कोरबा
स्वास्थ्य सुविधाओं में नई क्रांति : कोरबा बना स्वस्थ जीवन का मॉडल जिला
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2 months agoon
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Divya Akashसरकार के सतत प्रयासों से मजबूत हुई स्वास्थ्य सेवाओं की बुनियाद, आधुनिक उपचार से लाभान्वित हो रहे मरीज
कोरबा। स्वस्थ जीवन का प्रथम आधार बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं होती हैं। इसी उद्देश्य को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार और स्वास्थ्य लाभ प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं में हुए व्यापक सुधारों का परिणाम है कि अब अस्पतालों में पहले जैसी लंबी कतारें अतीत की बात बन गई हैं। आधुनिक मशीनों से सुसज्जित अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या में वृद्धि हुई है तथा पर्याप्त दवाएं, बेड और अन्य संसाधन सुनिश्चित किए गए हैं। प्रत्येक मरीज को समय पर उचित उपचार मिल रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं में आमूलचूल परिवर्तन आया है।
स्वास्थ्य सेवाओं का सशक्त नेटवर्क : आंकड़ों में झलकती प्रगति
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन.केशरी ने जिले के स्वास्थ्य सेवाओं के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि वर्ष 2000 की तुलना में वर्ष 2025 तक कोरबा जिले की स्वास्थ्य सुविधाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है- उप स्वास्थ्य केंद्र 197 से बढ़कर 285, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 29 से बढ़कर 40, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 3 से बढ़कर 7, शहरी स्वास्थ्य केंद्र 0 से बढ़कर 30, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र 3 और शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र 1 है।
जिला अस्पताल में आधुनिक उपकरणों और विशेषज्ञ सेवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित
बेहतर संसाधन, बेहतर उपचार
बेड की संख्या 364 से बढ़कर 856, डॉक्टरों की संख्या 99 और स्वास्थ्यकर्मी 876, एंबुलेंस सेवाएं 1 से बढ़कर 29, प्रसव सुविधा केंद्र 230 से बढ़कर 333, शिशु मृत्यु दर 62 से घटकर 48 हो गई है। इन उपलब्धियों ने स्वास्थ्य सेवाओं को न केवल सशक्त बनाया है, बल्कि आम नागरिकों को उपचार के प्रति आत्मविश्वास भी दिया है।
मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ चिकित्सकों से आमजनों को मिल रहा स्वास्थ्य लाभः-
जिले में स्व. बिसाहू दास मंहत स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय भी संचालित है, जहां विशेषज्ञ अनुभवी चिकित्सकों एवं अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से आमजनों को स्वास्थ्य लाभ मिल रहा है।
विशेष पहलें और नई व्यवस्थाएं-
जिले के सभी 5 ब्लॉकों में पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) संचालित है। बर्न यूनिट और शिशु केयर यूनिट (एसएनसीयू) की स्थापना से गंभीर मरीजों और नवजातों को राहत मिली है। टीबी जांच दर 04 प्रतिशत से बढ़कर 44 प्रतिशत, टीकाकरण दर 46 प्रतिशत से बढ़कर 96.36 प्रतिशत पहुंची है। डेंटल यूनिट 1 से बढ़कर 7, आई यूनिट 4 से बढ़कर 8, ब्लड बैंक की संख्या 6 तक पहुंची, जिससे रक्त की उपलब्धता सुलभ हुई।
विभिन्न प्रकार की जांच सुविधाओं का हुआ विस्तार
इन 25 वर्षो में जिले में विभिन्न प्रकार की जांच हेतु चिकित्सा सुविधाओं में विस्तार हुआ है। जिले में एक्सरे जांच की सुविधा 1 से बढ़कर 7 स्थानों में उपलब्ध है। सीटी स्कैन की सुविधा भी 0 से बढ़कर 1 हो गई है। अन्य स्कैन की सुविधा भी 47 पहुंच गई है।
सम्मान और पहचान
स्वास्थ्य सेवाओं में उल्लेखनीय उपलब्धियों के लिए कोरबा जिले को कई राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। “संपूर्ण अभियान” के तहत पांच सूचकांकों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए जिले को पुरस्कृत किया गया है। साथ ही, जिले की कई स्वास्थ्य संस्थाएं राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक से प्रमाणित हैं, जो गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जिले की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
कोरबा स्वास्थ्य क्रांति के पांच प्रमुख आयाम
स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों का निरंतर विस्तार, विशेषज्ञ डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की संख्या में वृद्धि, अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरण और एंबुलेंस नेटवर्क का सुदृढ़ीकरण, टीकाकरण, टीबी जांच और प्रसव सुविधाओं में ऐतिहासिक सुधार और राज्य स्तरीय पुरस्कार एवं एनक्यूएएस (राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक प्रमाणन के साथ गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की पहचान।
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कोरबा
भू-विस्थापितों को राहत, हर परिवार को 6.78 लाख मुआवजा
Published
4 hours agoon
January 18, 2026By
Divya Akashकोरबा। एसईसीएल मानिकपुर खदान से प्रभावित भिलाईखुर्द के भ-ूविस्थापितों को बड़ी राहत मिली है। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन की पहल पर 300 प्रभावितों को मुआवजा देने का रास्ता साफ हो गया है। हर परिवार को 6.78 लाख मुआवजा देने एसईसीएल प्रबंधन ने सहमति दी है।
एसईसीएल विश्राम गृह कोरबा में शुक्रवार को नगर विधायक व उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन की अध्यक्षता मेंभिलाईखुर्द के भूविस्थापितों, एसईसीएल के अधिकारियों व जिला प्रशासन के अधिकारियों के बीच बैठक हुई। जिसमें देवांगन ने एसईसीएल के अधिकारियों को दो टूक कहा कि 50 वर्ष पूर्व खदान के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया था।
तब ज़मीन का मुआवजा दिया जा चुका था, लेकिन इतने वर्षों बाद आज ज़मीन खाली करवाई जा रही है। भू-विस्थापितों को मकानों और शिफ्टिंग का उचित मुआवजा दिए किसी भी तरह से जमीन खाली करवाना गलत है। उद्योग मंत्री ने बैठक में भू विस्थापितों की मांग को मजबूती से रखते हुए कहा की इतने वर्षों में एक-एक जमीन धारक के एक से अधिक परिवार हो चुके हैं, आज की स्थिति में सिर्फ एक ज़मीन धारक के बजाए एक-एक परिवार के हिसाब से मुआवजा दिया जाए।
देवांगन ने कहा की देश की ऊर्जा के लिए कोयला अतिमहत्वपूर्ण हैं, लेकिन भू- विस्थापितों को साथ में लेकर खदानों का विस्तार करना होगा। एसईसीएल के अधिकारियों ने बैठक में ही सभी परिवारों का मुआवजा देने की मंजूरी दी। भू-विस्थापित के प्रति परिवार को 6.78 लाख देने की घोषणा की गई। पिछले 8 वर्ष से बिना मुआवजा दिए प्रबंधन बस्ती खाली कराने पर आमदा था। मंत्री के दबाव के बाद एसईसीएल बैकफुट पर आए। इस निर्णय का ग्राम भिलाईखुर्द के सभी भू विस्थापितों ने स्वागत करते हुए अपनी सहमति देते हुए मंत्री देवांगन का आभार जताया।
एसईसीएल मानिकपुर खदान से 52 लाख 50 हजार टन कोयला उत्पादन किया गया था। कोरबा एरिया का यह सबसे बड़ा ओपन माइंस है। लगातार 11 साल से लक्ष्य हासिल कर रहा है। इस साल कोरबा एरिया में 83 लाख 60 हजार टन उत्पादन का लक्ष्य रखा है।
कोरबा
कोरबा में चलती कार में शॉर्ट सर्किट से लगी आग:गैरेज पहुंचते ही भड़की, मिस्त्री ने पाया काबू
Published
5 hours agoon
January 18, 2026By
Divya Akashकोरबा। कोरबा के मानिकपुर चौकी क्षेत्र अंतर्गत मुड़ापार स्थित लिटिल स्टेप स्कूल के पास एक ऑटो गैरेज में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक चलती कार में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। गैरेज में मौजूद मिस्त्री ने तत्काल पानी डालकर और केबल वायर काटकर आग पर काबू पा लिया।
जानकारी के अनुसार, एक युवक लाल रंग की कार लेकर गैरेज पहुंचा था। गाड़ी रोकते ही वह तुरंत बाहर निकला और मिस्त्री को आवाज लगाई। मिस्त्री के मौके पर पहुंचते ही कार में अचानक आग की लपटें उठने लगीं, जो देखते ही देखते बढ़ने लगी।

शॉर्ट सर्किट के बाद लगी आग
कार चालक युवक ने बताया कि वह किसी काम से निकला था, तभी उसे गाड़ी से हल्का धुआं आता महसूस हुआ। वह किसी तरह कार को गैरेज तक लाया।
जैसे ही उसने बोनट खोला, धुआं तेजी से निकलने लगा और उसने तुरंत मिस्त्री को बुलाया। बताया जा रहा है कि चूहे ने कार के केबल काट दिए थे, जिसके कारण शॉर्ट सर्किट हुआ और आग लग गई।
समय रहते आग में पाया काबू
समय रहते आग पर काबू पा लिए जाने से एक बड़ी घटना टल गई। यह क्षेत्र आबादी वाला है और पास में ही बच्चों का स्कूल भी है। आगजनी के समय लोगों की आवाजाही भी थी।
घटना की सूचना मानिकपुर चौकी पुलिस और दमकल विभाग को देने की तैयारी थी, लेकिन आग पर जल्द ही नियंत्रण पा लिया गया।
कोरबा
DMF का कथित मिसयूज…केंद्र ने छत्तीसगढ़ CS को पत्र-जारी किया:तत्कालीन कलेक्टर पर निजी फायदे के लिए 26 करोड़ मंजूर करने का आरोप
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5 hours agoon
January 18, 2026By
Divya Akashकोरबा। कोरबा में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (DMF) के कथित दुरुपयोग के मामले में केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील को स्मरण पत्र जारी किया है। यह कार्रवाई भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर की शिकायत के बाद की गई है।
शिकायत में बालको से संबंधित सड़क निर्माण के लिए डीएमएफ फंड के गलत इस्तेमाल का आरोप है। दरअसल, ननकी राम कंवर ने शिकायत की थी कि दर्री ध्यानचंद चौक से बजरंग चौक परसाभाटा बालको तक की सड़क के लिए तत्कालीन कलेक्टर अजीत बसंत ने बालको को निजी फायदे के लिए डीएमएफ फंड से लगभग 26 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे।
ननकी राम के अनुसार, यह सड़क बालको की है और इसका निर्माण-मरम्मत बालको के सीएसआर फंड से होना चाहिए था। इस मामले में केंद्र सरकार ने पहले भी मुख्य सचिव विकास शील को पत्र जारी किया था। पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर ने आरोप लगाया कि तत्कालीन कलेक्टर को भारत सरकार में शिकायत होने की जानकारी मिलते ही, उन्होंने अपने ट्रांसफर से पहले ही लोक निर्माण विभाग को आनन-फानन में टेंडर प्रक्रिया जारी कर दी थी।

मुख्य सचिव से जवाब मांगा
इस जानकारी के बाद ननकी राम कंवर ने केंद्र सरकार को फिर पत्र लिखकर अवगत कराया। केंद्र सरकार ने उनके पत्र पर संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन विकास शील को पत्र लिखा है। इसमें केंद्र ने नाराजगी जाहिर करते हुए पत्र में लिखे गए तथ्यों के संबंध में जवाब मांगा है और आवेदक को भी अवगत कराने को कहा है।

कलेक्टर ने पुल मरम्मत कार्यों का निरीक्षण किया
इसी बीच कलेक्टर दुदावत ने डीएमएफ के तहत बनने वाले दर्री डेम मार्ग (ध्यानचंद चौक से बालको के बजरंग चौक तक) का निरीक्षण किया। उन्होंने आवश्यक मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही बेलगिरी-ढेंगुरनाला पुल के मरम्मत कार्य के लिए भी शीघ्र निविदा प्रक्रिया शुरू कर समयबद्ध तरीके से कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं।

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