कोलकाता/तिरुवनंतपुरम/चेन्नई,एजेंसी। तृणमूल कांग्रेस पार्टी (TMC) ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की कुल 294 सीटों में से 291 सीटों पर अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। बाकी 3 सीटें सहयोगी बीजीपीएम को दी हैं।
ममता बनर्जी भबानीपुर से चुनाव लड़ेंगी। उनका मुकाबला भाजपा नेता सुवेंद्र अधिकारी से होगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में ममता ने कहा कि मैं BJP से कहना चाहती हूं कि आप डर क्यों रहे हैं। अगर लड़ना है तो गैस संकट पैदा मत कीजिए। मैदान में आकर सही तरीके से मुकाबला कीजिए।
– ममता ने सेलिब्रिटी चेहरों से दूरी बनाई। जमीनी नेता और कार्यकर्ताओं पर ज्यादा भरोसा जताया। 2021 में 15 सेलिब्रिटी को टिकट दिया था। इस बार 2 सेलिब्रिटीज को टिकट मिला है। – लिस्ट में 52 महिलाएं हैं। 47 उम्मीदवार अल्पसंख्यक समुदाय से हैं। – 40 साल से कम उम्र के 42 उम्मीदवारों को टिकट मिला। – लिस्ट में 95 कैंडिटेट्स SC/ST कैंडिडेंट्स हैं।
पश्चिम बंगाल- 3 बार से ममता बनर्जी ही मुख्यमंत्री
14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद पर रहीं।
चुनाव आयोग ने शानदार खेल दिखाया- ममता
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोलकाता में कहा, “उम्मीदवारों की सूची घोषित करने से पहले, मैं बंगाल की जनता का धन्यवाद करती हूं। मैं ‘मां माटी मानुष बंग्लार संस्कृति’ सभी को समर्पित करती हूं और 294 सीटों के लिए उम्मीदवारों की सूची जारी करती हूं। मैं भाजपा से कहना चाहती हूं – आप क्यों डर रहे हैं? अगर चुनाव लड़ना है तो गैस संकट पैदा मत कीजिए; सही तरीके से मैदान में उतरिए। चुनाव आयोग ने शानदार खेल दिखाया। भाजपा के पास कोई मौका नहीं है। इस बार आपकी सीटें पिछली बार के मुकाबले कम होंगी। यह पश्चिम बंगाल के अस्तित्व की लड़ाई है। बंगाल जीतेगा। ‘दिल्ली का लड्डू’ नहीं जीतेगा।
कांग्रेस आजकल आपस में ही लड़ रही है- पद्मजा
केरल के त्रिशूर निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए की उम्मीदवार पद्मजा वेणुगोपाल का कहना है, “कई लोग एनडीए में शामिल होंगे। कांग्रेस आजकल आपस में ही लड़ रही है…”
असम विधानसभा चुनावों से पहले काले धन पर अंकुश लगाने के लिए आयकर विभाग ने 24×7 कंट्रोल रूम बनाया
आयकर विभाग ने असम में आगामी विधानसभा चुनावों 2026 में काले धन के उपयोग की निगरानी और उस पर अंकुश लगाने के लिए 24×7 कंट्रोल रूम बनाया है। यह पहल आयकर निदेशालय (जांच), उत्तर पूर्वी क्षेत्र, गुवाहाटी द्वारा 9 अप्रैल, 2026 को होने वाले स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों को सुनिश्चित करने में भारत निर्वाचन आयोग की मदद के प्रयासों के तहत की गई है।
चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले 19 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का तबादला किया
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले एक और फेरबदल करते हुए, चुनाव आयोग ने मंगलवार को दो एडीजी सहित 19 वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के तबादलों का आदेश दिया। आईपीएस अधिकारी राजेश कुमार सिंह को दक्षिण बंगाल का नया अतिरिक्त महानिदेशक (एडीजी) नियुक्त किया गया, जबकि के जयरामन को उत्तर बंगाल का एडीजी बनाया गया। दोनों 1997 बैच के अधिकारी हैं। आसनसोल-दुर्गापुर, हावड़ा, बैरकपुर और चंदननगर के लिए नए पुलिस आयुक्तों (सीपी) की नियुक्ति की गई। प्रणव कुमार को पश्चिम बर्धमान के आसनसोल-दुर्गापुर का नया सीपी, अखिलेश कुमार चतुर्वेदी को हावड़ा का सीपी, अमित कुमार सिंह को उत्तर 24 परगना के बैरकपुर का नया सीपी और सुनील कुमार यादव को हुगली जिले के चंदननगर का सीपी नियुक्त किया गया। हालिया फेरबदल में 12 जिलों के SP भी बदले गए हैं।
चुनाव आयोग ने 1,100 से अधिक पर्यवेक्षकों की तैनाती की
चुनाव आयोग (ईसी) ने अगले महीने होने वाले राज्य विधानसभा चुनावों और विधानसभा उपचुनावों के लिए 1,111 पर्यवेक्षकों की तैनाती की है। पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी विधानसभाओं के चुनाव होने के साथ-साथ, कई राज्यों में विधानसभा उपचुनाव भी अप्रैल में होने हैं। चुनाव आयोग ने कहा कि पर्यवेक्षक ईसी की आंख और कान के रूप में काम करेंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हों। ईसी ने निर्देश दिया है कि पर्यवेक्षक गुरुवार तक अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों में पहुंच जाएं। ईसी ने कहा कि पहुंचने पर, पर्यवेक्षक अपने संपर्क विवरण सार्वजनिक करेंगे और उम्मीदवारों, राजनीतिक दलों या उनके प्रतिनिधियों, या जनता के किसी भी सदस्य से चुनाव संबंधी शिकायतों को सुनने के लिए प्रतिदिन एक निश्चित समय निर्धारित करेंगे।
केरल चुनाव: NDA ने ईसाई बहुल सीटों पर पिता-पुत्र को उतारा मैदान में
केरल विधानसभा चुनाव (9 अप्रैल) से पहले सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। NDA ने कोट्टायम जिले की दो ईसाई बहुल सीटों पूनजार और पालासे पिता-पुत्र की जोड़ी को उम्मीदवार बनाया है।
यह जोड़ी है वरिष्ठ नेता पी. सी. जॉर्ज और उनके बेटे शोन जॉर्ज की। पीसी जॉर्ज को पूनजार से उम्मीदवार बनाया गया है। शोन जॉर्ज को पाला सीट से मैदान में उतारा गया है।
पीसी जॉर्ज सात बार विधायक रह चुके हैं। पहले केरल जनपक्षम (सेक्युलर) पार्टी बनाई, बाद में विभिन्न केरल कांग्रेस गुटों से जुड़े रहे। उन्होंने 2016 में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी जीत दर्ज की थी। उनकी पार्टी का 2024 लोकसभा चुनाव से पहले BJP-NDA में विलय हो गया था।
रजनीकांत का टीवीके को जवाब- समय बोलता नहीं, बल्कि जवाब देता है
सुपरस्टार रजनीकांत ने मंगलवार को टीवीके के महासचिव आदव अर्जुन की उनके बारे में की गई “अपमानजनक टिप्पणियों” की निंदा की। रजनीकांत ने कहा कि समय ही जवाब देगा। X पर पोस्ट किए गए एक आधिकारिक संदेश में, अभिनेता ने अर्जुन की टिप्पणियों पर चिंता व्यक्त की और उन्हें “सत्य के विपरीत” बताया।
उन्होंने उन राजनीतिक नेताओं, प्रशंसकों और मीडिया सदस्यों के प्रति आभार भी व्यक्त किया जिन्होंने “अपमानजनक” टिप्पणियों की आलोचना की। “तमिलगा वेट्री कजगम (टीवीके) पार्टी में नेतृत्व की भूमिका निभाने वाले आधव अर्जुन ने हाल ही में मेरे बारे में एक ऐसी राय व्यक्त की जो सत्य के विपरीत थी। मैं तमिलनाडु विधानसभा के माननीय विपक्ष नेता श्री एडप्पाडी के. पलानीस्वामी, तमिलनाडु भाजपा अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन, केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन, तमिलनाडु के मंत्रियों मीडिया के सदस्यों और मेरे प्रिय प्रशंसकों (जिन्हें मैं भगवान मानता हूँ) का तहे दिल से आभार व्यक्त करना चाहता हूं।
मैं अपने प्रियजनों को उनके अपमानजनक बयानों की निंदा करने और मेरे समर्थन में आवाज उठाने के लिए धन्यवाद देता हूं। रजनकांत ने कहा- समय बोलता नहीं, बल्कि इंतजार करता है और जवाब देता है, उन्होंने आगे कहा।
अयोध्या, एजेंसी।‘चंपत राय बेदाग और निष्कलंक हैं। यह मैं अपने अनुभव के आधार पर कह रहा हूं। उनका भोलापन उनके लिए मुसीबत बन गया। उन्होंने सब पर विश्वास करके गलती की। लोगों की पहचान करने में उनसे चूक हुई।’
‘ट्रस्ट के दायित्व निभाने में कुछ कमियां रही हैं। अगर कोई कमी नहीं होती तो चोरी कैसे हो सकती थी? जहां कमी रही है, वहां सुधार किया जाएगा। चोरी करने वालों को सजा जरूर मिलनी चाहिए।’
ये बातें श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नए महासचिव गोविंद देव गिरि महाराज ने कहीं।
श्रीहरिकोटा, एजेंसी। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने गुरुवार देर रात 2:55 बजे EOS-05 इमेजिंग सैटेलाइट को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। इसे श्रीहरिकोटा से GSLV-F17 रॉकेट के जरिए अंतरिक्ष में भेजा गया।
EOS-05 करीब 36 हजार किलोमीटर की ऊंचाई पर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में रहकर तस्वीरें लेगा। ऐसा करने वाला भारत का यह पहला सैटेलाइट है। इससे पहले भारत के सभी इमेजिंग सैटेलाइट निचली कक्षा में थे।
EOS-05 भारत और आसपास के बड़े इलाकों की लगातार तस्वीरें भेज सकेगा। इससे पाकिस्तान-चीन सीमा समेत संवेदनशील और रणनीतिक इलाकों पर नजर रखने में मदद मिलेगी।
सैटेलाइट का इस्तेमाल बाढ़, चक्रवात और दूसरी प्राकृतिक आपदाओं की निगरानी के लिए भी किया जाएगा। इससे आपदा की स्थिति का जल्दी पता लगाने और समय पर चेतावनी देने में मदद मिलेगी।
इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने बताया कि संगठन का इस साल छह और मिशन लॉन्च करने का लक्ष्य है। करीब आठ महीने बाद ISRO का यह पहला लॉन्च है। इससे पहले जनवरी 2026 और मार्च 2025 में उसके दो मिशन सफल नहीं हो पाए थे।
सैटेलाइट EOS-05 को GSLV-F17 रॉकेट से लॉन्च किया गया।
GSLV-F17 श्रीहरिकोटा के लॉन्चपैड तक ले जाया गया।
ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचा EOS-05
GSLV-F17 भारत के जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल कार्यक्रम की 19वीं उड़ान थी। EOS-05 को श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के सेकेंड पैड से लॉन्च किया।
EOS-05 लॉन्च के करीब 18 मिनट बाद सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में पहुंचा दिया गया। इसके बाद सैटेलाइट को 36000km पर मौजूद अपनी अंतिम कक्षा तक पहुंचना है।
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में क्या फायदा है?
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट पृथ्वी से करीब 35,786 किमी ऊपर की कक्षा है। इसमें सैटेलाइट पृथ्वी का एक चक्कर करीब 24 घंटे में पूरा करता है। यानी उसकी गति पृथ्वी के घूमने के साथ बनी रहती है।
वहीं, LEO (लो-अर्थ ऑर्बिट) पृथ्वी के काफी करीब होती है और आमतौर पर 2,000 किमी से कम ऊंचाई पर होती है। यहां सैटेलाइट बहुत तेजी से पृथ्वी का चक्कर लगाता है, इसलिए वह किसी एक इलाके के ऊपर थोड़े समय के लिए ही रहता है।
जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट का फायदा यह है कि सैटेलाइट भारत और आसपास के बड़े इलाके पर लगातार नजर रख सकता है। इसकी तस्वीरों और डेटा से चक्रवात, भारी बारिश, बाढ़ और जंगल की आग जैसे खतरों की पहचान, निगरानी और नुकसान का आकलन तेजी से किया जा सकेगा।
दो खास कैमरों से बड़े इलाके की निगरानी
EOS-05 में दो मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजर यानी ऐसे कैमरे लगे हैं, जो धरती की तस्वीरें अलग-अलग तरह की प्रकाश तरंगों में लेते हैं।
इससे सामान्य तस्वीर के अलावा जमीन, पेड़-पौधों, पानी और पर्यावरण में हो रहे बदलावों की जानकारी मिल सकती है। इनमें से एक इमेजर की रिजॉल्यूशन 42 मीटर प्रति पिक्सल है, यानी तस्वीर का एक पिक्सल जमीन के करीब 42×42 मीटर हिस्से की जानकारी देता है।
EOS-05 की खासियत बहुत छोटी चीजों की बारीक तस्वीर लेना नहीं, बल्कि करीब 36 हजार किमी की ऊंचाई से बड़े इलाके की बार-बार तस्वीरें लेना है।
2021 में GISAT-1 मिशन हुआ था फेल
अगस्त 2021 में इसरो ने जीएसएलवी-एफ10 से GISAT-1 लॉन्च करने की कोशिश की थी। क्रायोजेनिक स्टेज में रॉकेट को समस्या आने के बाद मिशन फेल हो गया था। इसके चलते सैटेलाइट ऑर्बिट तक नहीं पहुंच पाया।
GISAT-1 को जियोस्टेशनरी ऑर्बिट से भारतीय उपमहाद्वीप की करीब-करीब रियल टाइम इमेजिंग के लिए तैयार किया गया था।
ISRO के पिछले 2 लॉन्च फेल हुए
PSLV-C62- 12 जनवरी 2026 को यह रॉकेट रक्षा DRDO के ‘अन्वेषा’ उपग्रह और 15 अन्य उपग्रहों को ले जा रहा था, लेकिन तीसरे चरण में बेकाबू होने के कारण मिशन फेल हो गया।
PSLV-C61-18 मई 2025 को इस मिशन का उद्देश्य अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-09 को कक्षा में स्थापित करना था, लेकिन तीसरे चरण में कंबशन चैंबर प्रेशर अचानक गिरने से मिशन असफल रहा।
आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से PSLV-C62 12 जनवरी को 10.18 बजे लॉन्च हुआ था।
श्रीनगर, एजेंसी। श्रीनगर एयरपोर्ट पर इंडिगो का विमान 6E 225 (VT-NOG) पार्किंग के दौरान खंभे से टकरा गया। फ्लाइट शुक्रवार सुबह नवी मुंबई से श्रीनगर पहुंची थी। घटना करीब सुबह 9 बजे बे नंबर-6 पर विमान को पार्क करते समय हुई। विमान में सवार सभी 200 यात्री और क्रू मेंबर सुरक्षित हैं। किसी के घायल होने की सूचना नहीं है।
घटना के बाद यात्रियों और क्रू को मैनुअल एयरक्राफ्ट सीढ़ियों की मदद से विमान से सुरक्षित उतारा गया। हादसे की वजह का पता लगाने के लिए जांच की जा रही है। फिलहाल श्रीनगर एयरपोर्ट का संचालन सामान्य है और सभी फ्लाइट्स निर्धारित समय के अनुसार चल रही हैं।
विमान जिस खंभे से टकराया, वह विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम (VDGS) का हिस्सा है। यह सिस्टम विमान को पार्किंग बे में सही जगह लाने और सुरक्षित तरीके से पार्क कराने में मदद करता है।
घटना से जुड़ी तस्वीरें…
खंभे से टकराने के कारण प्लेन की नोज यानी अगला हिस्सा टूट गया।
विमान की नोज यानी आगे का हिस्सा करीब एक फुट तक अंदर चला गया।
पोल से विमान के टकराने की संभावित वजहें…
विमान का अलाइनमेंट थोड़ा बिगड़ना- पार्किंग के दौरान विमान निर्धारित सेंटरलाइन से हट गया हो।
संकेत को सही तरह से फॉलो न कर पाना- VDGS के डिस्प्ले/लाइट के संकेत में भ्रम या मानवीय गलती।
पायलट की विजिबिलिटी कम होना- बारिश, धुंध, रात या किसी अन्य वजह से पोल/मार्किंग स्पष्ट न दिखना।
VDGS में तकनीकी खराबी- सिस्टम गलत दूरी या दिशा दिखा रहा हो।
विमान की गति या ब्रेकिंग में मामूली गड़बड़ी- पार्किंग में विमान को रोकते समय ब्रेक नहीं लग पाना।
VDGS विमान को पार्क करने में मदद करता है
विजुअल डॉकिंग गाइडेंस सिस्टम (VDGS) एयरपोर्ट के पार्किंग बे में लगा होता है। यह पायलट को विमान को सही सेंटरलाइन पर रखते हुए तय जगह पर रोकने में मदद करता है। डिस्प्ले के जरिए विमान की दिशा, सेंटरलाइन से उसकी स्थिति और रुकने की जगह के संकेत मिलते हैं।
आधुनिक VDGS विमान का प्रकार पहचानने के साथ यह भी बता सकता है कि पार्किंग पोजिशन तक कितनी दूरी बाकी है और विमान किस गति से आगे बढ़ रहा है। सेंसर विमान की स्थिति का पता लगाते हैं और उसी के आधार पर डिस्प्ले पर निर्देश दिए जाते हैं।
विमान के आगे का कवर रडार को सुरक्षित रखता है
विमान के सबसे आगे लगे बाहरी कवर को रेडोम कहते हैं। इसके पीछे आमतौर पर वेदर रडार होता है, जो उड़ान के दौरान बारिश, तूफान और खराब मौसम का पता लगाने में मदद करता है। रेडोम रडार को सुरक्षित रखता है, लेकिन रेडियो तरंगों को आसानी से आने-जाने देता है।
विमान की नोज और उसके आसपास पिटोट ट्यूब, एंगल ऑफ अटैक सेंसर, टेम्परेचर सेंसर और एंटीना जैसे उपकरण भी लगे होते हैं। इनमें से कई विमान की बाहरी सतह पर होते हैं।
टक्कर में रेडोम या वेदर रडार के अलावा सेंसर भी डैमेज हो सकते हैं। इससे विमान की गति, ऊंचाई या हवा से जुड़ी जानकारी प्रभावित हो सकती है। इसलिए नोज पर टक्कर के बाद विमान को उड़ाने से पहले उसकी पूरी जांच जरूरी होती है।