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Ladakh New District: लद्दाख में 5 नए जिले घोषित, अब दो की जगह होंगे सात जिले, जानें कौन-कौन से नए district बने

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लद्दाख,एजेंसी। लद्दाख से एक बड़ी खबर सामने आई। उपराज्यपाल VK सक्सेना ने सोमवार को घोषणा की कि उन्होंने केंद्र सरकार की उस अधिसूचना को मंजूरी दे दी है जिसके तहत लद्दाख में  5 नए जिले बनाए जाएंगे। इसके साथ ही केंद्र शासित प्रदेश में जिलों की कुल संख्या 2 से बढ़कर 7 हो गई है।

एक पोस्ट में उपराज्यपाल ने इस कदम को क्षेत्र के लिए ‘ऐतिहासिक दिन’ बताया और कहा कि लोगों की लंबे समय से लंबित मांग अब पूरी हो गई है। उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, “लद्दाख के लिए एक ऐतिहासिक दिन। मैंने लद्दाख में 5 नए जिलों के गठन की अधिसूचना को मंजूरी दे दी है, जिससे लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं और लंबे समय से लंबित मांग को पूरा किया जा सके।”  

कौन-कौन से बने नए जिले?
-नुब्रा (Nubra)
-शाम (Sham)
-चांगथांग (Changthang)
-ज़ांस्कर (Zanskar)
-द्रास (Drass)

अभी लद्दाख में दो जिले हैं – लेह और कारगिल।
इन नए जिलों के जुड़ने से केंद्र शासित प्रदेश में कुल 7 जिले हो जाएंगे। उपराज्यपाल ने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित और समृद्ध लद्दाख के दृष्टिकोण के अनुरूप है। उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में गृह मंत्रालय ने अगनस्त 2024 में ही इस निर्णय को मंजूरी दे दी थी।

उपराज्यपाल सक्सेना के अनुसार, नए जिलों के गठन से जमीनी स्तर पर शासन को मजबूती मिलेगी, प्रशासन का विकेंद्रीकरण होगा और सार्वजनिक सेवाओं की त्वरित डिलीवरी सुनिश्चित होगी, विशेष रूप से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में। उन्होंने यह भी कहा कि इस कदम से विकास, रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है, साथ ही शासन को जनता के करीब लाया जा सकेगा। अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे कि लद्दाख के प्रत्येक नागरिक को इस परिवर्तनकारी निर्णय से लाभ मिले।

यह घटनाक्रम अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद हुआ, जिससे जम्मू और कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा समाप्त हो गया और क्षेत्र को दो केंद्र शासित प्रदेशों – जम्मू और कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया।

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US पैसिफिक एयर फोर्सेज कमांडर ने किया भारत दौरा, कहा- भारत और अमेरिका में रक्षा साझेदारी हुई मजबूत

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नई दिल्ली,एजेंसी। अमेरिकी  वायु सेना के जनरल केविन बी. श्नाइडर हाल ही में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और मज़बूत करने के लिए भारत आए थे। यह यात्रा 19 से 25 अप्रैल के बीच हुई, जिसके दौरान उन्होंने भारतीय रक्षा अधिकारियों के साथ कई अहम बैठकें कीं। इस दौरान, जनरल श्नाइडर ने भारतीय वायु सेना के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाक़ात की और दोनों देशों के बीच सैन्य सहयोग को और बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। इन चर्चाओं का मुख्य मकसद दोनों सेनाओं के बीच आपसी तालमेल (interoperability) को बेहतर बनाना और भविष्य के संयुक्त अभियानों के लिए तैयारी सुनिश्चित करना था।

पिछले कुछ सालों में भारत और अमेरिका के बीच रक्षा संबंध तेज़ी से मज़बूत हुए हैं। अब दोनों देश न सिर्फ हवाई क्षेत्र में, बल्कि जमीन, समुद्र, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्रों में भी अपना सहयोग बढ़ा रहे हैं। इससे दोनों देशों की सैन्य क्षमताओं और तालमेल में काफ़ी सुधार हो रहा है। इस यात्रा के दौरान लॉजिस्टिक्स,खास तौर पर सैन्य संसाधनों के आदान-प्रदान पर भी विशेष जोर दिया गया। एक मजबूत लॉजिस्टिक्स प्रणाली दोनों देशों को किसी भी आपात स्थिति या संकट के दौरान तेज़ी से प्रतिक्रिया देने में सक्षम बनाती है। यह मानवीय सहायता प्रदान करने और आपदा प्रबंधन प्रयासों में भी फायदेमंद साबित होगा।

जनरल श्नाइडर ने भारत भर में विभिन्न सैन्य और प्रशिक्षण केंद्रों का भी दौरा किया। यह इस बात का संकेत है कि दोनों देशों के बीच विश्वास और सहयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने नई तकनीकों और आधुनिक सैन्य क्षमताओं को विकसित करने के महत्व पर भी जोर दिया। अपनी यात्रा के दौरान, उन्होंने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों को श्रद्धांजलि दी और उन्हें ‘गार्ड ऑफ़ ऑनर’ दिया गया। इसके अलावा, उन्होंने भारतीय वायु सेना के प्रमुख, एपी सिंह से भी मुलाक़ात की। कुल मिलाकर, यह यात्रा इस बात का संकेत है कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और भी मजबूत होने की संभावना है। 

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हथियारों की दौड़ तेज: भारत का रक्षा बजट 92 अरब डॉलर पार, वर्ल्ड रैकिंग में 5वें नंबर पर पंहुचा देश

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नई दिल्ली,एजेंसी। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव और युद्धों के बीच दुनिया में सैन्य खर्च लगातार बढ़ रहा है। Stockholm International Peace Research Institute की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया का कुल सैन्य खर्च बढ़कर 2887 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो लगातार 11वें साल वृद्धि को दर्शाता है।
इस रिपोर्ट के मुताबिक, India ने भी अपने रक्षा बजट में बड़ा इजाफा किया है। भारत का सैन्य खर्च 8.9% बढ़कर 92.1 अरब डॉलर हो गया है, जिससे वह दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा सैन्य खर्च करने वाला देश बन गया है। यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए की गई है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष ने इस खर्च को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। इस संघर्ष में लड़ाकू विमान, ड्रोन और मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ था, जिसके बाद भारत ने अपनी सैन्य तैयारियों को और मजबूत करने पर जोर दिया।वहीं Pakistan ने भी अपने सैन्य खर्च में 11% की बढ़ोतरी की है, जो 11.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया। पाकिस्तान ने यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से चीन से नए हथियारों और सैन्य उपकरणों की खरीद के कारण की है।दूसरी तरफ China ने अपने रक्षा बजट में 7.4% की वृद्धि की, जो अब 336 अरब डॉलर हो गया है। यह लगातार 31वां साल है जब चीन ने अपने सैन्य खर्च में इजाफा किया है, जिससे उसकी सैन्य ताकत लगातार बढ़ रही है। वैश्विक स्तर पर सबसे ज्यादा सैन्य खर्च करने वाले देशों में United States पहले स्थान पर है, हालांकि उसका खर्च 2025 में 7.5% घटकर 954 अरब डॉलर रह गया।

इसके पीछे मुख्य कारण यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता में कमी बताया गया है। यूरोप और एशिया में सैन्य खर्च तेजी से बढ़ा है। यूरोप में 14% की वृद्धि देखी गई, जबकि एशिया और ओशिनिया में 8.1% की बढ़ोतरी हुई। इसका कारण रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य क्षेत्रीय तनाव हैं, जिनके चलते देशों ने अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने पर जोर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में वैश्विक GDP का 2.5% हिस्सा सैन्य खर्च पर खर्च किया गया, जो 2009 के बाद सबसे ज्यादा है। इससे साफ है कि दुनिया में बढ़ती अस्थिरता और सुरक्षा चिंताओं के कारण हथियारों की दौड़ लगातार तेज होती जा रही है। कुल मिलाकर, यह रिपोर्ट दिखाती है कि वैश्विक स्तर पर शांति की बजाय सैन्य ताकत को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे आने वाले समय में तनाव और बढ़ सकता है।

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बैरकपुर में रैली के दौरान पीएम मोदी बोले – अब मैं बंगाल 4 मई के बाद BJP के शपथ ग्रहण में आऊंगा

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बैरकपुर, एजेंसी। पीएम मोदी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले बैरकपुर में रैली को संबोधित कर रहे हैं। अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल के माहौल को देखकर मुझे लग रहा है कि मैं भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान फिर से आऊंगा।

बंगाल मेरी आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र: PM मोदी

जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि “बंगाल के प्रति मेरा लगाव ‘शक्ति’ की भक्ति जैसा रहा है। यह भूमि मेरी व्यक्तिगत आध्यात्मिक यात्रा का ऊर्जा केंद्र रही है। बंगाल की महान विभूतियों और यहाँ की ‘जनता जनार्दन’ के असीम प्रेम ने मुझे हमेशा प्रेरित किया है। इस धरती पर मुझे जो अनुभव मिले हैं, उन्हें मैं अपना सौभाग्य मानता हूँ।”

जीत का भरोसा और शपथ ग्रहण का निमंत्रण दिया

इस चुनाव अभियान की अपनी अंतिम रैली बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने पूरे बंगाल में जनता का मिजाज भांप लिया है। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा: “यह इस चुनाव में मेरी आखिरी रैली है। मैं इस भरोसे के साथ लौट रहा हूँ कि 4 मई को नतीजे आने के बाद, मुझे यहाँ भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए दोबारा आना पड़ेगा।”

जनता के संदेश और कलाकृतियों पर चर्चा

प्रधानमंत्री ने रैलियों और रोड-शो के दौरान मिलने वाले प्रेम का जिक्र करते हुए कहा कि वे लोगों द्वारा दिए गए चित्रों और पत्रों को सहेज कर रखते हैं। उन्होंने बताया कि वे रात के समय इन चित्रों को ध्यान से देखते हैं और लोगों के पत्रों में छिपे दर्द और आशीर्वाद को महसूस करते हैं।

बैरकपुर में दिखेगा त्रिकोणीय मुकाबला

बैरकपुर विधानसभा क्षेत्र में इस बार कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है:

  • भाजपा: पीएम मोदी यहाँ भाजपा उम्मीदवार कौस्तव बागची के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं।
  • TMC: सत्ताधारी दल की ओर से फिल्म निर्देशक और वर्तमान विधायक राज (राजू) चक्रवर्ती मैदान में हैं।
  • CPI(M): वामपंथी दल ने सुमन रंजन बंद्योपाध्याय को उम्मीदवार बनाया है।

आस्था और लोकतंत्र का संगम

इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री ने उत्तर कोलकाता में रोड-शो शुरू करने से पहले ऐतिहासिक ठंठनिया कालीबाड़ी मंदिर में मां काली का आशीर्वाद लिया था। यह मंदिर 1703 में स्थापित हुआ था और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

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