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कोरबा

पत्रकारवार्ता: जयसिंह अग्रवाल ने कहा- झीरम का फैसला, आधा अधूरा न्याय

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चालान में नामजद मुख्य आरोपियों से एनआईए ने पूछताछ तक नहीं की, मुख्य साजिशकर्ताओं के नामों का खुलासा नहीं, प्रदेश संगठन के निर्देश पर आगे की बनेगी रणनीति-पूर्व मंत्री
कोरबा। 13 साल पूर्व झीरम में हुए नक्सली वारदात पर एनआईए कोर्ट ने कल 05 सितम्बर को 10 लोगों पर दोष सिद्ध होने का फैसला सुनाया, 16 सितम्बर को इनकी सजा पर फैसला आ सकता है। आज 06 सितम्बर को प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर कोरबा जिला मुख्यालय के कांग्रेस कार्यालय में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कांग्रेसियों की उपस्थिति में पे्रसवार्ता ली और कहा कि एनआईए कोर्ट ने जो फैसला सुनाया, उस पर टिप्पणी करना गलत होगा, लेकिन झीरम कांड की जांच एनआईए ने पूरी तरह से निष्पक्ष नहीं की और कोर्ट ने वही फैसला सुनाया, जो एनआईए ने तथ्य पेश किए। झीरम कांड का फैसला आधा अधूरा न्याय है। जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि प्रारंभ में एनआईए ने जो चालान पेश किया था, उसमें बड़े नक्सली नेताओं का नाम था, उनसे न तो आज तक पूछताछ की गई और न ही उन्हें आज तक गिरफ्तार किया गया।
तत्समय के प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व केन्द्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल, महेन्द्र कर्मा सहित 32 कांग्रेस नेताओं की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और तत्समय के केन्द्र सरकार ने झीरम कांड पर एनआईए जांच करने टीम का गठन किया और 13 साल बाद एनआईए कोर्ट ने झीरम कांड में 10 लोगों को दोषी माना, जो आधा अधूरा न्याय जैसा है।
हमने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया, लेकिन जांच रूकवा दी गई- पूर्व मंत्री
प्रेसवार्ता में जयसिंह अग्रवाल ने कहा जब प्रदेश में हमारी सरकार आई, तो हमने झीरम कांड को अंजाम देने वाले साजिश कर्ताओं एवं दोषियों को बेनकाब करने के लिए एसआईटी का गठन किया, लेकिन केन्द्र सरकार ने इसकी इजाजत नहीं दी और जांच रूकवा दी। हमारी जांच एजेंसी से सभी बेनकाब हो सकते थे, लेकिन जांच नहीं होने दिया गया। एनआईए ने न तो मुख्य साजिशकर्ताओं के नामों का खुलासा किया और न ही बड़े सफेदपोश नेताओं एवं बड़े नक्सली लीडरों के नामों का खुलासा किया। एनआईए कोर्ट का फैसला आधा अधूरा न्याय है।
16 सितम्बर के बाद कांग्रेस की आगे की रणनीति बनेगी-जयसिंह
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि दोषियों को 16 सितम्बर को एनआईए कोर्ट सजा सुनाएगा, उसके बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी आगे की रणनीति तय करेगी।
बड़े नक्सली नेताओं के बिना इतना बड़ा कांड संभव नहीं-पूर्व मंत्री
एनआईए कोर्ट का फैसला आने के बाद जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि झीरम कांड का वारदात बड़े नक्सली नेताओं के ईशारे पर हुआ था और एनआईए ने तत्समय छोटे 10 नक्सलियों को गिरफ्तार किया, जबकि एफआईआर दर्ज करते समय एनआईए ने पहले कई बड़े नक्सली नेताओं का नाम शामिल किया था, जो आज तक न तो गिरफ्तार हुए और न ही उनसे पूछताछ की गई और एफआईआर दर्ज होने के बाद कुछ समय के बाद उनका नाम हटा दिया गया। जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि इस फैसले से घटना की साजिश का पर्दाफाश नहीं हो सकता।
कई सवाल आज भी जिन्दा हैं?
एनआईए ने साजिशकर्ताओं के नामों का आखिर खुलासा क्यों नहीं किया? कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा से सुरक्षा क्यों हटाई गई?
यात्रा के मार्ग को किसने और क्यों बदलाव किया?
हमले की योजना किसके द्वारा बनाई गई थी?
जब-जब बड़े नक्सलियों समर्पण किया, तब-तब सरकार ने दावा किया कि यह झीरम हमले में शामिल थे, एनआईए ने इनसे पूछताछ क्यों नहीं की?
झीरम कांड में घायल चश्मदीद गवाह थे, उनसे एनआईए ने पूछताछ क्यों नहीं की?
झीरम कांड में घायल और बचे पीड़ितों का बयान एनआईए ने क्यों नहीं लिया? कई बार पीड़ितों ने शपथ पत्र दे कर जांच एजेंसियों के सामने पेश हुए, लेकिन चालान में उनका बयान दर्ज नहीं किया गया। झीरम कांड के हफ्तों बाद भी मृतकों, घायलों का पर्स, मोबाईल एवं महत्वपूर्ण दस्तावेज घटना स्थल पर पड़े हुए थे, किसी का भी मोबाईल जांच एजेंसियों ने जब्त नहीं किया?
एसआईटी जांच क्यों रूकवाई गई?
एनआईए ने तात्कालीन मुख्यमंत्री, गृहमंत्री, मुख्य सचिव, डीजीपी, एडीसी (नक्सल आपरेशन) से कब पूछताछ की, इसका खुलासा करें?
जांच के दायरे में आए बड़े नक्सली नेताओं का नाम क्यों हटाया गया?
शुरूआत में एनआईए की एफआईआर में दो प्रमुख नक्सली नेता गणपति (मुपल्ला लक्ष्मण राव) और रमन्ना का नाम शामिल था, इनके नाम क्यों हटाए गए, जबकि 21 मार्च 2014 को गणपति और रमन्ना सहित 26 फरार आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, उनका नाम एकाएक क्यों हटा दिया गया?
एनआईए की एफआईआर में देवा (बारसे सुक्का उर्फ देवा) का नाम झीरम कांड में शामिल था और एनआईए ने वांछित भी घोषित किया था, ईनाम भी घोषित किया था, फिर उससे पूछताछ क्यों नहीं हुई।
एनआईए ने जिन 26 लोगों का नामजद कर फरार घोष्ज्ञित किया था, उसमें बसवराजू, गणेश उईके, रूपेश उर्फ संजीव, सुरेन्द्र उर्फ रामचन्द्र रेड्डी, जयदेव उर्फ बड्डादेव सोनू उर्फ भूपति के नाम थे। इनमें से अनेकों ने आत्मसमर्पण किया, लेकिन एनआईए इनसे पूछताछ नहीं की जबकि इन्हें दोषी मान लिया गया था।
झीरम कांड में शामिल सरेन्डर नक्सलियों से कब पूछताछ हुई, इसका खुलासा होना चाहिए
भाजपा नहीं चाहती, सच सामने आए-जयसिंह
जयसिंह अग्रवाल ने कहा भाजपा चाहती ही नहीं, कि सच सामने आए। भाजपा के वरिष्ठ नेता धरमलाल कौशिक न्यायिक जांच आयोग के खिलाफ स्टे लेकर आ गए थे, हमने एसआईटी का गठन किया तो एनआईए जांच के बहाने एसआईटी जांच रूकवा दी गई। जब सुप्रीम कोर्ट ने हमारी एसआईटी के पक्ष में फैसला दिया तो ढाई साल में विष्णु देव सरकार ने जांच तक प्रारंभ नहीं करवाई। एनआईए की जांच अधूरी है और कहीं न कहीं एनआईए ने निष्पक्ष जांच नहीं की और कोर्ट ने वही फैसला दिया जो एनआईए ने तथ्य पेश किए।
झीरम कांड में शामिल कई नक्सली नेताओं का नाम आया था, ये नाम निम्रलिखित हैं, जिनसे एनआईए ने पूछताछ तक नहीं की, उनमें चैतू उर्फ श्याम दादा, 25 लाख रूपए का ईनाम घोषित था और बस्तर पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
रूपेश उर्फ मोल्ला ने सरेन्डर के बाद सार्वजनिक रूप से बयान दिया था कि झीरम घाटी नरसंहार संगठन की एक बड़ी गलती और नीतिगत विफलता थी।
निर्मला उर्फ सुमित्रा पर 20 लाख का ईनाम था और झीरम कांड में अग्रिम मोर्चे और लाजिस्टिक सपोर्ट में सक्रिय रही।
01 करोड़ का ईनामी भूपति उर्फ सोनू दादा ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री की उपस्थिति में गढ़चिढ़ौली में सरेन्डर किया था।
केन्द्रीय समिति सदस्य सुजाता ने सितम्बर 2025 में तेलंगाना में सरेन्डर किया था और छत्तीसगढ़ सरकार ने 40 लाख तथा तेलंगाना सरकार ने 25 लाख का ईनाम घोषित किया था। इसके अलावा जयसिंह अग्रवाल ने प्रेसवार्ता में कई सवाल खड़े किए और फैसला को अधूरा न्याय बताया।
पत्रकारवार्ता में जयसिंह अग्रवाल के अलावा कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष ग्रामीण मनोज चौहान, शहर मुकेश राठौर पूर्व विधायक श्याम लाल कंवर, कांग्रेस पिछड़ा वर्ग प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष गजानंद प्रसाद साहू, पूर्व महापौर राजकिशोर प्रसाद, बीएन सिंह, पालूराम साहू, रवि चंदेल, आनंद जायसवाल, सपना चौहान, कुसूम द्विवेदी, सुरेश अग्रवाल, मनमोहन राठौर, मनीष शर्मा, केडी महंत सहित कांग्रेस, महिला कांग्रेस के सदस्य शामिल थे।

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सड़कों पर मवेशियों के विचरण व उचित व्यवस्थापन ना करने पर कलेक्टर सख्त, सीएमओ कटघोरा व छुरीकला को कारण बताओ नोटिस जारी

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कोरबा 07 सितम्बर 2026। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने नगरीय क्षेत्र में सड़कों पर घूमते मवेशियों के संबंध में नगर पालिका परिषद कटघोरा के मुख्य नगर पालिका अधिकारी मुद्रिका प्रसाद तिवारी एवं नगर पंचायत छुरीकला के मुख्य नगर पालिका अधिकारी मोहर लाल गहवरिया को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिवस के अंदर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
जारी नोटिस में उल्लेख किया गया है कि सड़क सुरक्षा/प्रोटोकाल कार्यक्रम के तहत एसडीएम कटघोरा द्वारा विशिष्ट अतिथियों के सम्बंधित क्षेत्र में भ्रमण के दौरान सड़कों पर घूमते मवेशियों के उचित व्यवस्थापन के संबंध में नगरीय निकाय को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद भी दिनांक 29 अगस्त 2026 को विशिष्ट अतिथियों के उक्त क्षेत्र के भ्रमण के दौरान सड़कों पर मवेशी घूमते पाए गए। इस संबंध में पूर्व में दिए गए निर्देशों के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने को गंभीरता से लिया गया है। इसी प्रकार सामान्य दिनों में सड़क पर घुमंतू मवेशियों के उचित व्यवस्थापन हेतु निकाय द्वारा अपेक्षित कार्यवाही की प्रगति नगण्य है।
नोटिस में कहा गया है कि नगर पंचायत क्षेत्र में मवेशियों के विचरण को रोकने तथा उन्हें सुरक्षित स्थान पर रखने के लिए दिए गए निर्देशों का विधिसम्मत पालन नहीं होना कार्य के प्रति उदासीनता को दर्शाता है। साथ ही उच्च अधिकारियों के दिये निर्देशो को गम्भीरता से नही लेना कर्तव्य के प्रति तत्परता  के अभाव को  प्रदर्शित करता है।  इस हेतु कलेक्टर श्री दुदावत ने सम्बंधित नगरीय निकाय के मुख्य नगर पालिका अधिकारियो को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिवस के अंदर स्पष्टीकरण प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

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संवेदनशीलता के साथ दिव्यांगजनों की जरूरतों पर त्वरित पहल

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कलेक्टर जनदर्शन में 6 दिव्यांगों को तत्काल मिले सहायक उपकरण

कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन में सीईओ जिला पंचायत के माध्यम से सहायक उपकरण किया गया प्रदान

कोरबा, 07 सितंबर 2026। कलेक्टर जनदर्शन में अपनी समस्याओं और आवश्यकताओं को लेकर पहुंचे दिव्यांगजनों के आवेदनों पर जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता के साथ त्वरित पहल करते हुए 6 हितग्राहियों को तत्काल सहायक उपकरण उपलब्ध कराया गया। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने जनदर्शन में आए दिव्यांगों के प्राप्त आवेदनों को संवेदनशीलता से  लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। कलेक्टर के निर्देशन में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत कोरबा श्री प्रतीक जैन  द्वारा हितग्राहियों को उनकी आवश्यकता के अनुरूप सहायक उपकरण प्रदान किया गया।
जनदर्शन मे आए दिव्यांग परदेशी दास  पिता ज्ञानदास निवासी धवईपुर कटघोरा को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल, गुड्डी सागर पिता मोहनसागर  निवासी मोतीसागर पारा कोरबा को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल व वॉकर तथा रामजी साव पिता सरबजिस साव निवासी दर्री कोरबा को मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल प्रदान की गई। इसी प्रकार ललित जांगड़े पिता सुखीराम जांगड़े निवासी कुसमुंडा कोरबा को व्हीलचेयर, कु. दृष्टि महंत पिता शंकर दास निवासी दुरपा रोड कोरबा को सी.पी. चेयर तथा निरवर पिता मिर्जा इसराइल बेग निवासी जिला कोरबा को सी.पी. चेयर प्रदान की गई।
सहायक उपकरण प्राप्त होने से दिव्यांग हितग्राहियों के लिए दैनिक जीवन की आवश्यक गतिविधियां अधिक सहज होंगी तथा उन्हें आवागमन और सामान्य जीवन में आत्मनिर्भरता हासिल करने में मदद मिलेगी। जिला प्रशासन की इस त्वरित एवं संवेदनशील पहल से हितग्राहियों ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए प्रशासन के प्रति आभार जताया।
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता के साथ पूरा करना जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है। जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों पर यथासंभव त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है, ताकि जरूरतमंद नागरिकों को शासकीय योजनाओं और सहायता का लाभ समय पर मिल सके। उन्होंने कहा कि सहायक उपकरण दिव्यांगजनों के लिए केवल सुविधा का साधन नहीं, बल्कि आत्मनिर्भरता, सम्मान और बेहतर जीवन की दिशा में महत्वपूर्ण सहयोग हैं। जिला प्रशासन का निरंतर प्रयास है कि पात्र दिव्यांगजनों को उनकी आवश्यकता  अनुरूप  योजनाओं और सुविधाओं का लाभ सुगमता एवं समयबद्ध तरीके से उपलब्ध कराया जाएगा।
इस अवसर पर अपर कलेक्टर ओंकार यादव, अपर कलेक्टर श्रीमती माधुरी सोम एवं उप संचालक, समाज कल्याण विभाग, कोरबा सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन ने 1500 छात्राओं को वितरित की एजुकेशन किट, जिले के अन्य शासकीय महाविद्यालयों में भी विशाल डोम निर्माण की घोषणा

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मिनीमाता कन्या महाविद्यालय में दीक्षारम्भ समारोह में बोले मंत्री, बेटियां जितना पढ़ेंगी, उतना ही सशक्त होगा परिवार, समाज और प्रदेश

कोरबा, 07 सितंबर 2026। शासकीय मिनीमाता कन्या महाविद्यालय, कोरबा में सोमवार को आयोजित दीक्षारम्भ समारोह में नगर विधायक एवं छत्तीसगढ़ शासन के कैबिनेट मंत्री लखन लाल देवांगन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत अतिविशिष्ट अतिथि तथा कलेक्टर कुणाल दुदावत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

समारोह को संबोधित करते हुए मंत्री लखन लाल देवांगन ने नवप्रवेशित छात्राओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि बेटियां दो कुलों का नाम रोशन करती हैं। बेटियां जितना अधिक पढ़ेंगी, उतना ही परिवार, समाज, प्रदेश और देश सशक्त होगा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत नवप्रवेशित विद्यार्थियों के स्वागत और उन्हें बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करने के उद्देश्य से दीक्षारम्भ समारोह आयोजित किए जा रहे हैं।

इस अवसर पर महाविद्यालय की लगभग 1500 छात्राओं को सीएसआर मद के माध्यम से एजुकेशन किट प्रदान की गई। मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में अधोसंरचना विकास को राज्य सरकार द्वारा प्राथमिकता दी जा रही है। शासकीय मिनीमाता कन्या महाविद्यालय में डीएमएफ मद से विशाल डोम का निर्माण कराया जा रहा है। इसी तर्ज पर जिले के अन्य शासकीय महाविद्यालयों में भी विशाल डोम निर्माण की घोषणा उन्होंने की।
मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के वर्ष 2047 तक छत्तीसगढ़ को विकसित एवं समृद्ध राज्य बनाने के लक्ष्य को साकार करने में युवाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विकास मॉडल के केंद्र में ज्ञान अर्थात गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी हैं। युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक उद्योगों की आवश्यकताओं के अनुरूप कौशल विकास तथा रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में मिशन मोड पर कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। प्रदेश का सकल नामांकन अनुपात वर्ष 2021-22 में 19.6 प्रतिशत था, जो बढ़कर वर्तमान में 27.5 प्रतिशत हो गया है। यह उच्च शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों की बढ़ती रुचि और राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक परिणाम है।
महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत ने छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि युवा देश का भविष्य हैं और विकसित भारत के निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने छात्राओं से कहा कि जीवन में आने वाली चुनौतियों से घबराने के बजाय संघर्ष और मेहनत के साथ निरंतर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास और दृढ़ संकल्प से सफलता के शिखर तक पहुंचा जा सकता है। 
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि जिले में डीएमएफ के कार्यों में शिक्षा को विशेष प्राथमिकता दी गई है। छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के साथ उन्हें बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिले का कोई भी छात्र-छात्रा देश के किसी भी शासकीय महाविद्यालय में अध्ययन के लिए जाता है, तो उसकी फीस की राशि जिला प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम में सुधार के साथ उच्च शिक्षा में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या में भी लगातार वृद्धि हो रही है।
समारोह में पार्षद श्रीमती वर्षा वैष्णव, नरेंद्र देवांगन, महाविद्यालय की प्राचार्य श्रीमती पापिया चतुर्वेदी, प्रफुल्ल तिवारी, सहित महाविद्यालय के प्राध्यापकगण, छात्राएं एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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