विदेश
रूस के खतरनाक प्लान का खुलासा: यूक्रेन पर विनाशकारी हमले की तैयारी, खतरे में परमाणु सुरक्षा
कीव,एजेंसी। यूक्रेन के विदेश मंत्री आंद्रेई सिबीहा ने शनिवार को कहा कि रूस यूक्रेन के परमाणु बिजली संयंत्रों को बिजली आपूर्ति करने वाले सबस्टेशनों पर “खतरनाक हमलों” की योजना बना रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि सर्दियों के बीच ऐसे हमले विनाशकारी परिणाम ला सकते हैं। सिबीहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “हमारी खुफिया जानकारी के अनुसार रूस उन सबस्टेशनों पर हमला करने की तैयारी कर रहा है जो यूक्रेन के परमाणु संयंत्रों को बिजली देते हैं। ठंड के मौसम में यूक्रेन को बिजली से वंचित करना मॉस्को का जनसंहारक लक्ष्य है, जिसकी कोई सीमा नहीं है।”
उन्होंने बताया कि यूक्रेन इस संबंध में अहम खुफिया जानकारियां अपने अंतर्राष्ट्रीय साझेदारों के साथ साझा कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) सहित उन वैश्विक शक्तियों से अपील कर रहा है, जो परमाणु सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं। सिबीहा ने कहा कि अब समय आ गया है कि दुनिया रूस को स्पष्ट चेतावनी दे और उसे ऐसी लापरवाह योजनाओं से पीछे हटने के लिए मजबूर करे। इस चेतावनी के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने भी कहा कि रूस ऊर्जा क्षेत्र और परमाणु संयंत्रों से जुड़े नेटवर्क पर नए हमलों की तैयारी कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सर्दियों में ऊर्जा ढांचे पर हर रूसी हमला युद्ध समाप्त करने के लिए मित्र देशों, विशेष रूप से अमेरिका, के प्रयासों को कमजोर करता है। ज़ेलेंस्की ने कहा, “यूक्रेन कूटनीति में पूरी तरह रचनात्मक है, जबकि रूस केवल हमलों और आम लोगों को पीड़ा देने पर ध्यान केंद्रित किए हुए है।” रिपोर्टों के अनुसार, हाल के महीनों में रूस ने यूक्रेन के ऊर्जा ढांचे पर हमले तेज कर दिए हैं। दोनों पक्षों द्वारा सैनिकों और सैन्य उपकरणों के नुकसान को लेकर किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि करना कठिन बताया जा रहा है।

विदेश
पाकिस्तान के “डबल गेम” से आगबबूला हुआ ईरान ! कहा- ‘ट्रंप के तलवे चाट रहे आसिम मुनीर’, नहीं पहुंचाया सही संदेश
तेहरान,एजेंसी। ईरान-पाकिस्तान के बीच इस समय भरोसे का गंभीर संकट पैदा हो गया है जिसके बाद ईरान-अमेरिका बातचीत में पाकिस्तान की मध्यस्थता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। ईरान के सरकारी मीडिया ने पाकिस्तान पर सीधा आरोप लगाया है कि वह अमेरिका के साथ मिलकर “डबल गेम” खेल रहा है और ईमानदारी से मध्यस्थता नहीं कर रहा। ईरान की सबसे बड़ी नाराजगी पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर (Asim Munir) को लेकर है। ईरान के सरकारी टेलीविजन ने पाकिस्तान की भूमिका पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है।

एक प्रमुख विश्लेषक के जरिए प्रसारित रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि मुनीर ने ईरान का प्रस्ताव अमेरिका तक पहुंचाने की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन अब तक कोई साफ जवाब नहीं आया। इससे ईरान को शक है कि या तो प्रस्ताव सही तरीके से नहीं पहुंचाया गया या जानबूझकर देरी की जा रही है।ईरानी पक्ष का आरोप है कि पाकिस्तान बाहर से खुद को न्यूट्रल (तटस्थ) दिखाता है, लेकिन अंदरखाने अमेरिका का साथ दे रहा है। यही वजह है कि ईरान को लग रहा है कि पूरी बातचीत की प्रक्रिया उसके खिलाफ बनाई जा रही है। मामला तब और बिगड़ गया जब ईरान के 10-सूत्रीय प्रस्ताव को नजरअंदाज कर दिया गया और अमेरिकी पक्ष जिसमें जे.डी. वैंस (JD Vance) जैसे नेता शामिल हैं । ईरान का मानना है कि पाकिस्तान ने एक सच्चे मध्यस्थ की तरह उसका पक्ष मजबूत करने के बजाय चुप्पी साध ली।
ईरान ने पाकिस्तान पर “मीडिया गेम” खेलने का भी आरोप लगाया है। तेहरान का कहना है कि इस्लामाबाद यह झूठा माहौल बना रहा है कि बातचीत जल्द शुरू होगी, जबकि ईरान ने अभी ऐसी किसी प्रक्रिया को मंजूरी नहीं दी है। इससे दुनिया के सामने ईरान को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। ईरान को अब डर है कि अगर यही स्थिति रही, तो पूरी बातचीत फेल हो सकती है। उसका साफ कहना है कि अगर मध्यस्थ पूरी तरह निष्पक्ष नहीं होगा, तो किसी भी समझौते की उम्मीद नहीं की जा सकती। कुल मिलाकर, ईरान का गुस्सा साफ दिख रहा है और उसने पाकिस्तान की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह विवाद न सिर्फ दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि पूरे क्षेत्र की राजनीति को भी और अस्थिर बना सकता है।
विदेश
होर्मुज में फिर 3 जहाजों पर बड़ा हमला ! रॉकेट और गोलियों से बनाए निशाना
तेहरान/तेल अवीव/वाशिंगठन, एजेंसी। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज में तीन कंटेनर जहाजों पर हमले की घटनाएं सामने आई हैं। यह इलाका दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों और United Kingdom Maritime Trade Operations (UKMTO) के अनुसार, बुधवार को कम से कम तीन जहाजों पर गोलीबारी की गई। इन हमलों में रॉकेट-प्रोपेल्ड ग्रेनेड (RPG) और गोलियों का इस्तेमाल हुआ।
पहला हमला ओमान के उत्तर-पूर्व में हुआ, जहां लाइबेरिया झंडे वाले एक कंटेनर जहाज के ब्रिज (जहाज का कंट्रोल रूम) को नुकसान पहुंचा।

जहाज के कप्तान ने बताया कि एक गनबोट तेजी से उनकी ओर बढ़ी और बिना किसी चेतावनी के फायरिंग शुरू कर दी। राहत की बात यह रही कि इस हमले में कोई आग या पर्यावरणीय नुकसान नहीं हुआ और सभी क्रू सदस्य सुरक्षित हैं।
दूसरी घटना में एक पनामा-झंडे वाला जहाज ईरान के पश्चिम में करीब 8 नॉटिकल मील दूरी पर फायरिंग का शिकार बना। हालांकि इस जहाज को कोई नुकसान नहीं हुआ और इसका पूरा स्टाफ सुरक्षित रहा।
तीसरी घटना में एक और लाइबेरिया-झंडे वाले जहाज पर उस समय गोलीबारी हुई जब वह स्ट्रेट से बाहर निकल रहा था। इस जहाज ने सुरक्षा के लिए बीच समुद्र में रुकने का फैसला किया। इसमें भी किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ और क्रू सुरक्षित रहा। रिपोर्ट के अनुसार, एक जहाज ने Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) को सूचना दी थी कि एक संदिग्ध गनबोट उनकी ओर बढ़ रही है। इसके कुछ ही समय बाद हमला हुआ।
बिज़नस
कनाडाई राजनयिक की चेतावनीः कनाडा को चीन के साथ व्यापार पड़ेगा भारी, झेलना पड़ सकता अमेरिका का गुस्सा
ओटावा, एजेंसी। कनाडा का चीन के साथ व्यापार बढ़ाने का फैसला अब बड़े आर्थिक और कूटनीतिक जोखिम के रूप में देखा जा रहा है। एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम कनाडा की आर्थिक सुरक्षा को कमजोर कर सकता है और उसके सबसे बड़े साझेदार अमेरिका के साथ रिश्तों में तनाव पैदा कर सकता है। पूर्व कनाडाई राजनयिक माइकल कोवरिग (Michael Kovrig) ने इस नीति को “रिस्की प्ले” बताया है। उनका कहना है कि चीन, अमेरिका के साथ कनाडा की समस्याओं का समाधान नहीं है। अगर कनाडा चीन के साथ ज्यादा नजदीकी बढ़ाता है, तो वॉशिंगटन की नजर में वह एक “अविश्वसनीय सहयोगी” बन सकता है, जिससे भविष्य के व्यापार समझौतों पर असर पड़ सकता है।

आंकड़ों के अनुसार, कनाडा का लगभग 75% निर्यात अमेरिका को जाता है, जबकि चीन का हिस्सा सिर्फ करीब 4% है। इसका मतलब है कि कनाडा की अर्थव्यवस्था अभी भी काफी हद तक अमेरिका पर निर्भर है। ऐसे में चीन की ओर झुकाव संतुलन बिगाड़ सकता है। प्रधानमंत्री Mark Carney की सरकार ने चीन के साथ एक नई डील की है। इस समझौते के तहत सीमित संख्या में चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का आयात किया जाएगा और कुछ कनाडाई कृषि उत्पादों पर टैरिफ में राहत दी जाएगी। सरकार का लक्ष्य 2030 तक चीन को निर्यात 50% तक बढ़ाना है। हालांकि विशेषज्ञों ने इस डील को लेकर कई चिंताएं जताई हैं। उनका कहना है कि चीन इस समय “बेचने” की स्थिति में है, यानी वह अपने उत्पाद दुनिया भर में ज्यादा से ज्यादा निर्यात करना चाहता है, जबकि खरीदने में उसकी रुचि कम है। इससे कनाडा के बाजार में सस्ते चीनी सामान की भरमार हो सकती है, जो स्थानीय उद्योगों को नुकसान पहुंचा सकती है।
माइकल कोवरिग ने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे बड़े रिटेल स्टोर छोटे दुकानदारों को खत्म कर देते हैं, वैसे ही सस्ते आयात घरेलू उद्योग को कमजोर कर सकते हैं। इससे धीरे-धीरे कनाडा की चीन पर निर्भरता बढ़ सकती है। कृषि क्षेत्र को लेकर भी चिंता जताई गई है। कनाडा के कैनोला, पोर्क और सीफूड जैसे सेक्टर पहले से ही चीन पर काफी निर्भर हैं। अगर भविष्य में चीन किसी कारण से इन उत्पादों का आयात बंद कर देता है, तो इन सेक्टरों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है और हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन आर्थिक दबाव का इस्तेमाल अपने फायदे के लिए कर सकता है। जैसे-जैसे कनाडा की निर्भरता बढ़ेगी, चीन अपने बाजार में ज्यादा पहुंच या ज्यादा कोटा मांग सकता है, जिससे कनाडा की नीतियों पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि, कोवरिग ने यह नहीं कहा कि चीन से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए। उनका सुझाव है कि कनाडा को चीन के साथ व्यापार जरूर करना चाहिए, लेकिन बहुत सावधानी और सख्त नियंत्रण के साथ, ताकि किसी तरह का दुरुपयोग न हो। कुल मिलाकर, कनाडा का यह कदम एक तरफ नए आर्थिक अवसर खोल सकता है, लेकिन दूसरी तरफ यह अमेरिका के साथ उसके संबंधों और घरेलू उद्योगों के लिए खतरा भी बन सकता है। इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा को संतुलन बनाकर और सोच-समझकर आगे बढ़ना होगा।
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