Connect with us

छत्तीसगढ़

Modi@75… नरेन्द्र मोदी युगांतरकारी नेतृत्व के प्रतीक

Published

on

आज नरेंद्र मोदी का नाम विश्व के शीर्ष नेताओं में गिना जाता है। टाइम और फोर्ब्स जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाएँ उन्हें दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल करती हैं। अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान जैसे देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके व्यक्तिगत रिश्ते भारत की कूटनीति को नई ऊँचाइयों तक ले गए हैं।

नरेंद्र मोदी आज केवल भारत के प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि वैश्विक परिदृश्य के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं। उनका व्यक्तित्व और कृतित्व भारतीय लोकतंत्र की गौरवगाथा को नई ऊँचाइयों तक ले गया है। साधारण परिवार में जन्मा एक बालक, जिसने जीवन के संघर्षों को तपस्या की तरह जिया, आज विश्व राजनीति ही नहीं, सम्पूर्ण मानवता का मार्गदर्शक बन गया है। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि यदि व्यक्ति में अटूट परिश्रम, कर्मनिष्ठा और राष्ट्रनिष्ठा का अदम्य संकल्प हो, तो वह इतिहास की धारा को भी मोड़ सकता है। नरेंद्र मोदी का उदय किसी एक व्यक्ति की उपलब्धि भर नहीं है, बल्कि यह भारत की जाग्रत चेतना और आत्मविश्वास का प्रतीक है। इक्कीसवीं सदी के भाल पर अपने कर्त्तृत्व की जो अमिट रेखाएं उन्होंने खींची हैं, वे विश्व राजनीति, मानवता एवं राष्ट्रीयता के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगी। राजनीति-क्रांति के साथ-साथ वे व्यक्ति-क्रांति एवं समाज-क्रांति के सूत्रधार है। उनके विराट व्यक्तित्व को किसी उपमा से उपमित करना उनके व्यक्तित्व को ससीम बनाता है। उनके लिये तो इतना ही कहा जा सकता है कि वे अनिर्वचनीय हैं। इस वर्ष उनका 75वां जन्मोत्सव मनाते हुए समूचा राष्ट्र अपूर्व गर्व और गौरव की अनुभूति कर रहा है।

मोदी का व्यक्तित्व अनेक विलक्षणताओं का समवाय है, वह कठोर परिश्रम और मिशनरी दृष्टिकोण का जीवंत उदाहरण है। उनके दिन और रात का प्रत्येक क्षण राष्ट्र के लिए समर्पित रहता है। वे चौबीस घंटे भारत के लिए जीते हैं और योजनाओं को केवल कागजों पर नहीं छोड़ते, बल्कि उन्हें धरातल पर उतारते हैं। उनका मंत्र “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक जीवन को नई दिशा देने वाला दर्शन है। उन्होंने राजनीति को सत्ता की होड़ से निकालकर सेवा और राष्ट्रनिर्माण का साधन बना दिया। काल के अनंत प्रवाह में 75 वर्षों का मूल्य बहुत नगण्य होता है, पर मोदी ने उद्देश्यपूर्ण जीवन जीकर जो ऊंचाइयां और उपलब्धियां हासिल की हैं, वे किसी कल्पना की उड़ान से भी अधिक है। अपने जीवन के सार्थक प्रयत्नों से उन्होंने इस बात को सिद्ध किया है कि साधारण पुरुष वातावरण से बनते हैं, किन्तु महामानव वातावरण बनाते हैं। समय और परिस्थितियां उनका निर्माण नहीं करती, वे स्वयं समय और परिस्थितियों का निर्माण करते हैं। साधारण पुरुष जहां अवसर को खोजते रहते हैं, वहां महापुरुष नगण्य अवसरों को भी अपने कर्तृत्व की छेनी से तराश कर महान् बना देते हैं।

नरेन्द्र मोदी का जन्म एवं पालन-पोषण वडनगर, बॉम्बे राज्य (वर्तमान गुजरात) में 17 सितंबर 1950 को हुआ। जहाँ उन्होंने अपनी माध्यमिक शिक्षा पूरी की। आठ साल की उम्र में उनका आरएसएस से परिचय हुआ और वे 1971 में गुजरात में संगठन के पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन गए। और 1998 में महासचिव बने। वे भारतीय राजनीति के जुझारू, कर्मठ एवं जीवट वाले नेता हैं जो 2014 से भारत के प्रधानमंत्री के रूप में कार्यरत हैं। मोदी 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहे और वाराणसी से सांसद हैं। इस वर्ष अपने 75वें जन्मदिन पर मोदी मध्य प्रदेश के धार जिले के भैंसोला गांव में रहेंगे। इस दिन प्रधानमंत्री मेगा इंटीग्रेटेड टेक्सटाइल रीजन एंड एपेरल पार्क का भूमि पूजन करेंगे। कपास आधारित उद्योगों पर आधारित यह पार्क 6 लाख किसानों को फायदा देगा। इसके अलावा स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान का शुभारंभ करेंगे, इस अभियान का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर उनकी पहुंच को बेहतर करना, गुणवत्तापूर्वक देखभाल और जागरूकता सुनिश्चित करना है। इसके अलावा महिलाओं के लिए कई अन्य योजनाओं की भी शुरुआत होगी।

मोदी के नेतृत्व में भारत ने जिन उपलब्धियों को हासिल किया है, वे युगांतरकारी कही जा सकती हैं। आर्थिक क्षेत्र में जीएसटी, डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया, मेक इन इंडिया जैसी योजनाओं ने देश को नई गति दी। सामाजिक क्षेत्र में स्वच्छ भारत अभियान, उज्ज्वला योजना, जन धन योजना, आयुष्मान भारत जैसी पहल ने करोड़ों गरीबों को सम्मानजनक जीवन का आधार दिया। राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक ने भारत की नई आक्रामक और निर्णायक छवि प्रस्तुत की। इन सबके बीच सबसे महत्वपूर्ण यह रहा कि मोदी ने भारतीय समाज में आत्मविश्वास का संचार किया और यह भावना मजबूत की कि भारत अब किसी से पीछे नहीं रहेगा। वैश्विक मंच पर नरेंद्र मोदी ने भारत की प्रतिष्ठा को नई ऊँचाइयों पर पहुँचाया। संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनके विचार, जी-20 शिखर सम्मेलन में भारत की अध्यक्षता, कोप-26 जैसे पर्यावरण मंचों पर उनकी स्पष्ट प्रतिबद्धता, विश्व को यह संदेश देती है कि भारत अब केवल दर्शक नहीं, बल्कि निर्णायक भूमिका निभाने वाला राष्ट्र है। कोविड महामारी के दौरान वैक्सीन मैत्री योजना ने यह सिद्ध कर दिया कि भारत अपनी सीमाओं से परे जाकर पूरी मानवता के लिए सोचता है। यही कारण है कि आज भारत को विश्वगुरु की भूमिका निभाने वाला देश माना जाने लगा है और नरेंद्र मोदी इस नई पहचान के प्रेरक बने हैं।

मेरे लिए भी नरेंद्र मोदी का व्यक्तित्व केवल दूर से देखने का विषय नहीं रहा, बल्कि उनके साथ जुड़े अनेक आत्मीय अनुभव आज भी मेरे जीवन की स्मृतियों में ताज़ा है। वर्ष 2007 में जब मैं सुखी परिवार फाउंडेशन के महामंत्री के रूप में कार्य कर रहा था, तब गुजरात के आदिवासी अंचल कवांट में एक विशाल आदिवासी सम्मेलन गणि राजेन्द्र विजयजी के नेतृत्व में हमने आयोजित किया था। उस सम्मेलन में नरेंद्र मोदी स्वयं पधारे थे। उस समय वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे और कार्यक्रम में उपस्थित आदिवासी समाज की ऊर्जा और उत्साह के बीच गणि राजेन्द्र विजयजी ने बड़ी आत्मीयता से उनको कहा था-“अब आप दिल्ली चलो।” गणिजी का यह वाक्य केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि एक दूरदर्शी धर्मगुरु की अंतरदृष्टि थी, जो बाद में सार्थक भी हुई। गणि राजेंद्र विजयजी के प्रभाव से उस सम्मेलन में करीब डेढ़ लाख आदिवासी एकत्र हुए थे और मोदीजी ने उस सम्मेलन को जिस संवेदनशीलता और गंभीरता से संबोधित किया, वह उनकी लोकमंगलकारी दृष्टि और आदिवासी समाज के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का प्रमाण था। मेरे लिए यह केवल एक व्यक्तिगत संस्मरण नहीं, बल्कि इस बात का साक्षात अनुभव है कि मोदीजी किस तरह जीवन के हर स्तर पर मिलने वाले लोगों और परिस्थितियों को दूरगामी दृष्टि से देखते हैं और उनमें राष्ट्र निर्माण की संभावनाएँ खोजते हैं।

मोदीजी के व्यक्तित्व का एक बड़ा पक्ष मानवीय संवेदनाओं से भरा हुआ है। चाहे गरीबों को पक्का मकान उपलब्ध कराना हो, किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में ठोस कदम उठाना हो, बेटियों की शिक्षा और सुरक्षा को सुनिश्चित करना हो या स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएँ आम जन तक पहुँचाना हो, मोदी का हर कदम जीवन को सरल और सम्मानजनक बनाने पर केंद्रित है। वे न्यूनतम सरकार और अधिकतम शासन के सिद्धांत पर चलते हुए प्रशासन को अधिक सक्षम और प्रभावी बनाते हैं। उनका नेतृत्व केवल आधुनिकता और विकास तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति और अध्यात्म से भी गहराई से जुड़ा हुआ है। उनके प्रयासों से योग को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने का निर्णय हुआ। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम और केदारनाथ धाम का पुनरुद्धार उनके सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और आस्था के प्रति गहरे सम्मान को प्रकट करता है। इस प्रकार वे आधुनिक भारत और प्राचीन भारत की आत्मा के बीच एक सेतु का कार्य करते हैं।

आज नरेंद्र मोदी का नाम विश्व के शीर्ष नेताओं में गिना जाता है। टाइम और फोर्ब्स जैसी प्रतिष्ठित पत्रिकाएँ उन्हें दुनिया के सबसे शक्तिशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल करती हैं। अमेरिका, रूस, फ्रांस, जापान जैसे देशों के शीर्ष नेतृत्व के साथ उनके व्यक्तिगत रिश्ते भारत की कूटनीति को नई ऊँचाइयों तक ले गए हैं। आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन, शांति और विकास जैसे मुद्दों पर उनकी स्पष्ट और निर्णायक आवाज़ आज पूरी दुनिया सुनती है। उनका 75वां जन्मोत्सव केवल एक व्यक्ति के जीवन का उत्सव नहीं है, बल्कि उस युगांतरकारी यात्रा का प्रतीक है जिसने भारत को नई ऊँचाइयों की ओर अग्रसर किया है। वे उस नेतृत्व के धनी हैं जिसने भारत को विश्वगुरु बनाने की दिशा में ठोस कदम बढ़ाए हैं। कठोर परिश्रम, राष्ट्रनिष्ठा और मिशनरी दृष्टि से ओतप्रोत नरेंद्र मोदी भारतीय राजनीति का ही नहीं, विश्व राजनीति का भी स्वर्णिम अध्याय हैं। आने वाला समय इस बात का साक्षी बनेगा कि उनका नेतृत्व न केवल एक नए भारत का निर्माण करेगा, बल्कि विश्व को भी शांति, सहयोग और विकास का नया मार्ग दिखाएगा।

– ललित गर्ग , Agency

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

कोरबा

6 मेधावी छात्राओं को दी छात्रवृत्ति

Published

on

कोरबा। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कन्या साडा की अजा और अजजा वर्ग की पात्र मेधावी छात्राओं को कैनरा बैंक की ट्रांसपोर्ट नगर कोरबा शाखा ने विंंद्या ज्योति छात्रवृत्ति योजना के तहत छात्रवृत्ति दी। योजना का मकसद छात्राओं को पढ़ाई में आगे बढ़ने के लिए आर्थिक मदद देना है।

योजना के तहत 6 छात्राओं को कुल 24 हजार रुपए की राशि उनके कैनरा बैंक खाते में मिली।कक्षा पांचवीं की अंशु लुहिया, छठवीं की तनुषी सागर, सातवीं की साधना बघेल को प्रति छात्रा 3-3 हजार रुपए दिए गए। कक्षा आठवीं की अदिति कुर्रे, नौवीं की दिव्या खूंटे, दसवीं की पलक सिदार को प्रति छात्रा 5-5 हजार रुपए की छात्रवृत्ति मिली। विद्यालय के प्राचार्य रणधीर सिंह ने ट्रांसपोर्ट नगर शाखा का आभार जताया। उन्होंने कहा कि बैंक का यह प्रयास जरूरतमंद और प्रतिभावान छात्राओं के लिए पढ़ाई जारी रखने में मदद करता है। चीफ ब्रांच मैनेजर परमेश्वर बेहरा ने छात्रवृत्ति पाने वाली छात्राओं को बधाई दी। उन्होंने कहा कि शिक्षित बालिका अपने साथ परिवार, समाज, राष्ट्र के विकास में भूमिका निभाती है। उन्होंने छात्राओं को परिश्रम, अनुशासन, दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।विद्यालय परिवार ने बैंक अधिकारियों का आभार जताया।

Continue Reading

कोरबा

किताबों से मिलती है ज्ञान व अच्छे संस्कार की शिक्षा: सीताराम

Published

on

कोरबा/छुरीकला। नगर के सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक स्कूल में शिक्षक दिवस कार्यक्रम में शिक्षकों का सम्मान किया। स्कूल के प्राचार्य सीताराम केंवट ने कहा कि किताबों से ज्ञान व अच्छे संस्कार की शिक्षा मिलती है। जीवन जीने की कला सिखाती है। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षक की जिम्मेदारी छात्रों को अच्छी शिक्षा व अच्छे इंसान बनाने की है। छात्रों ने शिक्षकों का श्रीफल भेंटकर सम्मान किया। इस मौके पर स्कूल की शिक्षा समिति के पदाधिकारी व सदस्य मौजूद रहे।

Continue Reading

कोरबा

कॉलेज छात्रा ने खाया जहर:3 दिन बाद मौत, 17 साल के नाबालिग पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप

Published

on

कोरबा। कोरबा के पाली थाना क्षेत्र में 21 साल की कॉलेज छात्रा ने छेड़छाड़ से परेशान होकर जहर खा लिया। तीन दिन तक मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज चलने के बाद रविवार शाम उसकी मौत हो गई। परिजनों ने गांव के ही 17 साल के नाबालिग पर छेड़छाड़ और आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है।

युवती के पिता नहीं थे। उसके दो भाई बाहर काम करते हैं। वह अपनी मां के साथ रहकर पढ़ाई कर रही थी। 12वीं पास करने के बाद उसने कॉलेज में दाखिला लिया था। परिजनों के मुताबिक, वह पढ़ाई में अच्छी थी।

कॉलेज आते-जाते रास्ता रोककर करता था परेशान

युवती की मां और भाइयों ने आरोप लगाया कि गांव का 17 साल का नाबालिग लंबे समय से युवती को परेशान कर रहा था। वह कॉलेज आते-जाते उसका रास्ता रोककर छेड़छाड़ करता था। साथ ही मां और भाई के नाम सुसाइड नोट लिखकर आत्महत्या की धमकी देता था और युवती पर मिलने का दबाव बनाता था।

समझाने के बाद भी नहीं माना

परिजनों का कहना है कि उन्होंने नाबालिग को कई बार समझाया, लेकिन वह अपनी हरकतों से बाज नहीं आया। उसकी हरकतों से युवती काफी तनाव में थी। वह परेशान होकर आत्महत्या करने की बात भी कहती थी।

3 सितंबर को चूहा मारने की दवा खाई

परेशान होकर युवती ने 3 सितंबर को चूहा मारने वाली दवा खा ली। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे लगातार उल्टियां होने लगीं। परिजनों ने उसे पाली के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया। शुरुआती इलाज के बाद उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, जहां तीन दिन इलाज के बाद रविवार शाम उसकी मौत हो गई।

रक्षाबंधन पर दोनों भाई घर आए थे

बताया गया कि दोनों भाई रक्षाबंधन पर बहन से राखी बंधवाने घर आए थे। छोटा भाई रक्षाबंधन के बाद काम के लिए दिल्ली चला गया, जबकि बड़ा भाई कोरबा में ही था। घटना की जानकारी दोनों को फोन पर दी गई।

पहले भी थाने में की थी शिकायत

परिजनों का कहना है कि नाबालिग की हरकतों को लेकर पहले भी थाने में मौखिक शिकायत की गई थी। कोरबा सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी ने बताया कि जिला मेडिकल कॉलेज से मिले मेमो के आधार पर जिला अस्पताल चौकी में परिजनों का बयान दर्ज किया गया है।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677