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छत्तीसगढ़

रायपुर के आसमान में गरजेंगे एयरफोर्स के जेट:सूर्य किरण एयरोबेटिक टीम के पायलट हवा में दिखाएंगे स्टंट,रक्षा मंत्रालय ने सांसद अग्रवाल को भेजा लेटर

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में लोगों को एयरफोर्स का स्टंट शो देखने को मिलेगा। भारतीय वायुसेना के पायलट हवा में करतब करते दिखाई देंगे। आसमान फाइटर जेट की गूंज से गरजेगा। एयरफोर्स टीम इसके लिए रायपुर में जगह का चुनाव करेगी। सिक्योरिटी बेंचमार्क भी जांचे जाएंगे।

यह आयोजन राज्योत्सव के दौरान किए जाने की तैयारी चल रही है। एयरफोर्स की टीम रायपुर में परफॉर्म करेगी। इसका कंफर्मेशन रक्षा मंत्रालय के एक लेटर से हुआ है। यह चिट्ठी रक्षा मंत्रालय की ओर से रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल को भेजी गई है।

रक्षा मंत्रालय की चिट्ठी में यह बात लिखी है रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कार्यालय से आए पत्र में कहा गया है कि सांसद बृजमोहन अग्रवाल द्वारा किए गए आग्रह पर भारतीय वायुसेना की ‘सूर्य किरण’ टीम को रायपुर में प्रदर्शन के लिए प्रस्तावित समय पर उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए भारतीय वायुसेना की टीम द्वारा निर्धारित अभ्यास और सुरक्षा मानकों का पालन करते हुए संपूर्ण कार्यक्रम आयोजित होगा।

सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि, “छत्तीसगढ़ राज्य का स्थापना दिवस हमारे लिए गर्व और आत्मसम्मान का दिन है। इस दिन राजधानी में भारतीय वायुसेना की सूर्य किरण टीम का प्रदर्शन प्रदेशवासियों के लिए एक अविस्मरणीय क्षण होगा। यह आयोजन युवाओं में राष्ट्रीय चेतना, अनुशासन और देशभक्ति को और मजबूत करेगा। मैं इस ऐतिहासिक निर्णय के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह जी का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं।”

सूर्य किरण एरोबैटिक टीम IAF के जांबाज इंडियन एयरफोर्स (IAF) की सूर्य किरण एरोबेटिक टीम (SKAT) का गठन 1996 में किया गया था और यह दुनिया की नौ-विमान वाली अनूठी एरोबेटिक्स टीमों में से एक है। एशिया में अपने आप में इकलौती ऐसी टीम है। इस अनूठी टीम ने भारत में 500 से अधिक प्रदर्शन किए हैं। इसके अलावा चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर और यूएई में एयर शो में भारतीय वायुसेना की ताकत दिखा चुके हैं।

महिला पायलट भी करती हैं स्टंट।

महिला पायलट भी करती हैं स्टंट।

यूथ को करते हैं इंस्पायर सूर्य किरण एरोबेटिक टीम, SKAT का आदर्श वाक्य “सदैव सर्वोत्तम” है। लाल वर्दी में दिखने वाले एयरफोर्स के पायलट इस शो के जरिए यूथ को इंडियन एयरफोर्स ज्वाइन करने के लिए इंस्पायर करते हैं।

ये जेट भरेगा रायपुर के आसमान से उड़ान।

ये जेट भरेगा रायपुर के आसमान से उड़ान।

ये फाइटर जेट दिखेगा रायपुर में सूर्य किरण टीम जिस जेट के साथ करतब आसमान में दिखाएगी उसका नाम हॉक एमके 132 (Hawk MK 132) है। फिलहाल, ये भारतीय वायुसेना में यंग पायलट की ट्रेनिंग में काम आता है। इसमें पायलट दुश्मन के हवाई इलाकों की निगरानी, जमीनी और नौसैनिक हमले का जवाब देने की ट्रेनिंग लेते हैं। हॉक एमके 132 जेट्स इंडियन नेवी के पास भी हैं जो समुद्री सीमाओं की निगरानी करते हैं। ये जेट ट्रेनिंग के अलावा भारत के एयर डिफेंस में लड़ाकू भूमिका भी निभाते हैं।

9 जेट आकाश में दिखाते हैं हैरतअंगेज करतब।

9 जेट आकाश में दिखाते हैं हैरतअंगेज करतब।

हॉक एमके 132 भारतीय वायुसेना में इसे 23 फरवरी 2008 को शामिल किया गया था। इसे ब्रिटिश कंपनी बीएई सिस्टम्स (BAE Systems) ने बनाया है। हॉक एमके 132 (Hawk MK 132) की फ्लीट कर्नाटक के बिदर एयरफोर्स स्टेशन में तैनात है।

हॉक एमके 132 (Hawk MK 132) ऐसा ट्रेनिंग फाइटर जेट है, जिसका उपयोग दुनिया के 14 देश कर रहे हैं। इस फाइटर जेट में दो क्रू बैठते हैं। एक ट्रेनी फाइटर पायलट और दूसरा इंस्ट्रक्टर। इसकी लंबाई 40.9 फीट है. विंगस्पैन 32.7 फीट हैं. ऊंचाई 13.1 फीट है. इसका वजन 4480 किलोग्राम है। पूरी तैयारी के साथ यह 9100 किलोग्राम वजन लेकर उड़ सकता है। हॉक एमके 132 (Hawk MK 132) में मशहूर कार निर्माता कंपनी रोल्स रॉयस का टर्बोमेका अडोर एमके 951 टर्बोफैन इंजन लगा है।

हॉक एमके 132 (Hawk MK 132) जेट को पायलट को ट्रेनिंग देने में भी इस्तेमाल किया जाता है।

हॉक एमके 132 (Hawk MK 132) जेट को पायलट को ट्रेनिंग देने में भी इस्तेमाल किया जाता है।

हॉक एमके 132 (Hawk MK 132) की अधिकतम गति 1028 किलोमीटर प्रतिघंटा है। यह एक बार में 2520 किलोमीटर तक उड़ना भर सकता है। अधिकतम 13,565 फीट की ऊंचाई तक जा सकता है। ऊंचाई पर जाने की इसकी गति 9300 फीट प्रति सेकेंड है।

2009 में रायपुर आ चुकी है टीम इससे पहले रायपुर में ही ऐसा एयर शो आयोजित किया जा चुका है। 2009 में 7 से 8 नवंबर में राज्योत्सव को ही ध्यान में रखकर एयर शो किया गया था। तब रायपुर के बूढ़ातालाब पर इन जेट्स ने उड़ान भरी थी और पूरे शहर ने शानदार करतब देखे थे।

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छत्तीसगढ़

सुकमा : मरीज को मिला समय पर उपचार, सुकमा के चिकित्सकों की टीम ने दिखाई तत्परता

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जिला अस्पताल में मौत के मुंह से लौटाई महिला की सांसें

सुकमा। सुकमा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा की तत्परता और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है। सिविल सर्जन डॉ. एमआर कश्यप से प्राप्त जानकारी के अनुसार छिंदगढ़ विकासखंड के कुन्ना निवासी 38 वर्षीय श्रीमती पाली कवासी को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल सुकमा में भर्ती कराया गया।

देरी से अस्पताल पहुंचने के कारण स्थिति अत्यंत जोखिमपूर्ण थी और तत्काल सर्जरी आवश्यक हो गई। अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुजा ने बिना समय गंवाए तुरंत एलएससीएस (सीजर) ऑपरेशन कर मरीज का उपचार प्रारंभ किया। हालांकि ऑपरेशन के दौरान मृत बच्चा पैदा होने से महिला की स्थिति और अधिक जटिल हो गई। 

महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और रेफर करने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान महिला का श्वास बंद सा हो गया, साथ ही नाड़ी और हृदय की धड़कन भी थम सी गई। ऐसे संकट की घड़ी में जिला अस्पताल की मेडिकल टीम ने त्वरित निर्णय लेते हुए महिला को दो बार सीपीआर दिया और तत्काल वार्ड में शिफ्ट कर आधुनिक वेंटीलेटर की सहायता से उपचार शुरू किया गया। इसके बाद महिला को दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया।

 डॉक्टरों की सतर्कता और उपलब्ध संसाधनों के कारण महिला की जान बचा ली गई। आज श्रीमती पाली कवासी पूरी तरह स्वस्थ हैं और जिला अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ के प्रयासों की सराहना कर रही हैं।

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जशपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर के मातृत्व वन में किया सीता अशोक के पौधे का रोपण

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जशपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने  सर्किट हाउस जशपुर के मातृत्व वन में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत सीता अशोक के पौधे का रोपण कर पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया।

इस अवसर पर कलेक्टर रोहित व्यास वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार और वनमंडला अधिकारी शशि कुमार और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस मातृत्व वन में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं के अद्वितीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मातृत्व वन में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधरोपण किया गया है। इस पहल ने अभियान को भावनात्मक और सामाजिक रूप से विशेष महत्व प्रदान किया है।

राज्यपाल रमेन डेका ने इस अवसर पर  कहा कि माँ हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती हैं और उनका स्थान सर्वोच्च होता है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से हम माँ के प्रति सम्मान को प्रकृति से जोड़ रहे हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि मातृत्व वन जैसी पहल न केवल हरित क्षेत्र बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव भी विकसित करेंगी।

मातृत्व वन के अंतर्गत पर्यावरणीय एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का चयन कर उनका रोपण किया गया है। इनमें टिकोमा, झारुल, सीता अशोक, गुलमोहर, लक्ष्मीतरु, आंवला, बीजा, सिन्दूर, नागकेसरी, अर्जुन एवं जामुन जैसी प्रजातियाँ प्रमुख हैं। ये पौधे न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाले समय में औषधीय एवं जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मातृत्व वन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, माताओं के प्रति सम्मान को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त करना तथा नई पीढ़ी में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यह पहल ‘हर घर एक पेड़, हर पेड़ में माँ की ममता’ के संदेश को साकार करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

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जशपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर के केरेगांव होम-स्टे का किया अवलोकन

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राज्यपाल श्री रमेन डेका ने जशपुर के केरेगांव होम-स्टे का किया अवलोकन

जशपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर प्रवास के दौरान शनिवार को जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल देशदेखा के समीप स्थित केरेगांव में विकसित होम-स्टे का अवलोकन किया। इस दौरान वे स्थानीय आदिवासी संस्कृति, जनजीवन और पारंपरिक आतिथ्य परंपरा से रूबरू हुए। होम-स्टे प्रवास के दौरान उन्होंने देशदेखा समूह की महिलाओं द्वारा पारंपरिक विधि से तैयार किए गए व्यंजनों का स्वाद चखा। राज्यपाल श्री  डेका ने ग्रामीण परिवेश में विकसित होम-स्टे को प्रेरणादायक कदम बताया और कहा कि यह प्रयास न केवल ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाते हैं। 

 इस दौरान स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने ‘जसक्राफ्ट’ ब्रांड के तहत छिंद एवं कांसा से निर्मित पारंपरिक आभूषण माला एवं झुमके राज्यपाल को भेंट किए। राज्यपाल श्री डेका ने स्थानीय महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल कौशल विकास, रोजगार सृजन तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगी।

इस दौरान ‘देशदेखा क्लाइंबिंग कम्पनी’ के सदस्यों ने भी राज्यपाल से भेंट की। उन्होंने क्षेत्र में एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि यहां नियमित रूप से रॉक क्लाइंबिंग जैसे खेलों का आयोजन किया जाता है। राज्यपाल ने अधिकारियों को ऐसे खेलों को निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन देने को कहा, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले और अधिक से अधिक युवा इन गतिविधियों की ओर आकर्षित हों। इस दौरान कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार,वनमंडलाधिकारी शशि कुमार  सहित अन्य अधिकारीगण एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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