नई दिल्ली,एजेंसी। राज्यसभा में बुधवार को अप्रैल से जुलाई के बीच राज्यसभा से रिटायर हो रहे 59 सांसदों को विदाई दी गई। इनमें पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा, शरद पवार, सभापति हरिवंश, आरपीआई नेता रामदास आठवले शामिल हैं। हालांकि पवार और आठवले राज्यसभा के लिए फिर चुन लिए गए हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने पूर्व पीएम एचडी देवगौड़ा के बारे में कहा, ‘मैं सबसे पहले देवगौड़ाजी का उल्लेख करना चाहूंगा। मुझे पता नहीं कि उन्हें क्या हुआ, मोहब्बत हमारे साथ की, लेकिन शादी मोदीजी के साथ की।’ इस पर पीएम को हंसी आ गई।
इस दौरान पीएम मोदी ने संसद को एक ओपन यूनिवर्सिटी बताया। उन्होंने कहा कि राजनीति में कभी पूर्ण विराम नहीं होता। भविष्य आपका इंतजार कर रहा है। आपका अनुभव हमारे राष्ट्रीय जीवन का स्थायी हिस्सा बना रहेगा।
हरिवंश ने कहा- मैं हर किसी के शब्दों से खुद को जोड़ता हूं
उपसभापति हरिवंश ने कहा कि सभापति जी आपने बोलने का मौका दिया। पीएम और सभापति जी आपने जो मेरे लिए शब्द कहे, वह मेरे जीवन का अमिट स्मृति है। मैं हर किसी के शब्दों से खुद को जोड़ता हूं।
आपके आने के बाद लगातार यह प्रयास रहा कि कैसे यह संसद चले। इस सदन के सदस्य जेपी नड्डा का मर्यादित आचरण याद रहेगा। खड़गे जी के साथ बैठने का अवसर, हर पल सजग रहना.. उनका अनुभव इससे बहुत कुछ सीखने मिला। किरेन रिजिजू का हिंदी में प्रेम से बात रखना बहुत अच्छा लगता है।
खड़गे ने आठवले पर कहा- मोदीजी का गुणगान कम करें
खड़गे ने कहा, शरद पवार दोबारा इस सदन में आएंगे। रामदास आठवले साहब अपनी कविता के रूप में ही हमेशा ही मोदी जी का गुणगान करते हैं। उन्हें दूसरी कविता ही नहीं आती। मुझे उम्मीद है कि वे अगले कार्यकाल में अपनी कविता में मोदी का जिक्र कम करेंगे। उन्होंने कहा कि दिग्विजय सिंह को पूरा देश जानता है। एमपी के सीएम रहे। राज्यसभा में कई समितियों मे रहे। उसकी रिपोर्ट्स भी दीं। मनु सिंघवी ने संसदीय वाद-विवाद को गरिमा दी।
खड़गे ने देवगौड़ाजी पर कहा- आपने मुहूर्त हमारे साथ देखा, शादी मोदीजी के साथ की
खड़गे ने कहा- मैं सबसे पहले देवगौड़ाजी का उल्लेख करना चाहूंगा। मुझे पता नहीं कि क्या हुआ उनको क्या हुआ मुहूर्त हमारे साथ देखा, लेकिन शादी मोदीजी के साथ की। शरद पवार दोबारा इस सदन में आएंगे। रामदास आठवले साहब अपनी कविता के रूप में ही हमेशा ही मोदी जी का गुणगान करते हैं। उन्हें दूसरी कविता ही नहीं आती। दिग्विजय सिंह को पूरा देश जानता है। एमपी के सीएम रहे। राज्यसभा में कई समितियों मे रहे। उसकी रिपोर्ट्स भी दीं। मनु सिंघवी ने संसदीय वाद-विवाद को गरिमा दी।
खड़गे ने कहा- यहां बोली गई हर बात सीखने लायक है
खड़गे ने कहा, ‘मैं खुद अपने संसदीय जीवन में पहली बार इस सदन का सदस्य बना हूं। 2022 से नेता प्रतिपक्ष बना हूं। जल्द ही मेरा कार्यकाल पूरा होने वाला है। जो मेरा अनुभव है वह सबसे अलग है। यहां जो बातें बोली जाती हैं वह सीखने लायक हैं। 39 साल असेंबली में था। उसके बाद यहां आया। मेरा 55वां साल चल रहा है। अपने पूरे संसदीय जीवन में नियमित रूप से सदन में मौजूद रहने और चर्चाओं में भाग लेने की कोशिश करता हूं, क्योंकि हमको कुछ अनुभव मिलता है। अलग राज्यो के लोग विचार धारा के लोग अलग अनुभव यहां बताए जाते हैं। मेरा बहुत खट्टा-मीठा अनुभव रहा है। इस सदन को सार्थक बनाने के लिए कई प्रयास करने होंगे ताकि समाज को बेहतर संदेश दिया जा सके।
मोदी ने कहा- संकट के समय काम हरिवंशजी के जिम्मे आता है
पीएम मोदी ने कहा, हमारे उपसभापति हरिवंशजी को लंबे समय तक इस सदन में जिम्मेदारी निभाने का मौका मिला। मृदुभाषी हैं। संकट के समय काम उनके ही जिम्मे आता है कि आप संभाल लेना जरा। उनको एक लंबा अनुभव होता है। सबको भली भांति जान लेते हैं। लेकिन उनका भी योगदान है। मैंने देखा है कि सदन का समय नहीं होता तो कहीं न कहीं वे देश के यूथ से मिलना जुलना करते रहे हैं। वे काम के धनी तो हैं ही कर्म कठोर के नाते भारत के हर कोने में जाकर काम किया है। कभी हम सुनते थे कि सदन में हास्य विनोद का अवसर मिलता रहता है। मीडिया की दुनिया ऐसी है कि हर कोई कॉन्शियस रहता है। मुझे पूरा भरोसा है कि वे आगे भी ऐसा व्यंग्य विनोद करते रहेंगे। हर 2 साल के बाद एक बड़ा समूह सदन से जाता है। लेकिन जो नया समूह आता है, उनको 4 साल से मौजूद साथियों से सीखने का मौका मिलता है। इसलिए यहां की जो विरासत है वो कंटीन्यू सदस्यों को मिलती रहती है।
पीएम ने कहा- जीवन में बड़ा फैसला लेना होता है
पीएम ने कहा,’मुझे पक्का विश्वास है जो नए सांसद आएंगे उनको भी यह अनुभव और विरासत मिलेगी। जीवन में या सामाजिक जीवन में कोई बड़ा फैसला लेना होता है। परिवार के लोग कहते हैं कि उनसे एक बार पूछ लो। उनका क्या कहना है। कोई बीमार है तो कहते हैं कि एक और डॉक्टर से पूछ लो। मैं मानता हूं कि संसदीय प्रणाली में सेकंड ओपिनियन की बहुत बड़ी भूमिका है। यह सेकंड ओपिनियन सारी बहस को नया आयाम देती है। हमारी निर्णय प्रक्रिया को समृद्ध करती है। जो सदन में बैठते हैं।
पीएम मोदी ने कहा- ये सदन अपने आप में बड़ी ओपन यूनिवर्सिटी
पीएम मोदी ने कहा कि ये उनके जीवन की सबसे बड़ी स्मृति रहेगी। ये सदन अपने आप में बड़ी ओपन यूनिवर्सिटी है। हमारी यहां शिक्षा-दीक्षा होती है। ये 6 साल जो यहां रहने का मौका मिलता है। वह राष्ट्र जीवन के साथ अपने जीवन को गढ़ने का भी मौका है। उनको यह भरोसा होता है कि चलो यहां नहीं तो उस सदन से कुछ तो हासिल होगा। जो सांसद विदाई ले रहे हैं आने वाले दिनों में तो ये मौका नहीं मिलेगा, इनमें कुछ ऐसे हैं जिनको नए और पुरानी संसद में बैठने का अवसर मिला है। ऐसे कई सांसद अब विदा हो रहे हैं। यह सेकंड ओपिनियन सारी बहस को नया आयाम देती है। हमारी निर्णय प्रक्रिया को समृद्ध करती है। जो सदन में बैठते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसी। पीएम मोदी 13 साल बाद शनिवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) पहुंचे। वे मेट्रो का सफर करके कॉलेज पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मेट्रो में बैठे बच्चों और लोगों से भी बातचीत की।
कॉलेज के 100 साल पूरे होने पर शताब्दी समारोह मनाया जा रहा है। इसी दौरान पीएम जेन-Z को संबोधित कर रहे हैं।
उन्होंने कहा- यहां के एलुमिनाई OG हैं, यानी ओरिजनल गैंगस्टर हैं। यहां के एलुमिनाई स्टूडेंट्स ने हर क्षेत्र में धूम मचाई है। वे धुरंधर भले न हों, पर धूम तो मचाई है।
समारोह की शुरुआत में पीएम ने 100 रुपए का सिक्का जारी किया। इसी साल अप्रैल में वे डाक टिकट भी जारी कर चुके हैं।
पीएम इससे पहले 2013 में श्रीराम कॉलेज का दौरा कर चुके हैं। उस समय वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे।
पीएम मोदी 2013 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के समारोह में शामिल हो चुके हैं।
मोदी ने 13 साल पहले दी स्पीच की खास बातें दोहराईं
संबोधन के दौरान पीएम ने 2013 में दी गई अपनी स्पीच की खास बातें दोहराईं। उन्होंने कहा- “उस समय आप सब स्कूल में रहे होंगे। पर आज इंटरनेट पर जाकर उस समय की खबरें पढ़ेंगे तब आपको पता चलेगा उस समय देश में क्या हालत थी। मैं चाहूंगा कि आप इंटरनेट पर पढ़ें। मैं उस वक्त की हेडलाइन की कुछ झलक दिखाना चाहता हूं। LOC पर भारतीय सैनिकों की हत्या। वर्ल्ड बैंक ने GDP का नंबर घटाया। महंगाई दर 10% के करीब। हेलिकॉप्टर में घूसखोरी और हैदराबाद में ब्लास्ट ये उस समय की हेडलाइंस थीं।”
मोदी बोले- देश के लिए जीने का जज्बा मेरे अंदर भावविष्ट
स्पीच के दौरान पीएम ने कहा- “देश के लिए जी जान से जुटना। देश के लिए जीने का जज्बा, जो मेरे अंदर भावविष्ट है। वो 2013 में यहीं से शब्दों की माला में गढ़ता गया। मैं काफी देर बोला था। मैंने उस दिन पानी के ग्लास का एक उदाहरण दिया था। मैंने कहा था कि पानी के आधे भरे ग्लास को देखने के तीन नजरिए क्या होते हैं। एक जिनको ग्लास आधा खाली दिखता है। दूसरा जिन्हें ग्लास आधा भरा दिखता है। और तीसरा जिन्हें ग्लास पूरा भरा दिखता है। आधा हवा से आधा पानी से।”
पीएम बोले- कुछ दिन इस आयोजन की खूब चर्चा है
पीएम मोदी ने कहा- “कुछ दिनों से इस कार्यक्रम की खूब चर्चा है। लोग मेरे 2013 के संबोधन को याद कर रहे हैं। नई पीढ़ी के लोगों ने भी उसे रिविजिट किया है। आज भी 13-14 साल बाद भी उस सभा और संबोधन का प्रभाव बरकरार है। साथियों तब आपकी जगह आपके सीनियर थे। मैं तब सीएम तो था पर मैं विपक्षी पार्टी में था। लोग उम्मीद कर रहे थे कि मैं उस वक्त तब की केंद्र सरकार पर आरोपों की झड़ी लगा दूंगा। पर मैंने इस मंच का वो उपयोग नहीं किया। मैंने एक विजन रखा था। मैंने तब जो कहा था वो मेरा कनविक्शन था।”
पीएम बोले- यहां के एलुमिनाई जेन जी की भाषा में OG और धुरंधर
इस कॉलेज की यात्रा दरियागंज के एक छोटे से स्थान से शुरू हुई थी। और वही छोटा कॉलेज एक विशाल वृक्ष बन चुका है। इसने कई लोगों को छांव और शीतलता दी है।
आज भी जब कोई पूछता है कि DU में कौन सा कॉलेज, तो SRCC कहना ही अपने आप में फ्लैक्स होता है। आपकी भाषा में कहूं तो यहां के एल्युमनाई OG हैं।
जिन्होंने SRCC का नाम पूरी दुनिया में पहुंचाया। हमारे अरुण जेटली जी यहीं पढ़े थे। और मैं कह सकता हूं कि हमारी ऐसी कोई मुलाकात नहीं हुई जहां उन्होंने SRCC की बात न की हो। कभी-कभी तो मैं तंग आ जाता था।
लोग मेरे 2013 के संबोधन को याद कर रहे हैं। नई पीढ़ी के लोगों ने भी उसे रिविजिट
पीएम मोदी का संबोधन शुरू, बोले- मैं छठा खिलाड़ी हूं
पीएम मोदी ने संबोधन की शुरुआत में एलुमिनाई स्टूडेंट्स के नाम लिए और फिर बोले- मैं छठा खिलाड़ी हूं। आज का ये अवसर बहुत ऐतिहासिक है। ये देश के शिक्षा जगत के लिए भी अहम है। यहां SRCC का हिस्सा रही अनेक पीढ़ियां जुड़ी हैं।
मोदी ने कहा- मैं कॉलेज के संस्थापक सर श्री राम जी का भी धन्यवाद करता हूं। जब कोई इंसान 100 साल जीता है तो उसके अनुभवों का सागर माना जाता है। और जब कोई संस्थान ऐसा करता है तो वो उपलब्धियों का महासागर हो जाता है।
नई दिल्ली, एजेंसी। पीएम मोदी 13 साल बाद शनिवार को दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (SRCC) पहुंचे। वे मेट्रो का सफर करके कॉलेज पहुंचे। इस दौरान उन्होंने मेट्रो में बैठे बच्चों और लोगों से भी बातचीत की।
कॉलेज के 100 साल पूरे होने पर शताब्दी समारोह मनाया जा रहा है। इसी दौरान पीएम जेन-Z को संबोधित करेंगे।
समारोह की शुरुआत में पीएम ने 100 रुपए का सिक्का जारी किया। इसी साल अप्रैल में वे डाक टिकट भी जारी कर चुके हैं।
पीएम इससे पहले 2013 में श्रीराम कॉलेज का दौरा कर चुके हैं। उस समय वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे।
पीएम मोदी 2013 में दिल्ली यूनिवर्सिटी के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के समारोह में शामिल हो चुके हैं।
दिल्ली मेट्रो में सफर के दौरान पीएम मोदी की तस्वीरें…
मोदी ने लिखा- SRCC ने लीडर्स की पीढ़ियां तैयार कीं
इवेंट के लिए रवाना होने से पहले पीएम मोदी ने X पर एक पोस्ट में लिखा- इस कॉलेज ने एकेडमिक एक्सीलेंस, संस्थान बनाने और बिजनेस, पब्लिक लाइफ और समाज में लीडर्स की पीढ़ियों को तैयार करने के मामले में सालों में अपनी अलग पहचान बनाई है।
अप्रैल में डाक टिकट जारी किया गया था
इस साल अप्रैल में पीएम ने संस्थान के 100 साल पूरे होने के मौके पर एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया था।
1926 में हुई थी श्रीराम कॉलेज की स्थापना
दिल्ली यूनिवर्सिटी का श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स भारत के प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों में से एक है और कॉमर्स, इकोनॉमिक्स और मैनेजमेंट के क्षेत्रों में सीखने का एक प्रतिष्ठित केंद्र है।
मशहूर उद्योगपति और समाजसेवी सर श्री राम ने 1926 में स्थापित इस कॉलेज ने एक सदी के दौरान विद्वानों, पेशेवरों, प्रशासकों, उद्यमियों, नीति-निर्माताओं और राष्ट्र-निर्माताओं की पीढ़ियों को तैयार किया है।
नई दिल्ली, एजेंसी। दुनिया का नक्शा अब कुछ बदला नजर आएगा। इसे लेकर संयुक्त राष्ट्र महासभा ने शुक्रवार को ऐतिहासिक प्रस्ताव पास किया है। भारत ने भी प्रस्ताव के पक्ष में वोट किया। अमेरिका प्रस्ताव के खिलाफ वोट करने वाला अकेला देश रहा।
इस फैसले से देशों और महाद्वीपों के क्षेत्रफल पर कोई असर नहीं पड़ेगा, बस इनका आकार पहले से थोड़ा छोटा या बड़ा दिख सकता है।
अब तक धरती पर देशों और महाद्वीपों को दिखाने के लिए मर्केटर वर्ल्ड मैप का उपयोग किया जाता था। इसमें देशों और महाद्वीपों का आकार उनके असली क्षेत्रफल से बड़ा या छोटा दिखता था।
नए नक्शे का नाम इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन है। इसमें अफ्रीका पहले से काफी बड़ा, जबकि यूरोप और उत्तरी अमेरिका छोटे नजर आएंगे। एशिया के कुछ हिस्सों का आकार भी पहले से छोटा दिखेगा।
भारत: क्षेत्रफल वही, आकार बड़ा दिख सकता है
भारत की वास्तविक जमीन, अंतरराष्ट्रीय सीमाओं या क्षेत्रफल में कोई बदलाव नहीं होगा। यह बदलाव देशों की सीमाएं बदलने वाला नहीं, बल्कि नक्शे पर पृथ्वी को दिखाने का तरीका बदलने वाला है।
भारत का नक्शा देखने में भी थोड़ा अलग दिख सकता है, लेकिन भारत के मामले में बदलाव बहुत बड़ा नहीं होगा।
नया नक्शा क्षेत्रफल सही अनुपात में दिखाता है। पुराने नक्शे में भूमध्य रेखा के आसपास के इलाके अपने आकार से छोटे और ध्रुवों के पास के इलाके बड़े दिखते हैं।
भारत भूमध्य रेखा से बहुत दूर नहीं है, इसलिए पुराने नक्शे में भी उसका आकार कुछ हद तक छोटा दिखता है।
भारत के लिए इसका मतलब
क्षेत्रफल: बिल्कुल वही रहेगा।
सीमाएं: नहीं बदलेंगी।
भारत की आकृति: थोड़ी बदली हुई/कम खिंची हुई दिखाई दे सकती है।
दूसरे देशों की तुलना में आकार: भारत कुछ बड़ा दिखाई दे सकता है, खासकर जब उसकी तुलना यूरोप, रूस, कनाडा जैसे ज्यादा उत्तरी देशों से की जाए।
अफ्रीका पर असर: सबसे ज्यादा नजर आएगा, क्योंकि उसका वास्तविक आकार पुराने मर्केटर नक्शे की तुलना में बहुत बड़ा दिखाई देगा।
अमेरिका ने प्रस्ताव का विरोध क्यों किया?
संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रस्ताव के पक्ष में 164 देशों ने वोट दिया, जबकि 6 देश वोटिंग से दूर रहे। अमेरिका ने इस पहल की कड़ी आलोचना की। अमेरिकी प्रतिनिधि यारिना फेरेन्सेविच ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को दुनिया की असली समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए, न कि 16वीं सदी के नक्शे को बदलने जैसी बहस पर।
उन्होंने इसे एक वैचारिक एजेंडा बताया और कहा कि ऐसी बहसों की वजह से संयुक्त राष्ट्र अपनी विश्वसनीयता खो रहा है।
वहीं, अफ्रीकी संघ ने इस फैसले का स्वागत किया। उसने दुनिया के नए नक्शे को ज्यादा सटीक और बराबरी वाला बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया।
मौजूदा नक्शे में आखिर दिक्कत क्या थी?
दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले नक्शों में से एक मर्केटर नक्शा है। इसे यूरोपियन मैप मेकर जेरार्डस मर्केटर ने 1569 में बनाया था।
इसका मकसद समुद्र में जहाजों के रास्ते और दिशा को समझना आसान बनाना था। लेकिन पूरी गोल धरती को सपाट नक्शे पर दिखाने की वजह से इसमें देशों और महाद्वीपों का आकार असल से अलग नजर आने लगता है।
जैसे-जैसे कोई इलाका भूमध्य रेखा से दूर जाता है, वह नक्शे पर जरूरत से ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही वजह है कि उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के कई इलाके असल से काफी बड़े नजर आते हैं।
मर्केटर प्रोजेक्शन में पृथ्वी का नक्शा। (फोटो: NASA)
ग्रीनलैंड इसका सबसे मशहूर उदाहरण है। मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड दक्षिण अमेरिका के लगभग बराबर दिखाई देता है। लेकिन असल में दोनों के आकार में बहुत बड़ा अंतर है।
ग्रीनलैंड का क्षेत्रफल करीब 22 लाख वर्ग किलोमीटर है। यह लगभग डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के बराबर है। वहीं अफ्रीका का क्षेत्रफल करीब 3 करोड़ वर्ग किलोमीटर है। यानी अफ्रीका ग्रीनलैंड से करीब 14 गुना बड़ा है।
फिर भी मर्केटर नक्शे को देखकर दोनों का आकार लगभग एक जैसा लग सकता है। यही वह फर्क है जिसे अब कम करने की कोशिश हो रही है।
अफ्रीकी देश नक्शा बदलने की मांग क्यों कर रहे थे?
अफ्रीकी देशों का कहना है कि बात सिर्फ नक्शे पर किसी देश या महाद्वीप के छोटा-बड़ा दिखने की नहीं है। दुनिया का नक्शा यह भी तय करता है कि हम अलग-अलग हिस्सों को किस नजर से देखते हैं।
UN के सामने रखे गए प्रस्ताव में कहा गया था कि मर्केटर नक्शे में अफ्रीका का वास्तविक आकार काफी छोटा नजर आता है। लंबे समय तक ऐसी तस्वीर देखने से लोगों के मन में अफ्रीका के आकार और वैश्विक महत्व को लेकर गलत धारणा बन सकती है।
प्रस्ताव में लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि नक्शे में इन क्षेत्रों का छोटा नजर आना उनकी विकास जरूरतों, बुनियादी ढांचे और आर्थिक क्षमता को भी कम करके आंकने की धारणा बना सकता है।
अफ्रीकी देश टोगो के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसे ने कहा कि नक्शे सिर्फ भूगोल समझने का साधन नहीं हैं, बल्कि वे शिक्षा और लोगों की सोच को भी प्रभावित करते हैं। यह प्रस्ताव टोगो ने पेश किया था और इसे अफ्रीकी संघ का समर्थन मिला।
फ्रांस भी मर्केटर मैप छोड़ने की तैयारी में
UN में मतदान से पहले फ्रांस ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया। फ्रांस के विदेश मंत्री ज्यां-नोएल बारो ने कहा कि उनका देश मर्केटर मैप की जगह ऐसे नक्शों का इस्तेमाल करेगा, जिनमें देशों का वास्तविक क्षेत्रफल ज्यादा सही तरीके से दिखाई दे।
फ्रांस अब एकर्ट IV प्रोजेक्शन का इस्तेमाल करेगा। एकर्ट IV नक्शा 1906 में जर्मन कार्टोग्राफर मैक्स एकर्ट-ग्राइफेंडॉर्फ ने बनाया था। उन्होंने दुनिया के नक्शे के छह अलग-अलग डिजाइन तैयार किए थे। इनमें चौथा नक्शा यानी एकर्ट IV क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे सटीक माना गया।
एकर्ट IV और इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन दोनों ऐसे नक्शे हैं, जिनमें देशों और महाद्वीपों का वास्तविक क्षेत्रफल सही अनुपात में दिखता है।
फिर 2018 में इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन की जरूरत क्यों पड़ी?
एकर्ट IV में क्षेत्रफल तो सही दिखाया गया है, लेकिन कई जगह देशों और महाद्वीपों के आकार में ज्यादा विकृति नजर आती है। इसी समस्या को कम करने के लिए इक्वल अर्थ बनाया गया,
इक्वल अर्थ बनाने का मकसद सिर्फ देशों और महाद्वीपों का सही क्षेत्रफल दिखाना नहीं था, बल्कि पूरी दुनिया को ऐसे रूप में दिखाना था, जो देखने में भी ज्यादा संतुलित लगे।
क्या UN का फैसला सभी पर लागू होगा?
नहीं। संयुक्त राष्ट्र महासभा का यह प्रस्ताव कानूनी रूप से बाध्य नहीं है। यानी यह देशों, स्कूलों, किताबों के प्रकाशकों या टेक कंपनियों को मर्केटर नक्शा हटाने के लिए मजबूर नहीं करता।
लेकिन इससे नक्शे बनाने और पढ़ाने में ऐसे तरीकों को बढ़ावा मिल सकता है, जिनमें देशों और महाद्वीपों का वास्तविक क्षेत्रफल ज्यादा सही दिखाई दे।
मर्केटर नक्शे को पूरी तरह खत्म करने की भी बात नहीं कही गई है। समुद्री और हवाई नेविगेशन में इसका इस्तेमाल जारी रह सकता है, क्योंकि इसमें दिशाओं को सही रखने की खासियत है।
मैप: यह अंग्रेजी का शब्द है। माना जाता है कि यह लैटिन के माप्पा से आया। जिसका अर्थ कपड़ा या चादर है, जिस पर नक्शा बनाया जाता था। बाद में इसका अर्थ मानचित्र हो गया।
नक्शा: यह अरबी मूल का शब्द है। अरबी में नक्श का अर्थ है चित्र या नक्काशी। इसी से नक्शा बना और हिंदी-उर्दू में किसी जगह का चित्र/मानचित्र बताने के लिए इस्तेमाल होने लगा।
मानचित्र: संस्कृत मूल का शब्द है। मान + चित्र, यानी किसी स्थान को माप या अनुपात के साथ चित्र के रूप में दिखाना।