छत्तीसगढ़
शराब-घोटाला…चैतन्य की जमानत याचिका खारिज
कोल-लेवी केस में नवनीत-देवेंद्र के खिलाफ 1,500 पन्नों का चालान पेश, EOW ने कहा-कोसले को सौम्या ने बनाया था निज-सचिव
रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ शराब घोटाला मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की जमानत याचिका खारिज हो गई है। बुधवार को रायपुर ACB-EOW स्पेशल कोर्ट में सुनवाई हुई। इसके अलावा कोल लेवी घोटाला केस में आरोपी जयचंद कोसले की जमानत याचिका भी खारिज कर दी गई है।
इससे पहले सोमवार को चैतन्य बघेल को ACB-EOW की विशेष अदालत में पेश किया गया था। कोर्ट ने चैतन्य को 13 अक्टूबर तक न्यायिक रिमांड पर जेल भेजा है। सुप्रीम कोर्ट से 90 दिनों में जांच पूरी करने के आदेश के बाद EOW ने 14 दिन की कस्टोडियल रिमांड पर लेकर पूछताछ की। चैतन्य बघेल 18 जुलाई 2025 से जेल में हैं।
वहीं अवैध कोल लेवी वसूली मामले में EOW ने आरोपी देवेंद्र डडसेना और नवनीत तिवारी के खिलाफ लगभग 1,500 पन्नों का चालान रायपुर की स्पेशल कोर्ट में पेश किया। दोनों आरोपी फिलहाल केंद्रीय जेल रायपुर में बंद हैं। इसके पहले भी कोल लेवी मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हो चुकी है।
EOW के वकील सौरभ पांडेय ने बताया कि EOW की कोर्ट में आज स्कैम के 2 मामले में लगे थे। पहला कोल स्कैम का मामला था। कोल स्कैम में नवनीत तिवारी की गिरफ्तारी हुई थी। नवनीत के खिलाफ इन्वेस्टिगेशन पूरी होने के बाद 519 पेज का चालान पेश किया गया है।
EOW के वकील ने बताया कि इसके साथ ही जयचंद कोसले, जोकि नगर निगम का सामान्य कर्मचारी था, लेकिन सौम्या चौरसिया ने उसे निज सचिव के तौर पर काम करा रहीं थीं। कोल घोटाले के पैसों की हेरा-फेरी करने में मदद करने में चौरसिया और बाकी आरोपियों की जयचंद ने मदद की थी।
इस मामले में जमानत याचिका पेश की गई थी। जिसे कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। इसी के साथ चैतन्य बघेल की याचिका भी निरस्त कर दी गई है।
चैतन्य के खिलाफ चल रहे केस
शराब घोटाला और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चैतन्य बघेल को आरोपी बनाया है। आरोप है कि शराब घोटाले से प्राप्त कुल राशि में से 16.70 करोड़ रुपए चैतन्य के हिस्से में आए। इस अवैध धन को रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश कर कानूनी रूप देने का प्रयास किया गया।
ED ने बताया था कि चैतन्य बघेल ने ब्लैक मनी को सफेद दिखाने के लिए फर्जी निवेश रिकॉर्ड प्रस्तुत किए। इसके अलावा, उन्होंने सिंडिकेट के सहयोग से करीब 1000 करोड़ रुपए की धनराशि की हेराफेरी में भाग लिया।

ये तस्वीर पिछली बार चैतन्य बघेल को कोर्ट में पेश किया गया था तब की है।
चैतन्य के प्रोजेक्ट में 13-15 करोड़ का निवेश
ED की जांच में सामने आया है कि चैतन्य बघेल के विट्ठल ग्रीन प्रोजेक्ट (बघेल डेवलपर्स) में शराब घोटाले की धनराशि निवेश की गई थी। प्रोजेक्ट से जुड़े अकाउंटेंट्स के ठिकानों पर छापेमारी कर ED ने आवश्यक रिकॉर्ड जब्त किया था।
प्रोजेक्ट के कंसल्टेंट राजेन्द्र जैन के अनुसार, इस प्रोजेक्ट में वास्तविक खर्च 13-15 करोड़ रुपए था, जबकि रिकॉर्ड में केवल 7.14 करोड़ रुपए दर्शाए गए। जब्त डिजिटल उपकरणों से यह भी पता चला कि बघेल की कंपनी ने एक ठेकेदार को 4.2 करोड़ रुपए कैश भुगतान किया, जिसे रिकॉर्ड में शामिल नहीं किया गया।
फर्जी फ्लैट खरीदी के माध्यम से धनराशि की हेराफेरी
ED की जांच में पता चला कि त्रिलोक सिंह ढिल्लो ने 19 फ्लैट खरीदने के लिए 5 करोड़ रुपए बघेल डेवलपर्स को ट्रांसफर किए। इन फ्लैट्स को ढिल्लन ने अपने कर्मचारियों के नाम पर खरीदा, लेकिन भुगतान उन्होंने स्वयं किया।
जांच में ढिल्लन के कर्मचारियों से पूछताछ के दौरान पता चला कि फ्लैट्स उनके नाम पर खरीदे गए थे, लेकिन भुगतान ढिल्लो ने किया। यह पूरा लेन-देन 19 अक्टूबर 2020 को ही किया गया था। ED का कहना है कि यह लेन-देन पूर्व-योजना के तहत किया गया था, ताकि ब्लैक मनी को कानूनी रूप से चैतन्य बघेल तक पहुंचाया जा सके।
5 करोड़ कैश के बदले फर्जी ट्रांसफर
ED के अनुसार, भिलाई के एक ज्वेलर्स ने चैतन्य बघेल को 5 करोड़ रुपए उधार दिए, लेकिन जांच में यह सामने आया कि ये पैसे बघेल की दो कंपनियों को लोन के रूप में ट्रांसफर किए गए थे।
इसके बाद, उसी ज्वेलर्स ने बघेल की कंपनी से 6 प्लॉट खरीदे, जिनकी कीमत 80 लाख रुपए थी। ED ने बताया कि यह पैसा शराब घोटाले से आया कैश था, जिसे बैंक के माध्यम से ट्रांसफर करके कानूनी रूप में दिखाया गया।
छत्तीसगढ़
GGU लॉ डिपार्टमेंट पेपर लीक मामला, री-एग्जाम का नोटिफिकेशन रद्द:छात्रों के विरोध के बाद यूनिवर्सिटी प्रबंधन का फैसला, 27 जुलाई से होना था एग्जाम
बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी (GGU) ने 27 जुलाई को होने वाली BA-LLB के छठे सेमेस्टर की परीक्षा का नोटिफिकेशन रद्द कर दिया है। छात्रों के विरोध के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने यह फैसला लिया। अब इस परीक्षा का नोटिफिकेशन भी रद्द कर दिया है।
छात्रों ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और री-एग्जाम के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की। रजिस्ट्रार प्रो. अश्वनी दीक्षित और अन्य अधिकारियों ने छात्रों को समझाइश दी।
दोबारा परीक्षा के लिए समय नहीं, इसलिए विरोध
छात्रों का कहना था कि दोबारा परीक्षा के लिए उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया है, जिससे तैयारी करना संभव नहीं होगा। दोपहर से ही छात्र-छात्राएं अपनी मांगों को लेकर विभागाध्यक्ष (HOD) से चर्चा कर रहे थे।
हालांकि कोई समाधान नहीं निकलने पर उनका आक्रोश बढ़ गया। इसके बाद बड़ी संख्या में छात्र प्रशासनिक भवन पहुंच गए और विश्वविद्यालय प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि री-एग्जाम का नोटिफिकेशन वापस नहीं लिया गया तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। छात्रों के बढ़ते विरोध और हंगामे को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने आखिरकार री-एग्जाम की अधिसूचना निरस्त करने की घोषणा कर दी।
रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग
बीए-एलएलबी के विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर परीक्षा दोबारा कराने पर आपत्ति जताई थी। छात्रों का कहना था कि जिस फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट के आधार पर परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया है, उसे पारदर्शिता के लिए सार्वजनिक किया जाए। साथ ही री-एग्जाम संबंधी अधिसूचना वापस लेने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की गई है।
डेढ़ महीने तक दबी रही जांच रिपोर्ट
पेपर लीक मामले की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने 6 जून को अपनी रिपोर्ट विश्वविद्यालय प्रशासन को सौंप दी थी। इसके बावजूद करीब डेढ़ महीने तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल को कार्यकाल विस्तार मिलने के बाद मंगलवार (21 जुलाई) को अचानक परीक्षा निरस्त करने का आदेश जारी कर दिया गया। इसे लेकर भी छात्र सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कार्रवाई में इतनी देरी क्यों हुई।
समर्थ पोर्टल हैक नहीं, लॉगिन आईडी से लीक हुआ था पेपर
फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की जांच में सामने आया कि समर्थ पोर्टल हैक नहीं हुआ था, बल्कि लॉगिन आईडी और पासवर्ड के जरिए प्रश्नपत्र और अन्य डेटा लीक किया गया। कमेटी ने मामले की पुलिस जांच कराने की भी अनुशंसा की है।
जिसके बाद यूनिवर्सिटी ने विभागीय जांच समिति बनाई है, जिसमें प्रो. एससी श्रीवास्तव, प्रॉक्टर प्रो. मुकेश कुमार सिंह, प्रो. खेमचंद देवांगन, ओएसडी प्रो. भारती अहिरवार और असिस्टेंट रजिस्ट्रार (परीक्षा) टी.पी. सिंह शामिल हैं।

पहले हटाए जा चुके हैं लॉ विभाग के डीन और एचओडी
पेपर लीक मामले में सवाल उठने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पहले ही लॉ विभाग के तत्कालीन एचओडी एवं डीन प्रो. सुधांशु रंजन मोहापात्रा को पद से हटा दिया है। उनकी जगह इतिहास विभाग के प्रो. प्रवीण मिश्रा को लॉ विभाग का नया एचओडी और डीन बनाया गया है। छात्रों ने इस मामले की शिकायत राष्ट्रपति और विश्वविद्यालय के कुलाध्यक्ष तक भी पहुंचाई थी।
छत्तीसगढ़
शेयर ट्रेडिंग में रकम दोगुनी करने का झांसा:जांजगीर-चांपा में व्यापारी से 2.04 करोड़ की ठगी, आरोपी पति-पत्नी रायपुर से गिरफ्तार
जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा जिले में शेयर मार्केट में निवेश कर रकम दोगुनी करने का लालच देकर एक व्यापारी से 2 करोड़ 4 लाख 97 हजार 502 रुपये की ठगी करने वाले फरार पति-पत्नी को चांपा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपी लंबे समय से फरार थे। पुलिस ने नया रायपुर से उन्हें पकड़कर लैपटॉप, टैबलेट, मोबाइल फोन और चेकबुक जब्त किए हैं।
पुलिस के अनुसार, चांपा निवासी बैटरी व्यापारी हेमदत्त केशरवानी ने 24 मई को थाना चांपा में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि उनकी पहचान मारुति विहार कॉलोनी निवासी हरिशंकर गुप्ता और उनकी पत्नी रेखा गुप्ता से थी। हरिशंकर ने खुद को यूनियन बैंक चांपा का कर्मचारी बताया और शेयर ट्रेडिंग में निवेश करने पर रकम दोगुनी होने का भरोसा दिलाया।
2 करोड़ से ज्यादा निवेश कराया
आरोपियों के झांसे में आकर व्यापारी ने बैंक से लोन लेकर तथा अन्य लोगों के माध्यम से चेक और आरटीजीएस के जरिए 2.04 करोड़ रुपये से अधिक उनके खातों में जमा करा दिए। बाद में आरोपियों ने केवल 39 लाख 99 हजार 400 रुपये लौटाए और बाकी रकम देने में टालमटोल करते हुए फरार हो गए।
तकनीकी जांच से नया रायपुर में मिले
मामला दर्ज होने के बाद चांपा पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर की सूचना के आधार पर आरोपियों की लोकेशन नया रायपुर में ट्रेस की। पुलिस टीम ने दबिश देकर हरिशंकर गुप्ता (43) और रेखा गुप्ता (42) को हिरासत में लिया। पूछताछ में दोनों ने ठगी की बात स्वीकार कर ली।
इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और चेकबुक जब्त
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से लैपटॉप, टैबलेट, मोबाइल फोन और चेकबुक जब्त किए हैं। दोनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) एवं 3(5) के तहत कार्रवाई कर न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
कोरबा
कोरबा प्रेस क्लब में जयसिंह और अरुण साव आमने-सामने:शपथ ग्रहण समारोह में विकास पर सियासी बहस, उपलब्धियों और चुनावी नतीजों को लेकर तीखी नोकझोंक
कोरबा। कोरबा प्रेस क्लब के शपथ ग्रहण समारोह का मंच गुरुवार को उस समय राजनीतिक रंग में रंग गया, जब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने प्रदेश सरकार के ढाई साल के कार्यकाल पर सवाल उठाए। कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री अरुण साव और उद्योग मंत्री तथा स्थानीय विधायक लखनलाल देवांगन भी मौजूद थे।
अपने संबोधन में जयसिंह अग्रवाल ने कहा, “सरकार अपनी ढाई साल की सिर्फ ढाई उपलब्धियां ही बता दे।” उन्होंने कहा कि यदि विकास के दावे किए जा रहे हैं तो उन पर खुले मंच से सार्वजनिक बहस होनी चाहिए। साथ ही उन्होंने सरकार के किसी भी मंत्री को कोरबा के विकास कार्यों पर चर्चा की चुनौती दी।

डिप्टी सीएम अरुण साव ने चुनावी नतीजों का हवाला देकर किया पलटवार
कोरबा का दौरा करने की दी सलाह
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि उप मुख्यमंत्री अरुण साव लंबे समय बाद कोरबा आए हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित रहने के बजाय कोरबा, कुसमुंडा, गेवरा, दीपका, कटघोरा और बालको का दौरा करें, ताकि जिले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।
महापौर पर नरमी, सरकार पर सवाल
पूर्व मंत्री ने कहा कि कोरबा महापौर संजू देवी राजपूत का कार्यकाल अभी केवल 16 महीने का है, इसलिए उनके कामकाज पर सवाल उठाना उचित नहीं होगा। वहीं उन्होंने राज्य सरकार के ढाई साल के कार्यकाल को लेकर सवाल खड़े करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के समय भी अधिकारियों की गड़बड़ी का खुले मंच से विरोध किया जाता था।
अरुण साव का पलटवार
जयसिंह अग्रवाल के बयान के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया। समारोह के बाद मीडिया से बातचीत में उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने पलटवार करते हुए कहा, “पहले जयसिंह अग्रवाल अपने कार्यकाल का आत्ममंथन करें। पांच साल कांग्रेस की सरकार रही, महापौर भी उनके घर से थी, लेकिन जनता ने चुनाव में जवाब दे दिया।”
उन्होंने दावा किया कि वर्तमान भाजपा सरकार ईमानदारी और प्रतिबद्धता के साथ कोरबा सहित पूरे छत्तीसगढ़ के विकास के लिए काम कर रही है।
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