएगा। 1 अप्रैल 2026 से 31 जुलाई 2026 तक की अवधि का संचयी आकलन कर स्कोरबोर्ड और जिलों/विभागों की रैंकिंग जारी की जाएगी। 

उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विभाग एवं अधिकारी सम्मानित 

      विभागीय श्रेणी (Top 3) प्रथम लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग, द्वितीय गृह विभाग, तृतीय वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग को सम्मानित किया गया इसी प्रकार अधिकारी श्रेणी में शीर्ष स्थान प्राप्तकर्ता संयुक्त सचिव श्रेणी में भूपेन्द्र कुमार राजपूत (आदिम जाति विकास) – प्रथम, अनुपम त्रिवेदी (अ.जनजाति विकास) – द्वितीय, सच्चिदानंद आलोक (पंचायत एवं ग्रामीण विकास) -तृतीय। उप सचिव श्रेणी में दूरदेशी राम सोन्टापर (वन एवं जलवायु परिवर्तन)-प्रथम, शिव कुमार सिंह (वाणिज्यिक कर) -द्वितीय, किशोर कुमार भूआर्य (सामान्य प्रशासन-1) -तृतीय स्थान पर रहे, जिन्हे सम्मानित किया गया।

          अवर सचिव श्रेणी में पूरन लाल साहू (गृह) -प्रथम, मगन लाल पवार (वाणिज्य एवं उद्योग) -द्वितीय, अरुण कुमार मिश्रा (विधि एवं विधायी कार्य) -तृतीय, अनुभाग अधिकारी श्रेणी में नंद कुमार मेश्राम (सामान्य प्रशासन-1) -प्रथम, शिवकुमार गोंड (पंचायत एवं ग्रामीण विकास) -द्वितीय, वीरेन्द्र कुमार (स्वास्थ्य विभाग) -तृतीय स्थान पर रहे,  विशेष सम्मान सहायक अनुभाग अधिकारी श्रेणी में आलोक जोशी (आई टी विभाग) तथा वरिष्ठ सचिवालय सहायक श्रेणी में सुश्री ललिता राय (चिकित्सा शिक्षा विभाग) को सम्मानित किया गया। कनिष्ठ सचिवालय सहायक में उमेश यादव – प्रथम, प्रभु सिंह राठिया – द्वितीय, सतकुमार भास्कर -तृतीय, कम्प्यूटर ऑपरेटर श्रेणी में अभिषेक दास -प्रथम, श्रीमती माया देवांगन -द्वितीय, अमित हूमाने -तृतीय, इसके अलावा, समयबद्ध कार्यालयीन उपस्थिति के लिए उप सचिव श्रीमती क्लेमेनटिना लकड़ा, अवर सचिव श्रीमती दिव्या वैष्णव सहित 19 अन्य अधिकारियों व कर्मचारियों को भी प्रशंसा पत्र देकर सम्मानित किया गया।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : राज्यपाल डेका से उच्च शिक्षा मंत्री वर्मा ने की सौजन्य भेंट

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रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका से आज लोकभवन में उच्च शिक्षा मंत्री टंक राम वर्मा ने सौजन्य भेंट की।

इस अवसर पर राज्यपाल श्री डेका और उच्च शिक्षा मंत्री श्री वर्मा के बीच प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता को और बेहतर बनाने तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन  पर  चर्चा हुई।

राज्यपाल श्री डेका ने  गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार, विद्यार्थियों के कौशल उन्नयन तथा नवाचार को बढ़ावा देने के संबंध में उच्च शिक्षा मंत्री से चर्चा की। 

इस दौरान प्रदेश के विश्वविद्यालयों की विभिन्न समस्याओं और उनके निराकरण से संबंधित विषयों पर भी चर्चा हुई।

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