देश
जिंदल स्टेनलेस का दूसरी तिमाही में शुद्ध लाभ 32% बढ़कर 808 करोड़ रुपए
नई दिल्ली,एजेंसी। जिंदल स्टेनलेस लिमिटेड का चालू वित्त वर्ष 2025-26 की दूसरी तिमाही में एकीकृत शुद्ध लाभ 32 प्रतिशत बढ़कर 808 करोड़ रुपए हो गया। कंपनी ने बयान में कहा कि पिछले वित्त वर्ष 2024-25 की दूसरी (जुलाई-सितंबर) तिमाही में उसका शुद्ध लाभ 609 करोड़ रुपए था। बयान के अनुसार, समीक्षाधीन तिमाही में कंपनी की कुल आय 12 प्रतिशत बढ़कर 10,982.46 करोड़ रुपए रही जो एक साल पहले की समान अवधि में 9,823.88 करोड़ रुपए थी। बिक्री मात्रा भी 15 प्रतिशत बढ़कर 6,48,050 टन हो गई, जबकि पिछले वर्ष की समान अवधि में यह 5,64,627 टन थी।
कंपनी ने कहा कि समीक्षाधीन तिमाही में औद्योगिक पाइप व ट्यूब, लिफ्ट व एलिवेटर, मेट्रो, रेल के डिब्बे और पहिये जैसे प्रमुख खंडों में लगातार मजबूत मांग रही। घरेलू उपकरणों के क्षेत्र में भी त्योहारों के दौरान मांग से बिक्री में सुधार देखा गया। जिंदल स्टेनलेस के प्रबंध निदेशक अभ्युदय जिंदल ने मीडिया के साथ ऑनलाइन बातचीत में कहा, “हमने प्रतिस्पर्धी मूल्य निर्धारण एवं बेहतर सेवाओं के माध्यम से बाजार हिस्सेदारी को बरकरार रखा हालांकि प्रतिकूल परिस्थितियां बनी रहीं।” उन्होंने कहा कि चीन और वियतनाम से आयात लगातार बढ़ रहा है जिससे भारतीय उत्पादकों, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के लिए समान अवसरों वाला माहौल प्रभावित हो रहा है।
जिंदल ने कहा, “गुणवत्ता नियंत्रण आदेशों (क्यूसीओ) का अस्थायी निलंबन पूरे घरेलू उद्योग के लिए चिंताजनक एवं निराशाजनक है। मौजूदा भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच निम्न गुणवत्ता वाले सस्ते आयात की आमद और बढ़ने की आशंका है।” कंपनी ने इस तिमाही के दौरान बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए उच्च क्षमता वाले ‘स्टेनलेस स्टील रिबार’ विकसित किए। रक्षा क्षेत्र में कंपनी की इकाई जिंदल डिफेंस एंड एयरोस्पेस (जेडीए) को एलएंडटी से ‘एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल’ (एटीजीएम) लॉन्चर प्रणाली के लिए उच्च क्षमता वाली ‘नाइट्रोजन स्टील प्लेट’ की आपूर्ति का ऑर्डर मिला। देश की अग्रणी स्टेनलेस स्टील विनिर्माता कंपनी जिंदल स्टेनलेस का वित्त वर्ष 2024-25 में वार्षिक कारोबार 40,182 करोड़ रुपए (4.75 अरब अमेरिकी डॉलर) रहा था। अब कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाकर वित्त वर्ष 2026-27 तक 42 लाख टन सालाना ‘मेल्ट’ क्षमता हासिल करने की दिशा में काम कर रही है।
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चांदी लाइफ टाइम हाई से रू.2.10 लाख सस्ती- सोना रू.53,700 सस्ता…
मुंबई, एजेंसी। सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। बीते हफ्ते सर्राफा बाजार में सोने-चांदी की कीमतों में काफी उथल-पुथल देखने को मिली। जिसका असर कमोडिटी मार्केट (MCX) और घरेलू बाजार दोनों जगह पर दिखा। सोना-चांदी अपने ऑल-टाइम हाई से काफी नीचे गिर गए। आइए जानते हैं कि इस गिरावट के बाद अब 10 ग्राम सोने और 1 किलोग्राम चांदी का नया प्राइस क्या है।

चांदी का भाव: ऑल-टाइम हाई से रू.2.10 लाख से ज्यादा की बड़ी गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर चांदी की कीमतों में रिकॉर्ड तोड़ गिरावट दर्ज की गई है। चांदी का भाव अब अपने All Time High से केवल आधा रह गया है। जनवरी महीने की बात करें तो चांदी ने इतिहास रचते हुए रू.4,57,328 प्रति किलोग्राम का स्तर छुआ था। लेकिन अब यह अपने इस All Time High से रू.2,10,724 प्रति किलो सस्ती हो चुकी है। दरअसल, 5 जून को चांदी का भाव रू.2,48,537 पर था, जो बीते शुक्रवार को रू.2,46,604 प्रति किलो पर बंद हुआ। यानी एक हफ्ते में यह 1,933 रुपए सस्ती हुई।
कैलकुलेशन
रू.4,57,328 – रू.2,46,604 = रू.2,10,724 सस्ता
सोने लाइफ टाइम हाई से रू.53,700 सस्ता
5 जून को 24 कैरेट सोना रू.1,55,594 प्रति 10 ग्राम पर था, जो शुक्रवार को बंद होते-होते रू.1,50,675 पर आ गया। यानी सिर्फ 5 दिनों में सोना रू.4,919 सस्ता हो गया।
लाइफ टाइम हाई की बात करें तो जनवरी में सोने ने रू.2,04,375 प्रति 10 ग्राम का रिकॉर्ड हाई बनाया था, जिससे यह अब रू.53,700 कम कीमत पर मिल रहा है। दरअसल, जून महीने में भी सोने की कीमतों में तेज गिरावट देखने को मिली है। 29 मई को MCX पर सोना 1,60,911 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ था, जबकि 12 जून तक इसका भाव घटकर 1,50,675 रुपये रह गया। यानी महज 10 कारोबारी दिनों में सोने की कीमत में 10,236 रुपये प्रति 10 ग्राम की कमी दर्ज की गई है।
कैलकुलेशन
रू.2,04,375 – रू.1,50,675 = रू.53,700 सस्ता
घरेलू बाजार में क्या हैं दाम?
IBJA के मुताबिक, 5 जून को 24 कैरेट सोने की कीमत 1,54,238 रुपये प्रति 10 ग्राम थी। वहीं, शुक्रवार को कारोबार बंद होने तक इसका भाव घटकर 1,47,800 रुपये प्रति 10 ग्राम रह गया। इस तरह एक सप्ताह के भीतर सोना 6,438 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो गया।
चांदी की कीमतों में भी गिरावट देखने को मिली है। 5 जून को चांदी का भाव 2,56,908 रुपये प्रति किलोग्राम था, जो अब घटकर 2,42,295 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गया है। यानी एक सप्ताह में चांदी की कीमत 14,513 रुपये प्रति किलो कम हुई है।
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Citroen Cars Discount : कार खरीदने का शानदार मौका! Citroen ने इन गाड़ियों पर किया डिस्काउंट का ऐलान
मुंबई, एजेंसी। Citroen ने अपने ग्राहकों के लिए चुनिंगा गाड़ियों पर डिस्काउंट का ऐलान किया है। ये डिस्काउंट मॉडल के आधार पर दिए जाएंगे और ग्राहक इसका फायदा 30 जून तक उठा सकते हैं। डिटेल में जानते हैं इन डिस्काउंट के बारे में-

Citroen Basalt
Basalt कूप-SUV पर इस महीने 1.4 लाख रुपये तक का डिस्काउंट मिल रहा है। इसमें 82hp, 115Nm वाला 1.2-लीटर नैचुरली एस्पिरेटेड (NA) पेट्रोल इंजन या 110hp, 190Nm वाला 1.2-लीटर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन मिलता है। NA इंजन के साथ 5-स्पीड मैनुअल ट्रांसमिशन मिलता है, जबकि टर्बो-पेट्रोल इंजन 6-स्पीड मैनुअल या 6-स्पीड ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ आता है। ऑटोमैटिक गियरबॉक्स के साथ, टर्बो-पेट्रोल इंजन 205Nm का ज़्यादा टॉर्क देता है। मार्केट में इसकी कीमत 8.55 लाख रुपये से 13.75 लाख रुपये की के बीच है।

Citroen Aircross
Citroen Aircross पर कंपनी इस महीने 1.4 लाख रुपये तक का डिस्काउंट दे रही है। अपने सेगमेंट में यह एकमात्र 7 सीटर एसयूवी है। इसकी कीमत 8.89 लाख रुपये से 13.99 लाख रुपये तक जाती है।
Citroen C3
Citroen C3 की खरीदी करने पर आप 1.1 लाख रुपए तक की बचत कर सकते हैं। इसकी कीमत 4.99 लाख रुपये से 9.60 लाख रुपये के बीच की है।
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Tata के iPhone प्लांट पर पर्यावरण नियमों के उल्लंघन का आरोप, बंद हो सकती है फैक्ट्री
मुंबई, एजेंसी। भारत में iPhone निर्माण से जुड़े एक प्रमुख संयंत्र को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। तमिलनाडु के होसुर स्थित टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के प्लांट पर आसपास की कृषि भूमि और भूजल को प्रदूषित करने के आरोप लगे हैं। मामले की जांच के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कंपनी से जवाब मांगा है और संतोषजनक स्पष्टीकरण न मिलने पर फैक्ट्री बंद करने तक की चेतावनी दी है।
यह प्लांट Apple के iPhone के लिए बैक पैनल और अन्य महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण करता है। पिछले कई महीनों से प्लांट के आसपास के किसानों ने शिकायत की थी कि फैक्ट्री से निकलने वाला अपशिष्ट जल के कारण उनकी खेती और जल स्रोत को प्रभावित कर रहा है। किसानों की शिकायत के बाद राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जांच शुरू की और अब मामला गंभीर रूप ले चुका है।

जांच के दौरान बोर्ड ने नोटिस में कहा कि फैक्ट्री परिसर के एक तालाब से निकला पानी आसपास के कृषि क्षेत्रों तक पहुंचा, जिससे भूजल प्रदूषण की आशंका पैदा हुई। बोर्ड ने यह भी आरोप लगाया कि दिसंबर 2025 में जारी निर्देशों के बावजूद कंपनी ने जरूरी सुधारात्मक कदम नहीं उठाए। इसी वजह से मई में जारी नोटिस में पूछा गया कि आखिर क्यों न यूनिट की बिजली आपूर्ति काट दी जाए और संचालन बंद कर दिया जाए। यह चेतावनी टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए बड़ी चुनौती बनकर सामने आई है।
टाटा ने आरोपों को किया खारिज
वहीं, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने इन सभी आरोपों को खारिज किया है। कंपनी का कहना है कि उसने एक मान्यता प्राप्त स्वतंत्र प्रयोगशाला द्वारा कराई गई जांच में संयंत्र को सभी पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप पाया गया है। कंपनी ने दावा किया है कि वह पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है तथा प्रदूषण नियंत्रण अधिकारियों को अपना जवाब सौंप चुकी है।
पर्यावरण और उद्योग के बीच संतुलन की चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। एक तरफ भारत वैश्विक कंपनियों के लिए उत्पादन केंद्र बनने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय समुदायों और किसानों की चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अब सभी की नजर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स के बीच होने वाली आगे की कार्रवाई पर टिकी है।
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