नई दिल्ली,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले के प्राचीर से पहली बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का जिक्र किया। उन्होंने 79वें स्वतंत्रता दिवस के संबोधन में कहा-
आज गर्व के साथ मैं इस बात का जिक्र करना चाहता हूं कि 100 साल पहले एक संगठन आरएसएस का जन्म हुआ। 100 साल की राष्ट्र सेवा गौरवपूर्ण है। आरएसएस ने व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण के संकल्प को लेकर 100 साल मां भारती के कल्याण के लिए अपना जीवन समर्पित किया। सेवा, समर्पण, संगठन और अप्रतिम अनुशासन जिसकी पहचान रही है, ऐसा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दुनिया का सबसे बड़ा NGO है।
इस पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा- प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में आरएसएस का जिक्र मोहन भागवत को खुश करने के लिए किया, क्योंकि मोदी अब पूरी तरह उनके भरोसे हैं। सितंबर के बाद जब वे 75 साल के हो जाएंगे, तो पद पर बने रहे के लिए मोहन भागवत की मदद पर निर्भर हैं।
भाजपा ने 75 साल की उम्र पर कई नेता रिटायर किए
पीएम मोदी 17 सितंबर को 75 साल के हो जाएंगे। विपक्ष के कई नेता 2024 के चुनाव से पहले और बाद में उनके 75 की उम्र पूरी करते ही रिटायर होने के चर्चा कर चुके हैं।
मई, 2024 में अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि अगर भाजपा लोकसभा चुनाव जीत गई तो मोदी अगले साल तक ही प्रधानमंत्री रहेंगे। PM मोदी ने खुद यह नियम (75 साल की उम्र में रिटायरमेंट) बनाया है।
दरअसल 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा में 75 साल की उम्र से ज्यादा के नेताओं को रिटायर करने का ट्रेंड शुरू। पहली बार प्रधानमंत्री बने नरेंद्र मोदी ने अपनी कैबिनेट में इससे कम उम्र के नेताओं को ही जगह दी थी।
लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी को मार्गदर्शक मंडल में शामिल किया गया। 2016 में जब गुजरात की मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल ने इस्तीफा दिया तो उस समय उनकी उम्र भी 75 साल थी। उसी साल नजमा हेपतुल्लाह ने भी मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दिया, जिनकी उम्र 76 साल थी।
2019 लोकसभा चुनाव से पहले तब के भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने एक इंटरव्यू में कहा- 75 साल से ऊपर के किसी भी व्यक्ति को टिकट नहीं दिया गया है। यह पार्टी का फैसला है। उस चुनाव में सुमित्रा महाजन और हुकुमदेव नारायण यादव जैसे नेताओं को टिकट नहीं दिया गया।
इसी तरह 2024 लोकसभा चुनाव में राजेंद्र अग्रवाल, संतोष गंगवार, सत्यदेव पचौरी, रीता बहुगुणा जोशी का टिकट 75 साल से ज्यादा उम्र की वजह से काट दिया गया था।
मार्च, 2023 में भाजपा के एक कार्यक्रम में PM मोदी के साथ दीप जलाते मार्गदर्शक मंडल में शामिल वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी। 2019 लोकसभा चुनाव में उनका टिकट काट दिया गया था।
शाह बोले- मोदी पर 75 साल का बैरियर लागू नहीं होगा
मई 2024 में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था, ‘मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि भाजपा के संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। मोदी जी 2029 तक देश का नेतृत्व करेंगे। मोदी जी आने वाले चुनावों में भी नेतृत्व करेंगे।’
इसी तरह पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कहा था कि भाजपा के संविधान में कहीं भी आयु को लेकर ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। अगले 5 साल के कार्यकाल में मोदी जी देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। मोदी जी हमारे नेता हैं। भविष्य में भी हमारा नेतृत्व करते रहेंगे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ANI को दिए इंटरव्यू में कहा था, ‘मैं BJP का वरिष्ठ नेता होने के नाते ये कहना चाहता हूं कि 2024 में भी वो (नरेंद्र मोदी) भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे। 2029 में भी वो भारत के प्रधानमंत्री बनेंगे।’
लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा-आरएसएस में खटपट की खबरें
नड्डा बोले थे- पहले RSS की जरूरत थी, आज BJP सक्षम
2024 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने द इंडियन एक्सप्रेस को एक इंटरव्यू दिया था। 19 मई, 2024 के इस इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि RSS सांस्कृतिक संगठन है, जबकि BJP राजनीतिक संगठन है। शुरुआत में हम कम सक्षम और छोटे थे। उस समय हमें RSS की जरूरत थी। आज हम बड़े हो गए हैं और हम सक्षम है। सक्षम हैं तो BJP अपने आप को चलाती है।
इस बयान के बाद भाजपा-आरएसएस में खटपट की खबरें आने लगी थीं।
31 मार्च 2025: पहली बार बतौर पीएम आरएसएस मुख्यालय पहुंचे थे मोदी
प्रधानमंत्री मोदी रविवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) मुख्यालय केशव कुंज पहुंचे। वे सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक यहां रहे। उन्होंने संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार और दूसरे सरसंघचालक माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) के स्मारक स्मृति मंदिर पहुंचकर श्रद्धांजलि दी।
बतौर प्रधानमंत्री मोदी का यह संघ मुख्यालय का पहला दौरा था। इससे पहले जुलाई 2013 में वह लोकसभा चुनाव के सिलसिले में हुई बैठक में शामिल होने नागपुर आए थे। प्रधानमंत्री ने संघ के माधव नेत्रालय के एक्सटेंशन बिल्डिंग की आधारशिला रखी।
प्रधानमंत्री मोदी नागपुर के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) मुख्यालय केशव कुंज पहुंचे थे। मोहन भागवत के साथ मिलकर संघ के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार को श्रद्धांजलि दी।
स्वतंत्रता दिवस पर PM मोदी 103 मिनट बोले
79वें स्वतंत्रता दिवस पर PM मोदी ने लालकिले पर लगातार 12वीं बार तिरंगा फहराया। इस दौरान उन्होंने अब तक का सबसे लंबा भाषण दिया। PM ने 103 मिनट के भाषण की शुरुआत ऑपरेशन सिंदूर से की। इस पर 13 मिनट से ज्यादा बोले।
उन्होंने आतंकवाद, सिंधु समझौता, आत्मनिर्भरता, मेड इन इंडिया, नक्सलवाद और अवैध घुसपैठियों पर अपनी बात रखी। उन्होंने पहली बार लाल किले से RSS का जिक्र किया।
PM मोदी ने तिरंगा फहराया। PM की फ्लैग बियरर फ्लाइंग ऑफिसर रशिका शर्मा रहीं। 1721 फील्ड बैटरी (सेरेमोनियल) के वीर तोपचियों ने 21 तोपों की सलामी दी।
स्वतंत्रता दिवस पर पीएम मोदी की 2 घोषणाएं…
GST रिफॉर्म: इस दिवाली पर सरकार GST रिफॉर्म ला रही है। इससे आम लोगों को टैक्स में बड़ी राहत मिलेगी।
23.5 करोड़ नौजवानों को रोजगार: आज से प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना लागू की जा रही है। इस योजना के तहत निजी क्षेत्र में पहली नौकरी पाने वाले बेटे-बेटी को 15 हजार रुपए सरकार की तरफ से दिए जाएंगे। कंपनियों को भी जो ज्यादा रोजगार जुटाएगा, उन्हें प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह योजना करीब 3.5 करोड़ नौजवानों के लिए रोजगार के अवसर बनाएगी।
नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी, NALSAR से जुड़े विवाद पर काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को फटकार लगाई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि भले ही छात्रों का फैसला गलत हो या उन्हें किसी ने गलत सलाह दी हो, फिर भी उन्हें अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है।
जस्टिस सूर्यकांत ने BCI के उस सर्कुलर पर भी नाराजगी जताई जिसमें NALSAR के 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स का वकील के तौर पर एनरोलमेंट रोकने को कहा गया था। CJI ने कहा- यह मेरे और छात्रों के बीच का मामला है। इसे मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं थी। बार काउंसिल इसमें दखल देने वाला कौन होता है?
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस भी जारी किया और यूनिवर्सिटी के किसी छात्र या फैकल्टी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया। NALSAR के करीब 450 छात्र जस्टिस सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह 2026का चीफ गेस्ट बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं।
CJI की टिप्पणी से नाराज हैं छात्र
NALSAR यानी नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च, हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी है। यहां करीब 1,400 छात्र पढ़ते हैं। इनमें से करीब 450 छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिखकर CJI को चीफ गेस्ट बनाने का न्योता वापस लेने की मांग की थी। समारोह की तारीख अभी तय नहीं है।
छात्रों की नाराजगी CJI की पिछले महीने की एक टिप्पणी को लेकर थी। यह टिप्पणी दिल्ली में NEET प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान की गई थी।
बार काउंसिल ने सभी 2026 ग्रेजुएट्स का एनरोलमेंट रोक दिया था
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 13 अगस्त को सभी स्टेट बार काउंसिलों को निर्देश दिया कि NALSAR के 2026 बैच के किसी भी ग्रेजुएट को अगले आदेश तक वकील के तौर पर एनरोल न किया जाए।
साथ ही यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर से तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई थी। यूनिवर्सिटी से उन लोगों की पहचान करने को कहा गया, जो कैंपेन शुरू करने, उसका ड्राफ्ट तैयार करने, उसे फैलाने, छात्रों को जुटाने, मीडिया से संपर्क करने, ऑनलाइन ग्रुप चलाने या बहिष्कार की अपील करने में मुख्य भूमिका में थे।
काउंसिल ने अपने शुरुआती लेटर में कहा था कि कानून के छात्र से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद के प्रति सम्मान की उम्मीद की जाती है। सम्मान न करने वाले छात्र भविष्य में जिम्मेदार वकील, शिक्षक या जज बनने की भूमिका के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते। BCI ने यह भी आरोप लगाया था कि कुछ शिक्षकों के बीच ग्रुपिज्म और गंदी राजनीति ने छात्रों को कैंपेन के लिए उकसाने में भूमिका निभाई।
कुछ घंटे बाद ही BCI ने आदेश बदला
आदेश जारी होने के कुछ घंटे बाद BCI ने अपना रुख बदल दिया। काउंसिल ने कहा कि NALSAR के 2026 बैच के ज्यादातर छात्र निर्दोष हैं और वे CJI के अनादर वाले किसी अभियान में शामिल होने के इच्छुक नहीं थे। BCI ने कहा कि कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों ने निर्दोष छात्रों को इस अभियान में शामिल करने की कोशिश की।
इसके बाद सभी छात्रों को अपनी पसंद की स्टेट बार काउंसिल में एनरोल होने की अनुमति दे दी गई। हालांकि उस समय BCI ने कहा था कि वह NALSAR के वाइस चांसलर की रिपोर्ट का इंतजार करेगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी BCI के एक्शन पर सवाल उठाए
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के शुरुआती आदेश पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और सीनियर वकील विकास सिंह ने भी आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे मनमाना, गैरकानूनी और जरूरत से ज्यादा कार्रवाई बताते हुए कहा था कि छात्रों को अपनी बात रखने के कारण वकालत में प्रवेश से वंचित करने की धमकी नहीं दी जानी चाहिए।
CJI सूर्यकांत के हाल की 3 बयान, जिसपर विवाद हुए
15 मई: CJI ने कहा था- कुछ युवा कॉकरोच की तरह भटक रहे
सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान युवाओं पर टिप्पणी की थी। CJI सूर्यकांत ने कहा था- कॉकरोच की तरह ऐसे युवा हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। इनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया और कुछ RTI और दूसरे तरह के एक्टिविस्ट बन रहे हैं। ये हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।’
इस बयान के बाद ही 16 जुलाई को अभिजीत दीपके नाम के शख्स ने कॉकरोच जनता पार्टी नाम से सोशल मीडिया पेज बनाया। इसने ही दिल्ली जंतर-मंतर पर 35 दिन तक प्रदर्शन किया था।
22 जुलाई: CJI ने कहा था- हमें वीडियो देखने में दिलचस्पी नहीं है
दरअसल, 22 जुलाई को एक वकील ने CJI की अगुआई वाली 3 जजों की बेंच के सामने जनहित याचिका लगाई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील ने कहा- छात्र महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे हैं। लेकिन उन पर पुलिस की बर्बरता के वीडियो भी हैं। यदि संभव हो तो मामले की सुनवाई जल्द की जाए।
इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा था, ‘हमें वीडियो में दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास देखने का समय नहीं है।’ जब वकील ने छात्रों के साथ मारपीट के वीडियो देखने का दूसरी बार अनुरोध किया तो CJI ने कहा, ‘हमारा और अपना समय बर्बाद मत कीजिए।
24 जुलाई: CJI ने कहा था- किसी भी याचिका की सुनवाई से इनकार नहीं किया
प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की हिंसा से जुड़ी 2 याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें कई राज्य पक्षकार के तौर पर शामिल हैं। इनका जिक्र पहले इसलिए नहीं किया गया क्योंकि वे डायरी नंबर का इंतजार कर रहे थे। इन दलीलों के बाद CJI ने कहा, “इसे लिस्टिंग में आने दें, हम इस पर सुनवाई करेंगे।”
नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सरकार ने जनगणना-2027 के लिए 40 सवालों की लिस्ट जारी कर दी है। इसमें लोगों से SC, ST या अन्य जाति के बारे में पूछा जाएगा। आजादी के बाद यह पहली बार होगा जब सभी समुदायों की जाति की जानकारी जनगणना में दर्ज की जाएगी।
इससे पहले 2011 की जनगणना के फॉर्म में 29 सवाल थे। इसमें जाति से जुड़ी जानकारी के लिए सिर्फ SC/ST का विकल्प था। जनगणना-2027 के सवालों की लिस्ट में जाति से जुड़ा सवाल नंबर 10 पर है, जिसमें SC/ST के साथ जाति शब्द भी जोड़ा गया है।
खास बात यह है कि लोगों से कोविड वैक्सीन कहां लगवाई थी, यह सवाल भी पूछा जाएगा। इसके साथ मोबाइल नंबर, आधार, वोटर ID और बैंक अकाउंट से जुड़े सवाल भी होंगे।
1. पहचान और परिवार: 12 सवालों में नाम से जाति तक जानकारी
जनगणना में व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्मतिथि और उम्र पूछी जाएगी। साथ ही वैवाहिक स्थिति, शादी के समय उम्र, पति या पत्नी का नाम, राष्ट्रीयता, धर्म और SC/ST/जाति की जानकारी ली जाएगी। माता-पिता की जानकारी भी दर्ज होगी।
2. शिक्षा और भाषा: 5 सवालों में पढ़ाई और डिजिटल साक्षरता
इस हिस्से में दिव्यांगता, मातृभाषा और दूसरी भाषाएं, साक्षरता और डिजिटल साक्षरता की जानकारी ली जाएगी। साथ ही शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाई की स्थिति और उच्चतम शैक्षणिक योग्यता, स्ट्रीम या विषय पूछा जाएगा।
3. रोजगार: 8 सवालों में काम और नौकरी की जानकारी
व्यक्ति ने पिछले एक साल में काम किया या नहीं, उसकी आर्थिक गतिविधि, व्यवसाय और काम का क्षेत्र पूछा जाएगा। इसके अलावा कामगार की श्रेणी, गैर-आर्थिक गतिविधि, काम की तलाश या उपलब्धता और काम की जगह तक आने-जाने की जानकारी भी ली जाएगी।
4. जन्म और माइग्रेशन: 8 सवालों में जन्मस्थान से बच्चों तक की जानकारी
इस सेक्शन में जन्म स्थान, पिछला निवास स्थान, माइग्रेशन का कारण और वहां रहने की अवधि पूछी जाएगी। स्थायी निवास का पता भी दर्ज होगा। महिलाओं से जीवित बच्चों, अब तक जन्मे बच्चों और पिछले एक साल में जन्मे बच्चों की संख्या भी पूछी जाएगी।
5. बैंक डिटेल्स और आधार नंबर: 7 सवालों में डॉक्यूमेंट्स की जानकारी
इसमें कोविड-19 वैक्सीन कहां लगवाई, कुल बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर पूछा जाएगा। साथ ही आधार नंबर, वोटर ID, पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध है या नहीं इसकी जानकारी भी ली जाएगी।
देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी
जनगणना 2027 देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। डेटा डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जाएगा और लोगों को खुद अपनी जानकारी देने यानी सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प भी मिलेगा। जनगणना की कानूनी प्रक्रिया सेंसस एक्ट, 1948 और सेंसस रूल्स, 1990 के तहत होगी।
केंद्र के मुताबिक, लोगों की दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सेंसस एक्ट की धारा 15 के तहत इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, RTI के तहत नहीं दिया जा सकता और किसी कोर्ट में सबूत के तौर पर भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जनगणना पहले 2021 में होने वाली थी। इसे कोरोना महामारी के कारण टाल दिया गया था।
जनगणना के लिए 11,718 करोड़ का बजट मंजूर
केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 11,718.24 करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दी है। जनगणना पूरे देश में केंद्र के समन्वय से होगी। राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें इसके क्रियान्वयन में मदद करेंगी।
लुधियाना/महाराष्ट्र,एजेंसी। महाराष्ट्र के नांदेड़ में गुरुवार को शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर हमला हुआ। पुलिस के मुताबिक, गुरुद्वारा माता साहिब कौर में एक निहंग ने उन पर कृपाण से हमला किया। बादल के हाथ में चोट लगी है। हमले के दौरान उनकी सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी भी घायल हो गया। घटना दोपहर करीब 1 बजे की बताई जा रही है। पुलिस ने हमले के आरोपी निहंग जसपाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। सुखबीर बादल परिवार के साथ नांदेड़ के गुरुद्वारे में माथा टेकने पहुंचे थे। हमले के बाद उन्हें यशोसाई अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
सुखबीर बादल पर 4 दिसंबर 2024 को भी हमला हुआ था। गोल्डन टेंपल में सेवादार की धार्मिक सजा भुगतने के दौरान उन पर फायरिंग की गई थी।
सुखबीर सिंह बादल ने अपने परिवार के साथ तख्त श्री हजूर साहिब में मत्था टेका।
हमले के बाद सुखबीर सिंह बादल को अस्पताल ले जाया गया।
यशोसाईं अस्पताल के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
हमले से पहले बादल अपनी पत्नी हरसिमरत कौर बादल के साथ नांदेड़ में तख्त श्री हजूर साहिब गए थे।
महाराष्ट्र सीएम फडणवीस ने जांच के आदेश दिए
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने नांदेड़ के पुलिस अधीक्षक से बात की और सुखबीर सिंह बादल पर हुए हमले की जांच के आदेश दिए।
इस हमले के दौरान बादल के सुरक्षाकर्मी संतोष हेगड़े ने भी हमलावर को रोकने का प्रयास किया, जिसमें वह भी घायल हुआ। हमलावर को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। घटना से जुड़े CCTV फुटेज तथा चश्मदीद लोगों से जानकारी जुटाई जा रही है।
हमलावर को सम्मानित करने का दावा
इस घटना के बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि हमला करने वाले निहंग जसपाल सिंह को सम्मानित किया गया। हालांकि, वीडियो को लेकर किए जा रहे दावे की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
दावा है कि जिस निहंग को दस्तार बांधा जा रहा है उसी ने हमला किया है। मौके पर एक पुलिसवाला भी मौजूद है, जो बाद में इसे पकड़कर ले गया।
अकाली दल के प्रवक्ता बोले- सिख धर्म विरोधी ताकतों की साजिश
इस मामले में अकाली दल के प्रवक्ता एडवोकेट अर्शदीप सिंह कलेर ने कहा कि सुखबीर बादल पूरी तरह स्वस्थ हैं। मामला महाराष्ट्र का है, इसलिए वहां की पुलिस जांच करेगी कि हमलावर कौन है?। उसने किसके कहने पर हमला किया?।उन्होंने आरोप लगाया कि इसके पीछे कुछ सिख धर्म विरोधी ताकतों की साजिश हो सकती है।
अकाल तख्त जत्थेदार ने कहा- हमलावर सच्चा सिख नहीं
इस बारे में सिखों की सर्वोच्च संस्था श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा कि गुरुद्वारा साहिब ऐसी जगह है, जहां श्रद्धालु सभी की भलाई के लिए अरदास करने आते हैं। सच्चा सिख किसी ऐसे व्यक्ति पर हमला नहीं कर सकता, जो गुरुद्वारा साहिब में माथा टेकने आया हो। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से गुरुद्वारों की मर्यादा को ठेस और पूरे सिख समुदाय की छवि को नुकसान पहुंची है।
2024 में भी हुआ था हमला
गोल्डन टेम्पल में सुखबीर सिंह बादल पर दिसंबर 2024 में हुए हमले की तस्वीर।
एक बुजुर्ग व्यक्ति भीड़ के बीच से धीरे-धीरे सुखबीर बादल की ओर बढ़ा। उसने अपनी जेब से 9mm की पिस्टल निकाली और सीधे बादल पर निशाना साधकर गोली चला दी।
सुखबीर सिंह बादल पर 4 दिसंबर 2024 को अमृतसर के गोल्डन टेंपल के प्रवेश द्वार पर जानलेवा फायरिंग की गई थी। इसमें वह बाल-बाल बच गए थे।
यह हमला उस समय हुआ था जब वह अकाल तख्त की ओर से सुनाई गई एक धार्मिक सजा (तनखैया) काट रहे थे।
सुखबीर बादल को सिखों की सर्वोच्च संस्था अकाल तख्त ने धार्मिक रूप से दोषी घोषित किया था। यह सजा अकाली दल सरकार के दौरान हुई गुरु ग्रंथ साहिब की बेअदबी की घटनाओं के प्रायश्चित के रूप में दी गई थी।
उस दिन उनकी सजा का दूसरा दिन था। पैर में फ्रैक्चर होने के कारण वह व्हीलचेयर पर बैठे थे। गले में पट्टी लटकी हुई थी, नीली पोशाक पहने थे और हाथ में भाला लेकर द्वार पर पहरेदार के रूप में सेवा दे रहे थे।