विदेश
मस्क ने ट्रम्प के खिलाफ यौन-शोषण वाली पोस्ट डिलीट की:पहले एप्स्टीन केस का जिक्र किया था, कहा था- बड़े खुलासे का टाइम आ गया
वॉशिंगटन,एजेंसी। टेस्ला के CEO इलॉन मस्क ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण में शामिल होने वाली पोस्ट सोशल मीडिया से हटा दी है।
इससे पहले मस्क ने गुरुवार को सनसनीखेज दावा करते हुए कहा था कि इस मामले में बड़ा खुलासा करेंगे। उन्होंने दावा किया था कि ट्रम्प का नाम एप्स्टीन फाइलों में है।
एप्स्टीन केस एक हाई-प्रोफाइल क्रिमिनल मामला है, जिसमें अमेरिकी अरबपति जेफरी एप्स्टीन पर नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण और तस्करी के आरोप लगे थे। इस केस में दुनियाभर के कई हाईप्रोफाइल लोगों के नाम सामने आए थे।
एप्स्टीन के साथ ट्रम्प की 1992 की तस्वीर

डोनाल्ड ट्रम्प के साथ यौन शोषण का आरोपी जेफ्री एप्स्टीन। (फाइल फोटो)
मस्क ने वीडियो भी शेयर किया था, ट्रम्प पार्टी में एप्स्टीन के साथ दिखे
मस्क ने लिखा था- एप्स्टीन फाइल्स में ट्रम्प का नाम
मस्क ने X पर लिखा था- अब बड़ा खुलासा करने का टाइम है। डोनाल्ड ट्रम्प का नाम एप्स्टीन फाइलों में हैं। यही वजह है कि इन्हें सार्वजनिक नहीं किया गया। डोनाल्ड ट्रम्प, आपका दिन शुभ हो।
एक अन्य पोस्ट में कहा था- इस पोस्ट को भविष्य के लिए मार्क कर लें। सच्चाई सामने आएगी।
एप्स्टीन केस- नाबालिग लड़कियों के शोषण का आरोप
- जेफ्री एप्स्टीन को पहली बार 2006 में फ्लोरिडा के पाम बीच से गिरफ्तार किया गया। एप्स्टीन को वेश्यावृत्ति और नाबालिग को लालच देने के लिए दोषी ठहराया गया।
- हालांकि कुछ सौदेबाजी के बाद उसे सिर्फ 13 महीने की हिरासत मिली, जिसमें वर्क रिलीज की इजाजत थी।
- वर्जीनिया गिफ्रे नाम की महिला ने 2009 में आरोप लगाया कि एप्स्टीन ने उन्हें नाबालिग रहते यौन तस्करी के लिए मजबूर किया। 2011 में गिफ्रे ने इस मामले में ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू का भी नाम लिया
- 2015 में ग्रिफ्रे ने एप्स्टीन के खिलाफ मुकदमा दायर किया। इसमें एप्स्टीन के प्रिंस एंड्रयू और पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के साथ रिश्तों का जिक्र था।
- एप्स्टीन को 2019 में फिर से नाबालिगों की यौन तस्करी के मामले में गिरफ्तार किया गया। गिफ्रे ने ही एप्स्टीन के खिलाफ अदालत में गवाही दी।
- एप्स्टीन को वेश्यावृत्ति का नेटवर्क चलाने और बड़ी संख्या में महिलाओं के यौन शोषण और मानव तस्करी का दोषी ठहराया गया।

फोटो में प्रिंस एंड्रयू हैं, जिनका हाथ 17 वर्षीय वर्जीनिया गिफ्रे की कमर पर है। सबसे दाएं एप्स्टीन की प्रेमिका घिसलैन मैक्सवेल है। फोटो 10 मार्च 2001 को लंदन में मैक्सवेल के घर पर ली गई थी।
एप्स्टीन की लिस्ट में बिल क्लिंटन, माइकल जैक्सन का नाम
- जनवरी 2024 में एक अमेरिकी कोर्ट ने जेफ्री एप्स्टीन से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक किए थे। इसमें पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन, माइकल जैक्सन और ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू जैसे हाई-प्रोफाइल लोगों के नाम थे।
- इसमें बिल क्लिंटन और प्रिंस एंड्रयू के साथ एप्स्टीन की पुरानी दोस्ती का भी जिक्र किया गया था। एप्स्टीन के मुताबिक क्लिंटन को कम उम्र की लड़कियां पसंद थीं। हालांकि क्लिंटन के खिलाफ कोई आरोप साबित नहीं हो पाया।

2019 में अमेरिकी कोर्ट के बाहर जेफ्री एप्स्टीन के खिलाफ प्रदर्शन करती महिलाएं।
एप्स्टीन ने जेल में खुदकुशी की थी
एप्स्टीन को 2019 में फ्लोरिडा और न्यूयॉर्क में नाबालिगों की यौन तस्करी के आरोपों में फिर से गिरफ्तार किया गया। 10 अगस्त 2019 को एप्स्टीन ने जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। जिस वक्त उसकी मौत हुई, ट्रम्प अमेरिका के राष्ट्रपति थे।
2025 में 25 अप्रैल को वर्जीनिया गिफ्रे की भी मौत हो गई। रिपोर्ट्स में बताया गया कि उन्होंने आत्महत्या की है। उन्होंने बताया था कि एप्स्टीन ने उन्हें 1999 से 2002 के बीच कई बड़ी हस्तियों के पास भेजा था। उन्होंने यह भी कहा था कि वे एप्स्टीन के जरिए ट्रम्प से कई बार मिली थीं।
ब्यूटीफुल बिल को लेकर भिड़ गए थे मस्क और ट्रम्प
ट्रम्प और मस्क के बीच गुरुवार को बिग ब्यूटीफुल बिल (टैक्स और खर्च बिल) को लेकर जमकर बहसबाजी हुई थी। पहले ट्रम्प ने मीडिया से बात करते हुए मस्क को लेकर नाराजगी जताई थी।
ट्रम्प ने कहा था कि जब हमने अनिवार्य तौर पर इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के कानून में कटौती करने की बात कही तो मस्क को दिक्कत होने लगी। मैं इलॉन से बहुत निराश हूं। मैंने उनकी बहुत मदद की है।
इसके बाद मस्क ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ट्रम्प को एहसान फरामोश बताते हुए लगातार कई ट्वीट किए। मस्क ने कहा कि मैं नहीं होता तो ट्रम्प चुनाव हार जाते। उन्होंने ट्रम्प पर महाभियोग चलाने तक की बात कही थी।
इसके बाद ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर मस्क को निशाने पर लिया। उन्होंने लिखा- जब मैंने उनका ईवी मैंडेट (कानूनी आदेश) वापस लिया तो मस्क पागल हो गए। ट्रम्प ने मस्क की कंपनी को दी जाने वाली सब्सिडी खत्म करने की धमकी दी थी।
विदेश
मिडल ईस्ट टकराव निर्णायक मोड़ पर ! अमेरिका-ईरान आखिर बातचीत को तैयार, वेंस पहुंच रहे पाकिस्तान
इस्लामाबाद,एजेंसी। मिडल ईस्ट टकराव अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता के लिए पाकिस्तान में बड़ा कूटनीतिक प्रयास शुरू हो गया है। JD Vance एक बड़े अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के साथ Pakistan रवाना हो रहे हैं, जहां Iran के साथ शांति वार्ता की जाएगी। यह वार्ता ऐसे समय हो रही है जब अमेरिका, ईरान और Israel के बीच चल रहा युद्ध अब आठवें हफ्ते में पहुंच चुका है और दो हफ्ते का सीजफायर खत्म होने के करीब है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी उपराष्ट्रपति जे.डी. वैंस (JD Vance) के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंचने वाला है, जिसमें स्टीव विटकॉफ़ (Steve Witkoff) और (जेरेड कुशनर) Jared Kushner भी शामिल होंगे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि बुधवार को युद्धविराम समाप्त हो रहा है और वह इसे बढ़ाने के इच्छुक नहीं हैं।

ईरान हुआ राजी
ईरान ने क्षेत्रीय मध्यस्थों को बताया है कि वह अमेरिका के साथ शांति वार्ता के दूसरे दौर के लिए मंगलवार को पाकिस्तान में एक वार्ता टीम भेजेगा। तेहरान ने सार्वजनिक रूप से इस बात की पुष्टि नहीं की थी कि वह इस्लामाबाद में होने वाली बैठकों में अपने प्रतिनिधि भेजेगा। वार्ता में उसकी भागीदारी को लेकर भ्रम तब और बढ़ गया, जब ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रतिनिधि इस्माइल बाकाई ने सोमवार को कहा कि पाकिस्तानी राजधानी में वार्ता के दूसरे दौर की कोई योजना नहीं है।
दबाव में बातचीत मंजूर नहीं
इससे पहले ईरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में बातचीत नहीं करेगा। उसका कहना है कि जब तक अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर लगी नाकेबंदी नहीं हटाता, तब तक वार्ता का कोई मतलब नहीं है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के अंदर भी इस मुद्दे पर दबाव है, खासकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की ओर से सख्त रुख अपनाने की मांग की जा रही है। इसी बीच पाकिस्तान, मिस्र और तुर्की जैसे देश मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं और दोनों पक्षों को बातचीत के लिए तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तान में होने वाली यह वार्ता तय करेगी कि हालात शांति की ओर बढ़ेंगे या फिर एक बड़े युद्ध की तरफ।अगर समझौता नहीं हुआ, तो मिडिल ईस्ट में एक बड़ा सैन्य संघर्ष शुरू हो सकता है ।
युद्ध की भयावह स्थिति
लगभग दो महीने से जारी युद्ध से वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला देने वाले ऊर्जा संकट के और गहराने की आशंका है। इस संघर्ष में अब तक भारी जान-माल का नुकसान हो चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान में 3,300 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है जिनमें 300 से ज्यादा बच्चे शामिल हैं । Lebanon में 2,200 से ज्यादा मौतें हो चुकी और हजारों लोग घायल हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि इस युद्ध का सबसे ज्यादा असर आम नागरिकों पर पड़ा है।
देश
ईरान युद्ध के बीच भारत की आर्थिक रफ्तार बरकरार: GDP ग्रोथ में बना एशिया का नंबर-1 देश, चीन भी रह गया पीछे
नई दिल्ली,एजेंसी। संयुक्त राष्ट्र की संस्था United Nations Economic and Social Commission for Asia and the Pacific की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान युद्ध और उससे पैदा हुए ऊर्जा संकट के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। इस वित्त वर्ष में भारत की GDP ग्रोथ 6.4% रहने का अनुमान है, जिससे भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना रहेगा। रिपोर्ट में बताया गया कि पिछले साल भारत की ग्रोथ 7.4% थी, जो इस साल थोड़ी कम होकर 6.4% रहेगी, लेकिन अगले साल फिर बढ़कर 6.6% हो सकती है। यह अनुमान उस समय के हालात पर आधारित है जब Iran युद्ध चल रहा था और Strait of Hormuz पर असर पड़ने लगा था।


एशिया-प्रशांत क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में भारत की स्थिति बेहतर है। China की ग्रोथ इस साल 4.3% रहने का अनुमान है, जबकि Pakistan की ग्रोथ और कमजोर रह सकती है। इससे साफ है कि भारत क्षेत्र में सबसे आगे बना हुआ है। भारत की मजबूत ग्रोथ के पीछे घरेलू मांग, खासकर ग्रामीण इलाकों में बढ़ता खर्च, सबसे बड़ा कारण बताया गया है। इसके अलावा सर्विस सेक्टर जैसे आईटी और बैंकिंग भी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ा रहे हैं। सरकार की नीतियां और गरीब वर्ग के लिए दी गई आर्थिक मदद ने भी बाजार में पैसा बनाए रखा।

ESCAP के अधिकारी Hamza Malik के अनुसार, भारत की बढ़ती उत्पादकता और बड़ी आबादी उसकी आर्थिक मजबूती का बड़ा आधार है। इससे देश लंबे समय तक ऊंची ग्रोथ बनाए रख सकता है। हालांकि कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं, जैसे अमेरिका को निर्यात में गिरावट और वैश्विक ऊर्जा संकट का असर। फिर भी, इन मुश्किलों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर बनी हुई है और दुनिया में तेजी से आगे बढ़ रही है।
विदेश
अमेरिका द्वारा जब्त ईरानी जहाज का चीन से कनेक्शन, ‘Touska’ का गुप्त मिशन बेनकाब
वाशिंगठन/बीजिंग, एजेंसी। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना द्वारा जब्त किए गए ईरानी मालवाहक जहाज M/V Touska को लेकर अब चीन कनेक्शन सामने आया है, जिससे इस पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। सरल शब्दों में समझें तो यह जहाज ईरान के एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा बताया जा रहा है, जो चीन के बंदरगाहों से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक यह जहाज हाल ही में चीन के झुहाई पोर्ट पर दो बार गया था और इसके जरिए ऐसे सामान ले जाए जाने की आशंका है, जो नागरिक और सैन्य दोनों तरह के उपयोग में आ सकता है।

अमेरिकी अधिकारियों ने इस जहाज को उस समय रोका जब यह अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को पार करने की कोशिश कर रहा था। चेतावनी के बाद भी न रुकने पर अमेरिकी बलों ने फायरिंग कर जहाज के इंजन को निष्क्रिय किया और फिर उस पर कब्जा कर लिया। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि जहाज में क्या सामान था, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह “डुअल-यूज़” यानी संवेदनशील सामग्री हो सकती है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि यह जहाज मलेशिया के पोर्ट क्लांग और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई रास्तों से होकर आया था। ऐसे रूट्स का इस्तेमाल अक्सर माल के असली स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता है। समुद्र में जहाज-से-जहाज ट्रांसफर के जरिए ट्रैकिंग को मुश्किल बना दिया जाता है।
चीन ने इस मामले में साफ कहा है कि वह ईरान को हथियार नहीं देता और उसके पास डुअल-यूज़ सामान के निर्यात पर नियंत्रण है। लेकिन चीन अमेरिकी प्रतिबंधों को नहीं मानता, इसलिए यह विवाद और गहरा हो गया है। बीजिंग ने जहाज जब्त किए जाने पर चिंता जताई है और संयम बरतने की अपील की है। इस घटना ने यह भी दिखा दिया है कि ईरान-यूएस संघर्ष अब सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और सप्लाई नेटवर्क से भी जुड़ चुका है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री रास्ते पर तनाव बढ़ने से दुनिया की तेल सप्लाई और बाजार पर असर पड़ रहा है। कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ एक जहाज की जब्ती नहीं, बल्कि ईरान, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक टकराव का संकेत है, जो आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है।
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