रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ आर्म्स फोर्ड में 2018 में 1786 पदों पर भर्ती निकाली गई थी। इनमें लगभग 417 कैंडिडेट वेटिंग लिस्ट में थे। जिन्हें सात साल बाद भी नौकरी नहीं मिल पाई है। जबकि CAF में 3 हजार से अधिक पोस्ट खाली हैं। सात साल ये लोग दफ्तरों और मंत्री बंगलों के चक्कर काट रहे हैं।
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को 1 सितंबर को पत्र लिखकर अपने हालात भी बता चुके हैं। कुछ दिन पहले मीडिया पर यहां तक कह दिया था कि नक्सली होते तो ज्यादा बेहतर होता। घर वापसी पर नौकरी भी मिलती और करियर भी संवर जाता। इसके बाद गृहमंत्री विजय शर्मा से आश्वासन मिला कि जल्दी ही वो कुछ करेंगे। लेकिन कुछ न हुआ।
अलग-अलग जिलों के कैंडिडेट गृहमंत्री विजय शर्मा से मिलने पहुंचे।
विजय शर्मा के बंगले पहुंचे कैंडिडेट
सोमवार को अलग–अलग जिलों से कैंडिडेट गृहमंत्री विजय शर्मा के बंगले पहुंचे। गृहमंत्री ने समस्या सुनी और कहा कि आप गलत जगह आएं हैं। आप लोगों को कोर्ट जाना चाहिए। कोर्ट का जो भी फैसला होगा उस हिसाब से सरकार फैसला करेगी। इस पूरे मामले पर उनके एंड से वो कुछ नहीं कर सकते।
नौकरी की तलाश में भटक रहे
अब इन कैंडिडेट्स को कुछ समझ नहीं आ रहा क्या करें। भास्कर ने कैंडिडेट से बात की, इनका कहना है जिस सरकार से उम्मीद थी, उन्होंने भी हमें और हमारी उम्मीदों को दरकिनार कर दिया। इनमें से कई ऐसे हैं, जो अब खेती कर रहे हैं। कुछ मजदूरी कर रहे हैं और कुछ नौकरी की तलाश में एक शहर से दूसरे शहर भटक रहे हैं।
दो साल तैयारी कि अब खेती कर रहे
सोमवार को गृहमंत्री से मिलने पहुंचे कैंडिडेट्स में सक्ती से पहुंचे सुजीत ने कहा कि इस नौकरी से बहुत उम्मीद थी। मेरिट लिस्ट में नाम आया तो टूट गया था। वेटिंग लिस्ट क्लियर हाेने के बाद नौकरी मिलने की उम्मीद थी। लेकिन वो भी नहीं हुआ। नौकरी मांगने हर जिम्मेदार के दरवाजे पर पहुंचे।
धमतरी से पहुंचे रंजीत कुमार नाग की भी कहानी कुछ ऐसी ही है। कहते हैं कि रोज सुबह-शाम एक साल तक मैदान के चक्कर लगाता रहा। पूरे लगन से तैयारी की। अब किसानी करता हूं। अब भी सिर्फ चक्कर ही लगा रहे हैं। सरकार सुनती ही नही, सुनती है तो समझती नहीं है।
परिवार में 8 लोग, मैं मजदूरी करके परिवार पाल रहा हूं
बस्तर के विद्यानंद चौहान ने बताया वेटिंग में उनका 26वां नंबर है। परिवार में आठ लोग हैं। मुझे मजदूरी कर उनका पेट पालना पड़ रहा है। गृहमंत्री के जवाब ने हमें निराश किया है, लेकिन उम्मीद नहीं छोड़ी है। ये नौकरी सिर्फ मेरे लिए नहीं पूरे परिवार के लिए जरूरी है।
इंटेलिजेंस से कॉल करके पूछा गया – नक्सल बन गए क्या
कैंडिडेट जीतेन्द्र दास ने बताया कि हमारा नक्सली वाला वीडियो वायरल हाेने के बाद कई अधिकारियों ने हमारा कॉल उठाना बंद कर दिया था। इंटेलिजेंस वाले कॉल पर पूछ रहे कि तुम से कितने लोग नक्सली बन गए हैं? कहां नक्सली बन गए? हमें उन्हें बताया कि वो गुस्से में कहा था। उन्हें लग रहा कि हम नक्सली बन गए हैं।
भर्ती का पूरा मामला…
सात साल पहले 2018 में जब भर्ती आई थी, तब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी। मेरिट लिस्ट के बाद वेटिंग लिस्ट जारी की गई थी। मेरिट लिस्ट में शामिल युवाओं की भर्ती कर ली गई। वेटिंग लिस्ट वाले 417 कैंडिडेट्स से कहा गया कि अभी पद खाली नहीं है, ऐसे में उनकी भर्ती रोक दी गई है।
साल 2018 में भर्ती के जारी नोटिफिकेशन की कॉपी।
50 प्रतिशत से अधिक कैंडिडेट ओवर एज
लेकिन आगे मेरिट लिस्ट में शामिल कई कैंडिडेट्स मेडिकल आउट हो गए, कुछ ने नौकरी छोड़ दी। सीट खाली हुई, लेकिन इन सब के बीच सरकार भी बदल गई। कांग्रेस ने इन वेटिंग लिस्ट वाले कैंडिडेट्स की भर्ती पर कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। वक्त के साथ इन 417 में से 250 से ज्यादा यानी 50 प्रतिशत से अधिक कैंडिडेट ओवर एज हो गए हैं।
आगे किसी भर्ती के काबिल नहीं हैं। दरअसल, जब भर्ती हुई थी उस वक्त सभी अभ्यर्थी 28 से 32 वर्ष के थे, लेकिन ज्वाइनिंग नहीं मिलने से आज इन्हीं अभ्यर्थियों की उम्र 36 से 40 साल पहुंच गई है। अभ्यर्थियों ने तत्कालीन मुख्यमंत्री से लेकर राज्यपाल के पास जाकर गुहार लगाई, लेकिन मदद नहीं मिल सकी।
आर्म्स फोर्स में पिछले 6 साल से भर्ती भी नहीं
2018 से लेकर अब तक कई पद खाली हो चुके हैं। इन पदों पर भर्ती नहीं हुई है। पिछले 6 सालों में अब तक इस सीएएफ में भर्ती नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि जब नई वैकेंसी नहीं आ जाती, तब वेटिंग लिस्ट वाले वैलिड ही माने जाते हैं। अगर शासन चाहे तो अभी भी इन्हें रिक्त पदों पर भर्ती कर सकती है।
मौजूदा स्थिति में 65,439 जवान कार्यरत
छत्तीसगढ़ में पुलिस बल में हजारों पद रिक्त हैं। यह रिक्तियां करीब 10 से 15 साल से हैं। इसके बाद भी इन पदों पर भर्तियां नहीं हो रही है। इधर छत्तीसगढ़ की जनसंख्या भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में पुलिस बल की कमी राज्य में अपराधों पर अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रही है।
प्रदेश में छत्तीसगढ़ पुलिस के पास डिस्ट्रिक्ट एक्जीक्यूटिव फोर्स, छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स और छत्तीसगढ़ टेलिकॉम फोर्स में कुल 83,259 पद स्वीकृत हैं। इनमें से मौजूदा स्थिति में 65,439 जवान कार्यरत हैं। लेकिन 17,820 पद लंबे समय से खाली हैं।
कई पदों पर वेटिंग लिस्ट और इंटरव्यू जैसी प्रक्रिया अपनाकर युवाओं को रोजगार दिया जा सकता है। लेकिन पुलिस विभाग में इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसकी वजह से राज्य के योग्य और होनहार युवा बेरोजगार होने के साथ-साथ ओवर एज भी हो रहे हैं।
प्रदेश में 13 आईपीएस तो 129 डीएसपी की जरूरत
छत्तीसगढ़ में पुलिस बल में जवानों की कमी की वजह से लगातार कार्यरत अफसरों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पुलिस बल को अभी 13 आईपीएस अफसरों की जरूरत है। प्रदेश में 142 स्वीकृत पदों में वर्तमान में 129 आईपीएस अफसर कार्य कर रहे हैं।
वहीं पुलिस बल में डीएसपी/एसी के 513 पद स्वीकृत हैं। इसमें 384 डीएसपी ही कार्यरत हैं। प्रदेश को अभी भी 129 डीएसपी की जरूरत है। इसके अलावा इंस्पेक्टर के 64 पद भी रिक्त पड़े हैं
कॉन्स्टेबल और सूबेदार के ज्यादातर पद खाली
पुलिस विभाग में सूबेदार का मुख्य काम कानून व्यवस्था बनाए रखना, अपराधों की जांच करना और थाना स्तर पर प्रशासनिक कार्यों की निगरानी करना होता है। वहीं कॉन्स्टेबल जनता की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। इसके अलावा पेट्रोलिंग, जांच में सहायता, एफआईआर दर्ज करना, और विशेष आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने का काम करते हैं।
लेकिन प्रदेश में सूबेदार के 80 स्वीकृत पदों में केवल 3 सूबेदार ही काम कर रहे हैं। दूसरी ओर हेड कॉन्स्टेबल के 827 और कॉन्स्टेबल के 10436 पद अभी भी रिक्त हैं।
जांच हो रही प्रभावित
पुलिस बल की कमी की वजह से प्रदेशभर में अपराधों की जांच लंबित है। रिक्त पदों को भरने से अपराधों की जांच में तेजी आएगी। इधर रायपुर जिले में अपराधों की जांच बेहतर और जल्द होने की बात सामने आई है। रायपुर में साल 2024 में 17693 अपराध दर्ज किए गए थे। जनवरी 2025 तक 1713 मामले पेंडिंग थे।
अक्टूबर 2024 में पुलिस बल में भर्ती निकाली गई। इस भर्ती के माध्यम से कुल 341 पदों को भरा जाना है। जिसमें 278 एसआई के पद, 19 सूबेदार, 14 प्लाटून कमांडर, 11 उप निरीक्षक (विशेष शाखा), 4 उप निरीक्षक (अंगुल-चिन्ह), 1 उप निरीक्षक (प्रश्नाधीन दस्तावेज) जैसे पद शामिल है।
इसके अलावा 5 उप निरीक्षक (कंप्यूटर) और 9 उप निरीक्षक (साइबर क्राइम) के पदों पर भर्ती होनी है। लेकिन इसकी प्रक्रिया भी अब तक पूरी नहीं हो सकी है। वहीं कॉन्स्टेबल की भर्ती भी नहीं हो सकी है।
कोरबा। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कुणाल दुदावत ने विकासखंड कटघोरा अंतर्गत संचालित एकलव्य आदर्श आवासीय विद्यालय, छुरीकला में विद्यार्थियों द्वारा विद्यालय की व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं से संबंधित प्राप्त गंभीर शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को प्रकरण की निष्पक्ष एवं तथयपरक जांच कर एक सप्ताह के भीतर अपना प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
प्राचार्य को हटाने बच्चों ने विधायक पटेल और जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन के काफिले का कर दिया था घेराव
गठित जांच समिति में सहायक आयुक्त आदिवासी विकास कोरबा, तहसीलदार कटघोरा, सहायक लेखा अधिकारी तथा कनिष्ठ लेखा अधिकारी (कार्यालय सहायक आयुक्त आदिवासी विकास, कोरबा) को सदस्य बनाया गया है। समिति विद्यालय में उपलब्ध व्यवस्थाओं, विद्यार्थियों को प्रदत्त सुविधाओं तथा शिकायतों से जुड़े सभी बिंदुओं की विस्तृत जांच करेगी। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों के हितों एवं गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। शिकायतों की निष्पक्ष जांच के आधार पर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सहायक आयुक्त की कार्यशैली पर भी सवाल!
एकलव्य आवासीय विद्यालय में बच्चों ने कुछ दिन पूर्व पुलिस में शिकायत की थी, लेकिन सहायक आयुक्त को निरीक्षण करने का समय ही नहीं मिला। महीनों से बच्चों को दूषित भोजन दिया जा रहा, लेकिन सहायक आयुक्त को कुछ पता ही नहीं।
कोरबा। कोरबा जिले में एक जून से 28 जुलाई तक कुल 528.2 मिलीमीटर औसत वर्षा दर्ज की गई। अधीक्षक भू-अभिलेख से मिली जानकारी के अनुसार उक्त अवधि में जिले की तहसील कोरबा में 546.1 मिलीमीटर, अजगरबहार 372.8, भैंसमा, 478.4, करतला 471.1, बरपाली 567.5, कटघोरा 540.9 दीपका 572.5, दर्री 661.3, पाली 581.4, हरदीबाजार 429.4, पोंड़ी-उपरोड़ा 577.6, और पसान तहसील में 539.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।
खनिज विभाग कोरबा की लगातार कार्यवाही से खनिज माफियाओं में मचा हड़कंप
कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश तथा उप संचालक, खनि प्रशासन के मार्गदर्शन में जिले में अवैध उत्खनन परिवहन व भण्डारण पर प्रतिबंध लगाने के लिए लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत गठित खनिज उड़़नदस्ता दलों द्वारा जिले के कई स्थानों पर छापा मारकर सघन जांच की गई। जिस दौरान सीतामढ़ी में रेत का अवैध परिवहन कर रहे 2 ट्रेक्टर, बरमपुर में रेत का अवैध परिवहन कर रहे 1 टीपर, राताखार में गिट्टी का अवैध परिवहन कर रहे 2 हाइवा व रेत का अवैध परिवहन कर रहे 1 टीपर, कुसमुंडा में ईंट का अवैध परिवहन कर रहे 2 ट्रेक्टर तथा कटघोरा में रेत का अवैध परिवहन कर रहे 1 ट्रेक्टर सहित कुल 9 वाहनों पर कार्यवाही करते हुए जब्त कर सिटी कोतवाली थाना, सर्वमंगला पुलिस चौकी, कुसमुंडा थाना, दर्री थाना व खनिज जांच चौकी, कटघोरा की अभिरक्षा में सुरक्षार्थ रखा गया है।
खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस अभियान का मुख्य उद्देश्य जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन तथा भण्डारण पर प्रतिबंध सुनिश्चित करना, अवैध खनन पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना तथा शासकीय राजस्व की हानि को रोकना है। नियमों का उल्लघंन करने, अवैध उत्खनन एवं परिवहन तथा भण्डारण में संलिप्त व्यक्तियों के विरुद्ध खान और खनिज ( विकास और विनियमन) अधिनियम 1957, छत्तीसगढ़़ गौण खनिज नियम 2015 और अन्य वैधानिक प्रावधानों के तहत कार्यवाही की जा रही है। विभाग ने चेतावनी दी है कि अवैध खनन, परिवहन और भण्डारण के विरुद्ध सघन अभियान लगातार जारी रहेगा तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।