बीजापुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बीजापुर में पत्रकार की हत्या कर दी गई। रिपोर्टर मुकेश चंद्राकर की लाश रिश्तेदार के बैडमिंटन कोर्ट कैंपस में बने सेप्टिक टैंक में मिली है। लाश क छिपाने के बाद टैंक को 4 इंच कंक्रीट से ढलाई कर पैक कर दिया गया था।
शनिवार को मुकेश चंद्राकर का अंतिम संस्कार किया गया। जांच में पता चला कि, मुकेश चंद्राकर का पहले गला घोंटा गया। बाद में सिर पर कुल्हाड़ी मारी। इस हमले से मुकेश के सिर पर ढाई इंच गड्ढा हो गया। पुलिस ने 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। रिश्तेदार सुरेश चंद्राकर के ठिकाने पर बुलडोजर भी चलाया गया है।
बीजापुर में हुई इस हत्या के बाद पत्रकारों में आक्रोश है। उन्होंने बीजापुर नेशनल हाइवे-63 पर 4 घंटे तक चक्काजाम किया। वहीं, रायपुर में भी धरना प्रदर्शन किया गया। पत्रकारों ने आरोपियों को फांसी देने की मांग की है। प्रियंका गांधी ने भी सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर सोशल मीडिया में पोस्ट किया है।
सुरेश चंद्राकर के 3 बैंक अकाउंट फ्रीज
बस्तर IG सुंदरराज पी ने कहा कि, रितेश चंद्राकर और महेंद्र रामटेके घटना के मुख्य आरोपी हैं। वहीं सुरेश चंद्राकर को भी आरोपी बनाया गया है। उन्होंने कहा कि सुरेश चंद्राकर के 3 बैंक अकाउंट को फ्रीज कर दिया गया है। वहीं शनिवार को पत्रकार मुकेश चंद्राकर हत्याकांड के आरोपी के ठिकाने पर बुलडोजर भी चलाया गया है।
मुकेश चंद्राकर हत्याकांड के आरोपी सुरेश चंद्राकर के ठिकाने पर बुलडोजर चलाया गया।
बीजापुर में पत्रकार मुकेश चंद्राकर की अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
रायपुर प्रेस क्लब में पत्रकारों ने बीजापुर के पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या के विरोध में धरना प्रदर्शन किया। साथ ही पत्रकारिता बचाओ, लोकतंत्र बचाओ के बैनर के साथ प्रदर्शन किया। प्रेस क्लब से राजभवन तक पैदल मार्च कर राज्यपाल को ज्ञापन सौंपेंगे।
रायपुर के जय स्तंभ चौक पर पत्रकार मुकेश को श्रद्धांजलि दी गई। हत्यारों को फांसी देने की मांग की गई। साथ ही रायपुर प्रेस क्लब ने हत्या की निंदा कड़ी की।
कांकेर में पत्रकारों ने रैली निकालकर कहा कि पत्रकारिता बचाओ..लोकतंत्र बचाओ। मुकेश चंद्राकर को श्रद्धांजलि दी।
शनिवार को पत्रकारों ने हत्या के विरोध में नेशनल हाईवे-63 पर चक्का जाम किया।
अब जानिए क्या है पूरा मामला ?
दरअसल, 1 जनवरी 2025 को शाम 7 बजे से मुकेश चंद्राकर घर से लापता हुए थे। अगले दिन 2 जनवरी को उनके भाई युकेश चंद्राकर ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। शिकायत के बाद पुलिस लगातार मुकेश के फोन को ट्रेस कर रही थी। फोन बंद होने की वजह से अंतिम लोकेशन घर के आस-पास का ही दिखा रहा था।
CCTV फुटेज भी खंगाले गए, जिसमें अंतिम बार मुकेश टी-शर्ट और शॉर्ट्स में दिखे। वहीं पत्रकारों ने भी अलग-अलग जगह पता किया। Gmail लोकेशन के माध्यम से लोकेशन ट्रेस किया गया, जिसमें मुकेश का अंतिम लोकेशन बीजापुर जिला मुख्यालय के चट्टानपारा में होना पाया गया।
छत्तीसगढ़ के बीजापुर में पत्रकार को मारकर सेप्टिक टैंक में डाल दिया गया। मर्डर से पत्रकारों में आक्रोश का माहौल है।
ठेकेदार सुरेश चंद्राकर के कोर्ट परिसर पहुंची पुलिस
यहीं पर मुकेश के रिश्तेदार (भाई) और ठेकेदार सुरेश चंद्राकर, रितेश चंद्राकर का बैडमिंटन कोर्ट परिसर है। मुकेश के सगे भाई यूकेश समेत अन्य पत्रकारों ने इसकी जानकारी बीजापुर जिले के SP जितेंद्र यादव और बस्तर के IG सुंदरराज पी को दी। पुलिस की टीम को भी उस इलाके में पहुंची।
रिश्तेदार (भाई) के बैडमिंटन कोर्ट परिसर में स्थित सेप्टिक टैंक में मिली मुकेश की लाश।
टैंक पर कंक्रीट का मोटा स्लैब डाला
इस दौरान कुछ पत्रकारों की नजर सेप्टिक टैंक पर गई। टैंक पर कंक्रीट का मोटा स्लैब डाला गया था, लेकिन उसमें एक भी चेंबर नहीं रखा था। अमूमन टैंक की सफाई के लिए एक हिस्से में चैंबर बनाया जाता है। यहां टैंक पूरी तरह से जब पैक दिखा तो शक हुआ।
पुलिस से टैंक तोड़वाने की मांग की गई। टैंक तोड़ते ही पानी में मुकेश की लाश मिली। शव को बाहर निकाला गया और पोस्टमॉर्टम के लिए शव को अस्पताल भिजवाया गया।
पत्रकार मुकेश की लाश को निकालने के लिए पुलिस और फोरेंसिक की टीम मौके पर पहुंची थी।
संदेह के दायरे में ठेकेदार सुरेश चंद्राकर
हत्याकांड में पुलिस के संदेह के दायरे में ठेकेदार सुरेश चंद्राकर और सुरेश के भाई रितेश चंद्राकर हैं। कुछ दिन पहले मुकेश ने करीब 120 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाली सड़क की खस्ता हाल की खबर बनाई थी।
बताया जा रहा है कि, यह काम सुरेश चंद्राकर का ही था, जिसके बाद से इनके बीच कुछ विवाद भी हुआ था। फिलहाल, पुलिस इस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद ही हत्यारे और हत्या की वजह स्पष्ट हो पाएगी।
पत्रकारों ने Gmail लोकेशन के माध्यम से मुकेश का लोकेशन ट्रेस किया था।
इसी सेप्टिक टैंक में शव को डाला गया था। ऊपर से ढलाई की गई थी।
सीएम साय ने जताया दुख
सीएम विष्णुदेव साय ने पत्रकार मुकेश की हत्या पर शोक जताया है। उन्होंने एक्स पर लिखा बीजापुर के युवा और समर्पित पत्रकार मुकेश चंद्राकर की हत्या का समाचार अत्यंत दु:खद और हृदयविदारक है। मुकेश जी का जाना पत्रकारिता जगत और समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
इस घटना के अपराधी को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। अपराधियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा देने के निर्देश हमने दिए हैं।
सरकार को आर्थिक सहायता, नौकरी पर भी निर्णय लेना चाहिए- भूपेश
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने फेसबुक पर लिखा कि, मुझे आज भी वो दिन याद है, जब नक्सलियों के कब्जे से कोबरा बटालियन के जवान राकेश्वर सिंह मन्हास को नक्सलियों के चंगुल से रिहा कराने वाली मध्यस्थ टीम मुख्यमंत्री निवास रायपुर में मुझसे भेंट करने आई थी।
साहसी पत्रकार मुकेश चंद्राकर उस मध्यस्थ टीम के प्रमुख सदस्य थे। उनके साहस के लिए मैंने उनकी पीठ थपथपाई थी। मुकेश के साथ जो हुआ है, वो बेहद दुर्भाग्यजनक है। सिर्फ शब्दों से निंदा कर देने से क्षति और असुरक्षा का समाधान नहीं हो सकता। ना ही इस विषय पर कोई राजनीतिक टिप्पणी करना चाहूंगा।
सरकार से अनुरोध है कि त्वरित जांच हो, दोषियों पर कार्रवाई हो और ऐसी नज़ीर पेश हो कि अपराधियों में संदेश जाए। साथ ही मुकेश के परिवार का ध्यान रखने के लिए सरकार को आर्थिक सहायता, नौकरी पर भी निर्णय लेना चाहिए। साहसी पत्रकार मुकेश चंद्राकर को हम सब छत्तीसगढ़वासियों की विनम्र श्रद्धांजलि। ईश्वर उनके परिवार को हिम्मत दे। ॐ शांति:
भूपेश बघेल ने अरुण साव को घेरा
भूपेश बघेल ने X पर पोस्ट किया है। उन्होंने लिखा कि मैंने सोचा था कि मुकेश चंद्राकर के मामले में न्याय मिलने तक इस पर राजनीतिक बयानबाजी नहीं होनी चाहिए, लेकिन भाजपा नेताओं के हद से अधिक गिर जाने पर मुझे कहना पड़ेगा कि प्रदेश के उपमुख्यमंत्री अरुण साव, जिनके पास ही PWD भी है।
बघेल ने लिखा अरुण साव इतने ताकतवर हो गए हैं कि उनके PWD में हुए बड़े सड़क घोटाले को जब पत्रकार मुकेश चंद्राकर ने उजागर किया तो उन्हें मौत के घाट उतार दिया गया।
इसी PWD विभाग में जब आचार संहिता के दौरान पुल निर्माण का मामला विधानसभा में वरिष्ठ कांग्रेस विधायक कवासी लखमा ने उठाया तो 10 दिन बाद उनके घर ED भेज दी गई। सत्य यही है और साबित भी हो रहा है कि अब तो यह स्पष्ट है, अरुण साव भ्रष्ट है।
बैज बोले- BJP सरकार में पत्रकार भी सुरक्षित नहीं
हत्या की खबर मिलते ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने अपना बयान जारी किया था। उन्होंने कहा कि, भाजपा की सरकार में पत्रकार सुरक्षित नहीं हैं। प्रदेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था अब असहनीय हो चुकी है। राजधानी से शुरू हुआ हत्याओं का खौफनाक मंजर अब बस्तर तक पहुंच चुका है। एक पत्रकार की हत्या हो गई है।
BJP ने बैज के साथ वाली जारी की संदिग्ध की तस्वीर
X पर BJP छत्तीसगढ़ के पेज से कुछ तस्वीरें भी पोस्ट की गई है। भाजपा ने लिखा कि, कांट्रेक्टर है या कांग्रेसी कॉन्ट्रैक्ट किलर ? मुकेश की हत्या का मुख्य आरोपी सुरेश चंद्राकर की PCC चीफ दीपक बैज से घनिष्ठता जगजाहिर है। बैज ने ही उसे SC मोर्चा के प्रदेश सचिव के पद से नवाजा है।
X पर BJP छत्तीसगढ़ के पेज पर तस्वीरें भी पोस्ट की गई है, जिसमें बैज के साथ ठेकेदार को दिखाया गया है।
क्या है पूरा मामला
बता दें कि, 120 करोड़ की लागत से नेलशनार, कुडोली, मिरतुर की सड़क बनी है। करीब 5 से 6 दिन पहले मुकेश ने रायपुर से आए अपने एक साथी के साथ मिलकर भ्रष्टाचार का मामला उजागर किया था। इसी बात से ठेकेदार और उसके परिवार के सदस्य इनसे खफा थे। इनसे बार-बार कॉन्टैक्ट करने की कोशिश कर रहे थे।
SP बोले- जांच जारी
इस मामले को लेकर बीजापुर SP जितेंद्र यादव ने कहा कि, हत्या के संबंध में हमारी जांच जारी है। जल्द ही मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
मंत्री केदार कश्यप ने दिवंगत पत्रकार मुकेश चंद्राकर को श्रद्धांजलि दी।
मंत्री केदार कश्यप ने मुकेश चंद्राकर को श्रद्धांजलि दी
कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने सुबह बीजापुर पहुंचकर दिवंगत पत्रकार मुकेश चंद्राकर को श्रद्धांजलि दी। उनके परिजनों को ढांढस बंधाया। पत्रकार मुकेश चंद्रकार की हत्या से मन व्यथित है। भारी मन से उनके परिवार से मिलकर ढांढस बंधाया। सरकार मुकेश के परिवार के साथ खड़ी है। आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा।
बिलासपुर में पत्रकार के हत्यारे को CBI भी नहीं ढूंढ पाई
बिलासपुर के वरिष्ठ पत्रकार सुशील पाठक की अज्ञात हमलावरों ने 19 दिसंबर 2010 की रात गोली मारकर हत्या कर दी थी। पहले पुलिस ने इस केस को दबाने के लिए बादल खान नाम के युवक को गिरफ्तार किया।
इसके बाद जब विरोध-प्रदर्शन हुआ तो तत्कालीन एसपी जयंत थोरात को हटा दिया गया। एक साल तक पुलिस इस मामले की जांच करती रही, लेकिन आरोपियों का सुराग नहीं मिला। इसके बाद CBI से जांच कराई गई, लेकिन CBI भी हत्यारों को पकड़ नहीं पाई और क्लोजर रिपोर्ट पेश कर दी गई।
कोरबा निवासी 02 लोगों के विरुद्ध म्यूल अकाउंट के मामले में पुलिस की कार्रवाई
कोरबा पुलिस की अपील—अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम एवं मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें
कोरबा। पुलिस अधीक्षक जिला कोरबा सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटेल एवं साइबर नोडल अधिकारी नितेश ठाकुर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कटघोरा के मार्गदर्शन में साइबर थाना प्रभारी ललित कुमार चंद्रा के नेतृत्व में म्यूल अकाउंट के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है।
भारत सरकार के गृह मंत्रालय से म्यूल अकाउंट (Mule Account) के संबंध में प्राप्त निर्देशों के पालन में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा ऐसे बैंक खातों के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है, जिनका उपयोग साइबर अपराधों में किए जाने की आशंका है।
इसी क्रम में साइबर पुलिस थाना कोरबा द्वारा अलग अलग बैंक खातों के संबंध में अपराध पंजीबद्ध कर धारा 317(2), 318(4) बीएनएस के तहत विवेचना में लिया गया। विवेचना के दौरान दो अलग अलग अपराधों में दो खाताधारकों को अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई।
पूछताछ में खाता धारक महेंद्र कुमार धीवर निवासी मानस नगर, कोरबा एवं के प्रभाकर राव निवासी कृष्ण नगर कोरबा द्वारा अपने बैंक खातों को लाभ कमाने के उद्देश्य से अन्य व्यक्तियों को कमीशन के बदले उपयोग हेतु दिए जाने की बात सामने आई। बाद में उन्हें जानकारी हुई कि संबंधित बैंक खाते होल्ड हो गए हैं।
प्रकरण में उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर दोनों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई है। प्रकरण की विवेचना वर्तमान में जारी है।
म्यूल अकाउंट के विरुद्ध कोरबा पुलिस की कार्रवाई
साइबर अपराधियों द्वारा आम नागरिकों को कमीशन अथवा आसान कमाई का लालच देकर उनके नाम से बैंक खाते खुलवाकर अथवा पहले से संचालित बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराध से प्राप्त राशि के लेन-देन के लिए किया जाता है। ऐसे बैंक खातों को म्यूल अकाउंट (Mule Account) कहा जाता है।
साइबर अपराध में प्रयुक्त ऐसे खातों की पहचान कर उनके विरुद्ध कार्रवाई की जा रही है। बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग के लिए उपलब्ध कराने वाले खाताधारक भी साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं।
कोरबा पुलिस की आम नागरिकों से अपील
साइबर अपराधी लोगों को कमीशन अथवा अन्य प्रकार के लाभ का लालच देकर उनके बैंक खाते, एटीएम कार्ड, मोबाइल नंबर अथवा सिम का उपयोग साइबर अपराधों में कर सकते हैं। अतः नागरिक निम्न सावधानियां बरतें—
अपना बैंक खाता किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग हेतु न दें।
अपना एटीएम/डेबिट कार्ड, पासबुक, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी को न दें।
अपना मोबाइल नंबर अथवा सिम कार्ड किसी अन्य व्यक्ति को उपयोग करने के लिए न दें।
किसी व्यक्ति द्वारा कमीशन या आसान कमाई का लालच देकर बैंक खाता उपलब्ध कराने की बात कही जाए तो सतर्क रहें।
अपने बैंक खाते में होने वाले लेन-देन की नियमित रूप से जानकारी रखें।
किसी संदिग्ध लेन-देन की जानकारी मिलने पर तत्काल अपने बैंक एवं पुलिस को सूचित करें।
किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर अपने खाते में राशि प्राप्त कर उसे दूसरे खाते में ट्रांसफर अथवा नकद निकालकर न दें।
कोरबा पुलिस नागरिकों से अपील करती है कि थोड़े से आर्थिक लाभ के लालच में अपना बैंक खाता, एटीएम, सिम अथवा मोबाइल नंबर किसी अन्य व्यक्ति को देकर स्वयं को साइबर अपराध की विवेचना एवं कानूनी कार्रवाई का हिस्सा न बनाएं।
SECL मानिकपुर जनसुनवाई रद्द करने की मांग:ग्रामीणों ने प्रक्रिया को फर्जी बताया,भू-विस्थापित बोले- पहले पुराने वादे पूरे करो,नहीं तो 3 हजार ग्रामीण करेंगे विरोध
कोरबा। SECL मानिकपुर ओपन कास्ट खदान विस्तार परियोजना को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है। भू-विस्थापित संगठन मानिकपुर ने 21 अगस्त को प्रस्तावित पर्यावरण जनसुनवाई को रद्द करने की मांग की है।
संगठन ने जनसुनवाई की प्रक्रिया को फर्जी बताते हुए चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो 8 प्रभावित गांवों के करीब 2 से 3 हजार महिला-पुरुष ग्रामीण मौके पर पहुंचकर इसका उग्र विरोध करेंगे।
200-250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप
250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि दशकों पहले खदान के लिए अपनी उपजाऊ जमीन देने के बावजूद करीब 200 से 250 किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिला है। वहीं, SECL द्वारा गोद लिए गए 7-8 गांवों में सड़क, पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की स्थिति भी खराब है।
ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन और SECL प्रबंधन खदान विस्तार और कॉर्पोरेट मुनाफे को प्राथमिकता दे रहा है, जबकि विस्थापित परिवारों की पुरानी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है।
युवाओं के लिए 400-500 स्थायी नौकरी की मांग
भू-विस्थापितों ने प्रभावित गांवों के युवाओं के लिए मौके पर ही 400 से 500 पदों पर नियमित और स्थायी भर्ती शुरू करने की मांग रखी है। इसके अलावा भिलाई खुर्द-1, 2 और 3 में बचे मकानों और जमीनों का दोबारा पारदर्शी तरीके से भौतिक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन कराने की मांग की गई है।
रापाखरा और दादर खुर्द को लेकर भी मांग
ग्रामीणों ने रापाखरा के विस्थापितों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने और आने-जाने के लिए वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की मांग की है। वहीं, दादर खुर्द के तालाब को गांव की निस्तारी का प्रमुख स्रोत बताते हुए वहां ओबी डंपिंग पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है।
ग्रामीणों को सूचना दिए बिना जनसुनवाई कराने का आरोप
ग्रामीण अमन पटेल ने आरोप लगाया कि SECL प्रबंधन 21 अगस्त को जनसुनवाई कराने जा रहा है, लेकिन प्रभावित गांवों को इसकी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने बताया कि करीब 15-20 दिन पहले अधिकारियों से चर्चा के दौरान कहा गया था कि जनसुनवाई की जानकारी मिलने पर ग्रामीणों को बताया जाएगा। इसके बावजूद अब पंचायत सचिव, सरपंच और अन्य क्षेत्रों को नोटिस भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक पुराने मुआवजे, रोजगार, पुनर्वास और मूलभूत सुविधाओं से जुड़े वादे पूरे नहीं होते, तब तक खदान विस्तार के लिए जनसुनवाई नहीं होने दी जाएगी।
पारदर्शी, निष्पक्ष एवं समयबद्ध शिकायत निवारण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
बिलासपुर/कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) ने भूमि के बदले रोजगार से संबंधित शिकायतों की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा समिति का गठन किया है। समिति उपलब्ध अभिलेखों, दस्तावेजों एवं साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक प्रकरण का परीक्षण कर अपनी अनुशंसाएं सक्षम प्राधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करेगी।
भूमि के बदले रोजगार की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने के उद्देश्य से लागू की गई यह उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था प्रत्येक पात्र हितग्राही के अधिकारों की प्रभावी सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
समिति के अध्यक्ष महाप्रबंधक (भू-राजस्व), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर होंगे। समिति में महाप्रबंधक (योजना एवं परियोजना), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/श्रमशक्ति), महाप्रबंधक (मानव संसाधन/औद्योगिक संबंध) तथा उप-महाप्रबंधक (विधि), एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर सदस्य होंगे।
गठित समिति आवश्यकता के अनुसार संबंधित अभिलेखों एवं दस्तावेजों की जांच करेगी, अधिकारियों से आवश्यक जानकारी प्राप्त करेगी तथा उपलब्ध तथ्यों एवं साक्ष्यों का सत्यापन करते हुए प्रचलित नियमों एवं निर्धारित प्रक्रिया के अनुरूप शिकायतों का परीक्षण करेगी। इससे प्रकरणों के त्वरित, निष्पक्ष एवं तार्किक निस्तारण में सहायता मिलेगी।
भूमि के बदले रोजगार से संबंधित अनियमितता, जाली अथवा कूटरचित दस्तावेजों के उपयोग, तथ्य छिपाकर रोजगार प्राप्त करने अथवा अन्य संबंधित मामलों के संबंध में कोई भी व्यक्ति आवश्यक दस्तावेजों एवं साक्ष्यों सहित समिति के समक्ष शिकायत प्रस्तुत कर सकता है।
एसईसीएल ने स्पष्ट किया है कि विधिवत दर्ज की गई शिकायत को वापस लेने का कोई प्रावधान नहीं है। अतः शिकायतकर्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे केवल प्रामाणिक तथ्यों एवं उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही शिकायत दर्ज कराएं। कंपनी ने सभी संबंधित पक्षों एवं आम नागरिकों से अपील की है कि शिकायत केवल अधिकृत माध्यमों से ही प्रस्तुत करें तथा किसी भी प्रकार के बिचौलियों, अपुष्ट सूचनाओं अथवा भ्रामक दावों से सावधान रहें।
एसईसीएल ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान कोई शिकायत जानबूझकर असत्य, दुर्भावनापूर्ण अथवा भ्रामक तथ्यों पर आधारित पाई जाती है, अथवा किसी व्यक्ति की छवि धूमिल करने या अनावश्यक उत्पीड़न के उद्देश्य से की गई प्रतीत होती है, तो संबंधित शिकायतकर्ता के विरुद्ध प्रचलित नियमों एवं लागू विधिक प्रावधानों के अनुसार आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
एसईसीएल सुशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही एवं संस्थागत निष्पक्षता के उच्च मानकों के प्रति प्रतिबद्ध है। कंपनी का विश्वास है कि उच्चस्तरीय स्थायी समीक्षा व्यवस्था के माध्यम से भूमि के बदले रोजगार संबंधी शिकायतों के परीक्षण की प्रक्रिया और अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं विश्वसनीय बनेगी। साथ ही, वास्तविक एवं पात्र हितग्राहियों के हितों का प्रभावी संरक्षण सुनिश्चित होने के साथ शिकायत निवारण तंत्र में जनविश्वास एवं संस्थागत जवाबदेही भी और सुदृढ़ होगी।